प्रेम में बंद
जून 2015 में, पेरिस ने पोंट डेस आर्ट्स पैदल पुल से पैंतालिस टन ताले हटाए l जोड़े प्रेम प्रसंग भाव के प्रदर्शन के तौर पर, तालों पर अपने नाम के प्रथमाक्षर उकेरकर पुल के जंगलों में लगाकर चाभी शेन नदी में फेंक देते हैं l
हजारों बार यह विधि दोहराई गई, पुल अधिक “प्रेम” का बोझ सहने को तैयार न था l आख़िरकार शहर अधिकारीयों ने, पुल की ताकत पर शंका करके, “प्रेम तालों” को हटा दिया l
तालों का अर्थ अनंत प्रेम प्रकट करना था, किन्तु मानवीय प्रेम स्थायी नहीं है l परम मित्र परस्पर धोखा देकर कभी मतभेद नहीं सुलझाते हैं l परिजन बहस करते और क्षमा नहीं करते l पति-पत्नी एक दूसरे से अलग हो जाते हैं और भूल जाते हैं कि उन्होंने विवाह क्यों किया था l मानवीय प्रेम चंचल होता है l
एक प्रेम स्थिर और स्थायी है-परमेश्वर का प्रेम l “यहोवा का धन्यवाद करो, क्योंकि वह भला है; और उसकी करुणा सदा की है!” भजन 106:1 की घोषणा है l परमेश्वर के प्रेम का विजयी और अनंत स्वभाव सम्पूर्ण बाइबिल में है l और इसका महानतम प्रमाण उसके पुत्र की मृत्यु है कि उसपर विश्वास करनेवालों को अनंत जीवन मिलेगा l और परमेश्वर के प्रेम से हमें कोई अलग नहीं कर सकता (रोमि. 8:38-39) l
सहविश्वसियों, हम परमेश्वर के प्रेम में हमेशा के लिए बंद हैं l
साधारण शब्दों की ताकत
हॉस्पिटल में मेरे पिता के कमरे में रौकस के ठहाके से आगंतुकों का बोध हुआ : दो वृद्ध चालक, एक पूर्व देशी/पाश्चात्य गायक, एक कारीगर, पड़ोस के फार्म से दो स्त्रियाँ, और मैं l
“ ...तब वह उठा और बोतल मेरे सर पर मारा,” कारीगर ने शराब पर झगड़े की अपनी कहानी बताई l
इस हास्य-स्मृति पर ठहाके लगे l कैंसर पीड़ित श्वास लेने में संघर्षरत पिताजी की हंसी, सबको बता रही थी कि “रैंडी एक प्रचारक है” इसलिए बोलने पर ध्यान दिया जाए l क्षणिक शांतता के बाद, इस खबर से पूरा कमरा फिर ठहाकों से भर गया और कोई अपने को हंसने से रोक न सका l
अचानक, करीब चालीस मिनट बाद, कारीगर गला साफ़ करते हुए मेरे पिता की ओर देखकर गंभीर हो गया l “होवर्ड, मेरे लिए अब शराब की कोई जगह नहीं है, l अब मेरे जीने का कारण भिन्न है l मैं तुम्हें अपने उद्धारकर्ता के विषय बताना चाहता हूँ l”
तब मेरे पिता के आश्चर्यचकित हलके विरोध के बावजूद उन्होंने सुसमाचार सुनाया l मुझे नहीं मालूम यदि सुसमाचार बताने का और भी मीठा, कोमल तरीका है l
कुछ वर्षों बाद मेरे पिता ने यीशु पर विश्वास किया l
एक सरल जीवन वाले पुराने मित्र की एक सरल कहानी ने, मुझे याद दिलायी कि सरल सीधा-सदा अथवा मुर्खता नहीं है; वह स्पष्ट और आडम्बररहित है l
यीशु की तरह l और उद्धार l
समय पर
कभी-कभी मैं मज़ाक करती हूँ कि मैं समय पर शीर्षक पर एक पुस्तक लिखूंगी l मुझे जाननेवाले हँसते हैं क्योंकि मैं अक्सर विलंबित होती हूँ l मेरा तर्क है कि मेरा विलम्ब आशावाद के कारण है, प्रयास की कमी से नहीं l मैं आशावादी बनकर झूठे विश्वास से लिपटी रहती हूँ कि मैं पहले से अधिक “इस बार” कम समय में अधिक करुँगी l किन्तु मैं कर नहीं सकती, और करती नहीं, इसलिए विलम्ब होने के कारण पुनः क्षमा मांगनी पड़ती है l
इसके विपरीत, परमेश्वर हमेशा समय से कार्य करता है l हमारी सोच में वह विलंबित दिख सकता है, किन्तु ऐसा है नहीं l सम्पूर्ण बाइबिल में हम लोगों को परमेश्वर के समय के साथ अधीर होते देखते हैं l इस्राएलियों ने अपेक्षित उद्धारकर्ता के लिए बहुत इंतज़ार किया l कुछ ने आशा छोड़ दी l किन्तु शमौन और हन्ना मंदिर में प्रार्थना और इंतज़ार करते रहे (लूका 2:25-26, 37) l और उनका विश्वास पुरस्कृत हुआ l उन्होंने बालक यीशु को देखा जब मरियम और यूसुफ उसको समर्पण के लिए लेकर आए (पद. 27-32, 38) l
परमेश्वर द्वारा हमारे समयानुसार प्रत्युत्तर नहीं देने पर निराशा में, क्रिसमस ताकीद देता है कि “जब समय पूरा हुआ, तो परमेश्वर ने अपने पुत्र को भेजा ... ताकि ... हम को लेपालक होने का पद मिले” (गला. 4:4-5) l परमेश्वर का समय सम्पूर्ण है , और इंतज़ार करना सार्थक l
सबके लिए आनंद
सिंगापुर में एक मसीही प्रकाशन सम्मेलन के आखिरी दिन, 50 देशों के 280 भागिदार एक समूह तस्वीर के लिए होटल के बाहिरी मैदान में इकट्ठे हुए l दूसरी मंजिल के बालकनी से, फोटोग्राफर ने अलग-अलग कोण से अनेक तस्वीर खींचे इससे पूर्व कि वह कहता, “फोटो खिंच गयीं l” भीड़ में से चैन की एक आवाज़ आयी, “अच्छा, खुश हों!” तुरंत, जवाब आया, “खुदावन्द आया है l” जल्द ही सभी क्रिसमस का परिचित गीत तारतम्य से गा रहे थे l मैं एकता और आनंद के इस मार्मिक प्रदर्शन को नहीं भूल सकता l
लूका के क्रिसमस की कहानी के वर्णन में, एक स्वर्गदूत ने चरवाहों को यीशु के जन्म की सूचना दी, “मत डरो; क्योंकि देखो, मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ जो सब लोगों के लिए होगा, कि आज दाऊद के नगर में तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है, और यही मसीह प्रभु है” (लूका 2:10-11) l
आनंद कुछ लोगों के लिए नहीं किन्तु सब के लिए था l “क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नष्ट न हो, परन्तु अनंत जीवन पाए” (यूहन्ना 3:16) l
जब हम यीशु का जीवन-परिवर्तन करने वाला सन्देश दूसरों को बांटते हैं, हम विश्वव्यापी रूप से “उसकी धार्मिकता और उसके प्रेम का आश्चर्य” मिलकर बांटते हैं l
“खुश हो खुदावंद आया है!”
कैद में क्रिसमस
हिटलर का विरोध करने के कारण जर्मनी के एक प्रसिद्ध पासवान, रेव्ह. मार्टिन निमोलर को, नाज़ी नज़रबन्दी-शिविर में लगभग आठ वर्ष बिताने पड़े l उसने डकाऊ में 1944 की एक क्रिसमस संध्या में, अपने सह-कैदियों से आशा के वचन कहे : “मेरे प्रिय मित्रों, हम इस क्रिसमस ... बैतलहम के बालक में, उसको खोजें जो उस बोझ को उठाने आया जिनसे हम दबे हैं ... परमेश्वर ने खुद से हम तक पहुँचने हेतु एक सेतु बनाया है! ऊपर से एक ज्योति हम तक पहुंची है!”
क्रिसमस में हम शुभसंदेश को गले लगाते हैं कि परमेश्वर, मसीह में, हमारे स्थान पर हमारे निकट आया और हमारे बीच की खाई को पाट दिया l वह हमारे अन्धकार के कैदखाने में अपनी ज्योति द्वारा प्रवेश करके हमें दबाने वाले दुःख, दोष, या एकाकीपन को हटाता है l
कैदखाने के उस अंधकारमय क्रिसमस संध्या में, निलोमर ने यह सुसमाचार बांटा : “उस ज्योति से जिससे चरवाहे घिरे थे हमारे अन्धकार में एक चमकीली किरण प्रवेश करेगी l” उसके वचन नबी यशायाह की याद दिलाती है जिसने कहा, “जो लोग अंधियारे में चल रहे थे उन्होंने बड़ा उजियाला देखा; और जो लोग घोर अन्धकार से भरे हुए मृत्यु के देश में रहते थे, उन पर ज्योति चमकी” (यशा. 9:2) l
चाहे हम जिस स्थिति में हों, यीशु अपने आनंद और अपनी ज्योति से हमारे अंधकारमय संसार में प्रवेश किया है l
मैं उसे क्या दूँ?
एक वर्ष, क्रिसमस चर्च सजावट के लिए जिम्मेदार लोग विषय “क्रिसमस सूचियाँ” उपयोग करने का निश्चय किया l सजाने के लिए सामान्यतया सुनहरे और चमकीले सजावटों का उपयोग करने की बजाए, उन्होंने हर एक को एक लाल अथवा हरा टैग दिया l उसकी एक ओर उन्हें लिखना था वे यीशु से क्या उपहार चाहते थे, और दूसरी ओर वे उसको क्या उपहार देना चाहते हैं जिसका जन्म दिन मना रहे हैं l
यदि आपको यह करना होता, आप कौन सा उपहार मांगते और आप क्या उपहार देते? बाइबिल हमें अनेक सुझाव देती है l परमेश्वर हमारी ज़रूरतें पूरी करता है, इसलिए हम नया काम, वित्तीय ज़रूरतों की पूर्ति, अपने और दूसरों के लिए शारीरिक चंगाई, अथवा एक सम्बन्ध का नवीनीकरण मांग सकते हैं l हम अपने आत्मिक वरदानों के विषय सोच सकते हैं जो हमें परमेश्वर की सेवा के लिए तैयार करता है l इनमें से अनेक रोमियों 12 और 1 कुरिन्थियों 12 में वर्णित हैं l या हम पवित्र आत्मा के फल की अधिकता प्रकट करना चाहते हैं : अधिक प्रेमी, आनंदित, शांतिमय, धीरजवन्त, दयालु और भला, विश्वासयोग्य, कोमल और आत्म-नियंत्रित (गला.5:22-23) l
परमेश्वर से मिलनेवाला सबसे महत्वपूर्ण वरदान उसका पुत्र, हमारा उद्धारकर्ता है, और उसके साथ क्षमा, नवीनीकरण, और आत्मिक जीवन की प्रतिज्ञा जो अभी आरंभ होकर अनंतता तक रहेगा l और हम सर्वोत्तम महवपूर्ण उपहार अपना हृदय उसे दे सकते हैं l
सबसे अच्छा उपहार
उत्तरी इंगलैंड में एक शीतकालीन सभा में, एक व्यक्ति ने पूछा, “अभी तक आपका सर्वोत्तम क्रिसमस उपहार क्या रहा है?”
एक स्पोर्ट्स मैन अपने मित्र की ओर देखकर बोलना चाहा l “यह सरल है, कुछ वर्ष पूर्व, कॉलेज समाप्त करने के बाद मैं व्यवसायिक फूटबाल खेलने के लिए आश्वस्त था l असफल होने पर, मैं खीज गया l कड़वाहट ने मुझे कुतर दिया, और मैंने हर मददगार के साथ कड़वाहट बांटी l”
उसने कहा, “अगले क्रिसमस में-एक दूसरा मौसम फूटबाल के बगैर-मैं इस मित्र के चर्च में क्रिसमस नाटक देखने गया, और अपने मित्र की ओर इशारा किया l “मैं यीशु को चाहता था, इसलिए नहीं, किन्तु अपनी भांजी को क्रिसमस नाटक में देखने के लिए l वहाँ की बातें मुर्खता लगी, किन्तु बच्चों के नाटक के मध्य, मुझ में उन चरवाहों और स्वर्गदूतों के साथ यीशु से मिलने की चाहत जागी l जब लोग ‘पावन रैन’ गीत समाप्त किये मैं वहाँ बैठकर रो रहा था l
उसने कहा, “उस रात मुझे क्रिसमस का सर्वोत्तम उपहार मिला,” और वह पुनः अपने मित्र की ओर इशारा किया, “जब इसने अपने परिवार को अकेले घर भेज दिया कि वह मुझे यीशु से मुलाकात करना सिखाए l”
और तब उसका मित्र बोल पड़ा : “और मित्रों, वह मेरा सर्वोत्तम क्रिसमस उपहार था l”
इस क्रिसमस में, यीशु के जन्म की आनंदमय सरलता की वह कहानी ही हम दूसरों को बताएँ l
एक व्यक्तिगत कहानी
न्यू यॉर्क चर्च के बाहर क्रिसमस झाँकी के पास चरनी में एक नवजात बालक को कोई छोड़कर चला गया l किसी परेशान युवा माँ ने उसे गर्म कपड़ो में लपेटकर ऐसे स्थान पर रख दिया था जहाँ वह दिखाई दे जाए l यदि हम उसका न्याय करन चाहते हैं, इसके बदले हम धन्यवाद दें कि इस शिशु को अब जीवन मिल सकता है l
यह मेरे लिए व्यक्तिगत है l खुद एक दत्तक संतान होकर, मैं अपने जन्म के विषय अज्ञान हूँ l किन्तु मैं कभी परित्यक्त महसूस नहीं किया l मैं इतना जानता हूँ, मेरी दो माताएं हैं जो मुझे जीवित चाहती थीं l एक ने मुझे जन्म दिया, और दूसरे ने अपना जीवन मुझमें निवेश किया l
हम निर्गमन में एक परेशान प्रेमी माँ को देखते हैं l फिरौंन ने सभी यहूदी लड़कों को मारने की आज्ञा दी थी (1:22) l मूसा की माँ ने उसको जब तक छिपा सकी छिपाया l मूसा के तीन माह का होने पर उसने उसे एक सुरक्षित टोकरी में रखकर नील नदी में छोड़ दिया l यदि योजना राजकुमारी द्वारा बच्चे को बचाना थी, फिरौंन के महल में परवरिश थी, और आख़िरकार लोगों को दासत्व से छुड़ाना थी, यह बिलकुल पूरी हुई l
जब एक परेशान माँ अपने बच्चे को एक मौका देती है, परमेश्वर वहाँ से उसे उठा लेता है l उसकी ऐसी आदत है-अत्यधिक अकल्पनीय रचनात्मक तरीकों से l
आनंद फैलाना
जब जेनेट विदेश में एक स्कूल में अंग्रेजी पढ़ाने गयी, वातावरण मनहूस और निराशाजनक था l लोग अपने कार्य करते थे, लेकिन कोई खुश नहीं लगते थे l वे परस्पर मदद या उत्साहित नहीं करते थे l किन्तु, परमेश्वर के समस्त प्रावधानों के लिए कृतघ्न, जेनेट, अपने कार्यों में दर्शाती थी l वह मुस्कराती और मित्रवत थी l वह आगे बढ़कर लोगों की मदद करती थी l वह गाने और गीत गुनगुनाती थी l
धीरे-धीरे, जेनेट द्वारा अपना आनंद बांटते समय, स्कूल का वातावरण बदल गया l एक-एक करके लोग मुस्कराने और परस्पर मदद करने लगे l जब एक अतिथि प्रशासनिक अधिकारी प्राचार्य से पूछा क्यों उसका स्कूल भिन्न है, प्राचार्य जो विश्वासी नहीं था, जवाब दिया, “यीशु आनंद लता है l” जेनेट प्रभु के उमंडनेवाले आनंद से पूर्ण थी और यह उसके चारों ओर के लोगों तक छलक रहा था l
लूका का सुसमाचार हमें बताता है कि परमेश्वर ने स्वर्गदूत को साधारण चरवाहों तक असाधारण जन्म की घोषणा करने हेतु भेजा l स्वर्गदूत ने चकित करनेवाली घोषणा की कि नवजात शिशु “सबके लिए आनंद लेकर आएगा” (लूका 2:10), जो उसने किया l
उस समय से यह सन्देश सदियों से हम तक पहुँच रहा है, और अब हम आनंद फैलानेवाले मसीह के संदेशवाहक हैं l अंतर्निवास करनेवाले पवित्र आत्मा द्वारा, हम यीशु के आदर्श पर चलकर और दूसरों की सेवा करके उसका आनंद फैलाते हैं l