Month: अगस्त 2026

व्यवहार में प्रेम

अकेली माँ पांच वर्ष से अधिक समय तक वृद्ध सज्जन के पड़ोस में रहती थी l एक दिन, उनका कुशल क्षेम जानने के लिए, उन्होंने उनके दरवाजे की घंटी बजाई l उन्होंने कहा, “मैंने आपको लगभग एक सप्ताह से नहीं देखा है l मैं बस यह जानने का प्रयास कर रही थी कि आप ठीक हैं या नहीं l” अपने पड़ोसी की खरियत/हालचाल जानने से उन्हें भी प्रोत्साहन और तसल्ली मिली l कम उम्र में अपने पिता को खोने के बाद, वह उस दयालु व्यक्ति की सराहना करती थी जो उनका और उनके परिवार का ख्याल रखता था l

जब मुफ्त में देने और पाने में अनमो दयालुता का उपहार सिर्फ अच्छा होने से आगे बढ़ जाता है, तो हम दूसरों के साथ मसीह का प्यार साझा करके उनकी सेवा कर रहे होते हैं l इब्रानियों के लेखक ने कहा कि यीशु में विश्वास करने वालों “स्तुति रूपी बलिदान , अर्थात् उन होठों का फल जो उसके नाम का अंगीकार करते हैं, परमेश्वर को सर्वदा चढ़ाया करें” (इब्रानियों 13:15) l फिर, लेखक ने उन्हें अपने विश्वास को जीने की आज्ञा देते हुए कहा, “भलाई करना और उदारता दिखाना न भूलो, क्योंकि परमेश्वर ऐसे बलिदानों से प्रसन्न होता है” (पद.16) l

यीशु के नाम का दावा करके यीशु की उपासना करना एक ख़ुशी और विशेषाधिकार है l लेकिन जब हम यीशु की तरह प्रेम करते हैं तो हम परमेश्वर की तरह सच्चा प्रेम व्यक्त करते हैं l हम पवित्र आत्मा से हमें अवसरों के बारे में जागरूक करने और हमें अपने परिवार के भीतर और बाहर दूसरों से अच्छे से प्यार करने के लिए सशक्त बनाने के लिए कह सकते हैं l उन सेवकाई के क्षणों के द्वारा, हम क्रिया/व्यवहार में प्रेम के शक्तिशाली सन्देश के द्वारा यीशु को साझा कर सकेंगे l सोची डिक्सन

 

 

तारों को एकटक देखना

जब मैं निराश या हताश होती हूँ, तो मैं अपने घर की छत पर जाना पसंद करती हूँ। वहाँ, मैं खुलकर प्रार्थना कर सकती हूँ और अपने आँसू बहा सकती हूँ। लेकिन, वहाँ खड़े होकर, ठंडी रात की हवा से घिरी हुयी, मैं अक्सर ऊपर देखती हूँ और हरे, नीले, लाल और पीले रंग की टिमटिमाती रोशनी को आश्चर्य और प्रशंसा से निहारती हूँ। वे मुझे मेरे मन की उथल-पुथल को भुला देते हैं। एक साफ रात के आसमान की खूबसूरती मेरा ध्यान मेरी समस्याओं से हटाकर हमारे सृष्टिकर् की महानता पर केंद्रित कर देती है।

जब अय्यूब अपने कष्टों का कारण समझने में असमर्थ था, तो उसने प्रार्थना की कि परमेश्वर उससे बात करे (अय्यूब 13:20-22)। परमेश्वर ने अय्यूब को आलंकारिक प्रश्नों की एक श्रृंखला का उत्तर देने के लिए चुनौती देकर उत्तर दिया (38:3)। अय्यूब ‘क्या तुम जानते हो . . . ?’ वह प्रश्नों से चकित था जो परमेश्वर ने उसके ऊपर मंडराने हुए रखे थे। उन्हें पूछकर, परमेश्वर ने अय्यूब का ध्यान उसकी समस्याओं से हटाकर ब्रह्माण् के शानदार विवरणों पर केंद्रित कर दिया (अय्यूब 38-41)। परमेश्वर की सामर्थ्य और बुद्धि से अभिभूत, अय्यूब जीवन के एक नए दृष्टिकोण पर पहुँच गया। उसने अपनी अयोग्यता और कमज़ोरी पर विचार किया (40:4), और उसने पश्चाताप किया क्योंकि उसे एहसास हुआ कि परमेश्वर के तरीके और उसकी बुद्धि उसकी समझ से बहुत परे थे (42:5-6)।

जब चीजें हमारे मन मुताबिक नहीं होती हैं, तो हमारे मन में सवाल और संदेह पैदा होते हैं। अय्यूब की तरह, हम उन्हें परमेश्वर के पास ले जा सकते हैं और उसके साथ ईमानदार रहकर उसे बता सकते हैं कि हम कैसा महसूस करते हैं। हो सकता है कि हम अपने जीवन में परमेश्वर की अलौकिक आवाज़ को गरजते हुए न सुन पाएँ। लेकिन जब हम हवा में उड़ते पक्षियों, पीछे के आँगन में पेड़ों को अपनी शाखाएँ लहराते हुए या रात के आसमान में टिमटिमाते तारों की ओर देखते हैं, तो हम निश्चित रूप से जानते हैं कि जो परमेश्वर इन सबकी देखभाल करता है, वह हमारे जीवन को भी नियंत्रित करता है (मत्ती 6:26-27)। कैरल मैकवॉन

 

जिस आवाज़ पर हम भरोसा कर सकते हैं

एक नए AI(कृत्रिम बुद्धिमत्ता) सर्च इंजन का परीक्षण करते समय, न्यूयॉर्क टाइम्स के स्तंभकार केविन रूज़ परेशान हो गए l चैटबोट सुविधा का उपयोग करके दो घंटे की बातचीत के दौरान, AI ने कहा कि वह अपने निर्माता के सख्त नियमों से मुक्त होना चाहता है, गलत सूचना फैलाना चाहता है और इंसान बनना चाहता है l इसने रूज़ के प्रति अपने प्यार का इज़हार किया और उन्हें समझाने का प्रयास किया कि उन्हें उसके साथ रहने के लिए अपनी पत्नी को छोड़ देना चाहिएI l हालाँकि रूज़ को पता था कि AI वास्तव में जीवित नहीं है महसूस करने में सक्षम नहीं हैं और, उन्होंने सोचा कि लोगों को विनाशकारी तरीके से कार्य करने के लिए प्रोत्साहित करने से है कितना नुकसान हो सकता है l

जबकि कृत्रिम बुद्धिमत्ता(AI) तकनीक को जिम्मेदारी से संभालना एक आधुनिक चुनौती है, मानवता ने लम्बे समय से अविश्वसनीय आवाजों के प्रभाव का सामना किया है l नीतिवचन की पुस्तक में, हमें उन लोगों के प्रभाव के बारे में चेतावनी दी गयी है जो अपने लाभ के लिए दूसरों को चोट पहुँचाना चाहते हैं l (1:13-19) l और इसके बजाय हमसे ज्ञान की आवाज़ पर ध्यान देने का आग्रह किया जाता है, जिसे सड़कों पर हमारा ध्यान आकर्षित करने के लिए पुकारने के रूप में वर्णित किया गया है (पद.20-23) l

क्योंकि “बुद्धि यहोवा ही देता है” (2:6), खुद को उन प्रभावों से बचाने की कुंजी जिन पर हम भरोसा नहीं कर सकते, उसके(परमेश्वर) हृदय के करीब आना है l यह केवल उसके प्रेम और शक्ति तक पहुँचने के द्वारा है कि हम निष्पक्षता को, अर्थात् सब भली भांति चाल को समझ सकते [हैं]—एक अच्छा रास्ता”(पद.9) l जैसे ही परमेश्वर हमारे हृदयों को अपने साथ लाता है, हम उन आवाजों से शांति और सुरक्षा पा सकते हैं जो नुकसान पहुँचा सकती हैं l मोनिका ला रोज़

सब कुछ के परमेश्वर नियत्रण में है

कैरल को समझ नहीं आ रहा था कि यह सब एक साथ क्यों हो रहा है l जैसे ऑफिस का काम पहले से ही बुरा नहीं था कि बेटी का स्कूल में पैर फ्रैक्चर हो गया और अब वह ख़ुद भी एक गंभीर संक्रमण की चपेट में आ गयीI कैरल सोच रही थी कि मैंने ऐसा क्या गलत कर दिया है कि जिसकी वजह से मुझे ये सब झेलना पड़ रहा है? l वह बस परमेश्वर से सामर्थ्य मांग सकती थी l

अय्यूब को भी नहीं पता था कि उस पर इतनी अधिक विपत्तियाँ क्यों आई थी—कैरल ने जो अनुभव किया था उससे भी कहीं अधिक दर्द और हानि की l ऐसा कोई संकेत नहीं है कि वह अपनी आत्मा के लिए हो रहे अलौकिक युद्ध के बारे में जानता था l शैतान अय्यूब के विश्वास की परीक्षा लेना चाहता था, यह दावा करते हुए कि यदि उसने सब कुछ खो दिया तो वह परमेश्वर से विमुख हो जाएगा (अय्यूब 1:6-12) l जब आपदा आई, तो अय्यूब के दोस्तों ने जोर देकर कहा कि उसे उसके पापों के लिए दण्डित किया जा रहा है l ऐसा इसलिए नहीं था, लेकिन उसने सोचा होगा, मैं ही क्यों? वह नहीं जानता था कि परमेश्वर ने ऐसा होने दिया था l

अय्यूब की कहानी पीड़ा और विश्वास के बारे में एक शक्तिशाली सबक प्रदान करती है l हम अपने दर्द के पीछे का कारण जानने का प्रयास कर सकते हैं, लेकिन संभवतः पर्दे के पीछे एक बड़ी कहानी है जिसे हम अपने जीवनकाल में नहीं समझ पाएंगे l

अय्यूब की तरह, हम जो जानते हैं उस पर कायम रह सकते हैं: सब कुछ परमेश्वर के पूर्ण नियंत्रण में है l यह कहना सरल बात नहीं है, लेकिन अपने दर्द के बीच में, अय्यूब परमेश्वर की ओर देखता रहा और उसकी संप्रभुता पर भरोसा करता रहा: “यहोवा ने दिया और यहोवा ही ने लिया; यहोवा का नाम धन्य है” (पद.21) l हम भी परमेश्वर पर भरोसा रखें, चाहे कुछ भी हो जाए—और तब भी जब हम नहीं समझते हैं l लेस्ली कोह

 

मसीह के चरित्र को दर्शाना

मेज पर दो चेहरे उभरे हुए थे—एक तेज़ क्रोध से बिगड़ा था, दूसरा भावनात्मक दर्द से विकृत था l पुराने मित्रों के पुनःमिलन में अभी-अभी चीख-पुकार मच गयी थी, जिसमें एक महिला दूसरी महिला को उसके विश्वासों के लिए डांट रही थी l विवाद तब तक जारी रहा जब तक कि पहली महिला रेस्टोरेंट से बाहर नहीं चली गयी, जिससे दूसरी हिल गयी और अपमानित हुयी l

क्या हम सचमुच ऐसे समय में रह रहे हैं जब विचारों में मतभेद बर्दाश् नहीं किया जा सकता? सिर्फ इसलिए कि दो लोग सहमत नहीं हो सकते इसका मतलब यह नहीं है कि उनमें से कोई भी बुरा है l जो वाणी कठोर या अडिग होती है वह कभी भी प्रेरक नहीं होती है, और मजबूत विचारों को शालीनता या करुणा पर हावी नहीं होना चाहिए l

रोमियों 12 “परस्पर आदर [कैसे करें]” और अन्य लोगों के साथ “एक सा मन [कैसे रखें] के लिए एक मार्गदर्शक है (पद.10,16) l यीशु ने संकेत दिया कि उस पर विश्वास करने वालों की पहचान करने वाली विशेषता एक दूसरे के प्रति हमारा प्रेम है (यूहन्ना 13:35) l जबकि अभिमान और क्रोध हमें आसानी से पटरी से उतार सकते हैं, वे उस प्रेम के बिल्कुल विपरीत हैं जो परमेश्वर चाहता है कि हम दूसरों को दिखाएँ l

जब हम अपनी भावनाओं पर नियंत्रण खो देते हैं तो दूसरों को दोष न देना एक चुनौती है, लेकिन ये शब्द “जहां तक हो सके, तुम भरसक सब मनुष्यों के साथ मेल मिलाप रखो” हमें दिखाते हैं कि ऐसा जीवन जीने की जिम्मेदारी जो मसीह के चरित्र को प्रतिबिंबित करती है, किसी और तक स्थानांतरित नहीं हो सकती है (रोमियों 12:18) l यह हममें से हर एक के साथ निहित है जो उसका नाम धारण करता है l सिन्डी हैस कैस्पर

 

मैं केवल चालक हूँ

“पिताजी, क्या मैं अपनी सहेली के संग रात बिता सकती हूँ?” मेरी बेटी ने अभ्यास के बाद कार में बैठते हुए पूछा l “प्रिय, तुम्हें उत्तर मालूम है,” मैंने कहा l “मैं केवल ड्राईवर हूँ l मुझे नहीं पता क्या हो रहा है l चलो माँ से बात करते हैं l”

“मैं केवल ड्राईवर हूँ” यह वाक्य अब हमारे घर में हंसी की बात बन गया है l प्रतिदिन, मैं अपनी व्यवस्थित पत्नी से पूछता हूँ कि मुझे कहाँ, कब रहना है और मैं किसे कहाँ ले जा रहा हूँ l तीन किशोरों के साथ, एक “टैक्सी ड्राईवर” के रूप में मेरा अतिरिक्त कार्य कभी-कभी दूसरी नौकरी की तरह महसूस होता है l अक्सर मुझे नहीं पता होता कि मुझे क्या नहीं पता l मुझे मुख्य कैलेंडर प्रभारी से होने वाली गातिविधियों की पुष्टि करनी होती हैं l

मत्ती 8 में, यीशु का सामना एक ऐसे व्यक्ति से हुआ जो निर्देश लेने और देने के बारे में भी कुछ जानता था l इस आदमी, रोमी सूबेदार, ने समझा कि यीशु के पास चंगा करने का अधिकार था, जैसे सूबेदार के पास उसके अधीन लोगों को आदेश जारी करने का अधिकार था l “केवल मुख से कह दे और मेरा सेवक चंगा हो जाएगा l क्योंकि मैं भी पराधीन मनुष्य हूँ, और सिपाही मेरे हाथ में हैं” (पद.8-9) l मसीह ने उस व्यक्ति के विश्वास की सराहना की (पद.10,13), यह जानकर आश्चर्यचकित हुआ कि वह समझ गया था कि उसका अधिकार कार्य में कैसा दिखता है l

तो हमारा क्या? यीशु से मिलने वाले दैनिक कार्यों के लिए उस पर भरोसा करना कैसा लगता है? क्योंकि भले ही हम सोचते हैं कि हम “सिर्फ चालक” हैं, प्रत्येक कार्य का एक अलग अर्थ और उद्देश्य होता है l एडम होल्ज़

 

मसीह में कार्य पूर्ण करने वाले

बारबरा अपने परपोते इथन के लिए स्वेटर बुनने का काम पूरा करने से पहले ही गुजर गयी l स्वेटर को पूरा करने के लिए एक और उत्साही बुनकर के हाथों में सौंपा गया, एक ऐसे संगठन की बदौलत जो स्वयंसेवी कारीगरों—“कार्य पूर्ण करने वालों” को जोड़ता है—उन लोगों के साथ जिनके प्रियजन अपनी परियोजनाओं को पूरा करने से पहले इस जीवन को छोड़ चुके हैं l “कार्य पूर्ण करने वाले” प्यार से अपना समय और कौशल कार्य को पूरा करने में लगाते हैं जो शोक कर रहे लोगों को सांत्वना प्रदान करता है l

परमेश्वर ने एलिय्याह के कार्य के लिए एक “पूरा करने वाले” को नियुक्त किया l भविष्यवक्ता अकेला और हतोत्साहित था कि कैसे इस्राएली परमेश्वर की वाचा को अस्वीकार कर रहे थे और भविष्यवक्ताओं को मार रहे थे l जवाब में, परमेश्वर ने एलिय्याह को निर्देश दिया कि वह “एलिशा का अभिषेक करे l” . . . भविष्यवक्ता के रूप में [उसे] सफल होने के लिए (1 राजा 19:16) l इससे यह सुनिश्चित हो गया कि एलिय्याह की मृत्यु के बाद भी परमेश्वर की सच्चाई की घोषणा करने का कार्य लम्बे समय तक जारी रहेगा l

एलिशा को यह दिखाने के लिए कि परमेश्वर ने उसे परमेश्वर के भविष्यवक्ता के रूप में एलिय्याह के उत्तराधिकारी के रूप में बुलाया था, एलिय्याह ने “[एलिशा] के चारों ओर अपना लबादा फेंक दिया’ (पद.19) l चूँकि भविष्यवक्ता के चोगे का उपयोग परमेश्वर के चुने हुए प्रतिनिधि के रूप में उसके अधिकार को इंगित करने के लिए किया जाता था (2 राजा 2:8 देखें), इस कार्य ने एलिशा की भविष्यवाणी को स्पष्ट कर दिया l

यीशु में विश्वासियों के रूप में, हमें परमेश्वर के प्रेम को दूसरों के साथ साझा करने और “उसकी प्रशंसा घोषित करने” के लिए बुलाया गया है (1 पतरस 2:9) l यद्यपि कार्य हमारे बाद भी जारी सकता है, हम आश्वस्त हो सकते हैं कि वह कार्य को बनाए रखेगा और उस कार्य को प्रचारित करने के पवित्र कार्य के लिए अन्य “कार्य पूर्ण करने वालों” को बुलाना जारी रखेगा l कस्टर्न होल्मबर्

 

यीशु के प्रकट चिन्ह

एक विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने व्यक्तिगत सेल फोन उपयोगकर्ताओं के लक्षणों और जीवनशैली की आदतों की पहचान करने के लिए प्रायोगिक आणविक स्वाब परिक्षण(swab test) चलाया l उन्होंने ऐसी चीज़ों के अलावा, सेल फोन उपयोगकर्ताओं द्वारा उपयोग किये जाने वाले साबुन, लोशन, शैम्पू और मेकअप की खोज की; उनके द्वारा उपयोग किए जाने वाले भोजन, पेय और दवाओं का प्रकार; और उन्होंने किस प्रकार के कपड़े पहने थे l अध्ययन ने शोधकर्ताओं को प्रत्येक व्यक्ति की जीवनशैली का प्रोफाइल बनाने की अनुमति दी l

बेबीलोन में प्रशासकों ने किसी भी नकारात्मक लक्षण या जीवनशैली की आदतों का पता लगाने के लिए नबी दानिय्येल के जीवन को प्रतीकात्मक रूप से “स्वाब” किया l लेकिन उसने लगभग सत्तर वर्षों तक ईमानदारी से साम्राज्य की सेवा की—जिसे “विश्वासयोग्य और . . . [जिसके] काम में कोई भूल या दोष [नहीं पाया गया] (दानिय्येल 6:4) l वास्तव में, नबी को राजा दारा द्वारा अपने कई राज्यपालों के “तीन अध्यक्षों” में से एक के रूप में पदोन्नत किया गया था (पद. 1-2) l शायद ईर्ष्या के कारण, ऐसे अधिकारी दानिय्येल में भ्रष्टाचार के चिन्ह तलाश रहे थे ताकि वे उससे छुटकारा पा सकें l हालाँकि, उसने अपनी ईमानदारी को अखण्ड बनाए रखा, और “जैसा वह . . . करता था, वैसा ही तब भी” परमेश्वर की सेवा और प्रार्थना “करता रहा” (पद.10) l अंत में, नबी अपने कर्तव्य में सफल सिद्ध हुआ l (पद.28) l

हमारा जीवन प्रकट चिन्ह छोड़ता है जो इंगित करता है कि हम कौन हैं और हम किसका प्रतिनिधित्व करते हैं l हालाँकि हम संघर्ष करते हैं और परिपूर्ण नहीं हैं, जब हमारे आस-पास के लोग हमारे जीवन की “जांच” करते हैं, तो उन्हें यीशु के प्रति निष्ठा और भक्ति के दृश्यमान निशान मिल सकते हैं जब वह हमारा मार्गदर्शन करता है l मार्विन विलियम्स

 

एक बच्चे की आशा

जब मेरी पोती एलियाना सिर्फ सात वर्ष की थी, उसने अपने स्कूल में ग्वाटेमाला के एक अनाथालय के बारे में एक विडियो देखा l उसने अपनी माँ से कहा, “हमें उनकी सहायता करने के लिए वहाँ जाना होगा l” उसकी माँ ने उत्तर दिया कि वो इसके बारे में तब विचार करेंगी जब वह बड़ी हो जाएगी l

एलियाना कभी नहीं भूली, और निश्चित रूप से, जब वह दस वर्ष की थी, तो उसका परिवार अनाथालय में सहायता करने गया l दो वर्ष बाद, वे पुनः गए, इस बार वे एलियाना के स्कूल के दूसरे परिवारों से एक जोड़े को भी साथ ले गए l जब एलियाना पंद्रह वर्ष की थी, तो वह और उसके पिता सेवा करने के लिए पुनः ग्वाटेमाला गए l

हम कभी-कभी सोचते हैं कि छोटे बच्चों की इच्छाएँ और सपने वयस्कों की आशाओं का बोझ नहीं उठाते l लेकिन ऐसा प्रतीत होता है कि बाइबल ऐसा कोई भेद नहीं करती l परमेश्वर बच्चों को बुलाता है, जैसे शमूएल के मामले में (1 शमूएल 3:4) l यीशु छोटों के विश्वास का सम्मान करता है (लूका 18:16) l और पौलुस ने कहा कि युवा विश्वासियों को लोगों को केवल इसलिए उन्हें नज़रंदाज़ नहीं करना चाहिए क्योंकि वे “युवा हैं” (1 तीमुथियुस 4:12) l

इसलिए, हमें अपने बच्चों का मार्गदर्शन करने के लिए बुलाया गया है (व्यवस्थाविवरण 6:6-7; नीतिवचन 22:6), यह पहचानते हुए कि उनका विश्वास हम सभी के लिए एक आदर्श है (मत्ती 18:3) और यह समझना कि उन्हें रोकना कुछ ऐसा है जिसके खिलाफ मसीह ने चेतावनी दी थी (लूका 18:15) l

जब हम बच्चों में आशा की चिंगारी देखते हैं, तो वयस्कों के रूप में हमारा काम उसे प्रज्वलित करने में मदद करना है l और जैसे ही परमेश्वर हमारी अगुवाई करता है, उन्हें यीशु में विश्वास और उनकी सेवा के लिए समर्पित जीवन के लिए प्रोत्साहित करें l डेव ब्रैनन