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एक साधारण अनुरोध

"सोने जाने से पहले कृपया सामने का कमरा साफ कर देना", मैंने अपनी एक बेटी से कहा। तुरंत उत्तर आया, "वह क्यों नहीं करती है?"

जब हमारी बेटियाँ छोटी थीं तब हमारे घर में ऐसा हल्का विरोध अक्सर होता था। मेरी प्रतिक्रिया हमेशा एक ही थी : "अपनी बहनों के बारे में चिंता मत करो; मैंने तुम से कहा है।"

यूहन्ना 21 में, हम शिष्यों के बीच इस मानवीय प्रवृत्ति को चित्रित होते हुए देखते हैं। पतरस द्वारा तीन बार उसका इन्कार किये जाने के बाद यीशु ने पतरस को बहाल कर दिया था (यूहन्ना 18:15-18, 25-27 देखें)। अब यीशु ने पतरस से कहा, मेरे पीछे हो ले! (21:19)—एक सरल लेकिन कठिन आदेश । यीशु ने समझाया कि पतरस मृत्यु तक उसका अनुसरण करेगा (पद.18-19)।

पतरस के पास यीशु के शब्दों को समझने का समय ही नहीं था, इससे पहले उसने उसके पीछे आते शिष्य के बारे में पूछा : "हे प्रभु, इस का क्या?" (पद.21) l यीशु ने उत्तर दिया, "यदि मैं चाहूँ कि वह मेरे आने तक ठहरा रहे, तो तुझे क्या?" फिर उसने कहा, "तू मेरे पीछे हो ले।" (पद.22)।

कितनी बार हम पतरस की तरह होते हैं! हम दूसरों की विश्वास यात्राओं के बारे में सोचते हैं न कि परमेश्वर हमारे साथ क्या कर रहा है उसके बारे में । अपने जीवन के अंत में, जब यूहन्ना 21 में यीशु की मृत्यु की भविष्यवाणी बहुत करीब थी, पतरस ने मसीह के सरल आदेश को विस्तार से बताया : "आज्ञाकारी बालकों के समान अपनी अज्ञानता के समय की पुरानी अभिलाषाओं के सदृश न बनो । पर जैसा तुम्हारा बुलानेवाला पवित्र है, वैसे ही तुम भी अपने सारे चाल चलन में पवित्र बनो।"(1 पतरस 1:14-15)। यह हममें से प्रत्येक को यीशु पर ध्यान केंद्रित रखने के लिए पर्याप्त है, न कि हमारे आस-पास के लोगों पर। मैट लूकस

प्रार्थना के लिए एक आह्वान

अब्राहम लिंकन ने अपने एक मित्र को गुप्त रूप से कहा, "मैं कई बार इस दबाने वाला दृढ़ निश्चय के कारण घुटनों पर बैठा हूँ क्योंकि मेरे पास जाने के लिए और कोई जगह नहीं थी ।" अमेरिकी गृहयुद्ध के भयावह वर्षों में, राष्ट्रपति लिंकन ने न केवल उत्साही प्रार्थना में समय बिताया, बल्कि पूरे देश को अपने साथ शामिल होने के लिए भी बुलाया। 1861 में, उन्होंने "अपमान, प्रार्थना और उपवास" का दिन" घोषित किया। और उन्होंने 1863 में फिर से ऐसा करते हुए कहा, "यह राष्ट्रों के साथ-साथ मनुष्यों का भी कर्तव्य है कि वे परमेश्वर की सर्वशक्तिमान शक्ति पर अपनी निर्भरता रखें: विनम्र दुःख के साथ अपने पापों और अपराधों को स्वीकार करें, फिर भी आश्वस्त आशा के साथ कि सच्चा पश्चाताप दया और क्षमा की ओर ले जाएगा।"

इस्राएलियों के सत्तर वर्ष तक बेबीलोन में बंदी रहने के बाद, राजा अर्तक्षत्र ने इस्राएलियों को यरूशलेम लौटने की अनुमति दी, बचे हुये कुछ लोग वापस लौटे। और जब नहेम्याह, जो एक इस्राएली (नहेम्याह 1:6) और बेबीलोन के राजा का पिलानेवाला था(पद.11) को पता चला कि जो लोग लौट आए थे वे "बड़े दुर्दशा में पड़े है, और उनकी निंदा होती है" (पद.3), तो वह "बैठ कर रोने लगा" और कितने दिन तक विलाप करता, और . . . प्रार्थना करता रहा (पद.4)। उसने अपने राष्ट्र के लिए दिन रात प्रार्थना की (पद. 5-11)। और बाद में, उसने भी अपने लोगों को उपवास और प्रार्थना करने के लिए बुलाया (9:1-37)।

सदियों बाद, रोमन साम्राज्य के दिनों में, प्रेरित पौलुस ने इसी तरह अपने पाठकों से अधिकार प्राप्त लोगों के लिए प्रार्थना करने का आग्रह किया (1 तीमुथियुस 2:1-2)। हमारा परमेश्वर अभी भी उन मामलों के बारे में हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है जो दूसरों के जीवन को प्रभावित करते हैं। एलिसन कीडा

गिनने से परे प्यार

"मैं तुम्हें किस तरह से प्यार करती हूँ? मुझे तरीकों को गिनने दें।" ये शब्द एलिजाबेथ बैरेट ब्राउनिंग के सोनेट्स फ्रॉम द पोर्च्युगीज की अंग्रेजी भाषा की सबसे प्रसिद्ध कविताओं में से हैं। उन्होंने इन्हें शादी से पहले रॉबर्ट ब्राउनिंग को लिखा था, और वह इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने उन्हें अपनी कविताओं का पूरा संग्रह प्रकाशित करने के लिए प्रोत्साहित किया। लेकिन चूँकि गीतों की भाषा बहुत कोमल थी, व्यक्तिगत गोपनीयता की इच्छा से बैरेट ने उन्हें इस तरह प्रकाशित किया जैसे कि वे किसी पुर्तगाली लेखक के अनुवाद हों।

कभी-कभी जब हम खुलेआम दूसरों के प्रति स्नेह व्यक्त करते हैं तो हमें अजीब महसूस हो सकता है। लेकिन इसके विपरीत, बाइबल परमेश्वर के प्रेम की अपनी प्रस्तुति से पीछे नहीं हटती। यिर्मयाह ने अपने लोगों के प्रति परमेश्वर के स्नेह को इन कोमल शब्दों में वर्णित किया : "मैं तुझ से सदा प्रेम रखता आया हूँ; इस कारण मैं ने तुझ पर अपनी करूणा बनाए रखी है"(यिर्मयाह 31:3)। भले ही उसके लोग उससे दूर हो गए थे, फिर भी परमेश्वर ने उन्हें बहाल करने और व्यक्तिगत रूप से उन्हें अपने पास लाने का वादा किया। "मैं इस्राएल को विश्राम देने के लिये तैयार हुआ," उसने उनसे कहा (पद.2)।

यीशु परमेश्वर के सबल बनानेवाला प्रेम की चरम अभिव्यक्ति हैं, जो उसके पास आने वाले किसी भी व्यक्ति को शांति और आराम देता है। चरनी से लेकर क्रूस से लेकर खाली कब्र तक, वह एक भटकी हुई दुनिया को अपने पास बुलाने की परमेश्वर की इच्छा का प्रतीक है। बाइबल को शुरू से अंत तक पढ़ें और आप बार-बार परमेश्वर के प्रेम के "तरीके गिनेंगे"; लेकिन वे शाश्वत हैं, आप कभी भी उनके अंत तक नहीं पहुंचेंगे। जेम्स बैंक्स

इच्छुक उद्धारकर्ता

देर रात गाड़ी चलाते समय निकोलस ने देखा कि एक घर में आग लगी हुई है। उसने रास्ते में गाड़ी पार्क की, जलते हुए घर में घुस गया और चार बच्चों को सुरक्षित बाहर ले आया। जब बच्चों की किशोरी दाई को एहसास हुआ कि भाई-बहनों में से एक अभी भी अंदर है, तो उसने निकोलस को बताया। बिना किसी हिचकिचाहट के, वह आग में फिर से गया। छह साल की बच्ची के साथ दूसरी मंजिल पर फंसे निकोलस ने खिड़की तोड़ दी। जैसे ही आपातकालीन टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं, वह बच्चे को गोद में लेकर सुरक्षित स्थान पर कूद गया। खुद से ज्यादा दूसरों की चिंता करते हुए उसने सभी बच्चों को बचा लिया।

दूसरों की खातिर अपनी सुरक्षा का त्याग करने की इच्छा से निकोलस ने वीरता का प्रदर्शन किया। प्रेम का यह शक्तिशाली कार्य एक अन्य इच्छुक बचानेवाले—यीशु—द्वारा दिखाए गए त्यागपूर्ण प्रेम को दर्शाता है, जिसने हमें पाप और मृत्यु से बचाने के लिए अपना जीवन दे दिया। "क्योंकि जब हम निर्बल ही थे, तो मसीह ठीक समय पर भक्तिहीनों के लिये मरा।" (रोमियों 5:6)। प्रेरित पौलुस ने इस बात पर जोर दिया कि यीशु—जो देह में पूर्ण रूप से परमेश्वर और पूर्ण रूप से मनुष्य है—ने अपना जीवन देकर हमारे पापों की कीमत चुकाने का चुनाव किया, एक ऐसी कीमत जिसे हम कभी भी अपने आप से नहीं चुका सकते थे। "परमेश्वर हम पर अपने प्रेम कि भलाई इस रीति से प्रगट करता है कि जब हम पापी हि थे तभी मसीह हमारे लिए मारा" (पद.8)।

जब हम अपने इच्छुक उद्धारकर्ता, यीशु को धन्यवाद देते हैं और उस पर भरोसा करते हैं, तो वह हमें अपने शब्दों और कार्यों से दूसरों से त्यागपूर्ण प्रेम करने के लिए सशक्त बना सकता है। सोचिल डिक्सन

परमेश्वर के पुनरुद्धार के लिए तैयार

मेरे पास एक मित्र की ओर से आयीं तस्वीरें आश्चर्यजनक थीं! उनकी पत्नी के लिए एक आश्चर्यजनक उपहार फिर से नई की गई लक्जरी कार : बाहर का शानदार गहरा नीला रंग, चमकदार क्रोम रिम्स, अन्दर की सीट/गद्दियाँ काले रंग की बनाई हुई, और एक मोटर जो अन्य ऊंची कोटि के सुधारों से मेल खा रही थी l उसी वाहन की "पहले" की तस्वीरें भी थीं—एक फीका, घिसा-पिटा, प्रभावहीन पीला रूप । हालाँकि इसकी कल्पना करना कठिन हो सकता है, यह संभव है कि जब वाहन असेंबली लाइन से निकली थी तो यह ध्यान आकर्षित करने वाली रही हो। लेकिन समय, टूट-फूट और अन्य कारकों ने इसे ज्यों का त्यों बनाये जाने के लिये तैयार कर दिया था।

पुनरुद्धार के लिए तैयार! भजन संहिता संहिता 80 में परमेश्वर के लोगों की स्थिति ऐसी ही थी और इस प्रकार बार-बार प्रार्थना की गई : "हे परमेश्वर, हम को ज्यों के त्यों कर दे; और अपने मुख का प्रकाश चमका, तब हमारा उद्धार हो जाएगा!" (पद.3; पद.7,19 देखें)। हालाँकि उनके इतिहास में मिस्र से बचाव और भरपूरी के देश में रोपा जाना शामिल था(पद.8-11), अच्छे समय आए और गए। विद्रोह के कारण, वे परमेश्वर के न्याय का अनुभव कर रहे थे(पद.12-13)। इस प्रकार, उनकी प्रार्थना थी : "हे सेनाओं के परमेश्वर, फिर आ! स्वर्ग से ध्यान देकर देख, और इस दाखलता की सुधि ले"(पद14)l

क्या आपको कभी परमेश्वर से संवेदनाशून्य, दूर या अलग हुआ महसूस होता है? क्या आनंदपूर्ण आत्म-संतुष्टि नहीं है? क्या ऐसा इसलिए है क्योंकि यीशु और उसके उद्देश्यों के साथ तालमेल नहीं है? परमेश्वर बहाल करने के लिए हमारी प्रार्थनाएँ सुनता है(पद.1)। परमेश्वर से मांगने से आपको क्या रोक रही है? आर्थर जैक्सन

 

लोबान का अर्थ

आज एपिफेनी (अवतरण-दिवस—गैर-मसीहियों के लिए मसीह का प्रकटन)है, वह दिन जो गीत "हम तीन राजा पूरब की शान" में वर्णित घटना की याद दिलाता है, जब गैर-यहूदी बुद्धिमान लोग बालक यीशु से मुलाकात किये थे l फिर भी वे राजा नहीं थे, वे सुदूर पूर्व से नहीं थे (जैसा कि पूरब) का पहले मतलब था), और इसकी संभावना भी नहीं है कि वे तीन थे।

हालाँकि, उपहार तीन थे, और गीत प्रत्येक को मानता है। जब मजूसी बैतलहम पहुंचे, "[उन्होंने] अपना-अपना थैला खोलकर [यीशु को] सोना, लोबान और गन्धरस की भेंट चढ़ाई" (मत्ती 2:11)। उपहार यीशु के मिशन(कार्य) का प्रतीक हैं। सोना राजा के रूप में उसकी भूमिका का प्रतिनिधित्व करता है। पवित्र-स्थान में जलाए गए धूप के साथ मिश्रित लोबान, उनके परमेश्वरत्व को दर्शाता है l गन्धरस, जिसका उपयोग शवों पर लेप लगाने के लिए किया जाता है, हमें ठहराव देता है।

गीत का चौथा पद कहता है, "मुर्र मैं लाया, मौत का निशान/ होगा वह, ग़मगीन परेशान/दुःख उठाके, खून बहा के, होगा वह कुर्बान।" हम कहानी में ऐसा कोई दृश्य नहीं लिखे होते, लेकिन परमेश्वर ने ऐसा किया। यीशु की मृत्यु हमारे उद्धार का केंद्र है। हेरोदेस ने यीशु को तब मारने का भी प्रयास किया जब वह बच्चा था (पद.13)।

गीत का अंतिम पद तीन विषयों को एक साथ जोड़ता है: "शाह खुदा क़ुरबानी वह भी/ शौकत, कुदरत, उल्फत उसकी l" यह क्रिसमस की कहानी को पूरा करता है, हमारी प्रतिक्रिया को प्रेरित करता है : "कुल जहां में, और आसमान में ज़ाहिर हो जायेगीl" टिम गस्टफसन

चौराहे पर परमेश्वर

कई दिनों की बीमारी और फिर तेज़ बुखार के बाद, यह स्पष्ट था कि मेरे पति को आपातकालीन देखभाल की आवश्यकता थी। अस्पताल ने उन्हें तुरंत भर्ती कर लिया; एक दिन अगले दिन में बदल गया। उनकी हालत में सुधार हुआ, लेकिन इतना नहीं कि उन्हें अस्पताल से छोड़ दिया जाये। मुझे अपने पति के साथ रहने या एक महत्वपूर्ण कार्य यात्रा को पूरा करने के कठिन विकल्प का सामना करना पड़ा जहां कई लोग और परियोजनाएं शामिल थीं। मेरे पति ने मुझे आश्वासन दिया कि वह ठीक हो जायेंगे। लेकिन मेरा दिल उसके और मेरे काम के बीच बंटा हुआ था।

परमेश्वर के लोगों को जीवन के निर्णयों के चौराहे पर उसकी सहायता की आवश्यकता थी। बहुत बार, उन्होंने उसके प्रकट निर्देशों का पालन नहीं किया था। इसलिए मूसा ने लोगों से उसकी आज्ञाओं का पालन करके "जीवन को चुनने" का आग्रह किया (व्यवस्थाविवरण 30:19)। बाद में, भविष्यवक्ता यिर्मयाह ने परमेश्वर के भटके हुए लोगों को दिशा-निर्देश दिए, और उन्हें उसके मार्गों पर चलने के लिए प्रेरित
किया : "सड़कों पर खड़े होकर देखो, और पूछो कि प्राचीनकाल का अच्छा मार्ग कौन सा है, उसी पर चलो" (यिर्मयाह 6:16)। पवित्रशास्त्र बाइबल के प्राचीन मार्ग और परमेश्वर के पिछले प्रावधान हमें निर्देशित कर सकते हैं।

मैंने खुद को एक भौतिक चौराहे पर कल्पना की और यिर्मयाह के ज्ञान के नमूना को लागू किया। मेरे पति को मेरी जरूरत थी, और मेरे काम को भी। तभी, मेरे संचालक ने फोन किया और मुझे घर पर रहने के लिए प्रोत्साहित किया। मैंने राहत की सांस ली और चौराहे पर परमेश्वर के प्रावधान के लिए उन्हें धन्यवाद दिया। परमेश्वर का निर्देश हमेशा स्पष्ट रूप से नहीं आता, लेकिन आता है। जब हम चौराहे पर खड़े हों, तो आइए सुनिश्चित करें कि हम उसकी तलाश करें। एलिसा मॉर्गन

मसीह में शांत विश्वसनीयता

पहले तो मैंने उस पर ध्यान नहीं दिया।

मैं अपने होटल में नाश्ते के लिए आया था। भोजन कक्ष में सब कुछ साफ़ था। बुफ़े टेबल भरी हुई थी. रेफ्रिजरेटर में सामान भरा हुआ था, बर्तन डिब्बे भरे हुए थे। सब कुछ सही था।

फिर मैंने उसे देखा l एक सीधा-सादा आदमी ने इसे फिर से भरा, उसे पोछा l उसने अपनी ओर ध्यान नहीं खींचा, लेकिन जितनी देर मैं बैठा रहा, उतना ही मैं चकित होता गया। वह आदमी बहुत तेज़ी से काम कर रहा था, हर चीज़ पर ध्यान दे रहा था, और इससे पहले कि किसी को किसी चीज़ की ज़रूरत हो सब कुछ फिर से भर रहा था। मैंने देखा कि एक खाद्य सेवा अनुभवी के रूप में, हर चीज पर उसका निरंतर ध्यान था । सब कुछ सही था क्योंकि यह आदमी ईमानदारी से काम कर रहा था—भले ही केवल कुछ लोगों ने ही ध्यान दिया हो।

इस आदमी को इतनी सावधानी से काम करते हुए देखकर, मुझे थिस्सलुनिकियों को कहे गए पौलुस के शब्द याद आए l "चुपचाप रहने और अपना-अपना काम काज करने और अपने अपने हाथों से कमाने का प्रयत्न करो; ताकि बाहरवालों से आदर प्राप्त करो" (1 थिस्सलुनीकियों 4:11-12)। पौलुस ने समझा कि यह इस बात की शांत गवाही देता है कि कैसे सुसमाचार दूसरों के लिए सेवा के छोटे-से प्रतीत होने वाले कार्य को भी गरिमा और उद्देश्य के साथ प्रेरित कर सकता है

मैं नहीं जानता कि जिस व्यक्ति को मैंने उस दिन देखा था वह यीशु में विश्वास करने वाला था या नहीं । लेकिन मैं आभारी हूं कि उसके शांत लगन (परिश्रम) ने मुझे शांत विश्वसनीयता(ईमानदारी) के साथ जीने के लिए परमेश्वर पर भरोसा करने की याद दिलाई जो उसके विश्वसनीय तरीकों को दर्शाता है। एडम आर. होल्ज़

आशा पाना

समुद्र विज्ञानी सिल्विया अर्ल ने मूँगा-चट्टान को नष्ट होते प्रत्यक्ष रूप से देखा है। उन्होंने मिशन ब्लू की स्थापना की, जो विश्वव्यापी "होप स्पॉट्स" के विकास के लिए समर्पित एक संगठन है। दुनिया भर में ये विशेष स्थान "समुद्र के संकटमय स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण" हैं, जो पृथ्वी पर हमारे जीवन को प्रभावित करते हैं। इन क्षेत्रों की साभिप्राय देखभाल के द्वारा, वैज्ञानिकों ने पानी के भीतर समुदायों के संबंधों को बहाल होते और विलोप होने वाली प्रजातियों के जीवन को संरक्षित होते देखा है।

भजन संहिता संहिता 33 में, भजन संहिताकार स्वीकार करता है कि यहोवा के वचन से सब कुछ बना और यह सुनिश्चित किया कि उसने जो कुछ बनाया वह स्थिर रहेगा (पद.6-9)। चूँकि परमेश्वर पीढ़ी से पीढ़ी तक और राष्ट्रों पर शासन करता है (पद.11-19), वह अकेले ही रिश्तों को बहाल करता है, जीवन बचाता है,और आशा को पुनर्जीवित करता है। हालाँकि, परमेश्वर हमें दुनिया और उसके द्वारा बनाए गए लोगों की देखभाल में उसके साथ शामिल होने के लिए आमंत्रित करता है।

हर बार जब हम बादलों, धूसर आकाश में बिखरे इंद्रधनुष की दमक या चट्टानी तट से टकराती समुद्र की चमकदार लहरों के लिए परमेश्वर की स्तुति करते हैं, तो हम उसके "अचूक प्रेम" और उपस्थिति की घोषणा कर सकते हैं क्योंकि उस पर "हमारी आशा है" (पद 22)lजब हम दुनिया की वर्तमान स्थिति पर विचार करते हुए निराशा या भय की ओर प्रलोभित होते हैं, तो हम यह मानना शुरू कर सकते हैं कि हम कोई फर्क नहीं डाल सकते। हालाँकि, जब हम परमेश्वर की देखभाल करने वाली टीम के सदस्यों के रूप में अपनी भूमिका निभाते हैं, तो हम उसे सृष्टिकर्ता के रूप में सम्मान दे सकते हैं और दूसरों को आशा खोजने में मदद कर सकते हैं क्योंकि वे यीशु पर अपना भरोसा रखते हैं। 

- सोचिल डिक्सन