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मेरा बूढ़ा कुत्ता मेरे पास बैठता है और दूर आसमान को घूरता है l बताओ तुम क्या सोच रहे हो l एक बात मुझे पता है कि वह मरने के बारे में नहीं सोच रहा है क्योंकि कुत्ते “समझते” नहीं हैं l वे भविष्य की चीजों के बारे में नहीं सोचते हैं l लेकिन हम सोचते हैं l कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारी उम्र या स्वास्थ्य या धन क्या है,  हम किसी बिंदु पर मृत्यु के बारे में सोचते हैं l यह इसलिए क्योंकि भजन 49:20 के अनुसार,  जानवरों के विपरीत, हमारे पास, “समझ” है l हम जानते हैं कि हम मरेंगे,  और इसके बारे में हम कुछ नहीं कर सकते l “कोई अपने भाई को किसी भाँति छुड़ा नहीं सकता है; और न परमेश्वर को उसके बदले प्रायश्चित में कुछ दे सकता है” (पद.7) l किसी के पास इतना पैसा नहीं है कि वह खुद को कब्र से बाहर निकाल सके l

लेकिन मृत्यु की अंतिम स्थिति से बाहर निकलने का एक तरीका है : “परमेश्वर मेरे प्राण को अधोलोक के वश से छुड़ा लेगा, क्योंकि वही मुझे ग्रहण कर अपनाएगा” (पद.15) l (शाब्दिक रूप से, “वह मुझे शामिल कर लिया”) l रॉबर्ट फ्रॉस्ट(अमरीकी कवि) ने कहा, “ घर वह स्थान है जहाँ, जब आपको जाना होगा, तो उन्हें आपको अंदर ले लेना होगा l” परमेश्‍वर ने हमें अपने पुत्र के द्वारा मृत्यु से छुड़ाया है, “जिसने अपने आप को सब के छुटकारे के दाम में दे दिया” (1 तीमुथियुस 2:6) l इस प्रकार यीशु ने वादा किया कि जब हमारा समय आएगा,  वह हमारा स्वागत करेगा और हमें शामिल कर लेगा (यूहन्ना 14:3) l

जब मेरा समय आएगा, तो यीशु,  जिसने परमेश्वर को मेरे जीवन की कीमत दी, वह खुले बाहों से अपने पिता के घर में मेरा स्वागत करेगा l

अत्यधिक जल

रिपोर्ट में अत्यधिक सूखे,  गर्मी और आग की "गंभीर कहानी" बताया गया था l वर्णन में केवल अल्प वर्षा के साथ एक भयावह वर्ष का वर्णन किया गया था,  जिसमें सूखी झाड़ियाँ ईंधन में बदल गईं l भड़की आग ने ग्रामीण इलाकों को जला दिया l मछलियाँ मर गईं l फसलें बर्बाद हो गईं l सब कुछ क्योंकि उनके पास एक साधारण संसाधन नहीं था, हम जिसका महत्व् नहीं समझते हैं─जल, जिसकी आवश्यकता हम सब को जीने के लिए होती है l

इस्राएल ने खुद को भयानक दुविधा में पाया l जब लोगों ने धूल,  बंजर रेगिस्तान में डेरा डाला, हमने इस खतरनाक पंक्ति को पढ़ा : “लोगों को पीने का पानी न मिला” (निर्गमन 17:1) l लोग भयभीत थे l उनके गले सूख गए थे l रेत गर्म हो गई l उनके बच्चों को अत्यधिक प्यास लगी l भयभीत,  लोगों ने “मूसा से वादविवाद किया,” “हमें पीने का पानी दे” (पद.2) l लेकिन मूसा क्या कर सकता था?  वह केवल परमेश्वर के पास जा सकता था l

और परमेश्वर ने मूसा को अजीब निर्देश दिए : “लोगों . . . को . . . साथ ले ले . . . चट्टान पर [मार], तब उसमें से पानी निकलेगा, जिससे ये लोग पीएँ” (पद.5-6) l इसलिए मूसा ने चट्टान को मारा,  और बहुत पानी फूट निकला, जो लोगों और उनके पशुओं के लिए बहुत था l उस दिन, इस्राएल जान गया कि उनका परमेश्वर उनसे प्रेम करता था l उनका परमेश्वर उनके लिए अत्यधिक जल का प्रबंध किया l

यदि आप जीवन में सूखा या निष्फलता का सामना कर रहे हैं,  तो जान लें कि परमेश्वर इसके बारे में जानता है और वह आपके साथ है l जो कुछ भी आपकी जरूरत है,  आपकी जो भी कमी है, आप उसके प्रचुर जल में आशा और ताजगी प्राप्त कर सकते हैं l

नवीकृत दर्शन

मेरी बाईं आंख में एक दर्दनाक मामूली सर्जरी के बाद,  मेरे डॉक्टर ने दृष्टि परीक्षण की सिफारिश की l आत्मविश्वास के साथ,  मैंने अपनी दाहिनी आंख को ढक लिया और चार्ट पर प्रत्येक पंक्ति को आसानी से पढ़ा l अपनी बाईं आंख को ढँकने पर,  मैं धक से रह गयी l मैं कैसे महसूस नहीं कर सकी कि मैं इतनी अंधी थी?

नए चश्मे और नवीनीकृत दृष्टि के साथ तालमेल बिठाते हुए,  मैंने सोचा कि कैसे दैनिक अभ्यास मुझे अक्सर आध्यात्मिक निकट दृष्टि वाली बना दी l केवल उसी चीज़ पर ध्यान केंद्रित करना,  जिसे मैं अति निकट देख सकती थी—मेरे दर्द और हमेशा बदलती परिस्थितियाँ —मैं अपने शाश्वत और अपरिवर्तनीय परमेश्वर की ईमानदारी के प्रति अंधी हो गयी l इस तरह के सीमित परिप्रेक्ष्य के साथ,  आशा एक अप्राप्य धुंधलापन बन गया l

पहला शमूएल 1 एक अन्य महिला की कहानी बताता है जो अपनी वर्तमान पीड़ा,  अनिश्चितता और नुकसान पर ध्यान केंद्रित करते हुए परमेश्वर की विश्वसनीयता को पहचानने में विफल रही l सालों तक, हन्ना ने अपने पति एलकाना की दूसरी पत्नी पन्निना से संतानहीनता और अंतहीन पीड़ा को सहन किया l हन्ना के पति ने उसे स्वीकार किया,  लेकिन संतोष उससे दूर रहा l एक दिन,  उसने अत्यधिक ईमानदारी के साथ प्रार्थना की l जब एली याजक ने उससे पूछा,  तो उसने अपनी स्थिति बताई l जब वह चली गई,  तो उसने प्रार्थना की कि परमेश्वर उसके अनुरोध को स्वीकार करे (1 शमूएल 1:17) l  हालाँकि हन्ना की स्थिति में तुरंत बदलाव नहीं आया,  लेकिन वह आत्मविश्वास की उम्मीद के साथ वापस गयी (पद.18) l

1 शमूएल 2:1-2 में हन्ना की प्रार्थना उसके ध्यान में बदलाव दर्शाती है l उसकी परिस्थितियों में सुधार होने से पहले,  हन्ना के नए दर्शन ने उसके दृष्टिकोण और उसके व्यवहार को बदल दिया l वह परमेश्वर की निरंतर उपस्थिति में आनन्दित थी─उसकी चट्टान और और हमेशा की आशा l

बुद्धिमान सलाह सुनना

अमेरिकी गृहयुद्ध के दौरान,  राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन एक बार खुद को एक राजनेता को खुश करते हुए पाया, तो उन्होंने कुछ केंद्रीय सेना रेजिमेंटों(सैन्य दलों) को स्थानांतरित करने का आदेश जारी किया l जब युद्ध के सचिव,  एडविन स्टैंटन को आदेश मिला,  तो उन्होंने इसे अंजाम देने से इनकार कर दिया l उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति मूर्ख थे l लिंकन को बताया गया कि स्टैंटन ने क्या कहा था,  और उन्होंने उत्तर दिया : “अगर स्टैंटन ने कहा कि मैं मूर्ख हूँ,  तो मुझे होना चाहिए,  क्योंकि वे लगभग हमेशा सही है l मैं अपने लिए देखूँगा l”  जब दोनों लोगों ने बात की,  राष्ट्रपति ने जल्द समझ लिया कि उनका निर्णय एक गंभीर गलती थी,  और बिना किसी हिचकिचाहट के उन्होंने इसे वापस ले लिया l यद्यपि स्टैंटन ने लिंकन को मूर्ख कहा था,  लेकिन जब स्टैंटन उनसे असहमत थे,  तो राष्ट्रपति ने अड़ियल ढंग से इन्कार न करके बुद्धिमान साबित हुए l इसके बजाय,  लिंकन ने सलाह सुनी,  उस पर विचार किया और अपना विचार बदल दिया l

क्या आपने कभी किसी ऐसे व्यक्ति का सामना किया है जो महज बुद्धिमान सलाह नहीं सुनता था? (1 राजा 12:1-11 देखें) l यह क्रोधित करनेवाला हो सकता है,  क्या यह नहीं हो सकता?  या, और भी व्यक्तिगत,  क्या आपने कभी सलाह मानने से इनकार किया है?  जैसा कि नीतिवचन 12:15 कहता है, “मूढ़ को अपनी ही चाल सीधी जान पड़ती है, परन्तु जो सम्मति मानता, वह बुद्धिमान है l लोग हमेशा सही नहीं हो सकते,  लेकिन हमारे लिए भी वैसा ही है! यह जानते हुए कि हर कोई गलतियाँ करता है,  केवल मूर्ख यह मानते हैं कि वे अपवाद हैं l इसके बजाय,  आइए ईश्वरीय बुद्धिमत्ता का अभ्यास करें और दूसरों के बुद्धिमान सलाह सुने ─भले ही हम शुरू में असहमत हों l कभी-कभी परमेश्वर हमारे अच्छे (पद. 2) के लिए ऐसे ही काम करता है l

हमारे लिए गाना

एक युवा पिता ने अपने बच्चे को अपनी बाहों में उठाए हुए था, उसके लिए गा रहा था और उसे लय में झुला रहा था l बच्चे में श्रवण-दोष था, जिससे वह मधुर गीत या शब्द नहीं सुन सकता था l फिर भी पिता ने अपने बेटे के लिए गाया, अपने बेटे के प्रति प्रेम का एक सुंदर, कोमल कार्य किया l और उसका प्रयास उसके छोटे लड़के के आनंदमय मुस्कान से पुरस्कृत किया गया l

पिता-पुत्र की अदला-बदली का अलंकार सपन्याह के शब्दों का असाधारण प्रतिरूप है l पुराने नियम के भविष्यवक्ता का कहना है कि परमेश्वर खुशी-खुशी अपनी बेटी, यरूशलेम के लोगों के लिए गाएगा (सपन्याह 3:17) l परमेश्वर को अपने प्यारे लोगों के लिए अच्छे काम करने में आनंद मिलता है, जैसे कि उनकी सजा को वापस लेना और उनके दुश्मनों को वापस करना (पद.15) l सपन्याह का कहना है कि उनके पास अब डरने की कोई वजह नहीं है और इसके बजाय खुशी मनाने का कारण है l

हम, जो परमेश्वर की संतान के रूप में यीशु मसीह के बलिदान द्वारा छुड़ाए गए हैं, कभी-कभी कम सुनते हैं – असमर्थ, या हमारे लिए परमेश्वर द्वारा उल्लासित  प्रेम के गाने की ओर अपने कानों को अनुकूल बनाने में शायद अनिच्छुक होते हैं l हमारे लिए उसका गहरा प्रेम उस युवा पिता की तरह है, जो अपने बेटे की सुनने में असमर्थता के बावजूद अपने बेटे के लिए प्यार से गाया l उसने हमारी सजा भी समाप्त कर दी है, जिससे हमें खुश होने के लिए अतिरिक्त कारण मिला है l शायद हम उसकी आवाज़ में ज़ोर से गूंज रही खुशी को और अधिक बारीकी से सुनने की कोशिश कर सकते हैं l पिता, हमें आपकी स्नेही धुन सुनने और आपकी बाहों में सुरक्षित रूप से रहने के लिए मदद करें l