फुस्फुसनेवाला गुम्बज(Whispering Gallery)
लंदन के सेंट पॉल कैथेड्रल(प्रधान गिरजाघर) के विशाल गुम्बज में, आगंतुक फुस्फुसानेवाला गुम्बज(Whispering Gallery) तक पहुंचने के लिए 259 सीढ़ियाँ चढ़ सकते हैं l वहाँ आप फुसफुसा सकते हैं और वृत्ताकार पथ में कहीं भी लगभग एक सौ फीट की दूरी पर भी बड़े फासले के पार दूसरा व्यक्ति आपको सुन सकता है l इंजीनियर्स इस विषमता को गुम्बज के गोलाकार आकार और एक फुसफुसाहट की कम तीव्रता वाली ध्वनि तरंगों का परिणाम बताते हैं l
हम इस बात के लिए कितना अधिक निश्चित होना चाहते हैं कि परमेश्वर हमारे कष्टदायी फुसफुसाहट को सुनता है! भजन इस बात से भरे पड़े हैं कि वह हमारी पुकार, प्रार्थना, सुनता है – और फुसफुसाता है l दाऊद लिखता है, अपने संकट में मैंने यहोवा परमेश्वर को पुकारा; मैंने अपने परमेश्वर की दोहाई दी” (भजन 18:6) l बार-बार, उन्होंने और अन्य भजनकार अनुनय करते हैं, “मेरी प्रार्थना सुन ले” (4:1), मेरी वाणी (5:3), [मेरा] कराहना (102:20) l कभी-कभी अभिव्यक्ति एक फुसफुसाहट से अधिक होती है, “मेरी ओर कान [लगा] (77:1), जहाँ पर “हृदय में ध्यान” और “आत्मा खोज . . . करती है” (77:6 Hindi – C.L.) l
इन दलीलों के जवाब में, भजनकार - दाऊद की तरह भजन 18:6 में – प्रगट करते हैं कि परमेश्वर सुन रहा है : “उसने अपने मंदिर में से मेरी बातें सुनी; और मेरी दोहाई उसके पास पहुंचकर उसके कानों में पड़ी l” चूँकि वास्तविक मंदिर अभी तक नहीं बनाया गया था, हो सकता है कि दाऊद परमेश्वर द्वारा अपने स्वर्गीय निवास में सुनने का सन्दर्भ दे रहा हो?
पृथ्वी के ऊपर स्वर्ग के अपने “फुसफुसाने वाले गुम्बज” से, परमेश्वर हमारी गहरी मंद ध्वनि, हमारी फुसफुसाहट की ओर भी झुकता है, और सुनता है l

मिलकर दुःख उठाना
2013 में, ब्रिटिश शाही नौसैनिक दिग्गज सत्तर वर्षीय जेम्स मैककोनेल का निधन हो गया l मैककोनेल का कोई परिवार नहीं था, और उनके वृद्धाश्रम के कर्मचारियों को डर था कि कोई भी उनके अंतिम संस्कार में शामिल नहीं होगा l मैककोनेल की यादगार(memorial) सेवा को संचालित करने के लिए नियुक्त किए गए एक व्यक्ति ने एक फेसबुक संदेश पोस्ट किया : “इस दिन और इस उम्र में यह काफी दुखद है कि किसी को भी इस दुनिया को छोड़ना है जिनकी मृत्यु पर कोई शोक करने वाला नहीं है, लेकिन यह व्यक्ति एक परिवार था . . . यदि आप इसके अंतिम संस्कार में अपना सम्मान देने के लिए उपस्थित हो सकते हैं जो पूर्व नौसैनिक था तो कृपया ज़रूर उपस्थित हों l” दो सौ शाही सैनिक उपस्थित हुए!
इन ब्रिटिश हमवतन लोगों ने एक बाइबिल सत्य दिखाया : “देह में एक हो अंग नहीं परन्तु बहुत से हैं,” पौलुस कहता है (1 कुरिन्थियों 12:14) l हम अकेले नहीं हैं l ठीक इसके विपरीत : हम यीशु में बंधे हुए हैं l पवित्रशास्त्र जैविक अंतरसंबंध का खुलासा करता है : यदि एक अंग दुःख पाता है, तो सब अंग उसके साथ दुःख पाते हैं” (पद.26) l यीशु के विश्वासियों के रूप में, परमेश्वर के नए परिवार के सदस्य, हम मिलकर पीड़ा में, दुःख में, उन अँधेरे स्थानों में, जहाँ हम अकेले जाने से डरेंगे, ओर बढ़ते हैं l लेकिन शुक्र है कि हम अकेले नहीं जाते l
शायद दुख का सबसे बुरा हिस्सा वह है जब हम महसूस करते हैं कि हम अकेले ही अंधेरे में डूब रहे हैं l हालाँकि, परमेश्वर एक नया समुदाय बनाता है जो मिलकर दुःख उठता है l एक नया समुदाय जहां किसी को अंधेरे में नहीं छोड़ा जाना चाहिए l

दास सुनता है
अगर वायरलेस रेडियो चालू होता, तो उन्हें पता चल जाता कि टाइटैनिक डूब रहा है l एक अन्य जहाज के रेडियो ऑपरेटर सिरिल इवांस ने टाइटैनिक के रेडियो ऑपरेटर जैक फिलिप्स को एक संदेश भेजने की कोशिश की थी - उन्हें बताने के लिए कि वे बर्फ के एक बड़े तैरते टुकड़े का सामना कर चुके हैं l लेकिन टाइटैनिक का रेडियो ऑपरेटर यात्रियों के संदेशों को आगे भेजने में व्यस्त था और उसने उसे रुखाई से चुप रहने को कहा l इसलिए दूसरे ऑपरेटर ने अनिच्छा से अपने रेडियो को बंद कर दिया और सोने चला गया l दस मिनट बाद, टाइटैनिक ने बर्फ के एक चट्टान से टकराया l उनके संकट के संकेत के कोई उत्तर नहीं मिले क्योंकि कोई भी नहीं सुन रहा था l
1 शमूएल में हमने पढ़ा कि इस्राएल के याजक भ्रष्ट थे और राष्ट्र के खतरे में पड़ने के कारण उनकी आध्यात्मिक दृष्टि और सुनने की शक्ति ख़त्म हो गए थे l “उन दिनों में यहोवा का वचन दुर्लभ था, और दर्शन कम मिलता था” (1 शमूएल 3:1) l फिर भी परमेश्वर अपने लोगों को नहीं छोड़ने वाला था l उसने शमूएल नाम के एक युवा लड़के से बात करनी शुरू की, जिसका पालन पोषण याजक के घर में किया जा रहा था l शमूएल के नाम का अर्थ है “परमेश्वर सुनता है” – परमेश्वर द्वारा उसकी माँ की प्रार्थना सुनने का स्मारक l लेकिन शमूएल को सीखना था कि परमेश्वर को कैसे सुनना होगा l
“कह, क्योंकि तेरा दास सुन रहा है l” (पद.10) l यह दास ही है जो सुनता है l हम भी सुनने और पवित्रशास्त्र में परमेश्वर द्वारा प्रगट बातों को माने l आइये हम उसको अपना जीवन समर्पित करें और दीन सेवकों की तरह व्यवहार करें - जिनके “रेडियो” चालू हैं l

स्व-जांच
हाल ही में मैंने द्वितीय विश्व-युद्ध के पत्रों के ढेर में से पढ़ा, जो मेरे पिताजी ने मेरी माँ को भेजे थे l वह उत्तरी अफ्रीका में थे और वह अमेरिका में थी l पिताजी, जो अमेरिकी सेना में सेकेण्ड लेफ्टिनेंट थे, को सैनिकों की चिट्ठियों को जांचने का काम सौंपा गया था - दुश्मन की आँखों से संवेदनशील जानकारी गुप्त रखते हुए l इसलिए यह देखना मज़ेदार था - अपनी पत्नी को लिखे पत्रों के बाहर - एक मोहर लगा होता था जिसमें लिखा होता था, “2nd लेफ्टिनेंट जॉन ब्रैन (मेरे पिता का नाम) द्वारा सेंसर/निरीक्षण किया हुआ l” वास्तव में, उन्होंने अपने पत्रों से लाइनें काट दी थीं!
स्व-जाँच(Self-censoring) वास्तव में हम सभी के लिए एक अच्छा विचार है l पवित्रशास्त्र में कई बार, लेखक यह जानने के लिए कि क्या सही नहीं है, जिससे परमेश्वर को सम्मान नहीं मिल रहा है, खुद पर एक अच्छा नज़र रखने के महत्व का उल्लेख करता है l उदाहरण के लिए, भजनकार ने प्रार्थना की, “मुझे जांच कर जान ले . . . और देख कि मुझ में कोई बुरी चाल है कि नहीं” (भजन :23-24) l देखें कि क्या मुझमें कोई अपमानजनक मार्ग है ”(भजन 139:23–24) l यिर्मयाह ने इसे इस तरह लिखा : “हम अपने चालचलन को ध्यान से परखें, और यहोवा की ओर फिरें” (विलापगीत 3:23) l और पौलुस ने प्रभु भोज के समय हमारे हृदयों की स्थिति के विषय लिखते हुए, कहा, “मनुष्य अपने आप को जांच ले” (1 कुरिन्थियों 11:28) l
पवित्र आत्मा हमें किसी भी दृष्टिकोण या कार्यों से फिरने में मदद कर सकता है जो परमेश्वर को खुश नहीं करते हैं l इससे पहले कि हम आज दुनिया में प्रवेश करें, आइये हम रुकें और स्व-जाँच करने के लिए आत्मा की मदद प्राप्त करें ताकि हम उसके साथ संगति में “प्रभु के पास लौट सकें l”

अंतिम लहर
लोग “लहर(the wave” करना पसंद करते हैं l दुनिया भर में खेल की घटनाओं और समारोहों में, यह तब शुरू होता है जब कुछ लोग खड़े होकर अपना हाथ उठाते हैं l एक क्षण बाद, उनके पास बैठे लोग भी ऐसा ही करते हैं l लक्ष्य है कि एक पूरे प्रवाह के दौरान एक क्रमिक प्रवाहित गति अपना काम करे l एक बार जब यह अंत तक पहुँच जाता है, तो इसे शुरू करने वाले लोग मुस्कुराते हैं और खुश होते हैं और गति को जारी रखते हैं l
लहर की पहली दर्ज की गई घटना 1981 में अमेरिका में एक पेशेवर खेल कार्यक्रम में हुई थी l मुझे इस लहर में शामिल होना पसंद है क्योंकि यह मजेदार है l लेकिन मेरे साथ यह भी हुआ कि यह करते हुए हमें जो खुशी और साथ का अनुभव होता है, वह सुसमाचार की याद दिलाता है - यीशु में उद्धार की अच्छी खबर जो प्रशंसा और आशा में हर जगह विश्वासियों को एकजुट करती है l यह “अंतिम लहर(ultimate wave)” यरूशलेम में बीस सदी पहले शुरू हुई थी l कुलुस्से के चर्च के सदस्यों को लिखते हुए, पौलुस ने इसे इस तरह वर्णित किया : “[सुसमाचार] फल लाता और बढ़ता जाता है, वैसे ही जिस दिन से तुम ने उसको सुना और सच्चाई से परमेश्वर का अनुग्रह पहिचाना है, तुम में भी ऐसा ही करता है”(कुलुस्सियों 1:6) l इस शुभ समाचार का स्वाभाविक नतीजा है, “ आप का विश्वास और प्रेम उस आशा पर आधारित है, जो स्वर्ग में आपके लिए सुरंक्षित है”(पद.5 Hindi-C.L.) l
यीशु में विश्वासियों के रूप में, हम इतिहास की सबसे बड़ी लहर का हिस्सा हैं l चलते रहने दें! एक बार इसके पूरा हो जाने के बाद, हम उस व्यक्ति की मुस्कान देखेंगे, जिसने इसे शुरू किया था l