अगाध प्रेम
जब वे पहली बार मिले, तो एडविन स्टैंटन ने यूएस के राष्ट्रपति अब्राहम लिंकन की व्यक्तिगत और पेशेवर रूप से आलोचना की-यहाँ तक कि उन्हें “लम्बी बाँह वाला प्राणी” तक कह दिया। परन्तु लिंकन ने स्टैंटन की योग्यताओं की प्रशंसा की और उन्हें क्षमा कर देने को चुना, और उन्हें गृहयुद्ध के दौरान कैबिनेट के एक मुख्य पद पर नियुक्त किया। बाद में स्टैंटन लिंकन से एक मित्र के रूप में प्रेम में बढ़ते गए। यह स्टैंटन ही थे जो फोर्ड थिएटर में राष्ट्रपति को गोली लगने के बाद सारी रात उनके पलंग पर बैठे रहे थे और उनके देहान्त पर आंसुओं के साथ धीमे स्वर में बोले, “अब इन्हें पीढ़ियों तक याद रखा जाएगा।”
पुनर्मिलन एक खुबसूरत चीज़ है। प्रेरित पौलुस ने यीशु के अनुगामियों की ओर संकेत किया जब उसने लिखा, “एक दूसरे से अधिक प्रेम रखो, क्योंकि प्रेम अनेक पापों को ढाँप देता है” (1 पतरस 4:8)। पतरस के शब्दों पर मुझे आश्चर्य हुआ कि क्या वह यीशु का इन्कार करने (लूका 22:54-62) और यीशु के द्वारा उसे (और हमें) क्रूस के द्वारा क्षमा कर दिए जाने के बारे में सोच रहा था।
जिस अगाध प्रेम का प्रदर्शन यीशु ने क्रूस पर अपनी मृत्यु के द्वारा किया, वह हमें हमारे पापों के ऋण से मुक्त करता और परमेश्वर के साथ हमारे पुनर्मिलन का मार्ग खोलता है (कुलुस्सियों 1:19-20)। उसकी क्षमा हमें दूसरों को क्षमा करने के लिए सशक्त करती है, जब हम इस बात का एहसास करते हैं कि हम अपनी ही सामर्थ से क्षमा नहीं कर सकते और हम उससे सहायता मांगते हैं। जब हम दूसरों से प्रेम करते हैं क्योंकि हमारा उद्धारकर्ता उनसे प्रेम करता और क्षमा करता है, क्योंकि परमेश्वर हमें अपने भूतकाल को छोड़ देने और उसके साथ अनुग्रह के सुन्दर स्थानों में आगे बढ़ जाने के लिए सामर्थ प्रदान करता है।
गोद लिए हुए
मुझे खुशी होती है जब एक परहित करने वाला बेघर बच्चों के लिए एक अनाथालय का निर्माण करता है। मैं और भी उत्साहित हो जाता हूँ जब वह और अधिक देता है और उन बच्चों में से एक को गोद ले लेता है। अधिकत्तर अनाथ बच्चे बस एक पिता को पाकर ही प्रसन्न होंगे। परन्तु मेरी सहायता करने वाले के बारे में बस जान लेना ही मेरी सहायता नहीं करेगा, परन्तु यह कि वह मुझे चाहता है। वह कैसा लगेगा?
यदि आप परमेश्वर की एक सन्तान हैं और यह आप पहले से ही जानते हैं, क्योंकि यह आपके साथ घटित हुआ है। हम शिकायत नहीं कर सकते यदि परमेश्वर ने हम से बस प्रेम किया और अपना पुत्र भेज दिया होता ताकि हम “नाश न हों परन्तु अनन्त जीवन पाएं” (यूहन्ना 3:16) । यह हमारे लिए पर्याप्त होता। परन्तु परमेश्वर के लिए नहीं। उसने अपने पुत्र को हमें छुड़ाने के लिए भेजा” परन्तु इसका अन्त यहीं नहीं हुआ, “परन्तु हमें पुत्रों के रूप में गोद लिया गया है” (गलातियों 4:4-5) ।
प्रेरित पौलुस हमें “पुत्र” बताता है, क्योंकि उसके समय में पुत्रों के लिए पिता की मीरास प्राप्त करना सामान्य था। उसकी मुख्य बात यह है कि जो कोई यीशु पर विश्वास करता है, चाहे वह पुरुष या महिला हो, मीरास के समान और समस्त अधिकारों के साथ परमेश्वर का “पुत्र” बन जाता है (पद 7)।
परमेश्वर बस आपको बचाना ही नहीं चाहता है। वह तो आपको चाहता है। उसके आपके अपने परिवार में गोद ले लिया है, आपको अपना नाम प्रदान किया है (प्रकाशितवाक्य 3:12), और गर्व के साथ आपको अपनी सन्तान कहता है। सम्भवतः आपको इससे अधिक प्रेम नहीं किया जा सकता, या कोई इससे महत्वपूर्ण नहीं हो सकता। आप बस परमेश्वर के द्वारा आशिषित नहीं हैं। आप परमेश्वर की सन्तान हैं। आपका पिता आपसे प्रेम करता है।
शैवाल और डायटम
“एक डायटम क्या है?” मैंने मेरी मित्र से पूछा। मैं उसके कांधे पर झुके हुए उसके फोन में वे तस्वीरें देख रही थी जो उसने एक सूक्ष्मदर्शी से ली थीं। “ओह, यह तो एक शैवाल है, परन्तु इसे देखना बहुत कठिन है। कईबार आपको लैंसों पर एक बूंद तेल की ज़रूरत होती है या उन्हें देखने के लिए उनका मृत होना आवश्यक है,” मेरी दोस्त ने मुझे बताया। मैं अचम्भित हो कर देखती रही, जब वह मुझे उन तस्वीरों को दिखा रही थी। मैं उन पेचीदा बातों पर विचार करने ने अपने आप रो नहीं पाई जो परमेश्वर ने उस जीवन में डाली थी जिसे हम मात्र सूक्ष्मदर्शी से ही देख सकते हैं!
परमेश्वर की सृष्टि और कार्य अनन्त हैं। अय्यूब की पुस्तक में, उसके मित्रों में से एक, एलीहू इसकी बात करता है जब अय्यूब अपने दुःख के साथ संघर्ष कर रहा था। एलीहू अपने मित्र को चुनौती देता है, “हे अय्यूब! इस पर कान लगा और सुन ले; चुपचाप खड़ा रह, और परमेश्वर के आश्चर्यकर्मों पर विचार कर। क्या तू जानता है, कि परमेश्वर कैसे अपने बादलों को आज्ञा देता, और अपने बादल की बिजली को चमकाता है? क्या तू घटाओं का तौलना, या सर्वज्ञानी के आश्चर्यकर्म जानता है?” (अय्यूब 37:14-16)। मनुष्यों के रूप में, हम परमेश्वर और उसकी सृष्टि की जटिलता को समझ नहीं सकते हैं।
यहाँ तक कि सृष्टि के वे हिस्से जिन्हें हम देख भी नहीं सकते परमेश्वर की महिमा और सामर्थ को दिखाते हैं। उसकी महिमा हमें घेरे रखती है। इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम किस स्थिति में हों, जब हम देख नहीं पाते और समझते नहीं हैं, परमेश्वर उस समय भी कार्य कर रहा होता हैl आइए आज ही उसकी स्तुति करें क्योंकि “वह तो ऐसे बड़े काम करता है जिनकी थाह नहीं लगती, और इतने आश्चर्यकर्म करता है, जो गिने नहीं जाते” (अय्यूब 5:9)।
आकाश को फाड़ दो
हाल ही में हुए एक वार्तालाप में मेरी एक मित्र ने मुझे बताया कि उसने अपने विश्वास को त्याग दिया है, मैंने एक जानी-पहचानी शिकायत सुनी: मैं एक ऐसे परमेश्वर पर कैसे विशवास कर सकती हूँ, जो कुछ करता हुआ ही प्रतीत नहीं होता है? हिला देने वाला यह प्रश्न हम में से सभी के सामने कभी न कभी अवश्य आता है, जब हम समाचारों में हिंसा के बारे में पढ़ते हैं, जब हम अपने ही दुःख को लिए फिरते हैं। मेरी दोस्त के दुःख ने उसकी परमेश्वर की उसके लिए कार्य करने गहन आवश्यकता को प्रदर्शित किया, यह एक ऐसी लालसा है, जिसे लगभग हम सभी महसूस करते हैं।
इस्राएल इस मार्ग को अच्छी रीति से जानता था। बेबीलोन के साम्राज्य ने उसे बर्बाद कर दिया था, उन्हें लोहे के घूंसे से चूर-चूर कर दिया था और यरूशलेम को धूआं देते हुए एक ढेर में बदल दिया था। नबी यशायाह लोगों की गहन शंका के ये शब्द डालता है: वह परमेश्वर कहाँ है जिसे हमें बचाना था? (यशायाह 63:11-15) । और ठीक इसी स्थान से यशायाह एक साहसपूर्ण प्रार्थना करता है: “भला हो कि तू आकाश को फाड़कर उतर आए” (64:1)। यशायाह की पीड़ा और दुःख उसे परमेश्वर दूर नहीं ले गए, अपितु उसे खोजने और उसके समीप आने की ओर ले कर गए।
हमारे संदेह और संघर्ष हमें यह अनोखा उपहार देते हैं: यह दिखाते हैं कि हम कितने खोए हुए हैं और हमें कितनी आवश्यकता है कि परमेश्वर हमारी तरफ आए। हम एक अनूठी और असम्भव घटना को देखते हैं। यीशु में, परमेश्वर ने वास्तव में आकाश को फाड़ा और हमारे पास आ गया। मसीह ने अपनी फाड़ दी गई और टूटी हुई देह दे दी ताकि वह हमें अपने प्रेम से अभिभूत कर सके। यीशु में परमेश्वर अति निकट है।
मन:स्थिति बनाने वाला
जब मैं अपने सप्ताह भर के आने-जाने के समय में एक बार ट्रेन के स्टेशन पर प्रतीक्षा कर रहा था, तो कुछ नकारात्मक विचारों से मेरा मस्तिष्क भर गया, जैसे की यात्री ट्रेन में चढ़ने के लिए लाईन में खड़े हैं-ऋण के तनाव में, मुझे कहे गए बुरे शब्द, निसहायता में या परिवार के किसी सदस्य के साथ हाल ही में हुए अन्याय का सामना करते हुए। जब तक ट्रेन आई, मैं बहुत ही विचलित मन:स्थिति में थी।
ट्रेन में, एक दूसरा विचार मेरे मन में आया: परमेश्वर को एक नोट लिखूँ और उसे मेरे दुःख के बारे में बताऊँ। जल्द ही जब मैंने अपने विचारों को अपने जनरल में लिख डाला, तो उसके बाद मैंने अपना फोन निकाला और उसमें स्तुति के गीतों को सुनना शुरू कर दिया। और कुछ ही समय में बुरी मन:स्थिति पूरी तरह से बदल गई।
मुझे नहीं पता था कि मैं भजनकार 94 के नमूने का पालन कर रही थी। भजनकार ने पहले अपनी शिकायतों को उंडेल डाला: “हे पृथ्वी के न्यायी, उठ; और घमण्डियों को बदला दे... कुकर्मियों के विरुद्ध मेरी ओर कौन खड़ा होगा? मेरी ओर से अनर्थकारियों का कौन सामना करेगा?” (भजन संहिता 94:2, 16)। जब उसने परमेश्वर से बात की तो उसने विधवाओं और अनाथों के साथ हुए अन्याय के बारे में कुछ बचाकर नहीं रखा। एकबार जब उसने परमेश्वर को अपना दुःख बता दिया, तो वह भजन स्तुति की ओर चला गया: “परन्तु यहोवा मेरा गढ़, और मेरा परमेश्वर मेरी शरण की चट्टान ठहरा है” (पद 22)।
परमेश्वर हमें अपने दुःख उसे बताने के लिए बुलाता है। वह हमारे भय, उदासी और निस्सहायता को स्तुति में बदल सकता है।
राष्ट्रों में धर्मी
इस्राएल के याद वाशेम के हौलोकास्ट म्यूजियम में मैं और मेरे पति राष्ट्रों में धार्मिक बगीचे में गए, जो उन पुरुष और महिलाओं के सम्मान में है जिन्होंने यहूदियों के सर्वनाश के समय यहूदी लोगों को बचाने के अपने प्राणों की आहूति दी थी । मेमोरियल को देखते हुए हमारी भेंट नीदरलैंड से आए एक समूह से हुई। एक महिला उस बड़े पत्थरों पर अपने दादा-दादी का नाम खोजने के लिए आई थी। युक्ति के साथ हम ने उसके परिवार की कहानी के बारे में पूछा।
रेजिस्टेंस नेटवर्क के सदस्य, उस महिला के दादा-दादी रेव. पीटर और आद्रिआना ने एक यहूदी लड़के को अपने घर में आने दिया और उसे 1943-1945 तक अपने आठ बच्चों में सबसे छोटे बच्चे के रूप में रखे रखा।
उस कहानी से भावुक हो कर हम ने पूछा, “क्या वह लड़का जीवित बचा?” उस समूह से एक वृद्ध भद्रपुरुष आगे आया और बोला, “मैं वह छोटा लड़का हूँ!”
यहूदियों के लिए अनेक लोगों की वीरता मुझे रानी एस्तेर की याद दिलाती है। हो सकता है 350 ईस्वी में रानी ने सोचा कि वह राजा क्षयर्ष के यहूदियों को मार डालने के आदेश से बच सकती थी, क्योंकि उसने अपनी पहचान को छिपाए रखा था। परन्तु वह यह कार्य करने के ली कायल हो गई-यहाँ तक कि मृत्यु तक के जोखिम में-जब उसके चचेरे भाई ने उससे यहूदी विरासत के बारे में शांत न रहने की दोहाई दी क्योंकि उसे “ऐसे समयों के लिए ही” उस पद पर रखा गया था (एस्तेर 4:14)।
हो सकता है हमें कभी भी ऐसा नाटकीय निर्णय लेने के लिए कभी न कहा जाए। परन्तु सम्भव है हमें एक अन्याय के बारे में बोलने या शान्त रहने; मुसीबत में किसी की सहायता करने या छोड़ देने के चुनाव का सामना करना पड़े। परमेश्वर हमें साहस प्रदान करे।
फ्रॉस्टबाइट से मुक्त
सर्दियों के एक दिन मेरे बच्चों ने स्लेज पर जाने की विनती की। तापमान ज़ीरो डिग्री फारनहाईट तक पहुँचा हुआ था। हिम कण हमारी खिडकियों तक फैले हुए थे। मैंने इस पर विचार किया और हाँ कह दिया , परन्तु उन्हें अच्छे से कपड़े पहनने और एकसाथ रहने और हर पन्द्रह मिनट में अन्दर आने के लिए बताया।
प्रेम में मैंने वे नियम बनाए, ताकि मेरे बच्चे फ्रास्टबाइट के बिना मुक्त हो कर खेल सकें। मेरे विचार से भजन 119 का लेखक परमेश्वर के भले मन्तव्य को पहचान गया, जब उसने लगातार दो पदों को लिखा, जो एक दूसरे के विरोधी प्रतीत होते हैं: “मैं तेरी व्यवस्था पर लगातार सदा सर्वदा चलता रहूँगा” और “मैं चौड़े स्थान में चला फिरा करूँगा, क्योंकि मैंने तेरे उपदेशों की सुधि रखी है” (पद 44-45) । यह कैसे है कि भजनकार ने स्वतन्त्रता और व्यवस्था का पालन करने वाले आत्मिक जीवन को एकसाथ मिला दिया?
परमेश्वर के बुद्धिमतापूर्ण निर्देशों का पालन करना हमें उन परिणामों से बचाता है, जो उन चुनावों से आते हैं, जिन्हें बाद में बदलना चाहते हैं। दोषभाव और पीड़ा के बोझ के बिना हम अपने जीवनों का आनन्द उठाने के लिए स्वतन्त्र हैं। परमेश्वर हमें यह करो और यह न करो के निर्देशों के साथ नियन्त्रित नहीं करना चाहता, परन्तु उसके निर्देश दर्शाते हैं कि वह हम से प्रेम करता है।
जब मेरे बच्चे स्लेज चला रहे थे, मैंने उन्हें पहाड़ी से तेज़ी से नीचे आते देखा। मैं उनके हंसी के ठाहकों और उनकी गुलाबी हुई गालों को देखकर मुस्कुराई। मेरे द्वारा दी गई सीमाओं में वे स्वतन्त्र थे। यही अकाट्य विरोधाभास परमेश्वर के साथ हमारे सम्बन्ध में भी है-यह हमें भजनकार के साथ यह कहने की ओर ले कर जाता है, “अपनी आज्ञाओं के पथ में मुझ को चला, क्योंकि मैं उसी से प्रसन्न हूँ” (पद 35)।
एक विशालदर्शी दृश्य
यूएस के प्रथम अफ्रीकी-अमरीकी राष्ट्रपति के अधिष्ठापन के टेलिविज़न कवरेज के दौरान कैमरे ने लगभग दो लाख लोगों की बड़ी भीड़ का एक विशालदर्शी दृश्य प्रस्तुत किया, जो इस ऐतिहासिक घटना के गवाह बनने के लिए एकत्र हुए थे। सीबीएस के समाचार प्रवक्ता बॉब स्किफर ने कहा, “इस शो के सितारे को बहुत बड़ी मात्रा में शूट किया गया है।” इतनी बड़ी भीड़ को और कुछ शूट नहीं कर सकता था, जो लिंकन मेमोरियल से कैपिटल तक फैली हुई थी।
पवित्रशास्त्र हमें इससे भी बड़ी भीड़ की एक झलक प्रदान करता है, जो यीशु में विश्वास के द्वारा एक की गई है: “तुम एक चुना हुआ वंश, और राज-पदधारी याजकों का समाज, और पवित्र लोग, और (परमेश्वर की) निज प्रजा हो, इसलिये कि जिसने तुम्हें अन्धकार में से अपनी अद्भुत ज्योति में बुलाया है, उसके गुण प्रगट करो” (1 पतरस 2:9)।
यह बहुत कम गौरवान्वित लोगों की तस्वीर नहीं, अपितु बचाए गए अनेकों की है जो “हर एक कुल और भाषा और लोग और जाति में से” हैं (प्रकाशितवाक्य 5:9)। आज हम सम्पूर्ण पृथ्वी पर बिखरे हुए हैं, जहाँ अनेक लोग अकेला अनुभव करते हैं और यीशु के साथ सम्बन्ध के कारण दुःख उठाते हैं। परन्तु परमेश्वर के वचन के लैंसों के द्वारा हम विश्वास में अपने भाइयों और बहनों की एक बड़ी तस्वीर को देखते हैं, जो उसका आदर करने के लिए एकसाथ खड़े हैं जिसने हमें छुड़ाया है और अपना निजभाग किया है।
आओ हम उसकी स्तुति में एकसाथ मिल जाएँ जो हमें अन्धकार से ज्योति में ले का आया!
एक बड़ी बात
परिवार के एक सदस्य को दिसम्बर का किराया चुकाने के लिए सहायता की आवश्यकता थी। परन्तु उसके परिवार को वह विनती एक बोझ जैसी प्रतीत हुई—विशेष रूप से वर्ष के अन्त में अपने अनापेक्षित खर्चों के कारण। परन्तु उन्होंने अपनी बचत को निकाला और परमेश्वर की उपलब्धता के लिए धन्यवादी हुए—और अपने सम्बन्धी के आभार से भी आशीषित हुए।
उसने उन्हें एक धन्यवाद का कार्ड प्रदान किया जिसपर आभार के शब्द लिखे हुए थे। “तुम लोगों ने यह फिर से किया...भले कार्य करते हुए, इसे ऐसे निपटा दिया जैसे यह कोई बड़ी बात नहीं थी।”
दूसरों की सहायता करना एक बड़ी बात है, परन्तु परमेश्वर के लिए है। नबी यशायाह ने इस्राएल राष्ट्र का ध्यान इसी ओर किया। लोग उपवास रख रहे थे परन्तु फिर भी लड़ाई झगड़ा कर रहे थे। इसलिए नबी यशायाह ने कहा: “अन्याय से बनाए हुए दासों, और अन्धेर सहनेवालों का जूआ तोड़कर उनको छुड़ा लेना... अपनी रोटी भूखों को बाँट देना, अनाथ और मारे–मारे फिरते हुओं को अपने घर ले आना, किसी को नंगा देखकर वस्त्र पहिनाना, और अपने जातिभाइयों से अपने को न छिपाना?” (यशायाह 58:6-7)।
यशायाह कहता है कि इस प्रकार का बलिदान परमेश्वर के तेज को बांटता है, परन्तु यह हमारे टूटे होने को भी चंगा करता है (पद 8)। जिस प्रकार उस परिवार ने अपने सम्बन्धी की सहायता की, उन्होंने अपने खर्चों की और भी देखा, और देखा कि वे पूरे वर्ष किस प्रकार एक उत्तम प्रबन्ध कर सकते थे। उदार होने के लिए यह परमेश्वर की प्रतिज्ञा थी: “तेरा धर्म तेरे आगे आगे चलेगा, यहोवा का तेज तेरे पीछे रक्षा करते चलेगा।” (पद 8)। अन्त में, अपने सम्बन्धी को देने ने उन्हें और आशिषित किया। और परमेश्वर को? उसने तो पहले ही अपना सबकुछ दे दिया था--सप्रेम।