पुल निर्माण
हमारे पड़ोस में, हमारे घर के चारोंओर कंक्रीट की ऊँची दीवारें हैं l इनमें से कई एक दीवारों के उपरी भाग पर कटीले तार लगे हैं जिनमें विद्युत् प्रवाहित होती है l उद्देश्य? चोरों को दूर रखने के लिए l
हमारे इलाके में अक्सर विद्युत् कटौती की समस्या रहती है l इससे सामने के फाटक की घंटी नहीं बजती है l इसके कारण विद्युत् कटौती के समय कोई भी आगंतुक को चिलचिलाती धुप और मूसलाधार बारिश में बाहर खड़े रहना पड़ सकता है l घंटी बजने के बाद भी, आगंतुक को पहचानना ज़रूरी होता है l हमारी दीवारों का उद्देश्य अच्छा है, किन्तु वे भेदभाव की दीवारें भी बन सकती हैं – बावजूद इसके कि आगंतुक बिना अधिकार के प्रवेश करनेवाला नहीं है l
कूँए पर यीशु से मुलाकात करनेवाली स्त्री भी इस प्रकार के भेदभाव का सामना कर रही थी l यहूदियों को सामरियों से कुछ लेना देना नहीं था l यीशु के उससे पानी मांगने पर, उसने कहा, “तू यहूदी होकर मुझ सामरी से पानी क्यों मांगता है?” (यूहन्ना 4:9) l यीशु से बात करते हुए उसने जीवन परिवर्तन का अनुभव किया जिससे वह और उसके पड़ोसी प्रभावित हो गए (पद.39-42) l यीशु वह पुल/सेतु बन गया जिससे शत्रुता और पक्षपात की दीवारें टूट गयीं l
भेदभाव करने का प्रलोभन वास्तविक है, जिसे हमें अपने जीवनों में पहचानना होगा l जिस प्रकार यीशु ने दिखाया, हम नागरिकता, सामाजिक दर्जा, अथवा लोकमत/प्रसिद्धि से ऊपर उठकर सभी लोगों तक पहुँच सकते हैं l वह पुल/सेतु बनाने(जोड़ने) आया l
तारों के परे
2011 में, द नेशनल एरोनॉटिक्स एंड स्पेस एसोसिएशन ने अन्तरिक्ष खोज(अनुसन्धान) के तीस वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया l उन तीन दशकों में, 355 से अधिक लोग अन्तरिक्ष यानों से अन्तरिक्ष में गए और अंतर्राष्ट्रीय अतरिक्ष स्टेशन स्थापित करने मे सहायता की l पाँच अंतरिक्ष यानों के सेवामुक्त होने के बाद, नासा(NASA) ने अपना ध्यान गुरुत्वकर्षी और चुम्बकीय क्षेत्र के परे अनुसन्धान पर केन्द्रित कर दिया है l
मानव जाति ने सृष्टि/कायनात की विशालता का अध्ययन करने के लिए, बड़ी मात्रा में धन और समय का निवेश किया है, जिसमें कुछ अन्तरिक्ष यात्रियों की मृत्यु भी शामिल है l इसके बावजूद हम परमेश्वर के वैभव/प्रताप का प्रमाण माप नहीं सकते हैं l
जब हम सृष्टि के सृजक और संभालनेवाले के विषय विचार करते हैं जो प्रत्येक तारे का नाम जानता है (यशायाह 40:26), हम भजनकार दाऊद द्वारा उसकी महानता की प्रशंसा करने का कारण समझ सकते हैं (भजन 8:1) l परमेश्वर के हाथों(उँगलियों) के निशान “चंद्रमा और तारागण ... [पर हैं] जो . . .[उसने] नियुक्त किये हैं,” (पद.3) l स्वर्ग और पृथ्वी का सृष्टिकर्ता सबके ऊपर राज्य करता है, लेकिन अपने सभी प्रिय बच्चों के निकट रहकर उनसे घनिष्ठता और व्यक्तिगत रूप से प्यार करता है (पद.4) l परमेश्वर ने, प्रेम में जो संसार हमें सौंपा है उसकी देखभाल करने, उसको जानने के लिए के लिए हमें महान शक्ति, उत्तरदायित्व, और अवसर देता है (पद.5-8) l
जब हम रात में आकाश को तारों से भरा देखते हैं, परमेश्वर हमें उसको उत्साह और दृढ़ता से खोजने के लिए आमंत्रित करता है l वह हमारे होंठों से निकली प्रत्येक प्रार्थना और प्रशंसा को सुनता है l
घर का मार्ग
कभी-कभी जीवन यात्रा इतनी कठिन दिखायी है जिससे हम अभिभूत/पराजित हो जाते हैं, और ऐसा महसूस होता है मानो अंधकार असीमित है l ऐसे ही एक सुबह हमारे पारिवारिक चिंतन के समय, मेरी पत्नी को अपने मनन के समय एक नयी सीख मिली l “मैं सोचती हूँ कि परमेश्वर चाहता है कि जो बातें हम इस अन्धकार में सीख रहें हैं उन्हें ज्योति में न भूलें l”
पौलुस अपनी टीम के साथ एशिया में अत्यधिक कठिनाईयों का वर्णन करते हुए, इन्हीं विचारों को कुरिन्थियों को लिख रहा है (2 कुरिन्थियों 1) l पौलुस चाहता था कि कुरिन्थुस के विश्वासी समझ जाएं कि परमेश्वर किस प्रकार अंधकारमय पलों को भी बदल सकता है l वह कहता है, “हमें शांति मिली है, इसलिए हम भी दूसरों को शांति दे सकते हैं” (पद.4) l पौलुस और उसकी टीम आजमाइशों में सीख रहे थे ताकि वे कुरिन्थियों को उसी प्रकार की कठिनाइयों में शांति और सलाह दे सकें l और यदि हम सुनने को तत्पर हैं तो परमेश्वर हमारे लिए भी ऐसा ही करता है l वह हमें आजमाइशों से सीखी हुई बातों से दूसरों को शांति देने के लिए तैयार करके हमारी आजमाइशों से हमें छुटकारा देगा l
क्या आप वर्तमान में अन्धकार में हैं? पौलुस के शब्दों और अनुभव द्वारा उत्साहित हो जाएं l भरोसा करें कि परमेश्वर आपके क़दमों को दिशा दे रहा है और अपनी सच्चाइयों को आपके हृदय में स्थापित कर रहा है ताकि आप समान स्थितियों में लोगों को उत्साहित कर सकें l आप उस स्थिति से परिचित हैं और आप घर का मार्ग जानते हैं l
यात्रा के लिए सामर्थ्य
मसीही जीवन की एक उत्कृष्ट रूपक कथा, हाइंड्स फीट ऑन हाई प्लेसेस(Hinds Feet on High Places), हबक्कूक 3:19 पर आधारित है l कहानी का अत्यधिक-भयभीत नामक चरित्र चरवाहे के साथ यात्रा पर जाता है l किन्तु बहुत डरा हुआ होने के कारण अत्यधिक-भयभीत चरवाहे से उसे गोद में लेकर चलने का आग्रह करता है l
चरवाहा दयालुता से उसको उत्तर देता है, “बजाए इसके कि तुम खुद ही ऊँचे स्थानों पर चढ़ो मैं स्वयं तुम्हें गोद में उठाकर ले चल सकता था l किन्तु यदि मैंने ऐसा किया होता, तो तुम्हारे पिछले टांग विकसित नहीं होते, और ऐसी स्थिति में तुम मेरे साथ चल नहीं पाते l”
अत्यधिक-भयभीत पुराने नियम के नबी हबक्कूक के प्रश्न दोहराता है (और यदि मैं ईमानदार हूँ तो मेरे भी प्रश्न वही हैं) : “मैं क्यों दुःख सहूँ?” “मेरी यात्रा कठिन क्यों है?”
इस्राएल के निर्वासन में जाने से पहले, हबक्कूक, यहूदा में ई. पूर्व सातवीं शताब्दी के आधिरी भाग में था l नबी ऐसे समाज में खुद को उपस्थित पाया जो सामाजिक अन्याय को अनदेखा करता था और बेबीलोन के आसन्न आक्रमण से अभय था (हबक्कूक 1:2-11) l उसने प्रभु से हस्तक्षेप करके कष्ट को दूर करने को कहा (1:13) l परमेश्वर का उत्तर था कि वह न्याय करेगा किन्तु अपने समय में (2:3) l
विश्वास में, हबक्कूक ने प्रभु पर भरोसा करने का चुनाव किया l यदि कष्ट का अन्त नहीं भी होता है, नबी यह विश्वास करता था कि परमेश्वर निरंतर उसकी सामर्थ्य बना रहेगा l
हम भी सुखकर महसूस कर सकते हैं कि प्रभु हमारी सामर्थ्य है और दुःख सहने में हमारी सहायता करते हुए मसीह के साथ हमारी संगति को गहरा करने में हमारे जीवन की सबसे अधिक चुनौतीपूर्ण यात्राओं का उपयोग करेगा l
ऑफिसर मिग्लियो का हृदय
पीछे वहाँ पुलिस थाने में, थके हुए ऑफिसर मिग्लियो दीवार से टिक गए l एक घरेलु हिंसा के निबटारे में उनकी ड्यूटी का आधा समय निकल चुका था l उस घटना के परिणामस्वरूप एक प्रेमी(बॉयफ्रेंड) हिरासत में, और एक जवान लड़की आपातकालीन कक्ष में थी, और एक विचलित माँ सोच रही थी कि यह सब कैसे हो गया l ऑफिसर को इस मामले को सुलझाने में बहुत समय देना था l
उनके सार्जेंट ने उनसे सहानुभूति से बोला, “विक, आप कुछ नहीं कर सकते थे l” लेकिन उनके शब्द खाली गए l कुछ ऑफिसर अपनी ड्यूटी को ड्यूटी के समय ही पूरा करते हैं किन्तु विक मिग्लियो ऐसा कभी नहीं करते थे l और ऐसे कठिन मामले तो बिल्कुल नहीं l
ऑफिसर मिग्लियो यीशु मसीह की तरस को दर्शाते हैं l मसीह के शिष्य अभी-अभी उसके पास एक प्रश्न लेकर आए थे : “स्वर्ग के राज्य में बड़ा कौन है?” (मत्ती 18:1) l एक बालक को अपने बीच खड़ा करके, उसने अपने शिष्यों से कहा, “जब तक तुम न फिरो और बालकों के समान न बनो, तुम स्वर्ग के राज्य में प्रवेश करने नहीं पाओगे” (पद.3) l तत्पश्चात उसने बच्चों को हानि पहुंचानेवालों को एक सख्त चेतावनी दी (पद.6) l वास्तव में बच्चे यीशु के लिए इतने विशेष थे कि यीशु ने हमसे कहा, “स्वर्ग में उनके दूत मेरे स्वर्गीय पिता का मुँह सदा देखते हैं” (पद.10) l
तब, यह कितना सुखद है, कि बच्चों के लिए यीशु का प्रेम हमारे लिए उसके प्रेम से सम्बंधित है l इसी कारण वह हमें बच्चों की तरह विश्वास रखते हुए अपने पुत्र और पुत्री बनने के लिए बुलाता है l
मदद के लिए पुकार
2016 की लिफ्ट दुर्घटनाओं में पांच की मृत्यु और इक्यावन घायल हुए, न्यूयॉर्क शहर में लोगों की जगुरकता के लिए विज्ञापन निकले कि शांत और सुरक्षित कैसे रहें। दुर्घटना के दौरान खुद को बचाने की कोशिश करने वालों के साथ सबसे बुरा हुआ था। अधिकारियों के अनुसार ऐसे समय में बेहतर होगा, "फोन करें, शांत रहें, और प्रतीक्षा करें।"
खुद को बचाने की कोशिश करने की गलती पर पतरस ने उपदेश दियाI लूका, कुछ उल्लेखनीय घटनाओं का वर्णन करता है जिसमें मसीही विश्वासी अन्य भाषाओं में बोल रहे थे जिन्हें वे नहीं जानते थे (प्रेरितों के काम 2:1-12)। पतरस ने यहूदी भाई-बहनों को समझाया कि यह सब एक प्राचीन भविष्यवाणी (योएल 2:28-32) की पूर्ति थी-आत्मा का उंडेला जाना और उद्धार का दिन। उन लोगों में पवित्र आत्मा का वरदान साक्षात् दिख रहा था जिन्होंने पाप और उसके प्रभाव से छुटकारा पाने के लिए यीशु को पुकाराI तब पतरस ने उन्हें बताया कि उद्धार सभी के लिए उपलब्ध है (21) हमारा परमेश्वर तक पहुंचना संभव है। व्यवस्था के पालन से नहीं वरन यीशु पर भरोसा करने और उन्हें प्रभु और मसीहा मानने द्वारा।
हम खुद को पाप से नहीं बचा सकते। हमारे छुटकारे की एकमात्र आशा है कि हम यीशु को प्रभु और मसीहा मानकर उन पर भरोसा करें।
चट्टान पर बना घर
मेरे मित्र के घर की बैठक धीरे-धीरे ज़मीन में घंस रही थी-दीवारों पर दरारें थीं और अब खिड़की नहीं खुलती थी। उन्हें पता चला कि इस कमरे की नींव नहीं थी। इसे सुधारने के लिए महीनों कार्य चला क्योंकि बिल्डर को नई नींव डालनी पड़ी।
बाद में देखा तो दरारें नहीं थीं और खिड़की खुल रही थी। तब मुझे एक ठोस नींव के मायने समझ आए।
यह हमारे जीवन में भी सत्य है।
यीशु ने उनकी बातों को अनसुना करने की मूर्खता को समझाने के लिए बुद्धिमान और मूर्ख बिल्डर का दृष्टान्त सुनाया (लूका 6:46-49)। उनकी बातें सुनकर पालन करने वाले उस व्यक्ति के समान होते हैं जो एक मजबूत नींव पर घर बनाते हैं। बजाय उसके जो सुनकर उनकी आज्ञाओं की अवहेलना करते हैं। यीशु ने अपने श्रोताओं को आश्वासन दिया कि तूफान आने पर उनका घर खड़ा रहेगा। उनका विश्वास न डिगेगा।
इस बात में हमें शांति मिलती है कि यीशु की बात सुनने और मानने से वह हमारे जीवन की नींव मजबूत बनाते हैं। बाइबिल पढ़ने, प्रार्थना करने और अन्य मसीहियों से सीखने द्वारा हम उनके लिए अपने प्रेम को मजबूत कर सकते हैं। फिर जब तूफान आएगा-चाहे विश्वासघात, पीड़ा या निराशा-हमें भरोसा रहेगा कि हमारी नींव मजबूत है। हमारा उद्धारकर्ता वह सहायता प्रदान करेगा जिसकी हमें जरूरत होगी।
क्या तुम मुझे प्रेम करते हो?
युवावस्था में मैं मां का विद्रोह कर चुकी हूँ। मेरी किशोरावस्था से पहले मेरे पिता की मृत्यु हो गई इसलिए माँ को मेरी परवरिश का बोझ अकेले उठाना पड़ा था।
मुझे लगता था कि माँ नहीं चाहती कि मुझे मज़ा मिले-शायद उन्हें मुझसे प्यार नहीं था-क्योंकि वो हर बात के लिए मुझे मना कर देती थी। अब समझ आता है, मुझसे प्रेम करने के कारण वह उन बातों के लिए मना करती थी जो सही नहीं थी।
बाबुल में बंधुवाई के कुछ समय बाद इस्राएलियों ने परमेश्वर के प्रेम पर सवाल उठाया। परन्तु वास्तव में उनके निरंतर विद्रोह के कारण परमेश्वर ने उन्हें बंधुवाई में भेजा था। फिर, उनके पास परमेश्वर ने मलाकी को भेजा (मलाकी 1:2)। परमेश्वर ने कहा, "मैंने तुमसे प्रेम किया है"। इस्राएल ने संदेहपूर्वक पूछा कि परमेश्वर ने किस बात में उन से प्रेम किया है? मलाकी के माध्यम से परमेश्वर ने उन्हें याद दिलाया कि उन्होंने उस प्रेम को किस तरह दिखाया था: उन्हें एदोमियों के ऊपर चुनकर।
जीवन के मुश्किल मौसम से गुजरने पर हम परमेश्वर के प्रेम पर प्रश्न उठाने को प्रलोभित हो जाते हैं। याद रखें कि परमेश्वर ने हम पर अपना अचूक प्रेम किस प्रकार दर्शाया है। उनकी भलाई पर विचार करके हम देखते हैं कि वह वास्तव में एक प्रेमी पिता हैं।
भरोसा करना सीखना
किशोरावस्था में जब मां मुझे परमेश्वर पर विश्वास करने के लिए प्रोत्साहित करती तो मैं विरोध करता था। वो कहती थीं, "परमेश्वर पर भरोसा रखो, वह तुम्हे संभालेंगे”, "यह इतना सरल नहीं है, माँ!" मैं पलटकर कहताI "परमेश्वर उनकी सहायता करता है जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं!"
ये शब्द, कि "परमेश्वर उनकी सहायता करता है जो स्वयं अपनी सहायता करते हैं" बाइबिल में नहीं हैं इसके बजाए, परमेश्वर का वचन हमें अपनी दैनिक जरूरतों के साथ उन पर निर्भर करना सिखाता है।I यीशु ने कहा, "आकाश के पक्षियों को देखो!...?" (मत्ती 6:26-27)।
हर ऐसी चीज़ जिसका हम आनंद लेते हैं, यहां तक कि जीविका कमाने का सामर्थ जिससे हम“अपनी सहायता" करते हैं – एक ऐसे स्वर्गीय पिता का उपहार हैं जो हमारी समझ से बढ़कर हमसे प्रेम करते हैं और हमें कीमती जानते हैं।
जीवन के अंत के निकट आने पर मानसिक रोग के कारण माँ की सोच-समझने की शक्ति और यादाश्त जाती रही, परन्तु परमेश्वर पर उनका विश्वास बना रहा। कुछ समय हमारे वह घर में रही, तब मैंने करीब से देखा कि परमेश्वर कैसे अप्रत्याशित तरीकों से उनकी ज़रूरतों को पूरा करते थे। चिंता करने की बजाय, उन्होंने स्वयं को उसे सौंप दिया था जिसने उनकी देखभाल करने का वादा किया था। और उन्होंने दिखाया कि वह विश्वासयोग्य हैं।