श्रेणी  |  odb

छिपी हुई सुन्दरता

 

टोबागो द्वीप से दूर कैरेबियन सागर में तैरते समय उसकी सतह के नीचे देखने के लिए स्नोर्कल(snorkel) अर्थात् श्वास लेने के लिए नली की ज़रूरत को समझाने के लिए हमें अपने बच्चों को फुसलाना था l किन्तु गोता लगाकर जब वे जल के ऊपर आए वे बहुत उल्लसित थे, “नीचे बहुत प्रकार की मछलियाँ हैं! वह इतना सुन्दर है जो मैंने कभी नहीं देखा है जैसे रंगीन मछली!”

इसलिए कि, जल का सतह मीठे पानी की झील की तरह ही दिखाई देती थी जैसे हमारे घर के निकट है, हमारे बच्चे सतह के नीचे छिपी खूबसूरती से वंचित रह जाते l

जब नबी शमूएल यिशे के बेटों में से एक बेटे को इस्राएल के अगले राजा के रूप में अभिषेक करने गया, उसने उसके बड़े बेटे, एलीआब के रूप को देखकर प्रभावित हो गया l नबी ने सोचा कि उसको सही व्यक्ति मिल गया है, किन्तु प्रभु ने एलीआब को अस्वीकार कर दिया l परमेश्वर ने शमूएल को याद दिलाया कि उसका “देखना मनुष्य का सा नहीं है; मनुष्य तो बाहर का रूप देखता है, परन्तु यहोवा की दृष्टि मन पर रहती है” (1 शौमेल 16:7) l
इसलिए शमूएल ने पूछा कि क्या उसके और भी बेटे हैं l सबसे छोटा पुत्र उपस्थित नहीं था किन्तु अपने परिवार की भेड़ें चरा रहा था l सबसे छोटा पुत्र, दाऊद को बुलाया गया और प्रभु ने शमूएल से उसे अभिषेक करने को कहा l

अक्सर हम लोगों का बाहरी स्वरुप देखते हैं और हमारे पास हमेशा उनकी भीतरी, और कभी-कभी छिपी, खूबसूरती देखने का समय नहीं होता l जो परमेश्वर के लिए महत्वपूर्ण है उसे हम हमेशा विशेष नहीं मानते हैं l किन्तु यदि हम समय निकालकर सतह के नीचे झांकेंगे, हमें महान ख़जाना मिलेगा l

परमेश्वर की महान सृष्टि

 

हाल ही में जब हम अपने नाती-पोते के साथ एक सैर पर थे, फ्लोरिडा में हमें एक वेब कैमरा की सहायता से एक उकाब के परिवार को देखने का अवसर मिला l भूमि से बहुत ऊपर बने घोंसले में हमने प्रतिदिन माँ, पिता और उकाब के छोटे बच्चे के दैनिक क्रिया पर ध्यान दिया l हर दिन दोनों माता-पिता निरंतर अपने बच्चे की सुरक्षा का ध्यान रखते हुए, उसके पोषण के लिए निकट के नदी से मछली लाकर खिलाया करते थे l
उकाब के परिवार की यह कहानी परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि की एक छवि अर्थात् सृष्टि की छवि का एक विस्तृत वर्णन, परमेश्वर के रचनात्मक हाथों के कार्यों का रूप प्रस्तुत करती है, जिसका वर्णन भजनकार अपने भजन 104 में करता है l

हम कायनात से सम्बंधित परमेश्वर की सृष्टि का प्रताप देखते हैं (पद.2-4) l
हम पृथ्वी की रचना का अनुभव करते हैं अर्थात् जल, पर्वत, घटी (पद.5-9) l
हम परमेश्वर के उपहार की महिमा अर्थात् पशु, पक्षी, और उपज का आनंद लेते हैं (पद.10-18) l
हम परमेश्वर द्वारा रचित प्रकृति के क्रम का अर्थात् सुबह/रात, अन्धकार/ प्रकाश, कार्य/विश्राम पर अचम्भा करते हैं (पद.19-23) l

परमेश्वर ने अपने हाथों से हमारे आनंद और अपनी महिमा के लिए कितनी शानदार सृष्टि रची है! “हे मेरे मन, तू यहोवा को धन्य कह!”(पद.1) l हममें से हर एक उसको सभी बातों के लिए जो उसने हमें दिया है जिसको हम सराह सकते हैं और जिसका हम आनंद ले सकते हैं उसे धन्यवाद दे सकते हैं l

सिद्ध संसार

 

केटी को स्कूल कार्य के रूप में “मेरा सिद्ध संसार” शीर्षक पर एक लेख लिखने को मिला l उसने लिखा : “मेरे सिद्ध संसार में . . . आइसक्रीम मुफ्त मिलता है, लॉलीपॉप हर जगह उपलब्ध है, और कुछ विशेष आकार के बादलों को छोड़कर आसमान हर समय नीला है l उसके बाद उसके लेख में गंभीर बातें थीं l उस संसार में, उसने आगे लिखा, “कोई भी बुरी खबर लेकर घर नहीं आएगा l और उस तरह का खबर लानेवालों की ज़रूरत नहीं है l

 कोई भी बुरी खबर लेकर घर नहीं आएगा l क्या यह खुबसूरत नहीं है? ये शब्द यीशु में हमारे निश्चित आशा की ओर संकेत करते हैं l वह “सब कुछ नया कर रहा है” अर्थात् हमारे संसार को चंगा एवं रूपांतरित कर रहा है (प्रकाशितवाक्य 21:5) l

स्वर्गलोक “कभी नहीं होगा” का स्थान है –  बुराई नहीं होगी, मृत्यु नहीं होगी, विलाप नहीं होगा, पीड़ा नहीं होगी, आँसू नहीं होंगे (पद.4) l यह परमेश्वर के साथ पूर्ण सहभागिता का स्थान है, जिसने अपने प्रेम से विश्वासियों को छुड़ाकर अपना बनाया है (पद.3) l हमारे लिए भविष्य में कितना अद्भुत आनंद है!

हम यहाँ पर वर्तमान में इस पूर्ण सच्चाई की एक झलक प्राप्त कर सकते हैं l जब हम प्रतिदिन परमेश्वर के साथ सहभागिता रखते हैं, हम उसकी उपस्थिति का आनंद अनुभव करते हैं (कुलुस्सियों 1:12-13) l और जब हम पाप के विरुद्ध संघर्ष करते हैं, हम कुछ हद तक, मसीह में, जिसने पाप और मृत्यु को पूरी तौर से पराजित कर दिया हैं, उस विजय का अनुभव कर सकते हैं (2:13-15)

मैं तुम्हें देख सकता हूँ

जब ज़ेवियर दो वर्ष का था, वह जूते की एक छोटी दूकान के गलियारे में दौड़ लगाने लगा l तब मेरे पति, एलन ने कहा, “मैं तुम्हें देख सकता हूँ,” वह जूते के डिब्बों के पीछे छिपकर खिलखिलाता रहा l
कुछ क्षण बाद, मैंने एलन को घबराकर एक गलियारे से दूसरे में भागते देखा l वे ज़ेवियर को पुकार रहे थे l हम दोनों दौड़ कर स्टोर के सामने आ गए l हमारा बेटा अभी भी खिलखिला रहा था, और हमने उसे दूकान के सामने व्यस्त सड़क की ओर भागते देखा l

कुछ ही पलों में, एलन ने उसे गोद में उठा लिया l हमने उसे बाहों में लेकर परमेश्वर का  धन्यवाद किया l हमने सिसकते हुए अपने छोटे बेटे के गोल-मोल गालों को चूमा l एक वर्ष पूर्व ज़ेवियर के जन्म लेने से पहले मैं अपना पहला गर्भ खो चुकी थी l जब परमेश्वर ने हमें एक बेटा के रूप में आशीषित किया, मैं भयभीत माँ हो गयी l जूते की दूकान वाले अनुभव ने यह जता दिया था कि मैं हमेशा अपने बेटे पर दृष्टि रखने या उसे सुरक्षित रखने में असमर्थ हूँ l किन्तु मैंने चिंता और भय से संघर्ष करते समय अपने सर्व उपस्थित परमेश्वर पर जो मेरा सहायक और सुरक्षा देनेवाला है, भरोसा करके शांति का अनुभव किया l

हमारा स्वर्गिक पिता अपने बच्चों पर सदा अपनी दृष्टि रखता है (भजन 121:1-4) l जबकि हम परीक्षा, दुःख, या हानि को रोकने में असमर्थ हैं, हम सदा उपस्थित रहनेवाले और सुरक्षा देनेवाले परमेश्वर पर जो हमारे जीवनों पर दृष्टि रखता है, निश्चित भरोसे के साथ जीवन व्यतीत कर सकते हैं (पद.5-8) l

हम ऐसे दिनों का सामना करेंगे जब हम खुद को खोया हुआ और मजबूर महसूस करेंगे l हम खुद को सामर्थहीन भी महसूस करेंगे जब हम अपनों की सुरक्षा नहीं कर पाएंगे l किन्तु हम सर्वज्ञानी परमेश्वर पर भरोसा कर सकते हैं जो सदैव हम पर अर्थात् अपने प्रिय और अतिप्रिय बच्चों पर दृष्टि रखता है l 

खुल कर जीना

टेक्सास, ऑस्टिन के एक होटल में ठहरे हुए, मैंने अपने कमरे की मेज़ पर एक कार्ड देखी जिसमें लिखा था :
स्वागत है !
हमारी प्रार्थना है कि आपका यहाँ रहना सुखदायक होगा और आपकी यात्रा लाभदायक l
यहोवा आपको आशीष दे और आपकी रक्षा करे; यहोवा आप पर अपने मुख का प्रकाश चमकाए l

इस कार्ड ने मुझे इस होटल का प्रबन्ध करने वाली कंपनी के विषय और भी जानने को विवश किया l इसलिए मैंने उनकी वेबसाइट खोल कर उनकी तहज़ीब, ताकत, और मान्यताएँ को जानना चाहा l मनोहर तरिके से, वे उत्कृष्टता का अनुसरण करते हुए अपने कार्यस्थल में अपने विश्वास से जीते हैं l

उनका यह दर्शन मुझे पतरस के शब्द याद कराते हैं जो उसने एशिया माइनर में बिखरे हुए यीशु के अनुयायियों को लिखी l उसने उनको अपने समुदाय में जहां वे रहते थे मसीह में अपने विश्वास को दर्शाने के लिए उत्साहित किया l धमकियों और सताव के मध्य भी, पतरस ने उनसे अभय रहने को कहा, “पर मसीह को प्रभु जानकार अपने अपने मन में पवित्र समझो l जो कोई तुम से तुम्हारी आशा के विषय में कुछ पूछे, उसे उत्तर देने के लिए सर्वदा तैयार रहो, पर नम्रता और भय के साथ” (1 पतरस 3:15) l
मेरा एक मित्र इसे “ऐसी जीवन शैली जो निरूपण की मांग करता है” संबोधित करता है l

परमेश्वर कैसा है?

एक विशेष अवसर को मनाने के लिए, मेरे पति मुझको एक स्थानीय कला दीर्घा (Art gallery) ले गए और मुझे उपहार देने के लिए मुझसे कोई चित्रकला चुनने को कहा l मैंने वन के बीच से बहती हुई एक छोटी नदी की छोटी चित्रकला का चुनाव किया l उस चित्र में नदी का तल पूरे चित्र फलक(Canvas) पर फैला हुआ था, और इस कारण आकाश का हिस्सा बहुत कम दिखाई दे रहा था l हालाँकि, नदी की प्रतिबिम्ब में सूरज, पेड़ों की चोटियाँ, और धुंधला फ़िज़ा स्पष्ट था l केवल पानी की सतह पर ही आसमान “देखा”  जा सकता था l
आत्मिक भाव में, यीशु उस नदी के समान है l जब हम जानना चाहते हैं कि परमेश्वर कैसा है, हम यीशु की ओर देखते हैं l इब्रानियों का लेखक कहता है कि वह “[परमेश्वर] के तत्व की छाप [है]” (1:3) l यद्यपि हम “परमेश्वर प्रेम है” जैसे बाइबल के प्रत्यक्ष कथनों से परमेश्वर के विषय सच्चाइयाँ सीख सकते हैं, हम परमेश्वर को उन समस्याओं में कार्य करते हुए देखकर  जिनसे हमारा सामना इस संसार में होता है, हम अपनी समझ को और भी गहरा कर सकते हैं l यीशु हमें दिखाने आया कि वह मानव रूप में परमेश्वर है l
परीक्षा में, यीशु ने परमेश्वर की पवित्रता प्रगट किया l आत्मिक अन्धकार का सामना करते हुए, उसने परमेश्वर का अधिकार दर्शाया l लोगों की परेशानियों से जूझते हुए, उसने परमेश्वर की बुद्धिमत्ता दिखाई l अपनी मृत्यु में, उसने परमेश्वर का प्रेम प्रगट किया l
यद्यपि हम परमेश्वर के विषय सब कुछ नहीं समझ सकते हैं – वह असीमित है और हम अपनी सोच में सीमित हैं – हम मसीह को देखकर परमेश्वर के चरित्र के विषय निश्चित हो सकते हैं l

जगत की ज्योति

मेरी पसंदीदा कलाकृति इंगलैंड, ऑक्सफ़ोर्ड में केम्बल कॉलेज चैपल में टंगा हुआ है l चित्रकार, विलियम होलमैन हंट की चित्रकला, द लाइट ऑफ़ द वर्ल्ड , में यीशु को अपने हाथ में लालटेन लिए हुए एक घर के दरवाजे को खटखटाते हुए दिखाया गया है l

दरवाजे में हैंडल का नहीं होना उस चित्रकला का एक लुभावना पक्ष है l जब पूछा गया कि दरवाजा कैसे खोला जाएगा, हंट का कहना था कि वे प्रकाशितवाक्य 3:20 का चित्र दर्शाना चाहते थे, “देख, मैं द्वार पर खड़ा हुआ खटखटाता हूँ; यदि कोई मेरा शब्द सुनकर द्वार खोलेगा, तो मैं उसके पास भीतर [आऊंगा] l”

प्रेरित यूहन्ना के शब्द और चित्रकारी यीशु की दयालुता प्रगट करती है l वह शांति का उपहार देने के लिए हमारी आत्माओं के द्वार पर धीरे-धीरे खटखटाता है l यीशु हमारे प्रतिउत्तर के लिए धीरज रखकर इंतज़ार करता है l वह खुद ही दरवाजा खोलकर हमारे जीवनों में प्रवेश नहीं करता है l वह अपनी इच्छा हमारे जीवनों पर नहीं थोपता है l इसके बदले, वह सभी लोगों को उद्धार का उपहार देता है और हमारे मार्गदर्शन के लिए हमें ज्योति l

जो कोई दरवाजा खोलता है, वह उसके अन्दर आने का वादा करता है l और कोई अनिवार्यता या ज़रूरत नहीं है l

यदि आप यीशु की आवाज़ और आपकी आत्मा के दरवाजे पर धीमी दस्तक सुने तो, उत्साहित हो जाएं कि वह आपके लिए धीरज से इंतज़ार करता है और जब आप उसे अपने जीवन में बुलाएँगे वह प्रवेश करेगा l

प्रेम की तस्वीर

हमारे बच्चे और मैंने एक नया दैनिक अभ्यास आरम्भ किया है l हर दिन सोते समय, हम रंगीन पेंसिल इकठ्ठा करते हैं और एक मोमबत्ती जलाते हैं l  परमेश्वर से हमारे मार्ग को प्रकाशित करने की प्रार्थना करते हुए, हम अपनी दैनिकी खोलकर दो प्रश्नों के उत्तर को चित्रित करते हैं या लिखते हैं : आज मैंने प्रेम कब प्रदर्शित किया? और आज मैंने प्रेम कब प्रगट नहीं किया?

“आरंभ से” ही पड़ोसी से प्रेम करना मसीही जीवन का एक महत्वपूर्ण भाग रहा है (2 यूहन्ना 1:5) l  यूहन्ना अपनी दूसरी पत्री में अपनी मण्डली को यही लिखते हुए परमेश्वर की आज्ञाकारिता में एक दूसरे से प्रेम करने को कहता है (2 यूहन्ना 1:5-6) l यूहना की पत्री में प्रेम उसका एक पसंदीदा विषय है l उसका कहना है कि वास्तविक प्रेम का अभ्यास यह जानने का एक तरीका है कि हम “सत्य के है,” कि हम परमेश्वर की उपस्थिति में जीवन बिताते है (1 यूहन्ना 3:18-19) l जब मेरे बच्चे और मैं विचार करते हैं, हम महसूस करते हैं कि हमारे जीवनों में प्रेम साधारण कार्यों में दिखाई देता है : एक छाता को दूसरे के साथ बांटना, किसी दुखित को उत्साहित करना, या एक पसंदीदा भोजन बनाना l वे क्षण जब हम प्रेम को व्यवहारिक नहीं होने देते हैं : हम व्यर्थ बातें करते हैं, दूसरों के साथ कुछ भी नहीं बांटते हैं, या दूसरों की ज़रूरतों की अवहेलना करके अपनी खुद की इच्छा पूरी करते हैं l

रोज़ रात के समय परस्पर एक दूसरे पर ध्यान देने के द्वारा हम और भी सतर्क रहते हैं, और अपने दैनिक जीवन में पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन की ओर और भी उन्मुख होते हैं l आत्मा की सहायता से, हम प्रेम में चलना सीख रहे हैं (2 यूहन्ना 1:6) l

कूड़ेदान में अंगूठी

कॉलेज में, एक सुबह जब मैं उठा तो अपने रूममेट, कैरोल को घबराया हुआ पाया l उसकी अंगूठी खो गयी थी l हमने सभी जगह खोजा l अगली सुबह हम कूड़ादान में खोज रहे थे l

मैंने कूड़े का एक बैग खोला l “तुम तो इसे खोजने में कितने लवलीन हो!”

“मैं दो सौ डॉलर की अंगूठी खोना नहीं चाहती हूँ!” उसने कहा l

कैरोल की दृढ़ता मुझे स्वर्ग के विषय यीशु का दृष्टान्त याद दिलाता है, जो “खेत में छिपे हुए धन के समान है l जब किसी मनुष्य ने पाया और छिपा दिया, और मारे आनंद के जाकर अपना सब कुछ बेच दिया और उस खेत को मोल ले लिया” (मत्ती 13:44) l कुछ वस्तुओं को खोजने में मेहनत करना फायदेमंद है l

सम्पूर्ण बाइबल में, परमेश्वर प्रतिज्ञा देता है कि उसको खोजनेवाले उसे पाते हैं l व्यवस्थाविवरण में, परमेश्वर इस्राएलियों से कहता है कि वे उसे पाएंगे जब वे अपने पापों से पश्चाताप करके अपने सम्पूर्ण हृदय से उसे खोजेंगे (4:28-29) l 2 इतिहास में, राजा आसा ने इसी प्रकार की प्रतिज्ञा से प्रोत्साहन प्राप्त किया (15:2) l और यिर्मयाह में, परमेश्वर ने यह कहकर कि वह उन्हें दासत्व से वापस लाएगा, निर्वासितों को उसी तरह की प्रतिज्ञा दी (29:13-14) l

यदि हम उसके वचन, और आराधना में, और अपने दैनिक जीवन में परमेश्वर को खोजते हैं, हम उसको पा लेंगे l समय के साथ, हम उसे गहराई से जानने पाएंगे l यह उस क्षण से भी बेहतर होगा जब कैरोल ने कूड़ेदान के अन्दर से अपनी अंगूठी खोज ली l