Month: नवम्बर 2018

Forgiveness-day-1

माफ करने की कला

 
तब वह उठकर, अपने पिता के पास चला वह अभी दूर ही था, कि उसके पिता ने उसे देखकर तरस खाया, और दौड़कर उसे गले लगाया, और बहुत चूमा। - लूका 15:20
 
मैं एक कला प्रदर्शनी देखने गया-एक पिता और उसके दो पुत्र, माफ करने की कला-जो यीशु के उड़ाऊ पुत्र के दृष्टांत पर आधारित थी।…

Our Mission & Vision

हमारा उद्देष्य

हमारा मिशन बाइबिल के जीवन परिवर्तन करनेवाली बुद्धि/ज्ञान को समझने योग्य एवं सुगम्य बनाना है।
 

हमारा दर्शन

हमारा दर्शन है कि सभी देश के लोग मसीह के साथ व्यक्तिगत् सम्बन्ध स्थापित करें, और भी मसीह के समान बनते जाएँ, और उसके परिवार के स्थानीय देह में सेवा करें।

मैं माफ़ी चाहता हूँ

2005में, कॉलिंस के एक रिपोर्ट को झूठा ठहराने के कारण मेगी को चार साल के लिए जेल जाना पड़ा, और मेगी जेल से छूटने के बाद कॉलिंस को ढूंढ़ कर उसे “हानि” पहुँचाने की कसम खायी l अंततः सबकुछ खोने के बाद, मेगी दोषमुक्त हो गया l इस बीच, कॉलिंस के सभी रिपोर्ट झूठे साबित हुए, उसकी नौकरी छूट गयी, उसे भी कई वर्षों के लिए जेल में रहना पड़ा l जेल में रहते हुए दोनों मसीह में विश्वास में आ गए l
2015 में, दोनों ने खुद को एक साथ एक विश्वास-आधारित कंपनी में नौकरी करते हुए पाया l कॉलिंस याद करता है, “[मैंने मेगी से कहा], ‘इमानदारी से, मेरे पास स्पष्ट करने के लिए कुछ भी नहीं है, मैं केवल यह कह सकता हूँ मुझे क्षमा कर दो l” मेगी का उत्तर था, “मैं लगभग यही सुनना चाहता था,” और उसने उसे माफ़ कर दिया l दोनों में मेल हो सका क्योंकि उन्होंने परमेश्वर का अतुलनीय प्रेम और क्षमा का अनुभव किया था, जो हमें “एक दूसरे . . . [को] . . . क्षमा” करने की योग्यता देता है (कुलुस्सियों) 3;13) l
वर्तमान में दोनों घनिष्ठ मित्र हैं l “हमारे पास संसार को बताने के लिए एक संयुक्त मिशन है . . . कि यदि आपको किसी से क्षमा मांगनी है, तो अहंकार छोड़कर उससे क्षमा मांग लें,” कॉलिंस ने कहा l “और यदि आपको किसी के विरुद्ध कोई शिकायत है, कड़वाहट छोड़ दें क्योंकि यह इस आशा से ज़हर पीने के समान है कि यह उन्हें हानि पहुंचेगा l”
परमेश्वर विश्वासियों को शांति और एकता में रहने के लिए बुलाता है l यदि हमारे पास  “किसी पर दोष देने का कोई कारण हो,” हम उसे परमेश्वर के पास ले जाएँ l वह हमें मेल करने में मदद करेगा (पद.13-15; फिलिप्पियों 4:6-7) l

दन्त चिकित्सक के पास पिता

हे मेरे पिता, यदि हो सके तो यह कटोरा मुझ से टल जाए, तौभी जैसा मैं चाहता हूँ वैसा  नहीं, परन्तु जैसा तू चाहता है वैसा ही हो l मत्ती 26:39
मैंने दन्त चिकित्सक के क्लिनिक में पिता के हृदय के विषय किसी गंभीर पाठ की अपेक्षा नहीं की थी-किन्तु मुझे एक मिल गयी l मैं अपने दस वर्षीय बेटे के साथ वहां था l उसके मूंह में दूध के एक दांत की जगह जो अभी टूटा नहीं थे स्थायी दांत निकल रहा था l दूध के दांत को हटना ही था l और कोई तरीका नहीं था l
मेरा बेटा रोते हुए मुझसे आग्रह करने लगा : “पापा, कोई और तरीका नहीं है क्या? क्या हम ठहर नहीं सकते? पापा, कृपया, मैं इस दांत को निकलवाना नहीं चाहता हूँ!” मुझे दुःख हुआ, किन्तु मैंने उससे कहा, “बेटा, इसे निकालना ही होगा l मुझे दुःख है l और कोई रास्ता नहीं है l” मैंने उसके हाथ को पकड़ लिया जब वह छटपटा रहा था और परेशान हो रहा था, और  दांत के डॉक्टर ने उसकी सख्त दाढ़ को निकाल दिया l उस समय मेरे आँखों में भी आँसू थे l मैं उसके दर्द को ले नहीं सकता था; उसके लिए मेरी उपस्थिति ही सबसे अच्छी बात थी l
उस क्षण, मैंने याद किया गतसमनी के बगीचे में यीशु को, वह अपने पिता से कोई और मार्ग बताने के लिए प्रार्थना कर रहा था l अपने पुत्र को ऐसी पीड़ा में देखकर पिता का हृदय किस तरह टूटा होगा! किन्तु अपने लोगों की सेवा करने के लिए और कोई मार्ग नहीं था l
हमारे जीवनों में, हम भी कभी-कभी अपरिहार्य किन्तु पीड़ादायक क्षणों का सामना करते हैं-जैसे मेरे बेटे ने सहा l किन्तु उसकी आत्मा के द्वारा हमारे लिए यीशु के कार्य के कारण, हमारे सबसे अंधकारमय क्षणों में भी हमारा प्रेमी पिता हमेशा हमारे साथ उपस्थित रहता है (मत्ती 28:20) l

बुद्धिमत्ता का श्रोत

एक व्यक्ति ने एक महिला पर मुकद्दमा दायर कर दिया, कि महिला के पास उसका कुत्ता था l कोर्ट में महिला ने कहा, उसका कुत्ता उस व्यक्ति का नहीं हो सकता और जज को बताया उसने उसे कहाँ से ख़रीदा था l वास्तविक मालिक का पता चल गया जब जज ने कोर्ट के कमरे में ही उस कुत्ते को खोल दिया l पूंछ हिलाते हुए, वह अपने मालिक के पास दौड़ गया l
प्राचीन इस्राएल का एक न्यायी, सुलैमान को इस तरह का एक मामला सुलझाना पड़ा l दो महिलाएँ एक ही छोटे लड़के की माँ होने का दावा कर रही थीं l दोनों के दलील को सुनने के बाद, तलवार से उस बच्चे को दो भाग में विभाजित करने को कहा l बच्चे की असली माँ ने अपना बच्चा नहीं मिलने की स्थिति में भी उसकी जान बचाने के उद्देश्य से उसे दूसरी स्त्री को दे देने का आग्रह किया (1 राजा 3:26) l सुलैमान में उसे  बच्चा दे दिया l
न्यायोचित और नैतिक, सही और गलत क्या है का निर्णय करने के लिए बुद्धिमत्ता अनिवार्य है l यदि हम सचमुच बुद्धि का मूल्य समझते हैं, हम सुलेमान की तरह, परमेश्वर से समझने वाला हृदय मांग सकते हैं (पद.9) l परमेश्वर दूसरों की रुचियों के साथ हमारी आवश्यकताओं और इच्छाओं को संतुलित करके हमारे निवेदन का उत्तर दे सकता है l वह दीर्घकालीन(कभी-कभी अनंत)  लाभ के विरुद्ध अल्पकालीन लाभ को तौलने में हमारी मदद भी कर सकता है ताकि हम अपने जीवन जीने में उसका आदर कर सकें l
हमारा परमेश्वर केवल एक सिद्ध बुद्धिमान न्यायी ही नहीं है, किन्तु एक व्यक्तिगत परामर्शदाता भी है जो हमें बड़ी मात्रा में ईश्वरीय बुद्धिमत्ता भी देना चाहता है (याकूब 1:5) l

अब तक राजा

एक न्यूज़ रिपोर्ट ने इसे संबोधित किया “मसीहियों के लिए दशकों में एक सबसे प्राणघातक दिन l” अप्रैल 2017 में रविवारीय आराधकों पर हमले हमारी समझ को चुनौती देते हैं l हम आराधनालय में रक्तपात को समझाने में असफल हैं l किन्तु इस प्रकार की पीड़ा को अच्छी तरह समझने वालों से हम थोड़ी सहायता ले सकते हैं l
आसाप द्वारा भजन 74 लिखने के समय यरूशलेम के अधिकतर लोग निर्वासन में थे या उनकी हत्या कर दी गयी थी l वह अपने हृदय का शोक दर्शाते हुए, कठोर आक्रमणकारियों के हाथों मंदिर का विनाश वर्णन करता है l “तेरे द्रोही तेरे पवित्स्थान के बीच गरजते रहे हैं,” आसाप ने कहा (पद.4) l “उन्होंने तेरे पवित्रस्थान को आग में झोंक दिया है, और तेरे नाम के निवास को गिराकर अशुद्ध कर डाला है” (पद.7) l
फिर भी, भजनकार ने इस भयंकर वास्तविकता के होते हुए खड़े होने के लिए एक स्थान ढूंढ़ लिया अर्थात् वह उत्साह देता है कि हम भी ऐसा कर सकते हैं l “आसाप ने निर्णय किया, “परमेश्वर तो प्राचीनकाल से मेरा राजा है, वह पृथ्वी पर उद्धार के काम करता आया है” (पद.12) l यद्यपि उस क्षण उसका उद्धार उसे अनुपस्थित दिखाई दे रहा था, इस सच्चाई ने आसाप को परमेश्वर के महान सामर्थ्य की प्रशंसा करने में योग्य बनाया l “आसाप ने प्रार्थना की, “अपनी वाचा की सुधि ले; . . . पिसे हुए जन को अपमानित होकर लौटना न पड़े; दीन और दरिद्र लोग तेरे नाम की स्तुति करने पाएँ” (पद.20-21) l
जब न्याय और करुणा अनुपस्थित महसूस हों, परमेश्वर का प्रेम और सामर्थ्य किसी भी तरह से क्षीण नहीं होते हैं l आसाप के साथ, हम भरोसे के साथ कह सकते हैं, “किन्तु परमेश्वर . . . मेरा राजा है l”

अपने नगर को देखें

“हमारी नज़रों से अपना शहर देखें l” डेट्रॉइट, मिशिगन, शहरी विकास समूह ने नगर के भविष्य की उनकी परिकल्पना को इस स्लोगन से आरम्भ किया l किन्तु यह परियोजना अचानक थम गयी जब समूदाय के कुछ सदस्यों ने इस मुहिम में कुछ कमी देखी l नगर की जनसँख्या और श्रमिक संख्या में अधिक बहुमत अफ़्रीकी अमरीकी लोगों का है l इसके बावजूद जो साइन बोर्ड, बैनर, और विज्ञापन तख्त उनकी नज़रों से नगर को देखने का आग्रह कर रहे थे, उनमें सफ़ेद चेहरों की भीड़ में काले लोगों के चेहरे गायब थे l
यीशु के देश के लोगों की दृष्टि में भविष्य के प्रति एक कमज़ोर विषय था l अब्राहम की संतान होने के नाते, वे प्रमुख तौर पर यहूदी लोगों के भविष्य के विषय चिंतित थे l वे सामरियों, रोमी सैनिकों, या उनके पारिवारिक मूल, रब्बियों, या मंदिर उपासना के विषय यीशु की चिंता को समझ नहीं पा रहे थे l
मैं डेट्रॉइट और यरूशलेम के कमज़ोर विषय से सम्बन्ध रखता हूँ l मैं भी केवल उन लोगों को देखने के लिए प्रवृत हूँ जिनके जीवन अनुभव मैं समझ सकता हूँ l इसके बावजूद परमेश्वर हमारी अनेकता के मध्य अपनी एकता ला सकता है l हमारी समझ से अधिक हम एक जैसे हैं l
हमारे परमेश्वर ने संसार के समस्त लोगों तक आशीष पहुँचाने के लिए मरुभूमि में निवास करनेवाला एक खानाबदोश अब्राम को चुना (उत्पत्ति 12:1-3) l यीशु हर एक को जानता और प्रेम करता है जिन्हें हम नहीं जानते या प्रेम करते हैं l मिलकर हम उसके अनुग्रह और करुणा से जीवित हैं जो हमें एक दूसरे को, हमारे नगरों और उसके राज्य को देखने में  सहायता कर सकता है – उसकी नज़रों से l

लोमड़ियों को पकड़ना

समुद्र तट के निकट रहनेवाली एक सहेली से फोन पर बातचीत करते समय, सामुद्रिक चिड़ियों के चीखने की आवाज़ सुनकर मैंने ख़ुशी दर्शायी l उसका उत्तर था, “वे दुष्ट प्राणी हैं,” क्योंकि उसके लिए वे दैनिक कष्ट हैं l लन्दन निवासी होने के कारण, लोमड़ियों के विषय मेरा विचार भी यही है l मैं उनको आकर्षक जानवर नहीं समझती हूँ किन्तु आवारा फिरनेवाले प्राणी जो सुबह के समय बदबूदार गंदगी छोड़ जाते हैं l
लोमड़ियों का वर्णन पुराने नियम की पुस्तक, श्रेष्ठगीत, की प्रेम कविता में है, जो पति-पत्नी के बीच और कुछ एक टिप्पणीकारों के अनुसार परमेश्वर और उसके लोगों के बीच प्रेम को दर्शाता है l दुल्हन छोटी लोमड़ियों के विषय चेतावनी देते हुए, अपने दूल्हे से उन्हें पकड़ने को कहती है (2:15) l दाख़ के अंगूर के लिए भूखीं लोमड़ियाँ, अंगूर के कोमल बेलों को हानि पहुँचा सकती हैं l अपने भावी वैवाहिक जीवन साथ बिताने की चाह रखते हुए, वह नहीं चाहती कोई बुरा व्यक्ति उनके प्रेम के वाचा में बाधा डाले l
किस तरह “लोमड़ियाँ” परमेश्वर के साथ हमारे सम्बन्ध को बाधित कर सकती हैं, जब मैं बहुत सारी इच्छाओं में “हाँ” कहती हूँ, मैं असहाय और अरुचिकर हो जाती हूँ l अथवा जब मैं सम्बन्धात्मक झगड़े का हिस्सा होती हूँ, मैं निराशा या क्रोध की परीक्षा में होती हूँ l जब मैं प्रभु से इन “लोमड़ियों” के प्रभाव को सीमित करने के लिए कहती हूँ – जिन्हें मैंने खुले फाटक से आने दिया है या जो छिपकर घुस गई हैं – मैं उसकी उपस्थिति और मार्गदर्शन को महसूस करके, परमेश्वर में भरोसा और प्रेम पाती हूँ l
आपके साथ क्या ऐसा है? आपको परमेश्वर से दूर रखने वाली किसी भी बात में आप किस प्रकार उससे सहायता प्राप्त कर सकते हैं?

तरस की थकान

एनी फ्रैंक अपने दैनिकी लिखने के लिए लोकप्रिय है जिसमें उसने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान अपने परिवार के छिपने का वर्णन करती है l बाद में जब वह नाज़ी मृत्यु शिविर में कैद कर दी गयी, उनके साथ के लोगों ने कहा, “[उनके लिए] उसके आँसू कभी नहीं सूखते था,” जो उसे “उसके सभी जाननेवालों में धन्य उपस्थिति” बना देती थी l इस कारण, विद्वान केनेथ बेली यह निष्कर्ष निकालते हैं कि एनी “तरस दिखाने में कभी नहीं थकती थी l”
एक टूटे संसार में रहने का एक परिणाम तरस दिखाने में थकान हो सकती है l मानव दुःख का वास्तविक फैलाव हमारे बीच सर्वोत्तम इरादा रखनेवाले को भी स्तब्ध कर देता है l हलाकि, तरस दिखाने में श्रमित होना, यीशु के व्यक्तित्व में नहीं था l मत्ती 9:35-36 कहता है, “यीशु सब नगरों और गाँवों में फिरता रहा और उनके आराधनालयों में उपदेश करता, और राज्य का सुसमाचार प्रचार करता, और हर प्रकार की बिमारी और दुर्बलता को दूर करता रहा l जब उसने भीड़ को देखा तो उसको लोगों पर तरस आया, क्योंकि वे उन भेड़ों के समान जिनका कोई रखवाला न हो, व्याकुल और भटके हुए से थे” (मत्ती 9:35-36) l
हमारा संसार केवल भौतिक आवश्यकताओं से नहीं किन्तु आत्मिक टूटेपन से भी पीड़ित है l यीशु उस आवश्यकता को पूरा करने और अपने अनुयायियों को इस कार्य में मदद करने की चुनौती देने आया (पद.37-38) l उसकी प्रार्थना थी कि पिता हमारे चारोंओर अर्थात् अकेलापन, पाप, और बिमारी से संघर्षरत लोगों की आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए कार्यकर्त्ताओं को खड़ा करेगा l काश पिता दूसरों के लिए हमारे अन्दर इच्छा दे जो उसके हृदय को प्रतिबिंबित करता है l उसकी आत्मा की शक्ति में, हम उसके दयालु फ़िक्र को पीड़ितों पर दर्शा सकते हैं l