भयमुक्त प्रेम
कुछ चित्र इतने शक्तिशाली होते हैं कि उन्हें कभी भुलाया नहीं जा सकता l यह मेरा अनुभव था जब मैंने वेल्स की दिवंगत राजकुमारी डायना की एक प्रसिद्द तस्वीर देखी l पहली नजर में, देखा गया दृश्य नीरस लगता है : गर्मजोशी से मुस्कुराते हुए, राजकुमारी एक अज्ञात आदमी से हाथ मिला रही है l लेकिन यह तस्वीर की कहानी है जो इसे उल्लेखनीय बनाती है l
19 अप्रैल, 1987 को, जब राजकुमारी डायना ने लन्दन मिडिलसेक्स अस्पताल का दौरा किया, यूनाइटेड किंगडम दहशत की लहर में घिरा हुआ था क्योंकि वह एड्स माहामारी का सामना कर रहा था l नहीं जानते हुए कि बिमारी──जो अक्सर भयावह गति से मार रही थी──कैसे फैलती थी, जनता ने कई बार एड्स पीड़ितों को सामाजिक रूप से अछूत की तरह माना l
इसलिए यह एक आश्चर्यजनक क्षण था जब डायना, दास्तानों के बिना हाथों और स्वाभाविक मुस्कान के साथ, उस दिन एड्स रोगी के हाथ को धीरता से हिला रही थी l सम्मान और दयालुता की छवि दुनिया को बीमारी से ग्रस्त लोगों के साथ समान दया और करुणा के साथ व्यवहार करने के लिए प्रेरित करेगी l
तस्वीर मुझे कुछ याद दिलाती है जिसे मैं अक्सर भूल जाता हूँ : स्वतंत्र रूप से और उदारता से दूसरों के लिए यीशु के प्यार की पेशकश करना इसके लायक है l यूहन्ना ने मसीह के आरंभिक विश्वासियों को याद दिलाया कि प्रेम को अपने भय के सामने मुरझाने या छिपने देना वास्तव में “मृत्यु की दशा में” रहना है (1 यूहन्ना 3:14) l और प्रेम जो स्वतंत्र और अभय है और पवित्र आत्मा के स्व-बलिदानी प्रेम से सशक्त है, अपनी सम्पूर्णता में जीवन के पुनरुत्थान का अनुभव करना है (पद.14, 16) l

अच्छी परेशानियाँ
जब जॉन ल्युईस, एक अमेरिकी राजनेता, की मृत्यु 2020 में हुई, तो कई राजनितिक धारणा वाले लोगों ने शोक व्यक्त किया l 1965 में, ल्युईस काले नागरिकों के लिए मताधिकार प्राप्त करने के लिए मार्टिन लूथर किंग जूनियर के साथ जुलूस में शामिल हुए थे l इस जुलूस के दौरान, ल्युईस को सिर में करारी चोट लगी थी, जिसके दाग उनके जीवन भर बने रहे l ल्युईस ने कहा, “जब आप कुछ ऐसा देखते हैं जो सही नहीं है, न्यायसंगत नहीं है, अन्यायपूर्ण है, आपके पास कुछ बोलने के लिए नैतिक जिम्मेदारी है l कुछ करने के लिए l उन्होंने यह भी कहा, “कभी नहीं, कभी भी, अच्छी, अनिवार्य परेशानी में कुछ आवाज़ उठाने में डरना नहीं चाहिए l”
ल्युईस ने समय पर सीखा कि जो सही है उसे करना, सच्चाई में विश्वासयोग्य रहना, “अच्छी” परेशानी उत्पन्न करने की मांग करता है l उन्हें अलोकप्रिय बातें बोलने की ज़रूरत पड़ सकती है l आमोस भविष्यद्वक्ता भी यह जानता था l इस्राएल का पाप और अन्याय देखते हुए, वह चुप नहीं रह सका l आमोस ने निंदा किया कि “तुम धर्मी को सताते और घूस लेते, और फाटक में दरिद्रों का न्याय बिगाड़ते हो” जबकि “मनभावनी दाख की [बारियों]” के साथ “गढ़ें हुए पत्थरों” के घर बनाए हो (आमोस 5:11-12) l कलह से बाहर रहकर अपनी सुरक्षा और आराम बनाए रखने के बजाय, आमोस ने बुराई का नाम लिया l नबी ने अच्छी, अनिवार्य परेशानी उत्पन्न की l
लेकिन इस मुसीबत का उद्देश्य सभी के लिए अच्छा करना था──सभी के लिए न्याय l “न्याय को नदी के समान, और धर्म को महानद के समान बहने दो” (पद.24) l जब हम अच्छी परेशानी(न्याय जिस धार्मिकता, अहिंसक परेशानी की मांग करता है), परिणाम हमेशा भलाई और चंगाई/स्वास्थ्य होता है l

पहले क्षमा करें
हमने अपने आप को “मसीह में बहनें” कहा, लेकिन मेरे गोर दोस्त और मैंने दुश्मनों की तरह व्यवहार करना शुरू कर दिया था l एक सुबह एक कैफ़े नाश्ते पर, हमने अपने अलग-अलग नस्लीय विचारों के बारे में कठोरता से बहस की l फिर हम अलग हो गए, कसम खाकर कि एक दूसरे से कभी नहीं मिलेंगे l एक साल बाद, हालाँकि, हमें उसी सेवा द्वारा काम पर रखा गया था──एक ही विभाग में काम करते हुए, एक दूसरे से फिर से जुड़ने में असमर्थ नहीं थे l सबसे पहले अटपटे ढंग से, हमने मतभिन्नता पर बात की l फिर, समय के साथ, परमेश्वर ने हमें एक-दूसरे से माफ़ी मांगने और चंगा करने और सेवा को अपना सर्वश्रेष्ठ देने में मदद की l
परमेश्वर ने एसाव और उसके जुड़वाँ भाई, याकूब के बीच कड़वे मतभेद को ठीक किया और दोनों के जीवनों को धन्य किया l एक समय चालबाजी करनेवाला, याकूब ने पिता की आशीष छीन लिया था जो एसाव की थी l लेकिन बीस साल बाद, परमेश्वर ने याकूब को अपने देश लौटने के लिए बुलाया l इसलिए, याकूब ने एसाव को खुश करने के लिए बेशुमार तोहफे भेजे l “तब एसाव उससे भेंट करने को दौड़ा, और उसको हृदय से लगाकर, गले से लिपटकर चूमा; फिर वे दोनों रो पड़े” (उत्पत्ति 33:4) l
उनका पुनर्मिलन अपने उपहारों──प्रतिभाओं या धनसंग्रह को परमेश्वर के सामने पेशकश करने से पहले एक भाई या बहन के साथ क्रोध शांत करने के लिए परमेश्वर के आग्रह का एक उत्कृष्ट उदाहरण है (मत्ती 5:23-24) l इसके बजाय, “जाकर पहले अपने भाई से मेल मिलाप कर और तब आकर अपनी भेंट चढ़ा” (पद.24) l याकूब ने एसाव के साथ सामंजस्य स्थापित कर परमेश्वर की आज्ञा मानी, और बाद में परमेश्वर के लिए एक वेदी स्थापित की (उत्पत्ति 33:20) l कितना सुन्दर एक व्यवस्था : पहले क्षमा और सामंजस्य के लिए प्रयास करें l फिर, वह हमें अपनी वेदी पर, स्वीकार करता है l

पुनः उठ खड़े हो
ओलंपिक धावक रेयान हॉल आधी लम्बी दौड़(half merathon) के लिए अमेरिकी रिकॉर्ड-धारक है l उन्होंने 13.1 मील (21 किलोमीटर) की दूरी को इक्यावन मिनट और तैंतालीस सेकंड के उल्लेखनीय समय में पूरा किया, जिससे वह एक घंटे के भीतर दौड़ने वाले पहले अमेरिकी एथलीट बन गए l जबकि हॉल ने रिकॉर्ड-सेटिंग की जीत का जश्न मनाया है, उसने एक दौड़ पूरी नहीं कर पाने की निराशा को भी जाना है l
सफलता और असफलता दोनों का स्वाद चखने के बाद, उसे सँभालने के लिए हॉल यीशु में अपने विश्वास को श्रेय देता है l उसकी पसंददीदा बाइबल पदों में से एक नीतिवचन की किताब से एक उत्साहजनक अनुस्मारक है कि “धर्मी चाहे सात बार गिरे तौभी उठ खड़ा होता है” (24:16) l यह नीतिवचन हमें याद दिलाता है कि धर्मी लोग, जिन पर भरोसा करते हैं और परमेश्वर के साथ एक रिश्ता रखते हैं, वे इसके बावजूद भी परेशानियों और कठियाइयों का अनुभव करेंगे l हालाँकि, जब वे कठिनाई के मध्य भी निरंतर उसे ढूढ़ते है, परमेश्वर उन्हें फिर से उठ कर खड़े होने की ताकत देता है l
क्या आपने हाल ही में एक विनाशकारी निराशा या असफलता का अनुभव किया है और महसूस करते हैं कि आप कभी भी ठीक नहीं होंगे? पवित्रशास्त्र हमें प्रोत्साहित करता है कि हम अपने ताकत पर भरोसा न करें, लेकिन परमेश्वर और उसके वादों पर अपना विश्वास बनाए रखें l जैसा कि हम उस पर भरोसा करते हैं, परमेश्वर की आत्मा हमें इस जीवन में आने वाली हर कठिनाई के लिए ताकत देता है, जो सांसारिक रूप से महत्वपूर्ण संघर्षों से मिलती है (2 कुरिन्थियों 12:9) l

महानता
कथबर्ट उत्तरी इंग्लैंड में अति-प्रिय व्यक्तिव है l सातवीं शताब्दी में इस क्षेत्र के अधिकाँश हिस्से में सुसमाचार प्रचार के लिए जिम्मेदार, कथबर्ट ने सम्राटों को सलाह दिया और राज्य को प्रभावित किया; और उनकी मृत्यु के बाद, उनके आदर में डरहम शहर बनाया गया l लेकिन इन से अधिक तरीकों से कथबर्ट की विरासत महान है l
एक महामारी(plague) द्वारा उस क्षेत्र को उजाड़ने के बाद, कथबर्ट ने एक बार प्रभावित इलाके का दौरा करते हुए दिलासा दी l एक गाँव को छोड़ते समय, उन्होंने पता लगाया कि क्या प्रार्थना करने के लिए कोई बचा है l हाँ एक बची थी──एक महिला, एक बच्चे को पकड़ी हुई l उसने पहले ही एक बेटे को खो दिया था, और जिस बच्चे को पकड़ी हुई थी वह भी मरने पर था l कथबर्ट ने बुखार से पीड़ित बच्चे को अपने बाहों में उठा लिया, उसके लिए प्रार्थना की, और उसके माथे को चूमा l उन्होंने उससे कहा, “डरो मत, क्योंकि तुम्हारे घर में और किसी की भी मृत्यु नही होगी l” बताते हैं कि बच्चा जीवित रहा l
यीशु ने महानता का सबक देने के लिए एक छोटे बच्चे को गोद में लेकर, कहा, “जो कोई मेरे नाम से ऐसे बालकों में से किसी एक को भी ग्रहण करता है, वह मुझे ग्रहण करता है” (मरकुस 9:37) l यहूदी संस्कृत में किसी का “स्वागत” करने का अर्थ उसकी सेवा करना था, जिस प्रकार एक मेजबान एक अतिथि की करता है l चूकिं बच्चे वयस्कों की सेवा करते थे और उनकी सेवा नहीं की जाती थी, इसलिए यह विचार चौंकाने वाला था l यीशु के बोलने का मतलब? सबसे छोटे और निम्नतम की सेवा में ही सच्ची महानता निवास करती है l
सम्राटों का सलाहकार l इतिहास को प्रभावित करने वाला l उसके सम्मान में एक शहर का बनाया जाना l लेकिन शायद स्वर्ग कथबर्ट की विरासत को इस तरह अधिक लिपिबद्ध करता है : एक माँ पर ध्यान दिया गया l एक माथे को चूमा गया l एक नम्र जीवन अपने स्वामी को प्रतिबिंबित किया l