बस एक पल
वैज्ञानिक समय को लेकर काफी नुक्ताचीनी करते हैं। 2016 के अंत में, मैरीलैंड के स्पेस फ्लाइट सेंटर पर लोगों ने साल में एक अतिरिक्त सेकंड जोड़ दिया। यदि आपको वह साल सामान्य से अधिक लम्बा लगा हो, तो आप सही थे।
उन्होंने ऐसा क्यों किया? क्योंकि समय के साथ धरती की परिक्रमा की गति धीमी और साल थोड़े लम्बे होते जाते हैं। अंतरिक्ष में मनुष्य द्वारा भेजी वस्तुओं को ट्रैक करते हुए वैज्ञानिकों को एक-एक मिली सेकंड तक सटीक होना पड़ता है। जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि टकराने से बचाने वाले हमारे कार्यक्रम सही कार्य कर रहे हैं।
हम में से अधिकांश के लिए एक पल पा लेने से या उसे गवा देने से कोई फर्क नहीं पड़ता। लेकिन वचन के अनुसार, हमारा समय, और इसका उपयोग हम कैसे करते हैं यह महत्वपूर्ण है। पौलुस ने 1कुरिन्थियों 7:29 में कहा कि "समय कम है"। परमेश्वर के लिए किए जाने वाले कार्यों के लिए समय सीमित है, इसलिए हमें बुद्धिमानी से इसका उपयोग करना चाहिए। वह कहता है, "और अवसर को..."। (इफिसियों 5:16 इएसवी)
इसका अर्थ यह नहीं कि हमें वैज्ञानिकों के समान प्रत्येक सेकंड गिनना चाहिए, परंतु जब हम जीवन की अनित्य प्रकृति (भजन 39:4) पर विचार करें तो समय के बुद्धिपूर्वक उपयोग की बात याद रखें।
गीत गाने का कारण
13 वर्ष के होने पर हमारे स्कूल के नियमों के अनुसार छात्रों को चार शोधपूर्ण कोर्स लेने अनिवार्य थे जिसमें गृह-अर्थशास्त्र, कला, गायक-वृंद तथा बढ़ईगिरी शामिल थे। गायन की पहली कक्षा में प्रशिक्षक ने छात्रों की आवाज सुनने के लिए एक-एक करके पियानो के पास बुलाया और उनकी स्वर क्षमता के अनुसार कमरे में पंक्तिबद्द किया। अपनी बारी पर मैंने पियानो के साथ गाने की कोशिश की, कई प्रयासों के बाद मुझे किसी पंक्ति की बजाए कोई दूसरी कक्षा लेने के लिए काउंसलिंग ऑफिस भेज दिया गया। मुझे लगा कि मुझे नहीं गाना चाहिए।
मैंने 10 वर्ष तक यह बात मन में रखी जबतक कि मैंने भजन-संहिता 98 ना पढ़ा। लेखक "प्रभु के लिए गाने" (भजन 98:1) के निमंत्रण से इसे आरम्भ करता है। इसका हमारे गाने की क्षमता से कोई सारोकार नहीं। वह अपने सभी बच्चों के धन्यवाद और स्तुति के गीतों से प्रसन्न होते हैं। वह हमें इसलिए गाने को कहता है क्योंकि परमेश्वर ने "अद्भुतकाम किए हैं "(पद 1)।
भजनकार ने अपने गीतों और व्यवहार में आनन्दित होकर परमेश्वर की स्तुति करने के दो कारण दिए: हमारे जीवन में उनके उद्धार का कार्य और उनकी निरंतर रहने वाली विश्वासयोग्यता। परमेश्वर की गायन मंडली में हम में से प्रत्येक के पास उनके अद्भुत कामों के लिए गीत होते हैं।
हमारे तूफानों में
हवा का शोर, बिजली का कौंधना, लहरों का टक्करना। मुझे लगा मैं मरने वाला था। झील में दादा-दादी समेत मछली पकड़ते हुए काफ़ी देर हो चुकी थी। सूरज ढलते ही हमारी नाव के ऊपर से तेज़ हवा गुजरी। नाव ना पलटे इसलिए दादाजी ने मुझे सामने बैठा दिया। दिल डर से भर गया। मैंने प्रार्थना आरंभ कर दी। मैं तब 14 वर्ष का था।
मैंने परमेश्वर से उनके आश्वासन और सुरक्षा को मांगा। तूफान नहीं थमा, परंतु हम किनारे पहुंच गए। परमेश्वर की उपस्थिति की गहन निश्चितता का अनुभव अभूतपूर्व था।
यीशु तूफान से अनभिज्ञ नहीं हैं। मरकुस 4: 35-41 में उन्होंने चेलों को झील के पार जाने को कहा जो जल्द तूफानी और क्रूर होने वाली थी। तूफान ने इन मछुआरों की परीक्षा ली और उन्हें सर्वश्रेष्ठ बना दिया। उन्हें भी लगा कि वे मरने वाले हैं, परंतु यीशु ने तूफान शांत और चेलों के विश्वास को गहरा किया।
हमारे तूफानों में यीशु हमें उनपर भरोसा करने को आमंत्रित करते हैं। कभी-कभी वह अद्भुत रूप से हवाओं और लहरों को, तो कभी हमारे मन को शांत करते हैं। और उनपर भरोसा करने में हमारी सहायता करते हैं। वह हमें इस विश्वास में स्थिर रहने को कहते हैं कि उनके पास लहरों से कहने का सामर्थ है, "शांत हो जाओ"।
जब एक दुख पाता है, सब दुख पाते हैं
मेरे सहकर्मी ने दर्द के कारण अवकाश लेने पर कार्यालय में सब चिंतित थे। उपचार के बाद उसने वापस आकर हमें दर्द की जड़ दिखाई- वह पथरी थी। मुझे वर्षों पूर्व अपने गॉल्ब्लैडर की पथरी याद आ गई जिसका दर्द बेहद कष्टदायी था।
इतनी छोटी चीज़ देह को इतनी पीड़ा दे सकती है? पौलुस ने 1कुरिन्थियों 12:26 में कहा, “इसलिये यदि एक अंग...”। पौलुस ने दुनिया भर के मसीहियों के लिए ‘देह’ का प्रयोग किया है। "परमेश्वर ने देह को...",( पद 24) यहाँ पौलुस मसीह की समस्त देह की बात कर रहे थे-सब मसीही। हम सभी के अलग वरदान और भूमिकाएं हैं। परंतु हम एक देह के अंग हैं इसलिए जब एक दुखी होता है तो सब दुखी होते हैं। जब एक सताव, दुख या परीक्षाओं में पड़ता है, तो हमें भी यूं कष्ट होता है मानो चोट हमें लगी है, दर्द मानो हम अनुभव कर रहे हैं।
मेरे सहकर्मी को वह मदद लेनी पड़ी जिसकी उसे आवश्यकता थी। मसीह की देह में दूसरे का दर्द हममें करुणा जगाता है और कुछ करने के लिए बाध्य करता है। हम प्रार्थना कर सकते हैं, प्रोत्साहन के शब्द कह सकते हैं या उपचार प्रक्रिया में मदद करने के लिए जो संभव हो वह कर सकते हैं। देह इसी प्रकार मिल कर काम करती है।
विश्वास, प्रेम और आशा
मेरी बुआ कैथी ने अपने पिता (मेरे नाना) की घर में 10 वर्ष देखभाल की। जब वह आत्मनिर्भर थे, वह खाना पकाती, कपड़े धोती। उनकी सेहत बिगड़ने पर उन्होंने नर्स की भूमिका निभाई।
उनकी सेवा पौलुस के शब्दों का आधुनिक उदाहरण है, जिसने थिस्सलुनिकियों को लिखा था कि वह उन सब के विषय में परमेश्वर का धन्यवाद...। (1 थिस्सलुनिकियों 1:3)
बुआ ने विश्वास और प्रेम से सेवा की। उनकी प्रतिदिन की, देखभाल उनके इस विश्वास का परिणाम थी कि इस कार्य की बुलाहट परमेश्वर की ओर से थी। उनका श्रम परमेश्वर और उनके पिता के प्रति प्रेम से उत्पन्न हुआ था।
उनमें भी आशा की धीरता थी। मेरे नाना दयालु व्यक्ति थे, परन्तु उनकी हालत बिगड़ते देखकर उन्होंने परिवार और दोस्तों से मिलना-जुलना और कहीं आना जाना कम कर दिया। वह इसलिए दृढ़ बनी रही क्योंकि उन्हें विश्वास था कि परमेश्वर हर दिन उन्हें सामर्थ देंगे, स्वर्ग की उस आशा के साथ जो मेरे दादा की प्रतीक्षा कर रही थी।
चाहे किसी अपने की देखभाल करने की, पड़ोसी की मदद करने की या अपना समय देने की बात हो, धीरज धारण करें क्योंकि आप वह कार्य कर रहे हैं जिसके लिए परमेश्वर ने आपको बुलाया है। आपका श्रम विश्वास, आशा और प्रेम की एक सामर्थपूर्ण गवाही हो सकते हैं।
कब तक?
लुईस कैरल की उत्कृष्ट कृतिएलिस इन वंडरलैंड में, ऐलिस पूछती है, "सदा के लिए कब तक होता है?" व्हाईट रेबिट उत्तर देता है, "कभी-कभी, सिर्फ एक सेकंड ।"
समय का आभास कुछ ऐसा ही था जब मेरे भाई डेविड का अचानक देहांत हो गया। उनकी शोकसभा तक जितने दिन बाकि थे, लंबे लगने लगे जिसने उन्हें खो देने के दुख को और गहरा बना दिया। हर सेकंड सदा चलने वाले युग के समान प्रतीत होता।
एक दूसरे डेविड (राजा दाउद) ने इस भाव को इस गीत में प्रतिध्वनित किया, हे परमेश्वर, तू कब तक? ...? (भजन संहिता 13:1 -2)। सिर्फ दो छंदों में चार बार वह परमेश्वर से पूछते हैं, "कब तक?" कभी-कभी जीवन के दर्द अंतहीन लगने लगते हैं।
हमारे इस दर्द में हमारे स्वर्गीय पिता हमें अपनी उपस्थिति परवाह से भरते हैं। राजा दाऊद के समान हम अपनी दर्द और पीड़ा के साथ सच्चाई से उनके पास जा सकते हैं, यह जानते हुए कि वह हमें कभी न छोडेंगे और त्यागेंगे (इब्रानियों 13:5)। यह भजनकार भी जान गया था, उसने अपने विलाप को विजयी घोषणा में बदल दिया: परन्तु मैं ने तो तेरी...। "(भजन संहिता 13:5)।
उनकी करूणा हमें उन संघर्ष के घड़ियों में थाम लेगी, जो अंतहीन प्रतीत होती हैं। हम उनके उद्धार में आनंदित हो सकते हैं।
केवल प्रार्थना के द्वारा
मेरी मित्र ने कैंसर के उपचार के दौरान मुझे देर रात फ़ोन किया। उसके रुदन से मेरा दिल भर आया और मैंने प्रार्थना की। हे प्रभु, मैं क्या करूं?
उसके रुदन ने मेरा दिल चीर डाला। उसकी पीड़ा को कम या उसकी स्थिति को सही या उसे प्रोत्साहित करने के लिए मैं कुछ ना कर सकी। परंतु मैं जानती थी कि कौन सहायता कर सकते हैं। प्रार्थना में मुश्किल हुई तो मैं फुसफुसाई यीशु, यीशु, यीशु।
उसका रोना सिसकियों में बदल कर धीमी सासों में थम गया। उसके पति ने बताया कि, "वह सो गई है" । "हम कल फोन करेंगे।" फोन रख कर मैंने रोते-रोते प्रार्थना की।
प्रेरित मरकुस ऐसे पिता की कहानी बताता है शैतान के चुंगल में फंसे अपने पुत्र को यीशु के पास लाया (मरकुस 9:17)। अपनी जटिल समस्या के वर्णन केk साथ उसकी प्रार्थना में संदेह था (पद 20-22)। उसने यीशु से उसके अविश्वास का उपाय करने को कहा। यीशु के नियंत्रण लेते ही पिता और पुत्र को मुक्ति और शांति मिली (पद 25-27)।
हमारे प्रियजनों को पीड़ा हो तो स्वभाविक तौर पर हम सही करना चाहते हैं, परंतु केवल प्रभु यीशु ही हमारी सहायता कर सकते हैं। यीशु नाम पुकारने से, वे उनके सामर्थ और उपस्थिति पर विश्वास करने में हमें सक्षम बनाते हैं।
एक विरासत छोड़ना
कुछ साल पहले मैंने अपने बेटों के साथ सलेमोन, इडाहो की "रिवर ऑफ नो रिटर्न" नामक नदी पर स्थिति एक परित्यक्त फार्म में एक सप्ताह बिताया।
एक दिन फार्म पर टहलते समय मैंने एक पुरानी कब्र देखी। वहाँ काठ पर लिखी लिखावट अब मिट चुकी थी। कोई, जो जीवित था और मर गया-अब भुलाया जा चुका है। कब्र की जगह दुखद थी। घर पहुंचकर उस पुराने फार्म के इतिहास के बारे में जानने की मैंने कोशिश की। परन्तु उस व्यक्ति के बारे में कोई जानकारी ना मिली।
कहावत है कि सबसे उत्तम लोगों को लगभग सौ साल याद किया जाता है। हम बाकियों को जल्द भुला दिया जाता है। पिछली पीढ़ियों की यादें हमारी लिखावट के समान जल्द मिटने लगती है। तो भी हमारी विरासत परमेश्वर के परिवार के माध्यम से आगे पारित होती आई है। परमेश्वर से और दूसरों से हम अपने जीवन में कैसे से प्रेम करते हैं, बस वह बाकि रह जाता है। मलाकी 3:16-17 हमें बताता है, जो यहोवा का भय मानते...।
पौलुस ने दाऊद के बारे में कहा कि क्योंकि दाऊद तो...(प्रेरितों के काम 13:36)। उसके समान हम भी परमेश्वर से प्रेम करें और हमारी पीढ़ी में उसकी सेवा करें और स्मरण को उन्हीं पर छोड़ दें। “वे मेरे निज भाग ठहरेंगे,” यहोवा की वाणी है।
दुख में सामर्थ
18 वर्षीय सैमी के यीशु को उद्धारकर्ता के रूप में ग्रहण करने पर, उसके परिवार ने उसे त्याग दिया क्योंकि उनकी परंपरा भिन्न विश्वास की थी। परंतु मसीही समुदाय ने उसे प्रोत्साहन दिया, और शिक्षा के लिए आर्थिक समर्थन देकर उसका स्वागत किया। उसकी गवाही के एक पत्रिका में प्रकाशित होने पर उसका सताव और बढ़ गया।
परंतु जब संभव होता सैमी परिवार से मिलने जाता और अपने पिता से बातें करता। हालाँकि, उसके भाई-बहन उसे परिवार के मामलों में भाग लेने से रोकते। पिता की बीमारी पर उसने परिवार की नाराजगी को नज़रअंदाज़ करके चंगाई के लिए प्रार्थनाएं करते हुए, पिता की सेवा की। जब परमेश्वर ने उन्हें चंगा कर दिया तो परिवार सैमी के प्रति स्नेह दिखाने लगा। समय के साथ उसकी प्रेममई गवाही से उसके प्रति उनका व्यवहार नर्म हुआ-और कुछ परिजन यीशु के बारे में सुनने के लिए इच्छुक हो गए।
मसीह का अनुसरण करने का हमारा निर्णय कठिनाइयों ला सकता है। पतरस ने लिखा, “क्योंकि यदि कोई...(1 पतरस 2:19)। विश्वास के कारण जब हम दुख उठाते हैं तो हम ऐसा इसलिए करते हैं, “क्योंकि मसीह भी...(पद 21)।
जब दूसरों ने उनका अपमान किया, “वह गाली सुन कर...(पद 23)। दुख उठाने का हमारा उदाहरण यीशु हैं। सामर्थ पाने के लिए हम उनके पास आ सकते हैं।