एक सेवक का दिल बढ़ाना
ऑफिस से घर लौटने पर मेरा "अन्य" काम करने का समय हो गया था। मेरी पत्नी और बच्चों के अभिवादन जल्द ही इन अनुरोधों में बदल गए, "डैड, रात के खाने के लिए क्या है"? "डैड, मेरे लिए आप पानी ला देंगे"? "डैड, हम फुटबॉल खेलें"?
मैं कुछ देर सुस्ताना चाहता था। उस समय परिवार की जरूरतों को पूरा करने का मन नहीं था। तभी मैंने एक थैंक-यू कार्ड देखा जो चर्च में मेरी पत्नी को किसी से मिला था। उसमें पानी का एक बर्तन, एक तौलिया, और मैले सैंडल का चित्र बना हुआ था और नीचे लूका 22:27 पद लिखा हुआ था:“मैं तुम्हारे बीच में सेवक की नाईं हूं।”
यीशु खोए हुओं को ढूंढ़ने... (लूका 19:10)। यदि यीशु अपने शिष्यों के लिए ऐसे काम करने को तैयार थे, जो सेवक करते थे-जैसे शिष्यों के पैर धोना जो निसन्देह रूप से मैले रहे होंगे (यूहन्ना 13:1-17)-तो मैं बिना शिकायत अपने बेटे को पानी लाकर दे सकता था। मुझे अहसास हुआ कि अपने परिवारवालों के अनुरोध मानना केवल एक दायित्व ही नहीं हैं लेकिन यीशु का सेवक का दिल और प्रेम दिखाने का अवसर भी हैं। उस व्यक्ति के समान बनने का अवसर जिसने हमारे लिए अपने जीवन को दे दिया और अपने शिष्यों की सेवा की।
यादों के पत्थर
कई बार फेसबुक मुझे "यादें" दिखाता है-जिन्हें कभी मैंने उस दिन पोस्ट किया था। जहाँ अपने भाई के विवाह की या मेरी दादी के साथ खेलते हुए मेरी बेटी के चित्र, मेरे होठों पर मुस्कुराहट ले आती हैं, वहां कुछ भावुक यादें भी हैं-अपने बहनोई की कीमोथेरेपी पर या मां की ब्रेन सर्जरी के बाद लिखे नोट को पढना। ये परिस्थितियां मुझे परमेश्वर की विश्वासयोग्य उपस्थिति की याद दिलाती हैं और प्रार्थना करने और आभारी होने के लिए बाध्य करती हैं।
परमेश्वर के किए कामों को भूलने की प्रवृति हम सभी में होती है। हमें याद दिलाए जाने की जरूरत होती है। परमेश्वर के लोगों की उनके नए घर ले जाने के लिए जब यहोशू ने अगुवाई की, तब उन्हें यरदन नदी को पार करना पड़ा (यहोशू 3:15-16)। परमेश्वर ने पानी दो भाग... (पद 17)। इस आश्चर्यक्रम का स्मारक बनाने के लिए...(4:3, 6-7)। ताकि जब दूसरे पूछें कि उन पत्थरों का क्या अर्थ है, तो परमेश्वर के लोग उस दिन की कहानी सुनाकर बताएं कि परमेश्वर ने उस दिन क्या किया था।
परमेश्वर की विश्वासयोगिता के भौतिक स्मारक उन पर वर्तमान-और भविष्य के प्रति भरोसा करने की हमें याद दिलाते हैं।
लेखा रद्द करने वाला
अपना मेडिकल बिल देख कर मेरे आंसू निकल आए। पति लम्बे समय से बेरोजगार थे। यदि मासिक किश्त दें तोभी आधा बिल चुकाने में भी कई साल लगेंगे। अपनी स्थिति स्पष्ट करके भुगतान की योजना का आग्रह करने के लिए डॉक्टर के ऑफिस में फ़ोन करने से पहले मैंने एक प्रार्थना की। थोड़ा समय बाद, रिसेप्शनिस्ट ने मुझे बताया कि डॉक्टर ने हमारे बिल को ख़ारिज कर दिया है।
मैंने सिसकते हुए उसका आभार पूर्वक धन्यवाद किया। फ़ोन रखते हुए, मैंने परमेश्वर की प्रशंसा की। मैंने उस बिल को रख लिया, यह याद दिलाने के लिए नहीं कि मुझे कितना चुकाना था, परन्तु उसे जो परमेश्वर ने किया था।
परमेश्वर ने मेरे पापों के लेखे को रद्द किया है। वचन आश्वासन देता है कि यहोवा “दयालु, अनुग्रहकारी” और “अति करूणामय” हैं, “हमारे पापों के अनुसार हम से व्यवहार नहीं करता” (भजन 103:8,10)। जब मनफिराव करके हम मसीह को अपना उद्धारकर्ता ग्रहण करते हैं तब “उदयाचल अस्ताचल से जितनी दूर है, वह हमारे अपराधों को हमसे उतनी दूर करते हैं।” (पद 12) उनका बलिदान ने उस लेखे को मिटाया है जो हमें चुकाना था। पूर्णतः।
अपनी समर्पित स्तुति और आभार युक्त प्रेम देकर, हम उनके लिए जीवन जी सकते हैं और दूसरों के साथ भी उसे बाँट सकते हैं।
एक नाम
क्लियोपेट्रा, गैलीलियो, शेक्सपियर, एल्विस, पेले। ये सब इतने प्रसिद्ध हैं कि पहचान करने के लिए केवल उनका नाम ही काफ़ी है। जो वो थे और जो उन्होंने किया उसके कारण वे इतिहास में प्रमुख रहे हैं। परन्तु एक और नाम है जो इनसे या किसी अन्य नाम से ऊपर है!
परमेश्वर पुत्र के संसार में जन्म लेने से पहले ही स्वर्गदूत ने मरियम और यूसुफ को उसका नाम यीशु रखने को कहा था “क्योंकि वह अपने लोगों का उनके पापों से उद्धार करेगा”। (मत्ती 1:21) और “वह...परमप्रधान का पुत्र कहलाएगा। (लूका 1:32) यीशु एक प्रसिद्द व्यक्ति के रूप में नहीं बल्कि एक दास के रूप में आए थे जिसने अपने आप को विनम्र किया और क्रूस पर aaअपनी जान दी जिससे जो कोई उन्हें ग्रहण करे वह उसे क्षमा करके पाप के बन्धन से मुक्त कर सकें।
प्रेरित पौलुस ने लिखा, “इस कारण परमेश्वर ने उस को अति महान भी किया, और उस को वह नाम दिया जो सब नामों में श्रेष्ठ है...”। (फिलिप्पियों 2:9-11)
हमारे सबसे बड़े आनन्द और सबसे बड़ी जरूरत में, जिस नाम में हमें शरण मिलती है, वह नाम यीशु है। वह हमें कभी नहीं छोड़ेगा, और उसका प्रेम कभी ना हारेगा।
द गिफ्ट ऑफ द मैगी
एक विवाहित जोड़े के पास धन से ज्यादा प्रेम था। क्रिसमस पर दोनों ऐसा उपहार ढूंडने लगे जो दूसरे के प्रति उनके प्रेम को दिखा सके। जिम को पुरखों से विरासत में मिली घड़ी के लिए एक प्लैटिनम चैन खरीदने के लिए डेला ने अपने घुटने तक के लम्बे बाल बेच दिए। जिम ने, डेला के बालों के लिए कंघे का एक महंगा सेट खरीदने के लिए उसी घड़ी को बेच दिया।
लेखक ओ हेनरी ने इस कहानी को द गिफ्ट ऑफ द मैगी नाम दिया जो बताती है कि भले ही उनके उपहार नाकाम रहे और क्रिसमस पर मूर्ख लगे, पर उनके प्रेम ने उन्हें सर्वश्रेष्ठ उपहार देने वाले बुद्धिमानों के बीच खड़ा कर दिया। पहली क्रिसमस की कहानी के बुद्धिमान भी कुछ लोगों को मूर्ख लगे होंगे, क्योंकि वे बेतलेहेम में सोने, लोहबान और गन्धरस की भेंट के साथ पहुंचे थे (मत्ती 2:11)। वे नहीं जानते थे कि यहूदियों के नए जन्में राजा के बारे में पूछताछ करना यरूशलेम की शांति भंग कर देगा। (पद 2)
मेगी की योजनाओं का परिणाम भी उम्मीद अनुसार न था। पर उन्होंने वह दिया जिसे धन नहीं खरीद सकता। वे उपहार लेके आए फिर उसकी आराधना करने लगे जो अंततः उनके लिए-और हमारे लिए, सबसे बड़ा प्रेममयी बलिदान देगा।
ठीक अपने पिता के समान
मैंने अपने पिता के पुराने जूतों को जिन्हें वे घुडसवारी के समय पहनते थे, अपने अध्ययन कक्ष के फर्श पर रखा है, जो मुझे ऱोज याद दिलाते हैं कि वे कैसे व्यक्ति थे।
अन्य कामों के साथ, वह घोड़ों को पालते और उन्हें प्रशिक्षित करते थे। उन्हें काम करते देख मुझे अच्छा लगता और आश्चर्य होता था कि वह कैसे इतना कुछ कर लेते थे। बचपन में, मैं उन्हीं के समान बनना चाहता था। अब मैं अस्सी वर्ष से ऊपर हूँ, और उनके जूते भरने के लिए मेरे पाँव आज भी बहुत छोटे हैं।
अब मेरे पिता स्वर्ग में हैं, परन्तु मुझे एक और पिता का अनुसरण करना है। उनकी भलाई और प्रेम की सुगन्ध से भर कर मैं उनके समान बनना चाहता हूँ। परन्तु भरे जाने के लिए उनके जूते मेरे लिए बहुत बड़े हैं।
प्रेरित पतरस ने यह कहा: “अब परमेश्वर...आप ही तुम्हें सिद्ध और स्थिर और बलवन्त करेगा।” (1 पतरस 5:10)।
हमारी कमियां, हमें हमारे स्वर्गीय पिता के समान बनने से रोकती हैं। इस जीवन में तो हम उनके स्वरूप को इतनी अच्छी तरह से नहीं दिखा पाते, परन्तु स्वर्ग में हमारे पाप और दुःख नहीं रहेंगे और तब हम उनके तेजस्वी रूप को पूर्णतः प्रकट कर सकेंगे! “परमेश्वर का सच्चा अनुग्रह” यही है। (पद 12)
विशेषज्ञों का कहना क्या है?
बोस्टन ग्लोब पत्रिका में जैफ जैकोबी “विशेषज्ञों द्वारा बातों का निराशाजनक, रूप से गलत अनुमान लगाने की विलक्षण क्षमता” के उपर व्यंग लिखते हैं। हाल के इतिहास से स्पष्ट है कि वे सही कहते हैं। विशेषज्ञों की अनगिनत भविष्यवाणियाँ बुरी तरह चूक गईं हैं। स्पष्ट है प्रतिभाशाली व्यक्ति की भी सीमा होती है।
केवल एक ही हैं जो पूरी तरह से विश्वास योग्य है, और कुछ तथाकथित विशेषज्ञों के लिए उनके पास कठोर शब्द थे, उस समय के धार्मिक अगुवे जो दावा करते थे कि उन्हें सत्य की पहचान थी। इन विद्वानों और धर्मशास्त्रियों की धारणा थी कि वे जानते हैं कि जब उद्धारकर्ता मसीहा आएगा तो वो कैसा होगा।
यीशु ने उन्हें चेताया कि किस तरह वे लोग विषय की तह तक नहीं पहुँच पा रहे थे, “तुम पवित्र शास्त्र में ढूंढ़ते हो...यह पवित्र शास्त्र वही है, जो मेरी गवाही देता है”। (यूहन्ना 5:39-40)
नए वर्ष से पहले, हमें भयभीत से लेकर बेहद आशावादी बनाने वाली सभी प्रकार की भविष्यवाणियां सुनने को मिल जाएंगीं। उनमें से बहुत सी बड़े विश्वास और अधिकार से कही जाएंगी। चिंतित मत होना। हमारा विश्वास एक में ही रहता है जो बाइबिल का मुख्य आधार है। हम सभी पर और हमारे भविष्य पर उसकी एक मज़बूत पकड़ है।
मंत्रमुग्ध करने वाली महिमा
यूरोप की यात्रा में लैंडस्केप को रंग-बिरंगा बनाने वाले ग्रैंड कैथेड्रल्स का दौरा करने का अपना आनंद है। ये गगनचुम्बी भव्य इमारतें अद्भुत रूप से सुन्दर हैं। इन भवनों की वास्तुकला और यहाँ प्रयुक्त प्रतीकात्मकता विस्मय और वैभव का मंत्रमुग्ध करने वाला अनुभव देती हैं।
परमेश्वर की महिमा और उनके महानतम वैभव को प्रदर्शन करने वाले इन भवनों को देखकर, मैं सोचने लगा कि परमेश्वर की भव्यता का अनुभव हम अपने मन और मस्तिष्क में किस प्रकार पुनः संभव बना सकते हैं जिससे उनकी महानता हमें स्मरण रहे। हमें मानव निर्मित भव्य इमारतों से बड़कर उस महान रचना पर विचार करना चाहिए जिसे परमेश्वर ने रचा है। तारों से टिमटिमाती रात परमेश्वर के सामर्थ को दिखाती है, जिन्होंने अपने शब्द से सृष्टि की रचना की। किसी नवजात शिशु को बाँहों में उठाकर जीवन के चमत्कार के लिए परमेश्वर का धन्यवाद करें। अलास्का के बर्फ़ीले पहाड़ों या विशालकाय अटलांटिक महासागर को देखें जो लाखों प्राणियों से भरे हैं जिनकी रचना परमेश्वर ने की है और ईकोसिस्टम चलाने वाली शक्ति की कल्पना करें।
ऊँची इमारतों से आकाश की ऊंचाईयां छूना गलत नहीं है, परन्तु हमारी सच्ची प्रशंसा परमेश्वर के लिए होनी चाहिए, जैसे लिखा है, "हे यहोवा! महिमा, पराक्रम, शोभा, सामर्थ्य और वैभव, तेरे ही हैं।" (1 इतिहास 29:11)
दौड़ ज़ारी रखना
अपने कार्यालय की इमारत के पास कंक्रीट स्लैब की दरार में से एक खूबसूरत फूल को पनपते देखकर मैं आश्चर्यचकित था। विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इस नन्हें पौधे को पैर जमाने का स्थान मिल गया था। सूखी दरार में जड़े जमाकर यह फल-फूल रहा था। मैंने देखा कि पौधे के ठीक ऊपर लगे एक एयर कंडीशनिंग यूनिट से पूरे दिन उसपरर पानी गिरता रहता है। विपरीत परिवेश में भी पौधे को उस पानी से वह मदद मिल गई थी जिसकी उसे आवश्यकता थी।
मसीही जीवन में कभी-कभी विकास कठिन लगता है परन्तु जब हम मसीह के साथ दृढ़ता से बने रहेंगे तब बाधाएं पार करना आसन होगा। चाहे हमारी परिस्थितियां प्रतिकूल हों और हम निराश हों तो भी परमेश्वर के साथ अपने संबंध में आगे बढ़ते रहने से हम उस पौधे के समान फलवंत हो सकते हैं। गंभीर कठिनाइयों और चुनौतियों का सामना होने पर भी प्रेरित पौलुस ने हार नहीं मानी (2 कुरिन्थियों 11:23-27)। “मैं...उस पदार्थ को पकड़ने के लिये दौड़ता हूं...,” उसने लिखा “मैं निशाने की ओर दौड़ा चला जाता हूं, ताकि इनाम पाऊं।” (फिलिप्पियों 3:12,14)
पौलुस ने अनुभव किया कि वह प्रभु में...सब कुछ कर सकते हैं (4:13), हम भी उनकी मदद से दौड़ जारी रख सकते हैं जो हमें सामर्थ देते हैं।