घमण्ड के साथ समस्या
अपने जीवनकाल में एक असाधारण स्तर की प्रसिद्धि या प्रतिष्ठा प्राप्त कर लेने वाले लोगों को "अपने समय में एक लेजेंड" कहा जाता है। प्रोफेशनल बेसबॉल खेल चुके एक मित्र कहते हैं कि वह खेल की दुनिया में ऐसे बहुत से लोगों से मिले हैं, जो केवल "अपनी सोच में एक लेजेंड थे।" घमण्ड का तरीका है कि हम जैसे अपने आप को देखते हैं उसे तोड़-मरोड़ कर रख दे, जबकि विनम्रता एक यथार्थवादी दृष्टिकोण प्रदान करती है।
" विनाश से पहिले गर्व,…।" (नीतिवचन 16:18)। आत्म-महत्व के दर्पण में खुद को देखने से एक विकृत छवि ही प्रतिबिम्बित होती है। आत्म-उन्नयन हमें गिरावट की स्थिति में खड़ा कर देता है।
सच्ची विनम्रता जो परमेश्वर से आती है घमण्ड का विष हरण करती है। “… दीन लोगों के संग नम्र भाव से रहना उत्तम है” (पद 19)।
यीशु ने चेलों से कहा, “जो कोई तुम में बड़ा होना चाहे, वह तुम्हारा सेवक बने...” (मत्ती 20:26–28)।
उपलब्धि और सफलता के लिए सम्मान प्राप्त करने में कुछ गलत नहीं है। चुनौती उस पर ध्यान बनाए रखने की है जो हमें उनके पीछे होने के लिए बुलाते हैं और यह कहते हैं, “क्योंकि मैं नम्र और मन में दीन हूं: और तुम अपने मन में विश्राम पाओगे” (11:29)।
प्रत्येक व्यक्ति के लिए कम्बल
लाइनस वैन पेल्ट, पीनट्स कार्टून के मुख्य पात्र है। विनोदपूर्ण और बुद्धिमान परन्तु असुरक्षित, लाइनस के पास सदा एक सुरक्षा कम्बल रहता था। हम इससे परिचित हैं। हमारे भी अपने डर और अपनी असुरक्षाएं होती हैं।
जब यीशु पकड़ लिए गए, तब पतरस ने महायाजक के आंगन तक प्रभु का पीछा करके साहस का प्रदर्शन तो किया। परन्तु भयभीत होकर अपनी पहचान छुपाने के लिए झूठ बोला (यूहन्ना 18:15–26) उसने वह लज्जात्मक शब्द कहे जो उसके प्रभु का इन्कार करते थे। परन्तु यीशु ने उसे प्रेम करना नहीं छोड़ा और अंततः उसे सम्भाल लिया (यूहन्ना 21:15–19 देखें)। इसी पतरस ने 1 पतरस 4:8 में हमारे संबंधों में प्रेम के महत्व पर इन शब्दों के साथ जोर दिया, "सब से ऊपर"। "एक-दूसरे को प्यार करें, क्योंकि प्रेम कई पापों को ढांप देता है"।
आपको कभी वैसे "कम्बल" की आवश्यकता हुई है? मुझे हुई! अपराध और शर्म के कारण "ढांपे" जाने की मुझे आवश्यकता थी जैसे यीशु ने लज्जा-भरे लोगों को ढांप दिया था।
यीशु के अनुयायियों के लिए, प्रेम वह कम्बल है जिसे दूसरों को आराम और उद्धार पाने के लिए अनुग्रहपूर्वक और साहसपूर्वक दिया जाना चाहिए। ऐसे महान प्रेम को प्राप्त करने वालों के रूप में, हम उसी प्रेम को देने वाले बनें।
समस्याओं के समय में स्तुति करना
यह "कैंसर" है। जब माँ ने कहा तो मन पक्का करने की कोशिश पर भी मेरे आंसू छलक आए। उन शब्दों को कोई नहीं सुनना चाहेगा। कैंसर के साथ माँ का तीसरी बार सामना था। उनकी बाँह के नीचे एक घातक ट्यूमर हुआ था।
अय्यूब के समान। जिसने अपनी संतान, संपत्ति और स्वास्थ्य खो दिए थे। परन्तु यह सुनने के बाद, वह “भूमि पर गिरा और दण्डवत् किया"। परमेश्वर को शाप देने की सलाह पर उसने कहा, “क्या हम जो परमेश्वर के हाथ से सुख लेते हैं, दुःख न लें” (2:10)? यद्यपि अय्यूब ने बाद में शिकायत की, पर अंततः स्वीकार किया कि परमेश्वर कभी बदले नहीं थे। अय्यूब जानता था कि परमेश्वर अब भी उसके साथ थे और वह अब भी उसकी परवाह करते थे।
“समस्याओं में प्रशंसा करने की हममें से अधिकांश की प्रारंभिक प्रतिक्रिया नहीं होती। कभी तो भय या क्रोध से हम बौखला उठते हैं। परन्तु माँ की प्रतिक्रिया देखकर मुझे याद आया कि परमेश्वर अब भी उपस्थित हैं, अभी भी अच्छे हैं। वह कठिन समय से हमारी मदद करेंगे।
उनकी आवाज को सुनना
मैं ऊंचा सुनता हूं-"एक कान से बहरा और दूसरे से नहीं सुन सकता" जैसा मेरे पिता कहा करते थे। इसलिए मैं कान में हिअरिंग एड पहनता हूं। लेकिन आस-पास बहुत शोर हो, तो यह हर ध्वनी पकड़ लेता है और मैं अपने सामने वाले व्यक्ति को नहीं सुन पाता।
हमारी संस्कृति के साथ भी ऐसा है: ध्वनियों की कर्कशता में परमेश्वर का धीमा शब्द डूब सकता है।
मेरे हियरिंग एड में एक ऐसी सेटिंग है जो आस पास की ध्वनियों को काटकर मुझे केवल वह आवाज सुनाती है जिसे मैं सुनना चाहता हूं। अपने चारों ओर शोर होते हुए भी यदि हम मन शांत करें और सुनें, तो परमेश्वर का “दबा हुआ धीमा शब्द” सुन सकेंगे (1 राजा 19:11–12)।
वह प्रतिदिन हमें पास बुला कर हमसे बात करते हैं, हमारी व्याकुलताओं और लालसाओं में, हमारे गहन दुःख में और हमारे अधूरेपन में और हमारे सबसे बड़े आनंद व असंतोष में।
मुख्य रुप से परमेश्वर हमसे अपने वचन द्वारा बात करते हैं। बाइबिल पड़ कर आप उनके शब्द को सुन सकेंगे। वह आपसे प्रेम करते हैं, जितना आप समझ पाएं उससे भी अधिक, और उनकी इच्छा यही है कि आप वह सुने जो वे आपसे कहना चाहते हैं।
यह अद्भुत है!
अपनी प्राकृतिक अवस्था में हम सभी उससे से रहित हैं। (रोमियो 3:23)
यीशु उस का प्रकाश था (इब्रानियों 1:3), और जो उन्हें जानते थे, उन्होंने उस की महिमा देखी (यूहन्ना 1:14)।
उस तेज ने तम्बू को भर दिया (निर्गमन 40:34–35), और इस्राएली उसकी अगुवाई में आगे बढ़ते थे।
और प्रतिज्ञा की गई है कि अंत समय में स्वर्ग उससे उज्जवलित होगा, ऐसा उजाला कि चान्द और सूरज के उजाले का प्रयोजन ना होगा (प्रकाशित वाक्य 21:23)।
उपर दिए सभी वाक्यों में "उस" शब्द क्या दिखता है? "उस" परमेश्वर की महिमा दिखता है। और वे अद्भुत हैं!
बाइबिल बताती है कि हम इस पृथ्वी पर, जिसे उन्होंने बनाया है, हमारे निवास करने के कारण हम परमेश्वर की भव्य महिमा की झलक पा सकते हैं। परमेश्वर की महिमा का वर्णन उनके अस्तित्व के बाहरी प्रदर्शन के रूप में किया गया है। अपनी उपस्थिति और कार्यों को वे ब्रह्मांड के वैभव, हमारे उद्धार की विशालता और हमारे जीवन में पवित्र आत्मा की उपस्थिति में प्रकट करते हैं। परमेश्वर की महानता के प्रमाण के लिए-उनकी महिमा की खोज करें। आप इसे प्रकृति की सुंदरता, एक शिशु की हंसी, और दूसरों के प्यार में देख सकेंगे। परमेश्वर उनकी महिमा से पृथ्वी को भरते हैं।
जीवन कैसे परिवर्तित करें
रॉक एंड रोल के सुप्रसिद्ध कलाकार ब्रूस स्प्रिंगस्टीन के कठिन बचपन में और डिप्रेशन से लगतार संघर्ष करने में सगींत कलाकारों के काम ने ही मदद की थी। अपने कार्य का अभिप्राय उन्हें उसी सत्य से मिला, जिसका अनुभव उन्होंने स्वयं किया था, “एक उचित गीत से आप किसी के जीवन को तीन मिनट में परिवर्तित कर सकते हैं”।
ध्यान से चुने हुए शब्द हमें आशा देते हैं, यहां तक कि जीवन बदल सकते हैं। जैसे किसी शिक्षक के शब्द जो संसार को देखने का हमारा नजरिया बदलते हैं, आत्मविश्वास बढ़ाने वाले उत्साह वर्धक शब्द, कठिन समय में मित्र के नम्र शब्द जो हमें सम्भालते हैं।
वचन की पुस्तक शब्दों को खज़ाना समझने और बुद्धिमानी से उनका उपयोग करने के हमारे उत्तरदायित्व पर बल देती है। हमारे शब्दों में मृत्यु और जीवन के परिणाम हो सकते हैं, (18:21 नीति)। शब्दों से हम किसी की आत्मा को दु:खित कर सकते हैं, या दूसरों के मनोबल को बढ़ा कर उन्हें मजबूत कर सकते हैं (15:4)।
प्रभावशाली संगीत बनाने की क्षमता हम सब में नहीं है। परन्तु अपनी बातों के माध्यम से दूसरों की सेवा करने के लिए हम परमेश्वर की बुद्धि मांग सकते हैं (भजन 141:3)। किसी के जीवन को कुछ शब्दों से बदलने के लिए परमेश्वर हमारा उपयोग कर सकते हैं।
अवसर की ओर कदम बढ़ाना
आम व्यक्तियों के समान, पर्याप्त व्यायाम के लिए मैं भी संघर्ष करता हूँ। हाल ही में मुझे एक पेडोमीटर मिला जो कदमों को गिनता है। अब सोफे से उठना कुछ और कदम चलने का अवसर लगता है। ऐसे काम करना जैसे बच्चे को पानी ला देना आदि ऐसे अवसर होते हैं जो बड़े लक्ष्य की ओर बढ़ने में मेरी सहायता करते हैं। उस अर्थ में, मेरे पैडोमीटर ने मेरी धारणा और मेरी प्रेरणा बदल दिए हैं। अब जितना संभव हो मैं कुछ और कदम चलने के अवसर ढूंढता हूँ।
हमारा मसीही जीवन क्या कुछ ऐसा ही नहीं है। प्रत्येक दिन में लोगों की सेवा करने और उनसे बातचीत करने के अवसर होते हैं, जैसा पौलुस कुलुस्सियों 4:5 में समझाते हैं। परंतु क्या मैं साधारण प्रतीत होने वाली बातचीत में उत्साहजनक व्यक्ति होने के अवसर पर ध्यान देता हूँ? चाहे परिवार से, सहकर्मियों से या किराने की दुकान में काम करने वाले एक क्लर्क से हो, प्रत्येक बातचीत में परमेश्वर कार्य कर सकते हैं-भले ही वह “छोटी सी” प्रतीत होने वाली बात क्यों न हो, जैसे किसी रेस्तरां में वेटर से उसका हाल चाल पूछना।
जब हम उन अवसरों के प्रति सचेत होंगे जिन्हें वे हमारी ओर भेजते हैं, तो कौन जाने कि परमेश्वर उन क्षणों में कैसे काम करेंगे।
राष्ट्रीय खजाना
एक विज्ञापनदाता के दाऊद की माइकल एंजेलो द्वारा निर्मित प्रसिद्ध संगमरमर की मूर्ति के चित्र में परिवर्तन कर देने से इटली की सरकार और गैलरी के अधिकारियों ने आपत्ति की। एक अधिकारी ने कहा, कंधे पर गुलेल के स्थान पर राइफल के साथ दाऊद का चित्रण करना मूर्ति पर हथौड़ा मारने जैसा है या उससे भी बदतर।
यरूशलेम में, चरवाहा-गीतकार और सैनिक-राजा दाऊद से इजरायल की प्रियत्तम यादें और आशाएं जुड़ीं थी। भविष्यद्वक्ताओं के अनुसार दाऊद का वंशज इजरायल के दुश्मनों को हराएगा। सदियों बाद भीड़ ने यीशु का स्वागत दाऊद की सन्तान के रूप में (मत्ती 21:6-9), यह सोच के किया कि वह उनपर राज करने वाली रोमी सत्ता का नाश करेंगे। परन्तु यीशु ने तो अपने पिता के घर को प्रार्थनाघर के रूप में पुनर्स्थापित करने के लिए वहां लेन देन करने वालों की चौकियां उलट दीं। इज़राइल के अगुवे क्रोधित थे। यह वह मसीहा और दाऊद का पुत्र नहीं था, जिसे वे खोज रहे थे। इसलिए बिना जाने कि वे क्या कर हैं, उन्होंने रोमी शासकों से इज़राइल की सच्ची महिमा के हाथों और पैरों के लिए हथौड़ा मांग लिया। यीशु ने खुद को क्रूस पर उठाए जाने दिया और अपने शत्रुओं पर प्रेम से विजय पाई और सुसमाचार के प्रसार के लिए जाति-जाति की संतानों को नियुक्त किया।
बर्फ़ के समान सफेद
पिछले दिसंबर माह में, मेरा परिवार और मैं पहाड़ों पर गए थे। पहली बार हम सभी ने इतनी शानदार बर्फ़ को देखा। सफेद लबादे से ढके खेतों को ध्यान से देखते हुए, मेरे पति ने यशायाह से उद्धृत किया, "तुम्हारे पाप चाहे लाल रंग के हों तौभी हिम की नाईं उजले हो जाएंगे" (यशायाह 1:18)।
हमारी तीन साल की बेटी ने पूछा, "क्या रंग लाल बुरा होता है?" वह जानती है कि पाप उन बातों को कहते हैं जिन्हें परमेश्वर पसंद नहीं करते हैं, परन्तु यह पद रंगों के बारे में बात नहीं है। यहाँ चमकदार लाल रंग का वर्णन है जो एक छोटे से कीड़े के अंडे से निकलता है। कपड़े को इस लाली में दो बार रंगा जाता हैa जिससे रंग पक्का हो जाए। न तो बारिश से और न ही धोकर इसे हटाया जा सके। पाप इसी के समान होता है। कोई मानव प्रयास इसे दूर नहीं कर सकता है। इसकी जड़ मन में होती है।
पाप को दिल से केवल परमेश्वर निकाल सकते हैं। जब हम वचन का अनुसरण करते हैं "मन फिराओ...कि तुम्हारे पाप मिट जाएं" (प्रेरितों के काम 3:19), परमेश्वर हमें क्षमा कर एक नया जीवन देते हैं। केवल यीशु के बलिदान के माध्यम से-एक निष्पाप दिल पाते हैं। क्या ही अद्भुत उपहार है!