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एक साल में बाइबिल

2002 में मेरी बहन मार्था और उसके पति, जिम की एक दुर्घटना में मृत्यु के कुछ महीनों बाद एक मित्र ने मुझे हमारे चर्च में “दुःख द्वारा उन्नति” कार्यशाला में बुलाया l मैं अपनी इच्छा के विरुद्ध पहले सत्र में गया किन्तु वापस जाने का मन न था l मैंने परवाह करनेवाले एक सामाजिक समूह को परमेश्वर और दूसरों की सहायता से अपने जीवनों में एक ख़ास हानि का विवेकपूर्ण हल निकालने का प्रयास करते हुए देखकर चकित हुआ l मैं बार-बार परस्पर दुःख बांटने की प्रक्रिया द्वारा स्वीकार किये जाने और शांति के लिए वहाँ गया l 

किसी प्रिय अथवा मित्र की अचानक मृत्यु की तरह, आरंभिक कलीसिया को यीशु के लिए सक्रिय, स्तिफनुस की मृत्यु, द्वारा आघात और दुःख पहुँचा (प्रेरितों 7:57-60) l सताव के मध्य, “भक्तों ने स्तिफनुस को कब्र में रखा और उसके लिए बड़ा विलाप किया” (8:2) l इन्होंने एक साथ दो काम किये : उन्होंने स्तिफनुस को दफ़न किया, जो अंतिम कार्य और हानि थी l और सभों ने विलाप किया, जो दुःख का सामूहिक प्रदर्शन था l

यीशु के अनुयायी के रूप में हमें अपनी हानि के लिए अकेले विलाप नहीं करना है l  हम सच्चाई और प्रेम के साथ दुखित लोगों तक पहुँच सकते हैं और दीनता में हमारे साथ खड़े होनेवालों को स्वीकार सकते हैं l

एक साथ विलाप करते हुए, हम यीशु द्वारा उस समझ और शांति में उन्नति कर सकते हैं जो हमारे गंभीर दुखों से परिचित है l

परमेश्वर को दे दें

किशोरावस्था में, बड़ी चुनौतियों अथवा जोखिम भरे बड़े फैसलों से परेशान होने पर, मेरी माँ ने दृष्टिकोण प्राप्त करने हेतु उन्हें लिख लेने के फाएदे सिखाए l किसी ख़ास अध्ययन अथवा कार्य के विषय अनिश्चित होने पर अथवा वयस्क होने की अवस्था की डरावनी सच्चाइयों से कैसे निपटा जाए, मैंने अपनी माँ की तरह उनकी मूल सच्चाइयों, उसके उपयुक्त परिणामों के साथ संभव कार्यवाही योजनाओं को लिखने की आदत बनायी l उस पृष्ठ पर मन लगाते हुए, मैं परेशानी से कदम पीछे हटाते हुए उन्हें अपनी भावनाओं की बजाए सच्चाइयों पर आधारित होकर देख पाती थी l

जिस तरह कागज़ पर विचारों को अंकित करने से मुझे नए दृष्टिकोण मिलते थे, प्रार्थना में परमेश्वर के सामने मन लगाने से उसका दृष्टिकोण प्राप्त होता है और हम उसकी सामर्थ्य याद कर पाते हैं l मनहूस शत्रु से एक चुनौतीपूर्ण पत्र प्राप्त करने के बाद राजा हिजकिय्याह ने ऐसा ही किया l अशुरों ने अनेक राष्ट्रों की तरह यरूशलेम को भी नाश करने की धमकी दी l हिजकिय्याह ने पत्र को प्रभु के आगे फैलाकर प्रार्थनापूर्वक अपने लोगों के छुटकारे के लिए प्रार्थना की ताकि संसार पहचान जाए कि  वह “केवल यहोवा” है (2 राजा 19:19) l

घबराहट, डर, या गहरी जानकारी वाली स्थितियों का सामना करते हुए हमें अपनी योग्यता से बढ़कर चाहिए l हिजकिय्याह की तरह प्रभु के पास जाएँ l उसकी तरह हम भी परमेश्वर के समक्ष अपनी समस्या रखकर अपने बेचैन हृदयों के लिए उसके मार्गदर्शन पर भरोसा रखें l

स्वर्ग की झलक

मैं अपने अध्ययन कमरे की खुली खिड़की के बाहर चिड़ियों को चहकते और पेड़ों पर मंद-मंद हवा चलते देखती हूँ l मेरे पड़ोसी के जोते हुए खेत में पुआल के ढेर, और चमकदार नीले आसमान के विपरीत सफ़ेद बादल दिखाई देते हैं l

मेरे घर के निकट निरंतर यातायात का शोर और मेरे पीठ में हलके दर्द को छोड़ दें तो मैं स्वर्ग का अल्प आनंद उठा रही हूँ l मैं स्वर्ग  शब्द को हलके तौर पर उपयोग कर रही हूँ क्योंकि यद्यपि हमारा संसार एक समय पूरी तौर से अच्छा था, अब नहीं है l मानवता के पापी होने के बाद, हमें अदन के बाग़ से निष्कासित कर दिया गया और भूमि को “श्रापित” किया गया (देखें उत्प.3) l उस समय से पृथ्वी और उसमें की हर वस्तु “पतन के आधीन” है l” पीड़ा, बीमारी, और हमारी मृत्यु मानव के पाप में गिरने का परिणाम है (रोमियों 8:18-23) l

फिर भी परमेश्वर सब कुछ नया कर रहा है l एक दिन उसका निवास उसके लोगों के बीच और पुनःस्थापित संसार में होगा-“एक नया आकाश और एक नयी पृथ्वी”-जहाँ मृत्यु न रहेगी, और न शोक, न विलाप, न पीड़ा रहेगी; पहली बातें जाती रहीं” (प्रकाशित 21:1-4) l हम उस दिन तक चमकीले रंग और कभी-कभी अपने संसार के विस्तृत अद्भुत खूबसूरती का आनंद ले सकते हैं, जो आनेवाले “स्वर्ग” की एक झलक है l

सामर्थ्य में प्रवेश

क्या हमें साँप दिखेंगे?

हमारा पड़ोसी युवक, एलन घर के निकट एक नदी के किनारे हमारे साथ पैदल घूमते हुए पूछा l

“हमने पहले कभी नहीं देखा, मैंने कहा, “किन्तु देख सकते हैं l इसलिए परमेश्वर से सुरक्षा मांगे l” हम प्रार्थना करके आगे चले l

कुछ मिनट बाद मेरी पत्नी, केरी, अचानक पीछे हटी, और सड़क पर एक कुंडलित जहरीले साँप से बची l हमने उसको जाने दिया l तब हमने परमेश्वर को धन्यवाद दिया l मुझे विश्वास है कि एलन के प्रश्न द्वारा, परमेश्वर ने हमें इस घटना के लिए तैयार किया था, और प्रार्थना उसके शुभ देखभाल का हिस्सा था l

उस शाम हमारा खतरे से बचना दाऊद के शब्द याद दिलाता है : “यहोवा और उसकी सामर्थ्य की खोज करो; उसके दर्शन के लिए लगातार खोज करो” (1 इतिहास 16:11) l यह सलाह यरूशलेम में वाचा के संदूक की वापसी का उत्सव मनानेवाले भजन का हिस्सा है l यह सम्पूर्ण इतिहास में परमेश्वर के लोगों का उनके संघर्ष में परमेश्वर की विश्वासयोग्यता स्मरण करने, उनको उसे सदा उसकी प्रशंसा करने और उसे “पुकारने” को कहता है (पद.35) l

“[परमेश्वर] के दर्शन के लिए .... खोज करो” का अर्थ क्या है? अर्थात् सबसे साधारण क्षणों में भी उसको खोजो l कभी-कभी प्रार्थनाओं के उत्तर हमारे मांगने से भिन्न होते हैं, किन्तु परमेश्वर हमेशा विश्वासयोग्य है l हमारा अच्छा चरवाहा मार्गदर्शन करते हुए हमें अपनी करुणा, सामर्थ्य, और प्रेम में रखेगा l हम उस पर निर्भर रहें l

अमूल्य आराधना

मैं लेखन को परमेश्वर की आराधना और सेवा मानती हूँ, जबकि इससे अधिक कि अब मेरा स्वास्थ्य मेरा चलना-फिरना सीमित कर दिया है l इसलिए, जब एक परिचित को मेरा लेखन महत्वहीन लगा, मैं निराश हुयी l मैंने परमेश्वर के लिए अपने छोटे भेंट के महत्त्व पर शक किया l

प्रार्थना, वचन अध्ययन, और मेरे पति, परिवार, और मित्रों के प्रोत्साहन द्वारा ही, प्रभु पुष्टि करता है कि केवल वह-दूसरों के दृष्टिकोण नहीं-एक उपासक के रूप में हमारी मंशा और उसके प्रति हमारी भेंट का मूल्य तय करता है l मैंने सर्वोत्तम दाता से अपने कौशल को विकसित करने और प्राप्त श्रोतों को बांटने हेतु अवसर देने को कहा l

यीशु ने हमारे देने के मापदंड का विरोध किया (मरकुस 12:41-44) l जब धनी लोग मंदिर के खजाने में बहुत अधिक पैसे डाल रहे थे, एक विधवा ने “दो दमड़ियाँ ...डाली” (पद.42) l प्रभु ने उसके दान को श्रेष्ठ माना (पद.43), यद्यपि उसका सहयोग उसके चारों ओर के लोगों से महत्वहीन दिखाई दिया (पद.44) l

यद्यपि विधवा की कहानी पैसे के दान पर केन्द्रित है, देने का हर कार्य आराधना और प्रेममय आज्ञाकारिता का एक ढंग हो सकता है l विधवा की तरह, हम परमेश्वर के दिए हुए में से जानबूझकर, उदार, और बलिदानी दान द्वारा उसका आदर करते हैं l हम परमेश्वर के प्रेम से प्रेरित हृदयों द्वारा अपना सर्वोत्तम समय, और योग्यताएँ देकर, उसे अमूल्य आराधना का भेंट चढ़ाते हैं l

अकेले न दौड़ें

मेरे पति जैक, अपनी दौड़ में 26 में से 25 वें मील पर थे जब उनकी शक्ति जवाब दे गयी l

 

यह उनकी प्रथम लम्बी दौड़ थी, और वे अकेले दौड़ रहे थे l एक सहायता के स्थान पर वे पानी के लिए रूककर, थकित महसूस करते हुए मार्ग के किनारे घास पर बैठ गए l कुछ क्षण बाद, वे उठ नहीं सके l उन्होंने दौड़ से हटना चाहा किन्तु उसी समय  केन्टकी की दो अधेड़ स्कूल शिक्षिकाएं उसके निकट आयीं l यद्यपि अपरिचित, उन्होंने जैक को अपने साथ दौड़ने को कहा l अचानक उनकी शक्ति लौट आई l जैक ने उठकर उन दोनों के साथ दौड़कर दौड़ पूरी की l

जैक को उत्साहित करनेवाली दो महिलाएँ मुझे, एक महत्वपूर्ण समय में, इस्राएलियों के अगुआ, मूसा की सहायता करनेवाले दो मित्र, हारून और हूर की याद दिलाते हैं (निर्ग. 17:8-13) l इस्रालियों पर आक्रमण हो रहे थे l मूसा के अपने हाथ खड़े रखने पर ही वे जीतते थे (पद.11) l इसलिए मूसा के हाथ थकने पर, हारून और हूर उसके दोनों ओर खड़े होकर सूर्यास्त तक उसकी बाहें ऊपर की ओर थामें रहे (पद.12) l

परमेश्वर के पीछे चलना अकेले का प्रयास नहीं है l उसने हमें जीवन की दौड़ अकेले दौड़ने हेतु नहीं बुलाया है l सहयोगी हमें परमेश्वर की इच्छापूर्ति में कठिनाई के समय भी धीरज धरने में सहायता करते हैं l

परमेश्वर, आपका अनुसरण करने में उत्साहित करनेवाले संबंधों के लिए धन्यवाद l दूसरों के लिए भी, शक्ति का श्रोत बनने में आप मेरी मदद करें l

परमेश्वर कुछ नया करता है

हाल ही में एक समूह में भागीदारी करते समय अगुए ने प्रश्न किया “क्या परमेश्वर आपके जीवन में कुछ नया कर रहा है?” कुछ कठिन स्थितियों से जूझ रही मेरी सहेली, मिंडी ने उत्तर दिया l उसने अपने वृद्ध माता-पिता के साथ धीरज, अपने अस्वस्थ पति के लिए ताकत, और बच्चों की समझ शक्ति और नाती-पोतों के विषय बताया जिन्होंने यीशु को उद्धारकर्ता ग्रहण नहीं किया था l तब उसने हमारी स्वाभाविक सोच के विपरीत गहरी पहुँच वाली टिप्पणी की : “मैं मानती हूँ परमेश्वर मेरे प्रेम करने और अवसर की सीमा को बढ़ाने का नया कार्य कर रहा है l”

थिस्सलुनीके के नए विश्वासियों के लिए पौलुस की प्रार्थना यहाँ ठीक बैठती है : “तुम्हारा प्रेम भी आपस में और सब मनुष्यों के साथ बढ़े, और उन्नति करता जाए” (1 थिस्स. 3:12) l उसने उनको यीशु के विषय शिक्षा दी थी किन्तु दंगे के कारण उसे अचानक जाना पड़ा था (प्रेरितों 17:1-9) l अब अपनी पत्री में वह उनको अपने विश्वास में स्थिर रहने को कहा (1 थिस्स. 3:7-8) l और उसकी प्रार्थना थी कि प्रभु उनके प्रेम को सबके लिए बढ़ाए l

कठिनाईयों में हम अक्सर शिकायत करते और पूछते हैं, “क्यों?  या सोचते है, मैं क्यों?  ऐसी स्थितियों में दूसरों से प्रेम करने के नए अवसरों के लिए प्रभु से प्रेम को बढ़ाने और सहायता करने की ताकत मांगे l

परमेश्वर की चमकदार सुन्दरता

ऑस्ट्रेलिया के पूर्वी तट के निकट लार्ड हॉवे द्वीप सफ़ेद रेत और अत्यधिक साफ़ जल का एक छोटा स्वर्ग है l कुछ वर्ष पहले जब मैं वहाँ गया था, तो वहां की खूबसूरती से चकित हुआ l यहाँ पर, कोई भी व्यक्ति बड़े कछुओं और मछलियों के संग झिलमिलाते जल में बिना किसी मेहनत के तैर सकता है, और विशेष प्रजाति की समुद्री मछलियाँ भी अपने रंग बिखेरती हुईं निकट तैरती होती हैं l उस झील में मैंने मूंगा-चट्टानों के बीच चमकदार नारंगी रंग की और ख़ास प्रजाति की मछलियाँ देखीं जो मेरे हाथों को छूना चाहती थीं l इस खूबसूरती से अभिभूत होकर मैं परमेश्वर की प्रशंसा करने के लिए विवश हुआ l

प्रेरित पौलुस मेरे प्रतिउत्तर के लिए कारण देता है l सृष्टि अपनी सबसे खूबसूरत अवस्था में परमेश्वर के स्वभाव की कुछ बातें प्रगट करती है (रोमी,1:20) l लार्ड हॉवे द्वीप ने मुझे परमेश्वर की सामर्थ्य और खूबसूरती की झलक दे रही थी l

जब परमेश्वर से नबी यहेजकेल का सामना हुआ, उसे एक प्रकाशमान व्यक्ति दिखाई दिया जो नीलम से बने सिंहासन पर बैठा था और वह सिंहासन सुहावने रंगों से घिरा हुआ था (यहेज. 1:25-28) l प्रेरित यूहन्ना को भी उसी प्रकार दिखाई दिया : परमेश्वर कीमती पत्थरों की तरह चमक रहा है, और मरकत-सा एक मेघ धनुष उसके चारों ओर है (प्रका.4:2-3) l जब परमेश्वर खुद को प्रगट करता है, वह केवल भला और सामर्थी ही नहीं खूबसूरत  भी दिखायी देता है l जिस तरह एक कलाकृति अपने कलाकार को प्रगट करती है उसी तरह सृष्टि अपने सृष्टिकर्ता को दर्शाती है l

अक्सर परमेश्वर की जगह प्रकृति की उपासना होती है (रोमि. 1:25) l कितनी दुःख की बात है l इसके विपरीत, धरती का स्वच्छ जल और उसमें तैरते जलजन्तु उस सृष्टिकर्ता की ओर संकेत करते है जो संसार के सभी वस्तुओं से कहीं सामर्थी और सुन्दर है l

साफ़ किया गया

जब मैंने बर्तन धोने की अपनी मशीन खोली, मैं उसकी खराबी के विषय सोचने लगी l साफ़ चमकदार बरतनों की जगह, मैंने उसमें से गन्दी थालियाँ और गिलास निकाले l मैं सोचने लगी कि कहीं मेरे इलाके का पानी या बर्तन धोने की मशीन तो खराब नहीं हो गयी है l

परमेश्वर का साफ़ करना, बर्तन धोने की उस ख़राब मशीन से भिन्न है l वह हमारे समस्त अशुद्धताओं को धो देता है l हम यहेजकेल की पुस्तक में पढ़ते हैं कि परमेश्वर अपने लोगों को वापस अपने पास बुलाता है जब यहेजकेल परमेश्वर के प्रेम और क्षमा का सन्देश सुनता है l इस्राएली दूसरे देवताओं और राष्ट्रों के प्रति निष्ठा जताकर परमेश्वर के विरुद्ध पापी ठहरे थे l हालाँकि, परमेश्वर ने करुणा दिखाकर उनको अपने पास बुलाया l उसने उनको उनकी “सारी अशुद्धता  और मूरतों” (36:25) से शुद्ध करने की प्रतिज्ञा की l अपनी आत्मा उनमें डाल कर (पद.27), वह उनको अकाल में नहीं बल्कि फलदायक स्थान में ले जाने वाला था l (पद.30) l

यहेजकेल के दिनों की तरह, वर्तमान में भी जब हम भटक जाते हैं, प्रभु हमें अपने निकट बुलाता है l जब हम अपने को उसकी इच्छा और मार्ग के अधीन कर देते हैं, वह हमारे पापों को धोकर हमें बदल देता है l हमारे अन्दर अपने पवित्र आत्मा द्वारा निवास करते हुए प्रति दिन उसके पीछे चलने में मदद करता है l