अत्यधिक फल
बसंत और गर्मी के मौसम में, मैं अपने पड़ोसी के अहाते में अंगूर के बड़े गुच्छे देखता हूँ जो हम दोनों के आँगन के बीच लगे बाड़े पर लटके होते हैं l बेर और संतरे हमारे पहुँच में होते हैं l
यद्यपि हम न भूमि को जोतते हैं, न बीज बोते हैं, अथवा न बगीचे को सींचते हैं और न उसमें का घास-फूस निकालते हैं, हमारे पड़ोसी हमारे साथ अपनी आशीष बांटते हैं l वे जिम्मेदारी से अपने फसल की देखभाल करते हैं और अपने फसल के एक भाग द्वारा हमें खुश करते हैं l
हमारे पड़ोसी के बगीचे के पेड़ और अंगूर की लताएँ मुझे एक और फसल की याद दिलाते हैं जो मुझे और उन लोगों को फायदा पहुंचाते हैं जो परमेश्वर ने मेरे जीवन में दिए हैं l वह फसल आत्मा का फल है l
मसीह के विश्वासियों को पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से जीवन के फाएदे प्राप्त करने को कहा गया है (गला. 5:16-21) l जब परमेश्वर की सच्चाई के बीज हमारे हृदयों में बढ़ते हैं, पवित्र आत्मा “प्रेम, आनंद, शांति, धीरज, कृपा भलाई, विश्वास, नम्रता, और आत्म-संयम” (पद.22-23) को अधिकाई से प्रगट करने में सहायता करता है l
एक बार जब हम अपने जीवन यीशु को समर्पित कर देते हैं, हमारी आत्म-केन्द्रित इच्छाएँ हम पर नियंत्रण नहीं रख सकतीं हैं (पद.24) l समय के साथ, पवित्र आत्मा हमारी सोच को, हमारे आचरण को, और हमारी आदतों को बदल देता है l जब हम मसीह में बढ़ते और प्रोढ़ होते जाते हैं, हम अपने पड़ोसियों के साथ उसके उदार फसल की आशीषों को बांटकर आनंदित होते हैं l
ध्यान देना
जॉन न्यूटन लिखता है, “यदि, घर जाते समय, एक बच्चे ने एक छोटा सिक्का खो दिया है, और यदि, मैं उसे दूसरा दे देता हूँ, मैं उसके आँसू पोंछ सकता हूँ, मैं अनुभव करता हूँ कि मैंने कुछ किया है l मुझे उससे बड़े काम करने चाहिए, किन्तु मैं यह काम नहीं छोडूंगा l”
इन दिनों में, ऐसे लोगों को ढूँढना सरल है जिन्हें आराम चाहिए l एक किराने की दूकान में एक थका हुआ खजांची जो अपनी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए दो नौकरियाँ करता है; एक शरणार्थी जो घर वापस जाने की लालसा करता है; एक अकेली माँ जिसने अत्यधिक चिंता के कारण सारी आशा खो दी है; एक बूढ़ा व्यक्ति जिसे डर है कि उसने बहुत वर्षों तक बेकारी का जीवन जी लिया है l
किन्तु हमें क्या करना चाहिए? दाऊद ने लिखा, “क्या ही धन्य है वह, जो कंगाल की सुधि रखता है” (भजन 41:1) l यद्यपि, हम उन लोगों की गरीबी समाप्त नहीं कर सकते हैं जिनसे हमारी मुलाकात होती है हम उनपर विचार कर सकते हैं अर्थात् उनपर “ध्यान दे सकते हैं l”
हम लोगों को बता सकते हैं कि हम उनकी चिंता करते हैं l हम उनके साथ नम्रता और आदर दिखा सकते हैं यद्यपि उनमें चिड़चिड़ापन अथवा थकान दिखाई देता हो l हम रूचि दिखाकर उनकी कहानी सुन सकते हैं l और हम उनके लिए और उनके साथ प्रार्थना कर सकते हैं जो सबसे अधिक सहायक और चंगा करनेवाला कार्य है l
यीशु का वह पुराना विरोधोक्ति न भूलें जो उसने हमसे कहा था, “लेने से देना धन्य है” (प्रेरितों 20:35) l ध्यान देना सफल काम है, क्योंकि हम उस समय सबसे खुश होते हैं जब हम खुद को देते हैं l कंगालों पर ध्यान दें l
ईमानदार खोज
प्रत्येक शनिवार हमारा परिवार दौड़ के मैदान के किनारे खड़ा होकर मेरी बेटी को उत्साहित करता है जब वह हाई स्कूल क्षेत्र पार टीम के साथ दौड़ती है l समापन रेखा को पार करने के बाद, सभी धावक फिर से अपने टीम के सदस्यों, कोच और सभी माता-पिता से मिलते हैं l समाप्त करनेवालों के चारों-ओर कभी-कभी तो 300 से भी अधिक लोगों की भीड़ जमा हो जाती है, और इतने लोगों के बीच एक को ढूँढना कठिन होता है l हम ध्यानपूर्वक भीड़ में उसको तब तक ढूंढते हैं जब तक वह मिल नहीं जाती है, और धाविका, हमारी दुलारी बेटी के चारों ओर अपनी बाहें डालते हैं जिसे हम देखने आए थे l
बेबीलोन में सत्तर वर्षों के बन्धुआई के बाद, परमेश्वर यहूदियों को वापस यरूशलेम और यहूदा ले गया l यशायाह उनके लिए परमेश्वर के आनंद का वर्णन करता है, और उनके घर वापसी की तीर्थयात्रा के लिए राजमार्गों और उनको वापस स्वीकार करने के लिए फाटक के तैयार करने का वर्णन करता है l परमेश्वर अपने पवित्र लोगों के लिए अपनी बुलाहट को दृढ़ करके उनके गौरव को एक नए नाम से पुनःस्थापित करता है, “यहोवा के छुड़ाए हए . . . न-त्यागी हुयी नगरी” (यशा. 62:12) l वह उनको बेबीलोन के अलग-अलग स्थानों से वापस अपने पास लौटा लाया l
इस्राएलियों की तरह, हम भी परमेश्वर की प्रिय संतान हैं, जिसे परमेश्वर ईमानदारी से खोजता है l यद्यपि एक समय हमारे पाप ने हमें उससे दूर कर दिया, यीशु का बलिदान हमें वापस उसके पास ले आता है l वह जी लगाकर हमें दूसरों के बीच खोजता है, और हृदय से गले लगान चाहता है l
साँप और तिपहिया साइकिल
वर्षों से मैंने घाना देश की एक कहानी बार-बार बताई है जब मेरा भाई और मैं छोटे थे l मैं याद करता हूँ कि उसने अपनी लोहे की पुरानी तिपहिया साइकिल एक छोटे नाग सांप के ऊपर खड़ी कर दी थी l तिपहिया साइकिल उस सांप के लिए बहुत भारी थी, जो अगले पहिये के नीचे दबा रहा l
किन्तु मेरी मौसी और मेरी माँ की मृत्यु के बाद, हमें माँ का लिखा हुआ एक पुराना पत्र मिला जिसमें इस घटना का वर्णन था l वास्तव में, मैंने सांप के ऊपर साइकिल खड़ी कर दी थी, और मेरा छोटा भाई इसके विषय मेरी माँ से कहने गया था l उन्होंने सचमुच में इस घटना को देखा था और वास्तविक घटना के विषय उनके लिखने से सच्चाई प्रगट हुआ l
इतिहासकार लूका सही शब्दों के महत्त्व को जानता था l उसने समझाया कि “जो पहले ही से इन बातों के देखनेवाले . . . थे” यीशु की कहानी को हम तक पहुँचाया (लूका 1:2) l उसने थियुफिलुस को लिखा, “उन सब बातों का सम्पूर्ण हाल और आरम्भ से ठीक-ठीक जांच करके, उन्हें तेरे लिए क्रमानुसार लिखूं ताकि तू यह जान ले कि वे बातें जिनकी तू ने शिक्षा पायी है, कैसी अटल हैं” (पद.3-4) l लूका का सुसमाचार परिणाम है l उसके बाद, प्रेरितों के काम की पुस्तक के आरंभ में, लूका यीशु के विषय कहता है, “उसने दुःख उठाने के बाद बहुत से पक्के प्रमाणों से अपने आप को उन्हें जीवित दिखाया” (प्रेरितों 1:3) l
हमारा विश्वास अफ़वाह और अभिलाषी सोच पर आधारित नहीं है l वह यीशु के जीवन के लिखित प्रमाणों पर आधारित है, जो परमेश्वर के साथ हमारा मेल कराने आया l उसकी कहानी अटल है l
लालच
2016 की गर्मी में, मेरी भांजी ने मुझे स्मार्ट फोन में फोन के कैमरा द्वारा खेला जानेवाला खेल पोकेमोन गो खेलने को मजबूर किया l इस खेल का लक्ष्य पोकेमोन नामक छोटे प्राणियों को पकड़ना होता है l जो कोई खेल शुरु करता हैं, एक लाल और सफ़ेद बॉल फोन की स्क्रीन पर दिखाई देता है l किसी पोकेमोन के पकड़ने के लिए ऊँगली से बॉल को पोकेमोन की ओर करना होता है l पोकेमोन को, हालाँकि, लालच देकर भी पकड़ा जा सकता है l
केवल पोकेमोन के चरित्रों को ही लालच नहीं दिया जा सकता है l नये नियम में विश्वासियों को लिखते हुए यीशु का भाई, याकूब, हमें याद दिलाता है कि हम “अपनी ही अभिलाषा से खिंचकर और फँसकर परीक्षा में” पड़ते हैं (1:14, पर महत्व दिया गया है) l अर्थात्, हमारी इच्छाएँ परीक्षाओं के साथ मिलकर हमें गलत मार्ग में जाने की लालच देते हैं l हमारे पास अपनी समस्याओं के लिए परमेश्वर अथवा शैतान को दोषी ठहराने की परीक्षा आ सकती है, किन्तु वास्तविक खतरा हमारे अन्दर है l
किन्तु अच्छा समाचार है l यदि हम हमें परीक्षाओं में ले जानेवाली बातों के विषय परमेश्वर से बातचीत करते हैं हम उनसे बच सकते हैं l यद्यपि, “न तो बुरी बातों से परमेश्वर की परीक्षा हो सकती है, और न वह किसी की परीक्षा आप करता है,” जिस तरह याकूब 1:13 में समझाता है, वह गलत करने की हमारी मानवीय इच्छा समझता है l हमें केवल उस बुद्धि को माँगना है जिसे परमेश्वर ने देने की प्रतिज्ञा की है (1:1-6) l
दूसरों की रूचियाँ
मेरा मित्र जैमी एक बड़ी अंतर्राष्ट्रीय निगम में काम करता है l कंपनी के साथ अपने काम के आरंभिक दिनों में, एक व्यक्ति उसके दफ्तर में आकर बातचीत शुरु करके जैमी से पूछा कि वह वहां क्या करता है l उस व्यक्ति को अपने काम के विषय बताते हुए, जैमी ने उस व्यक्ति से उसका नाम पुछा l “मेरा नाम रिच है,” उसने उत्तर दिया l
“आप से मिलकर ख़ुशी हुई,” जैमी ने उत्तर दिया l “और आप यहाँ क्या करते है?”
“ओ, मैं मालिक हूँ l”
जैमी ने अचानक पहचाना कि आकस्मिक, सरल बातचीत संसार के एक सबसे धनी व्यक्ति के लिए उसका परिचय था l
आज आत्म-प्रशंसा और “खुद” के विषय ख़ुशी मनाने वाली यह छोटी कहानी फिलिप्पियों की पत्री में पौलुस के महत्वपूर्ण शब्दों की ताकीद हो सकती है : विरोध या झूठी बड़ाई के लिए कुछ न करो” (2:3) l जो लोग अपना ध्यान अपनी ओर न करके दूसरों की ओर करते हैं उनके भीतर पौलुस के बताए हुए गुण हैं l
जब हम “दूसरों को अपने से अच्छा” समझते हैं, हम मसीह की दीनता प्रगट करते हैं (पद.3) l हम मसीह का अनुसरण करते हैं, जो इसलिए नहीं आया कि उसकी “सेवा टहल की जाए”, किन्तु इसलिए कि “आप ही सेवा टहल करे” (मरकुस 10:45) l जब हम “दास का स्वरुप” धारण करते हैं (फ़िलि. 2:7), हममें मसीह का स्वभाव होता है (पद.5) l
आज जब हम दूसरों के साथ बातचीत करते हैं, हम केवल अपने ही हित के नहीं किन्तु “दूसरों के हित की भी चिंता करें” (पद.4) l
हमारा दोष मिट गया
मैंने अपनी युवावस्था में, एक सहेली से निकट के उपहार के दूकान में मेरे साथ चलने को कहा l हालाँकि, उसने मुझे चकित कर दिया l उसने बालों में लगानेवाले कुछ रंगीन क्लिप्स मेरे पॉकेट में डालकर दूकानदार को पैसे दिए बगैर मुझे खींचती हुई बाहर ले आयी l मैं एक सप्ताह तक खुद को दोषी मानती रही इससे पहले कि मैं रोती हुई अपनी माँ के पास जाकर अपनी गलती न मान ली l
अपनी सहेली को चोरी करने से न रोक पाने पर मैं दुखित थी l मैं चोरी की वस्तुओं को लौटाकर दूकानदार से क्षमा मांगी और फिर कभी चोरी नहीं करने का प्रण किया l दूकानदार ने मुझसे अपने दूकान में आने से मना कर दिया l किन्तु इसलिए कि मेरी माँ ने मुझे क्षमा करके भरोसा दिलाया था कि मैंने सही करने का पूरा प्रयास किया था, और उस रात मैं शांति से सो पायी थी l
राजा दाऊद ने पश्चाताप करके क्षमा प्राप्त किया (भजन 32:1-2) l दाऊद ने बतशेबा और ऊरिय्याह के विरुद्ध अपने पाप को छिपाया(2 शमु. 11-12) जब तक कि उसकी “तरावट धूप काल की से झुर्राहट” न बन गयी (भजन 32:3-4) l किन्तु जब दाऊद ने अपने पाप को “प्रगट किया”, तो प्रभु ने उसके पाप क्षमा कर दिए (पद.5) l परमेश्वर ने “संकट से” उसकी रक्षा करके उसे “छुटकारे के गीतों से घेर” लिया (पद.7) l दाऊद आनंदित हुआ क्योंकि “जो यहोवा पर भरोसा रखता है वह करुणा से गिरा रहेगा” (पद.10) l
पश्चाताप करते समय और क्षमा मांगते समय हम अपने पापों के परिणाम का चुनाव नहीं कर सकते अथवा लोगों के प्रतिउत्तर पर नियंत्रण नहीं रख सकते हैं l किन्तु प्रभु हमें हमारे दोष को मिटाकर पाप की गुलामी से स्वतंत्रता और पश्चाताप द्वारा शांति का आनंद लेने में हमेशा सामर्थी बना सकता है l
कटनी के लिए तैयार
गर्मी बाद, हम इंगलैंड के न्यू फारेस्ट में घूमने गए और वहां पर जंगली बेर चुनने का आनंद लिया और पास ही घोड़ों को उछलते कूदते देखा l दूसरों के द्वारा वर्षों पहले लगाए गए पेड़ों के मीठे फलों का आनंद लेते हुए, मैंने यीशु द्वारा शिष्यों को कहे गए शब्दों को याद किये, “मैंने तुम्हें वह खेत काटने के लिए भेजा जिसमें तुमने परिश्रम नहीं किया” (यूहन्ना 4:38) l
मैं इन शब्दों में परमेश्वर के राज्य की उदारता पसंद करता हूँ l वह हमें दूसरों की मेहनत के फल का आनंद लेने देता है, जैसे जब हम किसी सहेली के साथ, जिसके परिवार को हम नहीं जानते हैं, और जो वर्षों से उसके लिए प्रार्थना कर रहा है, के साथ मसीह का प्रेम बांटते हैं l मुझे यीशु के शब्दों की सीमा भी पसंद है, कि हम बीज बोएँगे किन्तु हम नहीं कोई और कटनी काट सकेगा l इसलिए हम उस कार्य में भरोसा कर सकते हैं जो हमारे सामने है l हम इस सोच से धोखा नहीं खाएंगे कि हम परिणाम के लिए जिम्मेदार हैं l आखिरकार, परमेश्वर का कार्य हम पर निर्भर नहीं है l भरपूर कटनी के लिए उसके पास समस्त साधन है, और हम सौभाग्यशाली हैं कि हम भी उसमें भूमिका निभा सकते हैं l
मैं सोचता हूँ कि किस तरह के खेत आपके सामने और मेरे सामने कटनी के लिए तैयार हैं? हम यीशु के प्रेमी निर्देश का पालन करें : “अपनी आँखें उठाकर खेतों पर दृष्टि डालो कि वे कटनी के लिए पाक चुके हैं” (पद. 4:35) l