बच्चे की तैयारी
अनेक लालन-पालन वेबसाइटों पर एक वाक्यांश होता है, “सड़क के लिए बच्चे को तैयार करें, बच्चे के लिए सड़क को नहीं l” हमारे जीवन में समस्त बाधाओं को हटाने की कोशिश करके बच्चों के लिए मार्ग तैयार करने की अपेक्षा, हमें आगे के मार्ग में आनेवाली बाधाओं का सामना करने के लिए उन्हें तैयार करना चाहिए l
भजनकार लिखता है, “हम ... होनहार पीढ़ी के लोगों से, यहोवा का गुणानुवाद और उसकी सामर्थ्य और आश्चर्यकर्मों का वर्णन करेंगे l ... उसने हमारे पितरों को आज्ञा दी, कि तुम इन्हें अपने अपने बाल-बच्चों को बताना; कि आनेवाले पीढ़ी के लोग, अर्थात् जो बच्चे उत्पन्न होनेवाले हैं, वे इन्हें जानें; और अपने-अपने बाल-बच्चों से इनका बखान करने में उद्यत हों” (भजन 78:4-6) l लक्ष्य है कि “वे परमेश्वर का भरोसा रखें, और परमेश्वर के बड़े कामों को भूल न जाएं” (पद. 7) l
दूसरे अपने कथन और आचरण के द्वारा हम पर जो सामर्थी आत्मिक प्रभाव डालें हैं, उस पर विचार करें l उनकी बातचीत और निरूपण ने हमारा ध्यान खींचकर हमें यीशु का अनुसरण करने हेतु उत्तेजित किया है l
आने वाली पीढ़ी और पीढ़ियों को हमारे जीवनों के लिए परमेश्वर का वचन और उसकी योजना बांटना एक अद्भुत सौभाग्य है l उनके जीवन में आगे जो भी हो, वे तैयार रहकर प्रभु की सामर्थ्य में उनका सामना करें, यही हमारी इच्छा है l
परमेश्वर द्वारा आच्छादित
बचपन में मेरे बच्चे, हमारे गीले इंग्लिश बगीचे में खेलकर जल्द ही गंदे हो जाते थे l उनकी और मेरे फर्श की भलाई के लिए मैं उनके कपड़े बाहर उतरवाकर उनको तौलिये में लपेटकर नहाने ले जाती थी l वे साबुन, जल, और दुलार से जल्द साफ़ हो जाते थे l
जकर्याह को प्राप्त एक दर्शन में, हम एक महायाजक, यहोशु को मैले वस्त्र पहने हुए देखते हैं, जो पाप और दुराचार का प्रतीक है (जकर्याह 3:3) l किन्तु परमेश्वर उसके मैले कपड़े उतारकर उसे साफ़ कर उसे सुन्दर वस्त्र पहनाता है (3:5) l शुद्ध पगड़ी और वस्त्र प्रगट करते हैं कि प्रभु ने उसके पाप उससे दूर किये हैं l
यीशु के उद्धारक कार्य द्वारा परमेश्वर की शिफा से हम अपने दुराचार से स्वतंत्र होते हैं l उसके क्रूसित मृत्यु के परिणामस्वरूप, हमें परमेश्वर के संतानों का वस्त्र मिलता है l अब हम अपने बुरे कार्यों (चाहे झूठ, बकवाद, लालच, अथवा कुछ और) द्वारा परिभाषित नहीं होते हैं, किन्तु परमेश्वर अपने प्रेम करनेवालों को पुनरस्थापित, नया किया हुआ, स्वच्छ, स्वतंत्र, नाम देता है, जीनका हम दावा कर सकते हैं l
परमेश्वर से वे सारे गंदे कपड़े हटाने को कहें जो आपने पहन रखें हैं ताकि आप उसके द्वारा आपके लिए तैयार वस्त्र धारण कर सकें l
सिंहों के संग निवास
शिकागो अजायबघर घर घूमते समय, मैंने बेबीलोन के लम्बे डग मारने वाले सिंहों का मूल चित्र देखा l वह भयंकर भाव के साथ एक पंखदार सिंह का भित्तिचित्र था l बेबीलोन की प्रेम और यूद्ध की देवी इश्तार का प्रतीक, यह सिंह 120 समरूप सिंहों का उदहारण था जो ई०पु० 604-562 के वर्षों में बेबीलोन की सड़कों पर पंक्तिबद्ध रहे होंगे l
इतिहासकारों के अनुसार बेबीलोन के लोगों द्वारा यरूशलेम पर कब्ज़ा करने के बाद, यहूदी बंदियों ने अपने समय में नबूकदनेस्सर के राज्य में इन सिंहों को देखा होगा l इतिहासकारों का यह भी मानना है कि कुछ इस्राएलियों का विश्वास था कि इश्तार देवी ने इस्राएल के परमेश्वर को पराजित किया था l
एक इब्री बंदी, दानिय्येल अपने कुछ इस्राएली भाइयों की शंकाओं से विचलित और शंकित नहीं था l परमेश्वर के विषय उसका विचार और समर्पण स्थिर था l वह यह जानकार भी कि प्रार्थना करना उसे सिंहों के मांद में भेज सकता था वह खिड़की खोलकर तीन बार प्रार्थना करता था l परमेश्वर द्वारा दानिय्येल को भूखे जंतुओं से छुड़ाने के बाद, राजा दारा ने कहा, “जीवता और युगानयुग तक रहनेवाला परमेश्वर [दानिय्येल का ही है] .... वही बचाने और छुड़ानेवाला है” (दानि. 6:26-27) l दानिय्येल की विश्वासयोग्यता ने उसको बेबीलोन के अगुवों को प्रभावित करने दिया l
तनाव एवं निराशा के बावजूद विश्वासयोग्यता उसे महिमान्वित करने हेतु लोगों को प्रेरित करेगा l
सच्चा मित्र बनना
कवि सैमवेल फ़ॉस ने लिखा, “मुझे सड़क किनारे रहकर मनुष्य का मित्र बनने दें” (“द हाउस बाई द साइड ऑफ़ द रोड”) l मैं ऐसा ही रहना चाहता हूँ-लोगों का मित्र l मैं राह के किनारे थकित यात्रियों का इंतज़ार करना चाहता हूँ l मैं दूसरों द्वारा चोटिन एवं अपकृत लोगों को तलाशना चाहता हूँ, जो घायल और निर्भ्रांत हृदय का बोझ उठाते हैं l उनको उत्साहवर्धक शब्द द्वारा पोषित और तरोताजा करके उनको उनके मार्ग पर आगे भेजने के लिए l मैं शायद उनको या उनकी समस्याओं को “ठीक” नहीं कर पाऊँगा, किन्तु उन तक आशीष पहुंचा सकता हूँ l
शालेम का राजा और याजक, मलिकिसिदक, अब्राम को आशीषित किया जब वह युद्ध से लौट रहा था (उत्प. 14) l एक “आशीष” एक छींक के प्रति विनम्र प्रतिउत्तर से अधिक है l हम उनको आशीष के श्रोत के पास लाकर उन्हें आशीषित करते हैं l मलिकिसिदक ने अब्राम को यह कहकर आशीषित किया, “परमप्रधान ईश्वर की ओर से, जो आकाश और पृथ्वी का अधिकारी है, तू धन्य हो” (पद. 19) l
हम दूसरों के संग प्रार्थना करके उनको आशीषित करते हैं; हम उनको ज़रूरत के समय अनुग्रह के सिंहासन तक ले जाकर सहायता दे सकते हैं (इब्रा. 4:16) l हम शायद उनकी परिस्थिति न बदल सकें, किन्तु उनका परिचय परमेश्वर से करा सकते हैं l एक सच्चा मित्र ऐसा ही करता है l
सदा बहार पुष्प
मेरा बेटा ज़ेवियर बचपन में, मुझे फूल देना पसंद करता था l उसके द्वारा तोड़ा या अपने पिता के संग ख़रीदे गए छोटे-बड़े ताज़े फूल की मैं प्रशंसक थी, और मुरझाने तक उनको संयोजती थी l
एक दिन, ज़ेवियर ने मुझे बनावटी फूलों का एक सुन्दर गुलदस्ता दिया l वह सफ़ेद सोसन, पीला सूर्यमुखी, और बैंजनी सदाबहार फूलों को एक फूलदान में सजाते हुए मुस्करा कर बोला, “मम्मी, ये सदैव रहेंगे l मैं इसी तरह तुमसे प्रेम करता हूँ l”
अब मेरा बेटा युवा है l वे सफ़ेद पंखुड़ियां धूमिल हो गईं हैं l फिर भी सदाबहार फूल मुझे उसके गहरे प्रेम की याद दिलाते हुए, अचूक और चिरस्थायी वचन में वर्णित परमेश्वर के असीमित और अनंत प्रेम याद दिलाते हैं (यशा. 40:8) l
इस्राएलियों के निरंतर क्लेश में, यशायाह ने भरोसे से उनको परमेश्वर के चिरस्थायी वचन से सान्त्वना दी (40:1) l उसने घोषणा की कि परमेश्वर ने इस्राएलियों के पाप के दंड को चुकाया है (पद.2), भावी उद्धारकर्ता में उनकी आशा को सुरक्षित किया है (पद.3-5) l उन्होंने नबी पर भरोसा किया क्योंकि उसका केंद्र उनकी परिस्थितियाँ नहीं बल्कि परमेश्वर था l
अनिश्चितता और दुखित संसार में, मनुष्य का विचार और हमारी अपनी भावनाएं भी हमारी नश्वरता की तरह बदलती और सीमित हैं (पद.6-7) l फिर भी, हम परमेश्वर के निरंतर और अनंत सत्य वचन में प्रगट उसके अपरिवर्तनीय प्रेम और चरित्र पर भरोसा कर सकते हैं l
बीज बिखेरना
मैंने एक स्त्री से एक अदभुत ई-मेल प्राप्त किया, “1958 में पुटमेन सिटी में तुम्हारी माँ मेरी प्रथम कक्षा की शिक्षिका थी l वह बहुत अच्छी और दयालु, किन्तु सख्त शिक्षिका थी! उन्होंने हमें भजन 23 कंठस्थ करके पूरी कक्षा के सामना दोहराने को कहा, और मैं डर गया l किन्तु 1997 में मसीही बनने तक बाइबिल का मेरा एकमात्र संपर्क वही था l और इसे पुनः पढ़ते समय श्रीमति मैकेसलैंड की यादें सैलाब की तरह लौटती हैं l”
यीशु ने एक बड़ी भीड़ को विभिन्न प्रकार की भूमि-एक कठोर, चट्टानी, झाड़ियों, और अच्छी भूमि पर-बीज बोनेवाले एक किसान का दृष्टान्त बताया (मत्ती 13:1-9) l जबकि कुछ बीज उगे नहीं, “अच्छी भूमि पर गिरी हुई बीज, सुनकर समझने वाले व्यक्ति का सन्दर्भ देता है” और “सौ गुना, कोई साठ गुना, और कोई तीस गुना [फलता है] (पद.23) l
उन बीस वर्षों में मेरी माँ ने पब्लिक स्कूल में पढ़ाते हुए, पठन, लेखन और गणित के साथ परमेश्वर के प्रेम का सन्देश और दयालुता के बीज बोए l
उसके पूर्व विद्यार्थी के ई-मेल के अंत में लिखा था, “मेरे जीवन के बाद के वर्षों में अवश्य ही, अन्य मसीही प्रभाव था l किन्तु मेरा हृदय [भजन 23] और [आपकी माँ] के दयालु स्वभाव की ओर लौटता है l”
आज बोया गया परमेश्वर के प्रेम का एक बीज किसी दिन असाधारण फसल देगा l
शिविर-स्थल भजन
जब हम पति-पत्नी प्रकृति देखने जाते हैं, हम अपने कैमरे से अपने पाँवों के निकट संसार का सूक्ष्म रूप समान दिखाई दिखनेवाले पौधों के भी फ़ोटो पास से खींचते हैं l रात-ही-रात में उगने वाले, जंगलों में चमकीले नारंगी, लाल, और पीले रंगों की छठा बिखेरते कुकुरमुत्ते में हम अदभुत विविधता और सुन्दरता देखते हैं!
जीवन के चित्र मुझे अपनी आँखें केवल कुकुरमुत्ते को नहीं किन्तु आसमान के तारों को निहारने की प्रेरणा देते हैं l उसने अनंत विस्तार और विविधता का संसार अभिकल्पित किया l और उसने हमें इस खूबसूरती का आनंद लेने और इसको अपने अधिकार में करने हेतु रचकर इसके बीच रखा (उत्पत्ति 1:27-28; भजन 8:6-8) l
मेरा ध्यान हमारे परिवार के एक शिविर-स्थल भजन-जिसे हम आग के चारों ओर बैठकर पढ़ते हैं-की ओर जाता है l “हे यहोवा हमारे प्रभु, तेरा नाम सारी पृथ्वी पर क्या ही प्रतापमय है! तू ने अपना वैभव स्वर्ग पर दिखाया है . . . जब मैं आकाश को, जो तेरे हाथों का कार्य है, और चन्द्रमा और तारागन को जो तू ने नियुक्त किए हैं, देखता हूँ; तो फिर मनुष्य क्या है कि तू उसका स्मरण रखे, और आदमी क्या है कि तू उसकी सुधि ले?” (भजन 8:1-4) l
यह कितना अदभुत है कि समस्त भव्यता के इस संसार का सृष्टिकर्ता आपकी और मेरी चिंता करता है!
सलाहकार
मैं हवाई जहाज़ से घर से हजारों मील दूर एक शहर में अध्ययन करने हेतु जाते समय घबराई हुई और अकेली महसूस कर रही थी l किन्तु हवाई जहाज़ में मुझे यीशु के अपने शिष्यों को दी गई पवित्र आत्मा की शांतिदायक उपस्थिति की प्रतिज्ञा याद आई l
“मेरा जाना तुम्हारे लिए अच्छा है” (यूहन्ना 16:7), यीशु के मित्र उसके इस कथन से चकित हुए होंगे l किस तरह वे उसके आश्चर्यकर्मों की साक्षी और उसकी शिक्षा से सीखकर उसके बिना अच्छे रहेंगे? किन्तु यीशु ने उनसे कहा कि उसका उनसे अलग होने के बाद, सहायक-पवित्र आत्मा-आएगा l
यीशु संसार से अपने प्रस्थान के अंतिम घंटों से पूर्व अपने शिष्यों को अपनी मृत्यु और स्वर्गारोहण समझने में सहायता की (यूहन्ना 14-17 में), जिसे आज “अंतिम संवाद” कहा जाता है l इस संवाद का केंद्र उनके साथ रहनेवाला, पवित्र आत्मा था (14:16-17), एक सहायक जो उनके साथ रहकर (14:16-17), उनको सिखाएगा (15:15), गवाही देगा (पद.26), और उनका मार्गदर्शन करेगा (16:13) l
हम जिन्होंने परमेश्वर के नए जीवन की पेशकश को स्वीकारा है, में उसका आत्मा निवास करता है l उससे हम बहुत पाते हैं : वह हमें पाप के प्रति निरुत्तर करके हमें पश्चाताप तक पहुंचता है l वह हमारे दुःख में सान्त्वना, कठिनाई सहने में सामर्थ, परमेश्वर की बातें समझने में बुद्धिमत्ता, भरोसा करने में आशा और विश्वास, और बांटने में प्रेम देता है l
वायलेट के साथ गाना
जमाइका के एक अस्पताल में कुछ किशोरों ने एक वृद्ध महिला, वाएलेट को अपने बिस्तर पर बैठे मुस्कराते देखा l उसके छोटे समूह निवास में गर्म, चिपचिपी दोपहर की हवा पूरे आवेश में आ रही थी, किन्तु उसने शिकायत नहीं की किन्तु एक गीत गाना चाही l और उसने मुस्कराकर गाया, “मैं दौड़ती, उछलती, कूदती हुई प्रभु की स्तुति कर रही हूँ!” गाते समय वह अपनी बाहों को आगे पीछे हिला रही थी, मानो वह दौड़ रही हो l लोगों की आँखें नम हुईं, क्योंकि वायलेट के पास पैर नहीं थे l वह गाती हुए बोली, “यीशु मुझसे प्रेम करता है- और स्वर्ग में दौड़ने के लिए मेरे पास पैर होंगे l”
जब फिलिप्पियों 1 में पौलुस जीवन और मृत्यु की बात करता है वाएलेट का आनंद और आशापूर्ण प्रत्याशा उसके शब्दों को नयी गूंज देती है l उसने कहा, “यदि शरीर में जीवित रहना ही मेरे काम के लिए लाभदायक है तो मैं नहीं जानता कि किसको चुनूँ l ...जी तो चाहता है कि कूच करके मसीह के पास जा रहूँ, क्योंकि यह बहुत ही अच्छा है” (पद.22-23) l
हममें से प्रत्येक कठिन अवस्था में स्वर्गिक विश्राम चाहते हैं l किन्तु जैसे वाएलेट ने अपनी स्थिति में आनंद प्रगट किया, हम भी “दौड़ते, उछलते, और कूदते हुए प्रभु की प्रशंसा कर सकते हैं-वर्तमान के बहुतायत के जीवन के लिए और भावी आनंद के लिए l