कब्र 7 का धन
मेक्सिको के पुरातत्ववेत्ता अंटोनियो कासो ने 1932 में, मोंटे ऐल्बान, ओक्साका में कब्र 7 खोजा l उसने स्पेनी कब्जे से पूर्व के जवाहिरात “मोंटे अल्बान का धन” और चार सौ से अधिक शिल्पकृतियाँ खोजी l मेक्सिको के पुरातत्व खोज में यह महत्वपूर्ण है l कोई भी कासो के हाथों में शुद्ध सजावटी प्याला देखकर उसकी उत्तेजना की कल्पना ही कर सकता है l
शताब्दियों पूर्व, भजनकार ने सोना या स्फटिक पत्थर से अधिक मूल्यवान धन के विषय लिखा, “जैसे कोई बड़ी लूट पाकर हर्षित होता है, वैसे ही मैं तेरे वचन के कारण हर्षित हूँ” (भजन 119:162) l भजन 119 में, लेखक हमारे जीवनों के लिए परमेश्वर के निर्देश और प्रतिज्ञाओं का महत्त्व जानकर उनकी तुलना बड़े धन से किया जो एक विजेता के कब्जे में आता है l
कासो कब्र 7 की खोज से याद किया जाता है l हम ओक्साका में संग्रहालय में इसका आनंद ले सकते हैं l जबकि, प्रतिदिन हम वचन में जाकर प्रतिज्ञाओं के हीरे, आशा के माणिक, और बुद्धिमत्ता के पन्ना खोज सकते हैं l किन्तु पुस्तक द्वारा इंगित सबसे महान व्यक्तित्व स्वयं यीशु है l आखिरकार, वह ही पुस्तक का लेखक है l
हम मेहनत से भरोसा करें कि यह धन हमें समृद्ध बनाएगा l जैसे भजनकार कहता है, “मैंने तेरी चितौनियों को ... अपना निज भाग कर लिया है, क्योंकि वे मेरे हृदय के हर्ष का कारण हैं” (पद. 111) l
सुननेवाले और करनेवाले
मेरे पासवान, पति का फ़ोन बजा l हमारे चर्च की एक प्रार्थना योद्धा, अकेले रहने वाली 70 वर्ष की एक महिला को हॉस्पिटल ले जाया गया l वह अत्यधिक बीमार होने के कारण खाना पीना छोड़ दी थी और देखने और चलने में भी असमर्थ थी l इस बात से अज्ञात कि उसके साथ क्या होगा हमने उसके लिए परमेश्वर से सहायता और दया मांगी l हम उसके हालचाल के विषय चिंतित थे l चर्च क्रियाशीलता से 24 घंटे उसके सेवा में लग गई और उसके साथ अन्य मरीजों, आगंतुकों और चिकत्सीय कर्मचारियों के साथ मसीही प्रेम दिखाया l
यहूदी मसीहियों को लिखते हुए याकूब ने कलीसिया को ज़रुरतमंदों की सेवा करने हेतु उत्साहित किया l याकूब चाहता था कि विश्वासी परमेश्वर के वचन को सुनने से अधिक अपने विश्वास को कार्य में बदलें (1:22-25) l अनाथों और विधवाओं की ज़रूरतें दर्शाते हुए (पद.27), उसने एक कमज़ोर समूह को नामित किया, क्योंकि प्राचीन संसार में उनकी सेवा परिवार की जिम्मेदारी थी l
हमारी कलीसिया और समाज में जोखिम में पड़े लोगों के प्रति हमारा प्रतिउत्तर क्या है? क्या हम विधवाओं और अनाथों की सेवा को अपने विश्वास के अभ्यास का महत्वपूर्ण भाग मानते हैं? परमेश्वर हर जगह लोगों की सेवा के प्रति हमारी आँखें खोले l
शांत संवाद
क्या कभी आप खुद से बात करते हैं? कभी-कभी किसी योजना पर कार्य करते हुए-अक्सर कार के अन्दर-मैं मरम्मत के लिए जोर-जोर से बोलकर, सर्वोत्तम विकल्प ढूंढ़ता हूँ l किसी का मुझे “संवाद” करते हुए देखना लज्जाजनक हो सकती है-यद्यपि हममें से अनेक प्रतिदिन खुद से बातचीत करते हैं l
भजनकार अक्सर भजनों में खुद से संवाद करते थे l भजन 116 का लेखक अलग नहीं है l पद 7 में उसने लिखा, “हे मेरे प्राण, तू अपने निवासस्थल में लौट आ; क्योंकि यहोवा ने तेरा उपकार किया है l” अतीत में परमेश्वर की भलाई और विश्वासयोग्यता खुद को याद दिलाना वर्तमान में उसके लिए व्यावहारिक सुख और सहायता है l हम अक्सर इस तरह के “संवाद” भजनों में देखते हैं l भजन 103:1 में दाऊद खुद से बोलता है, “हे मेरे मन, यहोवा को धन्य कर; और जो कुछ मुझ में है, वह उसके पवित्र नाम को धन्य कहे l” और भजन 62:5 में वह दृढ़तापूर्वक कहता है, “हे मेरे मन, परमेश्वर के सामने चुपचाप रह, क्योंकि मेरी आशा उसी से है l”
खुद को परमेश्वर की विश्वासयोग्यता और उसमें अपनी आशा याद करना भला है l हम भजनकार के उदहारण का अनुसरण करके खुद के प्रति परमेश्वर की अनेक भलाइयों को नाम-ब-नाम याद कर सकते हैं l ऐसा करके हम उत्साहित होते हैं l अतीत में विश्वासयोग्य रहनेवाला परमेश्वर भविष्य में भी अपना प्रेम दिखाता रहेगा l
400 मील से दृष्टि
अंतरिक्ष यान के अंतरिक्ष यात्री, चार्ल्स फ्रैंक बोल्डन जूनियर कहते हैं, “पहली ही बार अंतरिक्ष में जाने पर पृथ्वी के विषय मेरा दृष्टिकोण नाटकीय ढँग से बदल गया l पृथ्वी से 400 मील ऊपर से, उसको सब कुछ शांतिमय और खुबसूरत दिखाई दिया l फिर भी बोल्डन ने याद किया कि मध्य पूर्व के ऊपर से गुज़रते समय, वह वहाँ पर जारी द्वन्द पर विचारते हुए “वास्तविकता में पहुँच” गया l फिल्म निर्माता जैरेड लेटो से एक साक्षात्कार में, बोल्डन ने उस क्षण पृथ्वी को उस अवस्था में देखा जैसा उसे होना चाहिए-और तब उसे बेहतर बनाने की चुनौती महसूस की l
बैतलहम में यीशु के जन्म के समय, संसार परमेश्वर की इच्छानुसार नहीं था l इस नैतिक और आत्मिक अंधकार में यीशु सबके लिए जीवन और ज्योति लेकर आया (यूहन्ना 1:4) l यद्यपि संसार ने उसे नहीं पहचाना, “जितनों ने उसे ग्रहण किया, उसने उन्हें परमेश्वर की संतान होने का अधिकार दिया” (पद.12) l
जीवन के अपने मूल अवस्था में नहीं होने के कारण हम दुखित होते हैं-जब परिवार टूटते हैं, बच्चे भूखे होते हैं, और संसार युद्ध में संलग्न है l किन्तु परमेश्वर की प्रतिज्ञा है कि कोई भी मसीह में विश्वास करके एक नयी दिशा में बढ़ सकता है l
क्रिसमस का मौसम हमें स्मरण कराता है कि उद्धारकर्ता, यीशु, उसको ग्रहण करने और उसका अनुसरण करनेवाले को जीवन और ज्योति देता है l
आप मोल क्या है?
एक कहानी के अनुसार ईसा पूर्व 75 में एक अमीर रोमी युवक, जुलियस सीज़र समुद्री डकैतों द्वारा अगवा कर फिरौती हेतु बंधक बनाया गया l जब उन्होंने फिरौती में चाँदी के 20 तोड़े मांगे (आज लगभग 600,000 डॉलर), सीज़र हंसकर बोला शायद उनको नहीं पता वह कौन है l उसने उनसे फरौती की रकम को 50 तोड़े करने को कहा! क्यों? क्योंकि उसे भरोसा था उसका मूल्य 20 तोड़ों से अधिक है l
सीज़र के अपने अभिमानी मूल्य और हमारे ऊपर परमेश्वर द्वारा ठहराए हुए मूल्य के बीच कितना बड़ा अंतर है l हमारी कीमत पैसे से नहीं किन्तु हमारे एवज़ में परमेश्वर द्वारा किए हुए कार्य से आंकी जाती है l
हमें बचाने के लिए उसे क्या फिरौती देनी पड़ी? पिता ने हमें हमारे पापों से हमें बचाने के लिए क्रूस पर अपने एकलौते पुत्र की मृत्यु द्वारा कीमत चुकायी l “तुम्हारा निकम्मा चाल-चलन जो बापदादों से चला आता है, तुम्हारा छुटकारा चाँदी-सोने अर्थात् नाशवान वस्तुओं के द्वारा नहीं हुआ; पर निर्दोष और निष्कलंक मेमने, अर्थात् मसीह के बहुमूल्य लहू के द्वारा हुआ” (1 पतरस 1:18-19) l
परमेश्वर हमसे इतना प्रेम किया कि उसने हमारी फिरौती और छुटकारे के लिए अपने पुत्र को मरने और पुनरुत्थित होने दिया l उसके लिए आपकी कीमत इतनी बड़ी है l
मैं धनी हूँ!
शायद आपने वह टीवी विज्ञापन देखा है जिसमें एक व्यक्ति दरवाजे में एक बड़ा चेक प्राप्त करता है l तब प्राप्तकर्ता चिल्लाने, नाचने, कूदने, और सभों को गले लगाता है l “मैं जीत गया! मुझे विश्वास नहीं है! मेरी समस्याएँ हल हो गई हैं!” समृद्धि अत्याधिक भावनात्मक प्रतिउत्तर जगाता है l
बाइबिल के सबसे लम्बे अध्याय भजन119 में हम यह उललेखनीय कथन पढ़ते हैं : “मैं तेरी चितौनियों के मार्ग से, मानो सब प्रकार के धन से हर्षित हुआ हूँ” (पद.14) l गज़ब की तुलना! परमेश्वर के निर्देश मानना धन प्राप्ति की तरह हर्षित करता है! पद 16 इन शब्दों को दोहराते हुए भजनकार प्रभु की आज्ञाओं के लिए कृतज्ञ आनंद प्रकट करता है l “मैं तेरी विधियों से सुख पाऊंगा; और तेरे वचन को न भूलूंगा l”
किन्तु यदि हम ऐसा अहसास नहीं करते हैं तो? किस तरह परमेश्वर की आज्ञाओं में आनंदित होना धन प्राप्ति के बराबर आनंददायक है? यह सब धन्यवाद से आरंभ होता है, जो आचरण और चुनाव है l हम उस पर ध्यान देते हैं जिसको हम महत्व देते हैं, इसलिए हम परमेश्वर के उन उपहारों के लिए धन्यवाद दें जिससे हमारी आत्माएं तृप्त होती हैं l हम उसके वचन में बुद्धिमत्ता, ज्ञान, और शांति का भण्डार देखने हेतु हमारी आँखों को खोलने का कहें l
जब प्रतिदिन यीशु के लिए हमारा प्रेम बढ़ेगा, हम वास्तव में धनी बनेंगे!
भलाई
दो किशोरियों की कल्पना करें l एक मजबूत और स्वस्थ्य है l दूसरी असहाय l वह अपने व्हीलचेयर में जीवन की सामान्य भावनात्मक चुनौतियों के साथ अनेक शारीरिक तकलीफ और संघर्ष से भी जूझती है l
किन्तु दोनों परस्पर संगति का आनंद लेती हुई खुश हैं l दो खुबसूरत किशोरियाँ-प्रत्येक दूसरे में मित्रता का खज़ाना देखती हैं l
यीशु ने अपना अधिक समय और ध्यान ऐसे लोगों में लगाया जो व्हीलचेयर में लड़की की तरह थे l आजीवन असक्तता अथवा शारीरिक विकलांगता वाले लोगों के साथ जिनको विभिन्न कारणों से नीचा देखा जाता था l वास्तव में, यीशु ने धार्मिक अगुओं की घृणा के पात्र “उनमें से” एक को उसे अभियंजित करने दिया (लूका 7:39) l एक और अवसर पर, जब एक स्त्री ने समान क्रिया द्वारा प्रेम दर्शाया, यीशु ने उसके आलोचक से कहा, “उसे छोड़ दो; ..उस ने तो मेरे साथ भलाई की है” (मरकुस 14:6) l
परमेश्वर सबको समान महत्व देता है; उसकी नज़रों में सब बराबर हैं l वास्तव में, हम सभों को मसीह के प्रेम और क्षमा की घोर आवश्यकता है l उसके प्रेम ने उसे हमारे लिए क्रूस पर मरने को विवश किया l
हम भी यीशु की तरह प्रत्येक को देखें : और परमेश्वर के स्वरुप में रचित और उसके प्रेम के योग्य l मसीह के समान हम सब के साथ बराबरी का व्यवहार करें और उसकी तरह भलाई देखें l
लाल शिखा/कलगी
अनेक वर्ष पूर्व, मैं ईसा पूर्व द्वितीय शताब्दी के एक यूनानी लेखक के मछली पकड़ने के ज्ञान सम्बन्धी एक लेख के कुछ अंश से चकित हुआ l “बोरोका और थिस्सलुनीके के बीच एस्त्राकस नदी है, जिसमें चितकबरी त्वचा वाली ट्राउट मछलियाँ हैं l” फिर वह “मछलियों के लिए फंदा, जिससे उनको अच्छी और अधिक मछलियाँ मिलती हैं, बताता है l वे दो पंखों के साथ सुर्ख लाल ऊन एक कांटे में लगाते हैं l फिर वे अपने फंदे को पानी में फेंकते हैं, और मछलियाँ रंग से आकर्षित होकर ऊपर आकर खाना चाहती हैं” (ऑन द नेचर ऑफ़ एनिमल्स) l
मछुआरे आज भी यह आकर्षण उपयोग करते हैं l इसे लाल शिखा/कलगी कहते हैं l 2,200 वर्ष पूर्व उपयोगी फंदा “अधिक ट्राउट मछलियाँ पकड़ने में” आज भी उपयोगी है l
उस प्राचीन लेख को पढ़कर मैंने सोचा : समस्त पुरानी बातें अप्रचलित नहीं हुई गईं हैं-विशेषकर लोग l यदि संतुष्ट और आनंदित वृद्धावस्था द्वारा हम परमेश्वर की परिपूर्णता और गहराई दर्शाते हैं, हम अपने जीवन के अंत तक उपयोगी रहेंगे l वृद्धावस्था गिरते स्वास्थ्य, पूर्व अवस्था पर केन्द्रित हों ज़रूरी नहीं है l यह परमेश्वर के साथ वृद्ध होनेवालों का फल अर्थात् शांतचित्तता और आनंद और साहस और दयालुता से भरपूर हो सकता है l
“वे यहोवा के भवन में रोपे जाकर, ... पुराने होने पर भी फलते रहेंगे, और रस भरे और लहलहाते रहेंगे” (भजन 92:13-14) l
न भेजें
ई-मेल भेजकर क्या आपने अचानक जाना कि वह गलत व्यक्ति तक पहुँच गया या उसमें हानिकारक, कठोर शब्द थे? काश आप बटन दबाकर उसे रोक सकते l वाह, अब संभव है l अनेक कंपनियां अब एक फीचर देती हैं जिससे आप अल्प समय में ई-मेल को जाने से रोक सकते हैं l उसके बाद, ई-मेल एक उच्चारित शब्द की तरह हो जाता है जो अनकहा नहीं हो सकता l इसे सर्वरोगहारी देखने की बजाए, एक “भेजा नहीं” फीचर हमें स्मरण दिलाए कि हमें अपने शब्दों पर लगाम लगाना होगा l
प्रेरित पतरस ने अपनी पहली पत्री में यीशु के अनुगामियों से कहा, “बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो; पर इसके विपरीत आशीष ही दो ... जो कोई जीवन की इच्छा रखता है, और अच्छे दिन देखना चाहता है, वह अपनी जीभ को बुराई से, और अपने होंठों को छल की बातें करने से रोके रहे l वह बुराई का साथ छोड़ें, और भलाई ही करे; वह मेल मिलाप को ढूंढ़ें, और उसके यत्न में रहे” (1 पतरस 3:9-11) l
भजनकार दाऊद ने लिखा, “हे यहोवा, मेरे मुख पर पहरा बैठा, मेरे होठों के द्वार की रखवाली कर” (भजन 141:3) l यह शब्दों द्वारा प्रहार की इच्छा के आरंभ में और प्रत्येक स्थिति में एक महान प्रार्थना है l
प्रभु, आज हमारे शब्दों की रखवाली कर जिससे हम हानि न करें l