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हमें मालूम न था

एक स्थानीय कलीसिया के स्वयंसेवकों ने एक ठण्डी शाम को निम्न-आय वाले लोगों के भवन-समूहों में भोजन वितरण किया l एक स्त्री भोजन पाकर उल्लासित हुई l उसने अपनी खाली आलमारी दिखाकर उनसे कहा कि वे उसकी प्रार्थनाओं के उत्तर थे l

स्वयंसेवकों के चर्च लौटने पर एक महिला रोने लगी l “जब मैं छोटी थी,” उसने कहा, “वह महिला मेरी सन्डे स्कूल शिक्षिका थी l वह प्रत्येक रविवार चर्च आती है l हमें मालूम न था कि वह लगभग भूखी मर रही है!”

स्पष्तः: वे लोग चिंता करनेवाले लोग थे जो परस्पर बोझ उठाना चाहते थे, जैसे पौलुस गलातियों 6:2 में सलाह देता है l फिर भी उन्होंने स्त्रियों की ज़रूरतों पर ध्यान नहीं दिया था-जिसको वे प्रति रविवार देखते हैं-और उसने अपनी ज़रूरतें नहीं बताई थी l यह हमारे लिए अपने चारों-ओर के प्रति और अभिज्ञ रहने की कोमल ताकीद हो सकती है और, जैसे पौलुस कहता है, “जहां तक, अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें, विशेष करके विश्वासी भाइयों के साथ” (6:10) l

एक साथ उपासना करनेवालों को परस्पर सहायता करने का अवसर है ताकि मसीह की देह में कोई सहायता विहीन न रहे l जब हम एक दूसरे को जानते और चिंता करते हैं, शायद हमें कभी नहीं कहना पड़ेगा, “हमें मालूम न था l”

एक कठिन पहाड़

हमारे घर आइडाहो के उत्तर में पर्वतों की जुगहैंडल चोटी की परत में ऊपर एक हिम झील है l इस झील तक का मार्ग शिलाखंडों और अलग-अलग पत्थरों के बीच खड़ी चढ़ाई, और खुला संकरा ऊंचा भाग है l यह प्रचंड चढ़ाई है l

हालाँकि, चढ़ाई के आरंभ में, एक छोटी नदी है-एक जल-श्रोत जो मुलायम, काईदार धरती से निकलकर हरे-भरे मैदान के बीच से बहती है l यह आगे की कठिन चढ़ाई के लिए संतुष्ट होने तक जल पीने का स्थान और तैयारी है l

मसीही जीवन पर जॉन बनयन की उत्कृष्ट कृति, द पिल्ग्रिम्स प्रोग्रेस, में मसीही पहाड़ कठिनाई नामक, एक खड़ी चढ़ाई के निकट पहुँचता है, “जिसके नीचे एक सोता था ... मसीही अब उस सोते तक गया और तरोताज़गी हेतु जल पीया, और तब पहाड़ पर चढ़ने लगा l”

शायद आपके लिए कठिन पहाड़ एक विद्रोही बच्चा या एक गंभीर चिकित्सीय रोग की पहचान हो सकती है l चुनौती आपके सहन से बाहर दिखती है l

अपने अगले मुख्य कार्य का सामना करने से पूर्व, तरोताज़गी के सोता परमेश्वर से मिलें l

अपने समस्त कमजोरी, थकान, बेकसी, भय और शंका के साथ उसके पास आएँ l तब उसकी

सामर्थ्य, ताकत, और बुद्धिमत्ता का पान करें l परमेश्वर आपकी समस्त परिस्थितियाँ जानता है और आत्मिक शक्ति और धैर्य का अत्यधिक सुख देगा l वह आगे बढ़ने हेतु आपके सिर को ऊँचा

करके सामर्थ्य देगा l

एक सुरक्षित स्थान

एक युवा जापानी समस्याग्रस्त था-वह अपने घर के बाहर जाने से डरता था l लोगों से दूर रहने के लिए, वह दिन में सोता था और पूरी रात टी.वी. देखते हुए जागता था l वह किकिकोमोरी  या आधुनिक सन्यासी था l  समस्या स्कूल में कम अंक लाने के कारण स्कूल छोड़ने से शुरु हुई l समाज से अधिक दूरी बनाकर, खुद को समाजिक रूप से अनुपयुक्त समझने लगा l आख़िरकार उसने अपने मित्रों और परिवार से बोलचाल बंद कर दिया l वह टोक्यो में इबासु- एक सुरक्षित स्थान जहाँ टूटे लोग पुनः समाज में लौट सकते हैं-नामक एक युवा क्लब में जाकर पुनः आरोग्य हो सका l

कैसा होता यदि हम कलीसिया को इबासु –और उससे अधिक समझते? शंका नहीं, हम टूटे लोगों का एक समाज हैं l पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया के पूर्व जीवन को समाज-विरोधी, हानिकारक, और खुद और दूसरों के लिए खतरनाक बताया (1 कुरिं. 6:9-10) l किन्तु यीशु में वे रूपांतरित और पूर्ण बन रहे थे l और पौलुस ने इन बचे हुए लोगों को परस्पर प्रेम करने, धीरज धरने और दयालु बनने, और ईर्ष्यालु अथवा अहंकारी या अशिष्ट नहीं बनने हेतु उत्साहित किया (13:4-7) l

चर्च को इबासु  बनाना है जहाँ सब, किसी भी संघर्ष या टूटेपन का सामना करते हुए, परमेश्वर और उसका प्रेम अनुभव करें l काश हम मसीहियों से यह दुखित संसार मसीह का अनुभव कर सके l

व्यवहारिक प्रेम

“क्या आपके पास कुछ है जो मैं धो सकती हूँ?” मैंने अपने घर में एक मेहमान से पूछा l उनका चेहरा खिल उठा, और उसने अपनी पुत्री से कहा, “अपने गंदे कपड़े ले आओ-एमी हमारे कपड़े धो देगी!” मैं मुस्कराई, यह जानते हुए कि मेरा पेशकश थोड़े वस्तुओं से बढ़कर कहीं अधिक हो गया है l

बाद में रस्सी पर कपड़े फैलाते समय, प्रातः बाइबिल पठन से एक वाक्यांश मेरे मस्तिस्क में आया : “दीनता से एक दूसरे को अपने से अच्छा समझो” (फिलि. 2:3) l मैं पौलुस की लिखी फिलिप्पियों की पत्री पढ़ रही थी, जिसमें उसने परस्पर सेवा और एकता में मसीह की बुलाहट के योग्य जीवन जीने का आह्वान किया l वे अत्याचार सह रहे थे, किन्तु पौलुस उनसे एक मन रहने को कहा l उसे मालूम था कि उनकी एकता मसीह के साथ रहने और परस्पर सेवा में प्रगट है, जिससे वह अपने विश्वास में ताकतवर रहेंगे l 

हम स्वार्थी इच्छा या व्यर्थ अहंकार के बगैर दूसरों से प्रेम करने का दावा कर सकते हैं, किन्तु व्यवहारिक प्रेम के बिना हमारे हृदय की वास्तविक दशा प्रगट नहीं होगी l यद्यपि मैंने कुड़कुड़ाना चाहा, मसीह का शिष्य होकर, मुझे अपने बुलाहट अनुसार अपना प्रेम मित्रों के सामने दर्शाना था-साफ़ हृदय से l

परमेश्वर की महिमा के लिए हम अपने परिवार, मित्रों, और पड़ोसियों की सेवा का अवसर खोजें l

शक्तिशाली विजेता

हममें से अधिक लोग अच्छे शासन की आशा से मत देते, सेवा करते, और उचित और न्याय-संगत कारणों से आवाज़ उठाते हैं l किन्तु अधिकतर राजनैतिक हल हमारे हृदयों की स्थिति परिवर्तन में असमर्थ हैं l

यीशु के अनेक अनुयायियों को एक छुड़ानेवाला चाहिए था जो रोम के निरंकुश शोषण का जोरदार राजनैतिक प्रतिउत्तर दे सके l पतरस ने इस प्रक्रिया में, रोमी सैनिकों द्वारा मसीह की गिरफ़्तारी के समय, तलवार से याजक के सेवक का कान उड़ा दिया l

यीशु ने एक-व्यक्ति जंग को यह कहकर रोका, “अपनी तलवार म्यान में रख l जो कटोरा पिता ने मुझे दिया है, क्या मैं उसे न पीऊँ?” (यूहन्ना 18:11) l  घंटो बाद, यीशु पिलातुस से बोल सकता था, “मेरा राज्य इस संसार का नहीं; यदि ... होता, तो मेरे सेवक लड़ते कि मैं यहूदियों के हाथ सौपा न जाता” (पद.36) l

प्रभु के जीवन के न्याय के समय, उसके उद्देश्य के विस्तार पर विचार करते उसका संयम हमें चकित करता है l एक दिन, वह युद्ध में स्वर्गिक सेना की अगुवाई करेगा l यूहन्ना ने लिखा, “वह धर्म के साथ न्याय और युद्ध करता है” (प्रका. 19:11) l

किन्तु अपनी गिरफ़्तारी, जांच, और क्रूसीकरण के आज़माइश में, यीशु अपने पिता की इच्छा पर केन्द्रित था l क्रूस पर मृत्यु द्वारा, उसने घटनाओं की एक कड़ी प्रतिपादित की जो हृदय बदलता है l और उस प्रक्रिया में, हमारा शक्तिशाली विजेता मृत्यु को पराजित किया l

प्रेम द्वारा मार्गदर्शन

अपनी पुस्तक स्पिरिचुअल लीडरशिप  में जे. ऑस्वाल्ड सैंडर्स युक्ति  और कूटनीति  के गुण एवं महत्त्व खोजता है l सैंडर्स कहते हैं, “इन दोनों शब्दों के मेल से अपकार और सिद्धांत में समझौता किये बगैर दो विपरीत विचारों के सामंजस्य के कौशल का विचार उभरकर आता है l”

पौलुस रोम में कैद के दौरान, उनेसिमुस नामक भगोड़े दास का आत्मिक सलाहकार और निकट मित्र बन गया, जिसका मालिक फिलेमोन था l पौलुस ने कुलुस्से की कलीसिया का अगुआ, फिलेमोन को पत्र लिखकर उनेसिमुस को मसीह में भाई मानकर स्वीकार करने का आग्रह करते समय, यक्ति और कूटनीति का उदहारण प्रस्तुत किया l “इसलिए यद्यपि मुझे मसीह में बड़ा साहस है कि जो बात ठीक है, उसकी आज्ञा तुझे दूँ l तौभी ... भला जान पड़ा कि प्रेम से विनती करूँ ... [उनेसिमुस] मेरा तो विशेष प्रिय है ही, पर अब शरीर में और प्रभु में भी, तेरा भी विशेष प्रिय हो” (फिले. 8-9, 16) l

आरंभिक कलीसिया का आदरणीय अगुआ, पौलुस यीशु के अनुयायियों को अक्सर स्पष्ट आदेश देता था l इस परिस्थिति में, यद्यपि, उसने फिलेमोन से समानता, मित्रता, और प्रेम के आधार पर आग्रह किया l “मैं ने तेरी इच्छा बिना कुछ भी करना न चाहा, कि तेरी यह कृपा दबाव से नहीं पर आनंद से हो” (पद.14) l

हम अपने सभी संबंधों में, प्रेम के भाव में तालमेल और सिद्धांत को बनाए रखने का प्रयास करें l

सचेत और सतर्क

मेरी मेज पड़ोस की ओर खुलनेवाली खिड़की के निकट है l मैं वहाँ से पक्षियों को निकट के पेड़ों पर बैठते हुए देख सकता हूँ l कुछ खिड़की की जाली में फंसे कीटों को खाने आती हैं l

पक्षी अपने आस-पास के तात्कालिक खतरे को जांचती और इधर-उधर देखकर ध्यानपूर्वक सुनती हैं l  खतरा न होने के निशिचय पश्चात ही वह चुगने को बैठती हैं l उसके बाद भी, आस-पास की जांच करने हेतु कुछ पल ठहरती हैं l

इन पक्षियों की सतर्कता मुझे स्मरण दिलाती है कि बाइबिल हम मसीहियों को सतर्कता का अभ्यास सिखाती है l हमारा संसार परीक्षाओं से पूर्ण है, और हमें निरंतर सचेत रहकर खतरों को नहीं भूलना है l आदम और हव्वा की तरह, हम आकर्षणों में फंसते हैं जिससे संसार की वस्तुएँ “खाने के लिए अच्छा, और देखने में मनभाऊ, और बुद्धि देने के लिए चाहने योग्य” लगती हैं (उत्प.3:6) l

पौलुस ने सावधान किया, “जागते रहो, विश्वास में स्थिर रहो” (1 कुरिं. 16:13) l और पतरस ने चिताया, “सचेत हो, और जागते रहो; क्योंकि तुम्हारा विरोधी शैतान गर्जनेवाले सिंह के सामान इस खोज में रहता है कि किस को फाड़ खाए” (1 पतरस 5:8) l

दैनिक ज़रूरतों के लिए मेहनत करते हुए, क्या हम बर्बाद करनेवाली बातों की ओर सचेत हैं? क्या हम अभिमान अथवा इच्छा की कोई झलक देखते हैं जो हमें हमारे परमेश्वर पर भरोसा करने की ओर उन्मुख करे?

मेरे निकट आओ

स्थानीय उद्यान में घूमते समय दो खुले कुत्तों से मेरे बच्चों का और मेरा सामना हुआ l उन मालिक ध्यान नहीं दे रहा था कि एक ने मेरे बेटे को डरना आरंभ कर दिया था l मेरे बेटे ने कुत्ते को भगाने की कोशिश की, किन्तु वह पशु उसे और भी परेशान करने लगा l

 मेरा बेटा घबरा गया l वह कई गज़ पीछे हटा, किन्तु कुत्ते ने उसका पीछा किया l वह कुत्ता मेरे चिल्लाने तक, “मेरे निकट आओ!,” मेरे बेटे का पीछा करता रहा l मेरा बेटा शांत होकर मेरे पीछे छिप गया, और अनन्तः कुत्ता कहीं और शैतानी करने चला गया l

हमारे जीवनों में ऐसे क्षण होते हैं जब परमेश्वर हमसे कहता है, “मेरे निकट आओ!” हमारे निकट कुछ परेशानी है l हम जितनी गति से और जितनी दूर भागते हैं, वह उतना ही हमारे अति निकट आता है l हम उससे छुटकारा नहीं पा सकते हैं l हम लौटने और उसका सामना स्वयं करने में अति भयभीत होते हैं l किन्तु वास्तव में हम अकेले नहीं हैं l परमेश्वर वहाँ हमें मदद और ढाढ़स देने हेतु मौजूद है l हमें मुड़कर उसकी ओर लौटना है l उसका वचन कहता है, “यहोवा का नाम दृढ़ गढ़ है , धर्मी उसमें भागकर सब दुर्घटनाओं से बचता है” (नीतिवचन 18:10) l

यह कभी खाली नहीं होता

सेवा निवृत होनेवाली एक मित्र से उनके जीवन के अगले पड़ाव के विषय पूछने पर वह बोली, “मुझे निश्चित करना होगा कि मेरे पास पैसा हो l” अगले दिन अपने वित्तीय सलाहकार से बातचीत करते समय उसने मुझे समझाया किस तरह मैं पैसे के अभाव से बच सकता हूँ l निःसंदेह, हम अपने बाकी जीवन की ज़रूरतों के लिए श्रोत…