नूतन हृदय चाहिए?
समाचार भयानक था l
मेरे पिता के सीने में दर्द हो रहा था, इसलिए डॉक्टर ने उनके हृदय की जांच-पड़ताल करने के लिए जांच का आदेश दिया l परिणाम? तीन रक्तवाहनियों में अवरोध(blockages) l
फरवरी 14 के लिए तिहरा-बाईपास सर्जरी निर्धारित किया गया l यद्यपि मेरे पिता घबराए हुए थे, उन्होंने उस दिन को एक आशापूर्ण संकेत की तरह देखा l “वैलेंटाइन डे के लिए मुझे एक नया हृदय मिलनेवाला है!” और उन्हें मिला! सर्जरी बिलकुल सफल रही, और उनके पीड़ादायक हृदय में जीवन-दायक रक्त प्रवाह पुनःस्थापित हो गया-उनका “नया” हृदय l
मेरे पिता की सर्जरी ने मुझे याद दिलाया कि परमेश्वर हमें भी नया जीवन देता है l इसलिए कि पाप हमारे आत्मिक “रक्तवाहनियों को अवरुद्ध कर देता है-परमेश्वर के साथ सम्बन्ध जोड़ने की हमारी योग्यता-हमें उनको साफ़ करने के लिए आत्मिक “सर्जरी” की ज़रूरत है l
यहेजकेल 36:26 में परमेश्वर अपने लोगों के लिए इसी की प्रतिज्ञा करता है l वह इस्राएलियों को आश्वास्त करता है, “मैं तुम को नया मन दूँगा. . . और तुम्हारी देह में से पत्धर का हृदय निकालकर तुम को मांस का हृदय दूँगा l” उसने यह भी प्रतिज्ञा किया, “मैं तुम को तुम्हारी सारी अशुद्धता . . . से शुद्ध करूँगा” (पद.25) और “अपना आत्मा तुम्हारे भीतर [दूँगा](पद.27) l ऐसे लोगों को जो आशाहीन हो गए हे, परमेश्वर ने उनके जीवनों को पुनः नूतन बनाने वाले के रूप में उनको एक नयी शुरुआत की प्रतिज्ञा दी l
वह प्रतिज्ञा आखिरकार यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान द्वारा पूरी हुयी l जब हम उसपर विश्वास करते हैं, हम एक नया आत्मिक हृदय पाते हैं, ऐसा हृदय जो हमारे पाप और निराशा से शुद्ध हो चुका है l मसीह की आत्मा से भरपूर, परमेश्वर की आत्मिक जीवनशक्ति के साथ हमारा नया हृदय धड़कता है, कि “उसी तरह हम भी एक नया जीवन जीयें” (रोमियों 6:4 हिंदी C.L.) l
सतर्क रहें!
मैं गर्म दक्षिणी शहरों में बड़ी हुयी, इसलिए जब मैं उत्तर में रहने लगी, मुझे लम्बे, बर्फीले महीनों के दौरान गाड़ी सुरक्षित चलाना सीखने में काफी समय लगा l मेरे पहले कठिन सर्दियों में, तीन बार बर्फ के टीले में फंस गयी! किन्तु कई वर्षों के अभ्यास के बाद, मैं सर्द स्थितियों में गाड़ी चलाने में आराम महसूस करने लगी l वास्तव में, मैं थोड़ा अधिक सहज महसूस करती थी l मैंने सावधान रहना छोड़ दिया l और ठीक उसी समय मैं बर्फ के गोले को मारते हुए सड़क के किनारे टेलीफोन पोल से टकरा गयी!
शुक्र है, किसी को चोट नहीं लगी, किन्तु उस दिन मैंने कुछ महत्वपूर्ण सीखा l मैंने जान लिया कि निश्चिन्त महसूस करना कितना खतरनाक हो सकता है l सचेत होने के स्थान पर, मैं “ऑटोपायलट (चेतनाशून्य)” हो गयी थी l
हमें अपने आत्मिक जीवन में भी उसी प्रकार की सतर्कता का अभ्यास करना होगा l पतरस विश्वासियों को चेतावनी देता है कि जीवन में बेध्यानी से न चले, परन्तु “सचेत रहें” (1 पतरस 5:8) l शैतान क्रियाशीलता से हमें नाश करने का प्रयास कर रहा है, और इसलिए हमें भी क्रियाशील रहना है, परीक्षा का सामना करना है और अपने विश्वास में दृढ़ रहना है (पद.9) l हालाँकि यह ऐसा कुछ नहीं है जो हमें अपनी ताकत से करना है l परमेश्वर हमारे दुःख में हमारे साथ रहने की और, आखिरकार, हमें “सिद्ध और स्थिर और बलवंत”(पद.10) बनाने की प्रतिज्ञा करता है l उसकी सामर्थ्य से, हम बुराई का सामना करने और उसका अनुसरण करने में सचेत और सावधान रहना सीखते है l
स्थितिपरक अभिज्ञता
हमारा परिवार, हम सब पांच लोग, क्रिसमस की छुट्टियों में रोम घूमने गए l मुझे याद नहीं कब मैंने कभी भी इससे अधिक लोगों को एक स्थान पर ठसाठस देखा है l जब हम भीड़ के बीच से मार्ग बनाते हुए निकलकर वैटिकन और कोलिज़ीयम जैसे दर्शनीय स्थलों को देखने गए, मैंने बार-बार अपने बच्चों से “स्थितिपरक अभिज्ञता”-ध्यान दें आप कहाँ हैं, कौन आपके आसपास है, और क्या हो रहा है-के अभ्यास पर बल दिया l हम ऐसे संसार में रहते हैं, देश और विदेश, जो सुरक्षित स्थान नहीं है l और मोबाइल फ़ोन और इअर बड्स(हेड फोन) का उपयोग करते हुए, बच्चे (और बड़े इस सम्बन्ध में) हमेशा अपने आसपड़ोस की जानकारी का अभ्यास नहीं करते हैं l
स्थितिपरक अभिज्ञता l फिलिप्पियों 1:9-11 में वर्णित फिलिप्पी के विश्वासियों के लिए यह पौलुस की प्रार्थना का एक पहलु है l उनकी परिस्थितियों के विषय कौन/क्या/कहाँ से सम्बंधित उसकी इच्छा उनके लिए सर्वदा-बढ़ता हुआ विवेक था l किन्तु व्यक्तिगत सुरक्षा के कुछ लक्ष्य की अपेक्षा, पौलुस एक श्रेष्ठ उद्देश्य के साथ प्रार्थना किया कि परमेश्वर के पवित्र लोग मसीह के प्रेम के अच्छे भंडारी बन सकें जो उन्होंने प्राप्त किया है, “सर्वोत्तम” को पहचाने, “पवित्र एवं निर्दोष” जीवन जीएँ, और भले गुणों से भर जाएँ जो केवल यीशु उत्पन्न कर सकता है l इस प्रकार का जीवन इस जागरूकता से निकलता है कि हमारे जीवनों में परमेश्वर ही वो है, और उसपर हमारा बढ़ता हुआ भरोसा ही है जिससे उसे प्रसन्नता मिलती है l और प्रत्येक और सभी परिस्थितियाँ ही हैं जहां हम उसके महान प्रेम की अधिकता में से साझा कर सकते हैं l
न समझाया जा सकने योग्य प्रेम
हमारी छोटी सी मण्डली ने मेरे पुत्र को उसके छटवें जन्मदिन पर उसे आश्चर्यचकित करने का निर्णय किया l कलीसिया के सदस्यों ने उसके सन्डे स्कूल क्लासरूम को गुब्बारों से सजाया और एक छोटे मेज़ पर एक केक रखा l जब मेरे बेटे ने दरवाजा खोला, सभी ने चिल्लाया, “जन्मदिन मुबारक!”
बाद में, जब मैं केक को काट रही थी, मेरा बेटा आकर मेरे कान में फुसफुसाया, “माँ, क्यों सभी लोग यहाँ पर मुझे प्यार करते हैं?” मेरे पास भी वही प्रश्न था! ये लोग हमें केवल छः महीने से जानते थे किन्तु हमसे ऐसा बर्ताव कर रहे थे जैसे बहुत समय से हम उनके मित्र थे l
मेरे पुत्र के लिए उनका प्रेम हमारे लिए परमेश्वर के प्रेम की झलक थी l हम नहीं समझ सकते वह क्यों हमसे प्रेम करता है, किन्तु वह करता है-और उसका प्रेम मुक्त भाव से दिया जाता है l हमने उसका प्रेम पाने के योग्य कुछ नहीं किया है, और फिर भी वह हमसे भरपूर रीति से प्रेम करता है l बाइबल हमसे कहती है : “परमेश्वर प्रेम है” (1 यूहन्ना 4:8) l यह परमेश्वर के व्यक्तित्व का एक भाग है l
परमेश्वर ने अपना प्रेम हमारे ऊपर इसलिए उंडेला है ताकि हम दूसरों के प्रति ऐसा ही प्रेम दिखा सकें l यीशु ने अपने शिष्यों से कहा, “जैसा मैं ने तुम से प्रेम रखा है, वैसा ही तुम भी एक दूसरे से प्रेम रखो l यदि आपस में प्रेम रखोगे, तो इस से सब जानेंगे कि तुम मेरे चेले हो” (यूहन्ना 13:34-35) l
हमारी छोटी कलीसिया समुदाय के लोग हमसे प्रेम करते हैं क्योंकि उनमें परमेश्वर का प्रेम है l वह उनमें से होकर चमकता है और यीशु के अनुयायियों के रूप में उनकी पहचान कराता है l हम पूरी तौर से परमेश्वर के प्रेम को समझ नहीं सकते हैं, किन्तु हम दूसरों पर उंडेल सकते हैं- न समझाया जा सकने योग्य उस प्रेम का नमूना बनकर l
उधार ली हुई आशीष
दोपहर के भोजन के समय, मेरे मित्र जेफ़ ने प्रार्थना की : “पिता, आपको धन्यवाद आपने हमें सांस लेने के लिए अपनी हवा और खाने के लिए अपना भोजन दिया है l” जेफ़ हाल ही में नौकरी छूटने की कठिनाई से गुज़रा था, इसलिए परमेश्वर में उसका भरोसा और स्वीकृति कि सब कुछ उसका है ने मुझे पूरी तरह प्रेरित किया l मैंने खुद को विचार करते हुए पाया : क्या मैं ईमानदारी से समझता हूँ कि मेरे जीवन में सबसे बुनियादी, दैनिक वस्तुएं भी वास्तव में परमेश्वर की ही हैं, और वह मुझे केवल उनका उपयोग करने दे रहा है?
जब राजा दाऊद यरूशलेम में मंदिर बनाने के लिए इस्राएलियों से भेंट स्वीकार किया, उसने प्रार्थना की, “मैं क्या हूँ और मेरी प्रजा क्या है कि हम को इस रीति से अपनी इच्छा से तुझे भेंट देने की शक्ति मिले? तुझी से तो सब कुछ मिलता है, और हम ने तेरे हाथ से पाकर तुझे दिया है l” उसके बाद उसने आगे उसमें जोड़ा, “सब तेरा ही है” (1 इतिहास 29:14, 16) l
बाइबल हमें बताती है कि “सम्पति प्राप्त करने की सामर्थ्य” और आजीविका भी उसी की ओर से मिलती है (व्यवस्थाविवरण 8:18) l यह समझ कि सब कुछ जो हमारा है उधार ही का है इस संसार की वस्तुओं पर हमारी पकड़ को ढीला करके खुले हाथों और हृदय से जीने में हमें प्रोत्साहित करता है-उदारतापूर्वक साझा करते हुए क्योंकि हम प्रतिदिन नेकियों के लिए बहुत ही धन्यवादित है l
परमेश्वर उदार दाता है-इतना प्रेमी कि उसने ”हम सब के लिए” अपना पुत्र भी दे दिया (रोमियों 8:32) l इसलिए कि हमें बहुत अधिक मिला है, काश हम भी सभी छोटी और बड़ी आशीष के लिए उसे ह्रदय को छू जाने वाला अपना धन्यवाद प्रेषित करें l
सबसे बड़ा उपहार
वर्षों से मेरी सहेली बारबरा ने मुझे अनगिनत (उत्साहवर्धक) कार्ड्स और विचारशील उपहार दिए हैं। जब मैंने उसे बताया कि मैंने यीशु को अपने उद्धारकर्ता के रूप में स्वीकार कर लिया है तो उसने मुझे अब तक का सबसे बड़ा उपहार दिया-मेरी पहली बाइबल। उसने कहा. “परमेश्वर से प्रतिदिन मिलने, पवित्रशास्त्र पढ़ने, प्रार्थना करने और उस पर भरोसा रखने और उसकी आज्ञा का पालन करने के द्वारा तुम परमेश्वर की नज़दीकी और आत्मिक परिपक्वता में बढ़ती जाओगी।” मेरा जीवन बदल गया जब बारबरा ने मुझे परमेश्वर को और अच्छे से जानने के लिए आमन्त्रित किया।
बारबरा मुझे प्रेरित फिलिप्पुस की याद दिलाती है। यीशु के फिलिप्पुस को उनके पीछे चलने के लिए आमन्त्रित करने के पश्चात (यूहन्ना 1:43), उस प्रेरित ने तुरन्त अपने मित्र नतनएल को बताया कि “जिस का वर्णन मूसा ने व्यवस्था में और भविष्यद्वक्ताओं ने किया है, वह हम को मिल गया; वह यूसुफ का पुत्र, यीशु नासरी है।” (पद 45) । जब नतनएल ने सन्देह किया, तो फिलिप्पुस से वाद-विवाद, आलोचना नहीं की या अपने मित्र के लिए हार नहीं मान ली। उसने अब उसे यीशु से साक्षात रूप में मिलने के लिए आमन्त्रित किया। उसने उससे कहा “चलकर देख ले।”
मैं फिलिप्पुस के आनन्द की कल्पना कर सकती हूँ, जब उसने नतनएल को यह कहते हुए सुना कि यीशु “परमेश्वर का पुत्र” और “इस्राएल का राजा” है (पद 49) । यह जानना कितनी बड़ी आशीष है कि उसका मित्र “बड़े बड़े कामों” को देखने से चूकेगा नहीं, जिनकी प्रतिज्ञा यीशु ने की थी कि वे उन्हें देखेंगे (पद 50-51)।
पवित्र आत्मा परमेश्वर के साथ हमारे घनिष्ठ सम्बन्ध का आरम्भ करते हैं और फिर उन सब में वास करते हैं, जो विश्वास के साथ उत्तर देते हैं। वह हमें उन्हें व्यक्तिगत रूप से जानने और अपने आत्मा और पवित्रशास्त्र के द्वारा प्रतिदिन उनसे मिलने के योग्य करते हैं। यीशु को और अच्छे से जानने का आमन्त्रण देने और लेने के लिए सबसे बड़ा उपहार है।
सृष्टिकर्ता और सम्भालने वाला
आवर्धक लैंस और चिमटी के साथ काम करते हुए, स्विस घड़ीसाज फिलिप्प ने सतर्कतापूर्वक मुझे बताया कि वह विशेष घड़ियों के छोटे-छोटे कलपुर्ज़ों को किस प्रकार निकालता, साफ़ करता और फिर से जोड़ता है। जटिल पुर्जों को देखते हुए फिलिप्प ने मुझे घड़ी के मुख्य पुर्जे, मुख्य स्प्रिंग, को दिखाया। मुख्य स्प्रिंग वह कलपुर्जा है, जो घड़ी को समय दिखाने के लिए सभी गरारियों को चलाता है और घड़ी को समय बताने में सहायता करता है। इसके बिना, अत्यधिक कुशलता से बनाई गई घड़ियाँ भी काम नहीं करेंगी।
नया नियम के एक सुन्दर पद्यांश में, जो इब्रानियों की पुस्तक में पाया जाता है, लेखक बहुत ही उत्तम रीति से यीशु की वह व्यक्ति होने के लिए प्रशंसा करता है जिसके द्वारा परमेश्वर ने आकाशमण्डल और पृथ्वी को बनाया था। एक विशेष घड़ी की जटिलता के समान हमारे आकाशमण्डल को यीशु ने बनाया है (इब्रानियों 1:2)। हमारे सौरमण्डल से लेकर हमारे ऊँगलियों के निशान तक, सभी वस्तुएँ उनके द्वारा ही बनाई गई हैं।
परन्तु एक सृष्टिकर्ता से अधिक, यीशु, एक घड़ी के एक मुख्य स्प्रिंग के समान सृष्टि के कार्य करने और फलने-फूलने के लिए जरूरी हैं। उनकी उपस्थिति “सब वस्तुओं को अपनी सामर्थ्य के वचन से” संभालती है (पद 3) और जो कुछ उसने बनाया है, उसे इसकी अद्भुत जटिलता में काम करते रहने के लिए बनाए रखता है।
आज जब आप सृष्टि की सुन्दरता का अनुभव करने का अवसर पाते हैं, तो याद रखें कि “सब वस्तुएँ उसी में स्थिर रहती हैं” (कुलुस्सियों 1:17)। प्रभु करे कि आकाशमण्डल को बनाने और सम्भालने में यीशु की मुख्य भूमिका का परिणाम एक आनन्द से भरा हुआ हृदय और एक प्रशंसा की एक प्रतिक्रिया हो, जब हम हमारे लिए उनकी लगातार उपलब्धता को पहचानते हैं।
चमकदार ज्योतियाँ
2015 के ग्रीष्मकाल में हमारी कलीसिया से एक समूह उस बात से बहुत ही गम्भीर हो गया, जो उन्होंने मैथरी, नैरोबी, केन्या, की एक गन्दी बस्ती में देखा। हम कच्ची भूमी के फ़र्श, जंग लगी इस्पात की दीवारों और लकड़ी के बैंच वाले स्कूल में गए। परन्तु बहुत ही गरीब परिदृश्य की पृष्ठभूमी में एक व्यक्ति असाधारण था।
उसका नाम ब्रिलियंट था, जो उसके लिए बिलकुल उपयुक्त था। वह एक प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका थी, जो आनन्द और दृढ निश्चय से भरी हुई थी, जो उसके कार्य के लिए सटीक थे। रंग-बिरंगी पौशाक पहने हुए, उसकी दिखावट और आनन्द, जिसके साथ वह वच्चों को पढ़ाती थी, हक्का-बक्का कर देने वाला था।
ब्रिलियंट अपने आस-पास के क्षेत्र में जो चमकदार ज्योति ले कर आई थी, वह उस रीति से मेल खाता है, जिस रीति से फिलिप्पी के मसीहियों को उनके जगत में रहने के लिए रखा गया था, जब प्रथम शताब्दी में पौलुस ने उनके लिए एक पत्री को लिखा था। आत्मिक जरूरत वाले जगत की पृष्ठभूमी के विपरीत, प्रभु यीशु में विश्वासियों को “जलते हुए दीपकों” के समान चमकना था (फिलिप्पियों 2:15)। हमारा कार्य बदला नहीं है। चमकदार ज्योतियों की हर जगह ज़रूरत है! यह जानना कितना उत्साहवर्धक है कि “अपनी सुइच्छा निमित्त तुम्हारे मन में इच्छा और काम, दोनों बातों के करने का प्रभाव डाला है” (पद 13), ताकि यीशु में विश्वासी उस रीति से चमक सकें, जिनके लिए यीशु का वह कथन मेल खाता है, जो उनके पीछे चलते हैं। वह हमें अभी भी यह कहता है तुम जगत की ज्योति हो. . . उसी प्रकार तुम्हारा उजियाला मनुष्यों के सामने ऐसा चमके कि वे तुम्हारे भले कामों को देखकर तुम्हारे पिता की, जो स्वर्ग में है, बड़ाई करें” (मत्ती 5:14–16)।
परमेश्वर के द्वारा घिरे
एक व्यस्त एयरपोर्ट पर एक युवा माता अकेली संघर्ष कर रही थी। उसका बच्चा बुरी तरह से चिढ़ा हुआ था-वह चिल्ला रहा था, पैर पटक रहा था और वायुयान पर चढ़ने से मना कर रहा था। घबराई हुई और गर्भवती बोझ से दबी उस युवा महिला ने हार मान ली, वह अपने चेहरे को ढक कर निराशा में फ़र्श पर ही बैठ गई थी,और उसने सुबकना शुरू कर दिया था।
अचानक ही सात महिला सहयात्रियों, सभी अजनबी, ने उस युवा महिला और उसके बच्चे के चारों ओर घेरा बना लिया और उनके साथ खाना पीना, पानी बाँटने लगे एक-दूसरे के गले लगने लगे और कुछ नर्सरी राईम्स भी गाने लगे। प्रेम से भरे उनके उस घेरे ने उस माता और बच्चे को शान्त कर दिया, जो फिर अपने वायुयान में चढ़ गए। वे महिलाएं फिर अपनी-अपनी सीट पर चली गईं, इस बात की परवाह कि उनके सहयोग ने एक युवा माता को बल प्रदान किया, जब उसे इसकी आवश्यकता थी।
यह भजन संहिता 125 के एक सुन्दर सत्य का उदाहरण प्रस्तुत करता है। “जिस प्रकार यरूशलेम के चारों ओर पहाड़ हैं” पद 2 बताता है, “उसी प्रकार यहोवा अपनी प्रजा के चारों ओर अब से लेकर सर्वदा तक बना रहेगा।” यह दृश्य हमें याद दिलाता है कि यरूशलेम कितनी हलचल वाला नगर था, जो वास्तव में पहाड़ों से घिरा था-जिनमें जैतून पर्वत और मौरियाह पर्वत शामिल थे।
उसी प्रकार परमेश्वर अपने लोगों को घेरे रखते हैं-हमारी आत्माओं का “सर्वदा” सहयोग और सुरक्षा करते हुए। इसलिए भजनकार लिखता है कि कठिन दिनों में “पर्वतों की ओर” आँखें लगाओ (भजन संहिता 121:1)। परमेश्वर प्रबल सहायता, स्थिर आशा और अनन्त प्रेम के साथ प्रतीक्षा करते हैं।