मेरे पिता को स्मरण करना
जब मैं अपने पिता को याद करता हूँ, तो मैंने उन्हें सबसे अच्छी रीति से हथौड़ा चलाते, बागबानी करते या सीढ़ियों के नीचे अव्यवस्थित कमरे में आकर्षक औजारों और यंत्रों के साथ देखता हूँ। उनके हाथ हमेशा किसी न किसी कार्य को पूरा करने में लगे होते थे-कुछ न कुछ बनाना (कोई गैरेज या एक छत या एक चिड़िया के लिए घर), कईबार ताले ठीक करना और कईबार आभूषण बनाना या शीशे की कलाकृति करना।
मेरे पिता को स्मरण करना मुझे मेरे स्वर्गीय पिता और सृष्टिकर्ता के बारे में सोचने के लिए प्रेरित करता है, जो सर्वदा से ही कार्य करने में व्यस्त रहे हैं। आदि में, “[परमेश्वर] ने पृथ्वी की नींव डाली. . .उस पर किसने सूत खींचा . . . जब कि भोर के तारे एक संग आनन्द से गाते थे और परमेश्वर के सब पुत्र जयजयकार करते थे” (अय्यूब 38:4–7)। जो कुछ भी उन्होंने बनाया वह एक कला, एक सर्वोत्तम कृति थी। उन्होंने एक विस्मयकारी सुन्दर संसार की सृष्टि की और इसे “बहुत अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:31)।
उसमें आप और मैं भी शामिल हैं। परमेश्वर ने हमें भयानक और अद्भुत रीति से रचा है (भजन संहिता 139:13–16); और उसने हमें एक लक्ष्य और कार्य करने का एक लक्ष्य प्रदान किया है, जिसमें इस पृथ्वी पर अधिकार रखना और इसके जीव-जन्तुओं की देखभाल करना शामिल है (उत्पत्ति 1:26–28; 2:15) । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हम क्या काम करते हैं-हमारे काम में या हमारे आराम में-परमेश्वर हमें सामर्थ प्रदान करता है, जिसकी हमें पूरे दिल के साथ उसके लिए कार्य करने के लिए आवश्यक होती है। जो कुछ भी हम करें, परमेश्वर करे कि वह उन्हें प्रसन्न करने के लिए हो।
रुई का रोआं और दूसरी चीज़ें
विन्नी द पू का एक प्रसिद्ध कथन है “जिस व्यक्ति से आप बात कर रहे हैं, यदि वह सुनता हुआ प्रतीत नहीं हो रहा हो तो धैर्यवान बने रहें। यह भी हो सकता है कि उसके कान में रुई का एक रोआं हो।
वर्षों से मैंने सीखा है कि विन्नी कुछ कर रहा है। जब कोई आपको नहीं सुनता, यद्यपि आपकी सलाह को सुनना उनके लिए हितकर होगा, तो हो सकता है कि उनकी चुप्पी उनके कान में एक रुई के रोएँ से अधिक और कुछ न हो। या हो सकता है कि कोई और बाधा हो। कुछ लोगों के (लिए) सुनना बहुत ही कठिन होता है, क्योंकि वे अन्दर से टूटे हुए और निरुत्साहित होते हैं।
मूसा ने कहा कि उसने इस्राएल के लोगों से बात की परन्तु उन्होंने नहीं सुना क्योंकि उनकी आत्माएँ दुखी और उनका जीवन कठिन था (निर्गमन 6:9) । इब्रानी लेख में निरुत्साह शब्द का शब्दशः अर्थ “साँस का फूलना” होता है, जो मिस्र में उनके दासत्व का परिणाम था। उस परिस्थिति में, इस्राएल का मूसा के समझ और दया के निर्देशों को सुनने के लिए इच्छा न रखना, क्या निन्दा करने के योग्य नहीं है।
जब दूसरे लोग हमारी बात को नहीं सुनते, तब हमें क्या करना चाहिए? विन्नी द पू के शब्द बुद्धि से परिपूर्ण हैं: “धैर्यवान रहो। परमेश्वर कहते हैं, “प्रेम धैर्यवान है, प्रेम दयालु है” (1 कुरिन्थियों 13:4); वह प्रतीक्षा करने की इच्छा रखता है। उसका उस व्यक्ति में काम अभी समाप्त नहीं हुआ है। वह उनके दुःख में, हमारे प्रेम, हमारी प्रार्थनाओं के द्वारा उनमें काम कर रहा है। शायद, अपने समय में, वह सुनने के लिए उनके कानों को खोल देगा। धैर्यवान बने रहें।
आशीष आ रही है
मेरी एक सहेली और मैं उसके नाती-पोतों के साथ घूमने के लिए गए। स्टॉलर(बच्चे की गाड़ी) को धकेलते हुए, उसने कहा कि उसके कदम बेकार हो रहे थे-क्योंकि वे उनकी गतिविधि पर नज़र रखने वाले यंत्र के द्वारा गिने नहीं जा रहे थे, जो उन्होंने अपनी कलाई पर पहना हुआ था, ऐसा इसलिए हो रहा था क्योंकि वह अपने हाथ को हिला नहीं रही थी। मैंने उसे याद दिलाया कि वे कदम अब भी उसकी शारीरिक सेहत को सुधार रहे थे। “हाँ,” वह हँसी। “परन्तु मुझे सच में वह सोने का सितारा चाहिए था!”
मैं समझ सकती हूँ वह कैसा अनुभव कर रही थी! तुरन्त मिले परिणामों के बिना कोई काम करना दिल को दुखाने वाला होता हैI परन्तु प्रतिफल हमेशा तुरन्त नहीं मिलते या तुरन्त ही दिखाई नहीं देते।
जब ऐसा होता है, तो यह महसूस करना सरल होता है कि जो भली बातें हम करते हैं, वे अनुपयोगी हैं, चाहे वह एक मित्र की सहायता करना या किसी अजनबी पर दया दिखाना ही हो। पौलुस ने गलतिया की कलीसिया को समझाया कि “मनुष्य जो कुछ बोता है वही काटेगा”(गलातियों 6:7)। परन्तु आवश्यक है कि हम “हम भले काम करने में साहस न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे” (पद 9)। भला करना उद्धार प्राप्त करने का मार्ग नहीं है, और न ही यह पद बताता है कि जो कटनी हम करेंगे वह अभी होगी या स्वर्ग में होगी, परन्तु हम इस बात का निश्चय कर सकते हैं कि “वह एक आशीष की कटनी होगी” (6:9)।
भला कार्य करना कठिन होता है, विशेष रूप से तब जब हम नहीं देखते या जानते कि वह “कटनी” क्या होगी। परन्तु मेरी उस सहेली की तरह, जिसे उस दिन घूमने से शारीरिक लाभ तो प्राप्त हो गया था, तो भला करना जारी रखना उत्तम है क्योंकि आशीष आ रही है!
आत्मा में गाना
आरम्भिक बीसवीं शताब्दी के वेल्श पुनर्जागरण के दौरान बाइबल के शिक्षक और लेखक जी. कैम्पबैल मॉर्गन ने उसका उल्लेख किया जो उन्होंने देखा था। उन्होंने विश्वास किया कि “पवित्र भजनों की लहरों” पर परमेश्वर के पवित्र आत्मा की उपस्थिति थी। मॉर्गन ने लिखा कि उन्होंने सभाओं में संगीत के एकत्र करने वाले प्रभाव को देखा है, जिसने स्वेच्छा से प्रार्थना करने, अंगीकार करने और स्वैच्छिक गायन करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यदि कोई भावनाओं में बह गया और बहुत देर तक प्रार्थना की या उस तरह से बात की जो दूसरों की समझ में नहीं आती है, तो कोई धीमे से गाना शुरू कर देता था। दूसरे लोग धीमे से उसके साथ शामिल हो जाते थे, उस गीत के स्वर तब तक बढ़ते जाते थे, जब तक वे दूसरी अन्य समस्त आवाजों को दबा न दें।
जिस गीत के नया किए जाने का उल्लेख मॉर्गन करते हैं, उसकी पवित्रशास्त्र में एक कहानी है, जिसमें संगीत एक मुख्य भूमिका निभाता है। संगीत का प्रयोग विजय का आनन्द मनाने (निर्गमन 15:1–21); मन्दिर के आराधनामय समर्पण में (2 इतिहास 5:12–14); और सैन्य रणनीति बनाने के एक हिस्से के लिए किया जाता था (20:21–23)। बाइबल के मध्य में हम एक पुस्तक को पाते हैं (भजन संहिता 1–150)। और पौलुस के इफिसियों के लिए नया नियम के पत्र में हम आत्मा में जीवन के उल्लेख को पढ़ते हैं : “और आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया करो” (इफिसियों 5:19)।
इसके विपरीत, आराधना में, सम्पूर्ण जीवन में, हमारे विश्वास का संगीत हमारी आवाज़ को खोजने में सहायता कर सकता है। पुरानी और नई धुनों से हम बार-बार नए किए जाते हैं, न तो बल से और न ही शक्ति से परन्तु हमारे परमेश्वर के आत्मा और गीतों के द्वारा।
बादलों के द्वारा अस्पष्ट
नवम्बर 2016 में एक विचित्र चन्द्रमा दिखाई दिया था-अपनी कक्षा में चन्द्रमा साठ साल में पृथ्वी के सबसे निकटम बिन्दू पर पहुँच गया था और यह पहले से बड़ा और चमकदार दिखाई दिया। परन्तु मेरे लिए उस दिन आकाश स्लेटी रंग से ढका हुआ था। यद्यपि मैंने इस चमत्कार की दूसरे स्थानों पर मेरे मित्रों के द्वारा ली गई तस्वीरों को देखा और जब मैंने ऊपर देखा तो मुझे उस समय भरोसा करना था कि वह अद्भुत चन्द्रमा उन बादलों के पीछे छिप कर इन्तजार कर रहा था।
प्रेरित पौलुस ने कुरिन्थुस की कलीसिया से कठिनाइयों में अनदेखे, परन्तु सर्वदा तक बने रहने वाले, पर विश्वास करने के लिए आग्रह किया। उसने कहा उनकी “क्षणिक कठिनाइयाँ” किस प्रकार “एक अनन्त महिमा” को प्राप्त कर सकती हैं (2 कुरिन्थियों 4:17) । इसलिए उन्होंने अपनी आँखें “उस पर नहीं लगाई, जो दिखाई दे रहा था, अपितु उस पर जो दिखाई नहीं दे रहा था,” क्योंकि जो दिखाई नहीं दे रहा है, वह अनन्त है, (पद 18) । पौलुस ललायित था कि कुरिन्थुस के लोग विश्वास में बढ़ें और यद्यपि उन्होंने दुःख उठाया, फिर भी वे परमेश्वर पर भरोसा रखें। हो सकता है वे उन्हें देखने के योग्य न हों, परन्तु वे विशवास कर सकते थे कि वह उन्हें दिन-ब-दिन नया कर रहे थे (पद 16)।
मैंने विचार किया कि परमेश्वर किस प्रकार अनदेखा परन्तु अनन्त है, जब मैंने उस दिन बादलों में से देखा, तो मैं इस बात को जानती थी कि वह चन्द्रमा छिपा हुआ तो है, परन्तु वह वहीं है। और मैंने विचार किया कि जब अगली बार यह विश्वास करने की परीक्षा में हूँगी कि परमेश्वर मुझ से दूर है, तब मैं अपनी आँखें उस पर लगाऊँगी जो अनदेखा है।
गलतियों के बोझ को वहन करना
जनवरी 30, 2018 को अपने लगभग तीस साल के कारावास के पश्चात मल्कोम एलेक्जेंडर एक आज़ाद व्यक्ति के रूप में कारावास से बाहर निकले। डीएनए के प्रमाणों ने एलेक्जेंडर को मुक्त करवा दिया, जिसने कोर्ट की असंख्य कार्यवाहियों, जो बुरी तरह से अन्ययापूर्ण थीं, के दौरान उनकी निर्दोषता को बनाए रखा। एक अयोग्य सुरक्षा अधिकारी (जिसे बाद में उसके पद से हटा दिया गया) नकली प्रमाणों, और सन्देहात्मक जाँच ने एक निर्दोष व्यक्ति को लगभग चार दशकों तक कारावास में रखवा दिया था। अंततः जब उन्हें छोड़ा गया, फिर भी एलेक्जेंडर ने अत्यधिक दया दिखाई। “आप क्रोधित नहीं हो सकते,” उन्होंने कहा। “क्रोधित होने के लिए पर्याप्त समय ही नहीं है।”
एलेक्जेंडर के शब्द बहुत ही गहन अनुग्रह का प्रमाण प्रस्तुत करते हैं। यदि अन्याय ने हमारे जीवन के अड़तीस वर्षों को लूट लिया और हमारी प्रसिद्धि को बर्बाद कर दिया, तो हमारा क्रोध से जल उठना सम्भव है। परन्तु एलेक्जेंडर ने दिल को तोड़ देने वाले वर्ष गलतियों के उस बोझ को वहन करते हुए बिताए, जो उनपर डाला गया था, परन्तु वह बुराई के द्वारा परास्त नहीं किए गए थे। प्रतिशोध लेने के लिए अपनी उर्जा लगाने के स्थान पर उन्होंने वह अपनाया जिसका निर्देश हमें पतरस देता है: “बुराई के बदले बुराई मत करो और न गाली के बदले गाली दो” (1 पतरस 3:9)।
पवित्रशास्त्र एक कदम आगे जाता है: प्रतिशोध लेने के स्थान पर, प्रेरित पतरस हमें बताता है कि हम आशीष देने के लिए हैं (पद 9) । हम उन लोगों के लिए क्षमा और भलाई की आशा प्रदान करते हैं, जिन्होंने अन्यायपूर्ण रीति से हमारे साथ गलत किया है। उनके बुरे कामों का बहाना बनाए बिना, हम उनके साथ परमेश्वर की चौंका देने वाली दया के साथ मिल सकते हैं। यीशु ने क्रूस पर हमारी गलतियों का बोझ उठा लिया, ताकि हम अनुग्रह प्राप्त कर सकें और इसे दूसरों को भी दिखा सकें-यहाँ तक कि उन्हें भी जिन्होंने हमारे साथ गलत किया है।
आपके लिए हाथ का बना
मेरी दादी एक कुशल दर्जिन थीं जिन्होंने अपने स्थानीय नगर टेक्सस में अनेक प्रतियोगिताएँ जीती थीं। मेरे सम्पूर्ण जीवन में अपने हाथ से सिले गए उपहारों से उन्होंने अनेक विशेष अवसर प्रदान किए। मेरे माध्यमिक स्कूल में उतीर्ण होने पर गहरे जामुनी रंग की महीन चिकने ऊन से बनी हुई एक स्वेटर। मेरे विवाह के लिए फिरोज़ी रजाई। मैं प्रत्येक हाथ से बनाई हुई चीज़ का एक कोना उनके हस्ताक्षर वाली पट्टी देखने लिए मोड़ती थी, जिसपर यह लिखा होता था, “मुन्ना के द्वारा आपके लिए हाथ से बनाया गया।” बुने हुए प्रत्येक शब्द के साथ मैंने मेरे लिए मेरी दादी के प्रेम का अहसास किया और मेरे भविष्य के लिए उनके विशवास का एक सामर्थी वाक्य प्राप्त किया।
पौलुस ने इफिसियों को उनके इस संसार में होने के उद्देश्य को दिखने के लिए लिखा, उन्हें “उसके बनाए हुए...और मसीह यीशु में उन भले कामों के लिए सृजे गए” बताया (2:10)। यहाँ “उसके बनाए गए” कला या उत्कृष्ट कृति के एक कार्य की ओर संकेत करता है। पौलुस आगे उल्लेख करना जारी है कि हमें बनाने में परमेश्वर की हस्तकला का परिणाम हमारे संसार में परमेश्वर की महिमा के लिए हमारे द्वारा भले कामों-या यीशु के साथ हमारे पुनर्स्थापित सम्बन्ध का प्रकटन-का करना होगा। हम अपने भले कामों से कदापि नहीं बचाए जा सकते, परन्तु जब परमेश्वर का हाथ हमें अपने उद्देश्य के लिए बनाता है, तो वह दूसरों को अपने महान प्रेम की ओर लाने में हमें इस्तेमाल कर सकता है।
सूई पर अपने झुके हुए सर के साथ मेरी मुन्ना के हाथ से बनी चीज़ें मेरे प्रति उनके प्रेम और उनके इस जोश को प्रदर्शित करते हैं कि मैं इस गृह पर अपने उद्देश्य को समझ लूंगी। और उनकी ऊँगलियाँ मेरे दिन की घटनाओं को आकार देती हैं, परमेश्वर उनके प्रेम और उद्देश्य को हमारे हृदयों के साथ सिल देता है ताकि हम अपने लिए उन्हें अनुभव कर सकें और उनकी हस्तकला का दूसरों पर प्रदर्शन कर सकें।
विलाप से आराधना की ओर
किम ने 2013 में स्तन कैंसर के साथ संघर्ष करना आरम्भ किया था। उसके उपचार के समाप्त होने के चार दिनों के पश्चात, चिकित्सकों ने उसे लगातार बढ़ रहे फेफड़ों के रोग से ग्रस्त बताया और उसे तीन से पाँच साल और जीने का समय दिया। वह बहुत दुखी हुई और पहले साल अपनी भावनाओं के साथ उसने रो-रोकर परमेश्वर से प्रार्थना की। 2015 में जब मेरी मुलाकात किम के साथ हुई, तब तक उसने अपनी परिस्थिति को परमेश्वर के हाथों में सौंप दिया था और दूसरों पर असर डालने वाला आनन्द और शान्ति प्राप्त कर ली थी। यद्यपि कुछ दिन बहुत ही कठिन होते हैं, फिर भी जब वह दूसरों को प्रोत्साहित करती थी तो परमेश्वर उसके दिल दहला देने वाले दुःख को आशा से भरी हुई स्तुति की सुन्दर गवाही में बदलते रहे।
यद्यपि जब हम भयानक परिस्थितियों में होते हैं, परमेश्वर हमारे विलाप को आनन्द के नृत्य में बदल सकता है। यद्यपि उनकी चंगाई सर्वदा दिखाई या अनुभव नहीं होती, जिसकी हम आशा करते हैं, परन्तु फिर भी हम परमेश्वर के कार्यों पर दृढ विश्वास कर सकते हैं (भजन संहिता 30:1–3) । इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि हमारा मार्ग कितना भी ऊबड़-खाबड़ प्रतीत हो, हमारे पास उनकी स्तुति करने के अनगिनत कारण हैं (पद 4)। हम परमेश्वर में आनन्द मना सकते हैं, जब वह हमारे विश्वास को स्थिर रखता है (पद 5–7) । हम उसकी दया के लिए दोहाई दे सकते हैं (पद 8–10), और उस आशा से आनन्द मना सकते हैं जो वह अनेक विलाप करते आराधकों के लिए ले कर आता है। मात्र परमेश्वर ही निराशा के विलाप को गुंजायमान आनन्द में बदल सकता है, जो किसी परिस्थिति पर निर्भर नहीं होता है (पद 11–12)।
जब हमारा करुणामयी परमेश्वर हमारे दुःख में हमें आराम प्रदान करता है, तो वह हमें शान्ति से भर देता है और हमें अपने आप और दूसरों के लिए दया दिखाने की सामर्थ प्रदान करता है। हमारा प्रेमी और विश्वासयोग्य प्रभु हमारे विलाप को आराधना में बदल सकता और बदलता है, जो हमारे दिल को गहन भरोसे, स्तुति या आनन्द से परिपूर्ण नृत्य में बदल सकता है।
मोम्मा द्वारा प्रभावित
उनका नाम लम्बा था परन्तु उनकी आयु और भी लम्बी थी। मेडलिन हैरियट ओर्र जैक्सन विलियम्स अपने दो पतियों से अधिक 101 वर्ष तक की आयु तक जीवित रही। उनके दोनों पति प्रचारक थे। मेडलिन मेरी दादी थीं और हम उन्हें मोम्मा के रूप में जानते थे। मेरे भाई-बहन और मैं उन्हें बहुत अच्छे से जानते थे; हम तब तक उनके घर पर ही रहे जब तक उनका दूसरा पति उन्हें हम से चुपके से दूर नहीं ले गया। फिर भी वह हम से पचास मील से कम की दूरी पर ही थीं। हमारी दादी भजन-गायक, धार्मिक मौलिक शिक्षा सुनाने वाली, पियानोवादक और परमेश्वर का भय मानने वाली महिला थीं और मेरे भाई-बहनों और मुझ पर उनके विश्वास का प्रभाव स्पष्ट दिखाई देता है।
2 तीमुथियुस 1:3–7 के अनुसार तीमुथियुस की नानी लोइस और उसकी माता युनीके का उसके जीवन पर बहुत अधिक प्रभाव था। उनके जीवन और शिक्षा की जड़ें पवित्रशास्त्र की मिट्टी की गहराई तक गईं हुई थी (पद 5; 2 तीमुथियुस 3:14–16) और उनका विश्वास तीमुथियुस के हृदय में फल-फूल रहा था। पवित्रशास्त्र पर आधारित उसका पालन-पोषण न केवल परमेश्वर के साथ उसके सम्बन्ध के लिए बुनियादी था, परन्तु यह प्रभु की सेवा में भी उसकी उपयोगिता के लिए सुस्पष्ट था। (1:6–7)।
आज और इसके साथ-साथ तीमुथियुस के समय में (भी) परमेश्वर विश्वासयोग्य महिलाओं और पुरुषों को आने वाली पीढ़ियों को प्रभावित करने के लिए प्रयोग करता है। हमारी प्रार्थनाएँ, शब्द, कार्य और सेवा प्रभु के द्वारा सामर्थी रूप से प्रयोग किए जा सकते हैं, जब तक कि हम जीवित हैं या हमारे चले जाने के पश्चात। इसीलिए मेरे भाई-बहन और मैं उन बातों का पुनराभ्यास करते हैं जो हमें मोम्मा के द्वारा दी गई थीं। मेरी प्रार्थना यही है कि मोम्मा की मीरास हमारे साथ ही समाप्त न हो।