स्काई गार्डन
जब मैं लंदन में था तो एक मित्र ने मेरी पत्नी मार्लीन और मेरे लिए स्काई गार्डन की यात्रा की व्यवस्था की। यह गार्डन पैंतीस मंजिला इमारत की छत पर बना है जिसका ढांचा (छत और दीवारें) कांच की हैं और वहां पौधे, पेड़ और फूल हैं। वहां 500 फीट की ऊंचाई से नीचे देखते हुए हम सेंट पॉल कैथेड्रल, टॉवर ऑफ लन्दन, और अन्य दृश्यों की सराहना कर रहे थे। यह लुभावना दृश्य हमारे देखने के नजरिए पर एक उपयोगी सबक दे रहा था।
परमेश्वर हमारे हर अनुभव को अपने नज़रिए से देखते हैं। भजनकार ने लिखा, "क्योंकि यहोवा ने अपने ऊंचे और पवित्र स्थान से दृष्टि ...; "(भजन संहिता 102:19-20 )
भजन संहिता 102 में वर्णित लोगों के समान, हम भी अक्सर निराशा से "तड़पते हुए" अपने संघर्षों के साथ वर्तमान में कैद हो जाते हैं, ऐसा संभव नही कि परमेश्वर न जानते हों कि हमारेजीवन में क्या होने वाला है। जैसे भजनकार ने आशा की, कि परमेश्वर का नज़रिया ऐसा छुटकारा देगा जो अंत में “घात होन वालों: को भी छुड़ा लेगा" (पद 20, 27-28)।
कठिन क्षणों में, याद रखें: भले ही आगे होने बातों की हमें जानकारी न हो, परन्तु हमारे परमेश्वर को निश्चय है। हम हर आने वाले क्षण के लिए उन पर भरोसा कर सकते हैं।
यीशु ने थाम लिया
कभी-कभी जीवन व्यस्त होता है-कक्षाएं कठिन और काम थकाऊ लगते हैं, बाथरूम साफ करना, और किसी से मिलने जाना। मैं इतनी व्यस्त हो जाती हूँ कि कुछ मिनट बाइबिल पढ़ने के लिए खुद को मजबूर करती हूँ, फिर खुद से वादा करती हूं कि अगले सप्ताह परमेश्वर के साथ अधिक समय बिताऊँगी। परन्तु ध्यान भटक जाता है, दिनभर काम से भरा रहता है, और परमेश्वर से मदद मांगना याद नहीं रहता।
जब पतरस यीशु के पास जाने को पानी पर चलने लगा, तो जल्द ही हवा और लहरों से डर गया। मेरी तरह वह डूबने लगा (मत्ती 14:29-30) पतरस के पुकारते ही "यीशु ने तुरन्त..." (पद 30-31)।
लगता है कि इस तरह व्यस्त रहने की और परमेश्वर की ओर से ध्यान भटकाने की भरपाई करने के लिए मुझे परमेश्वर के लिए कुछ करना पड़ेगा। परन्तु परमेश्वर ऐसे कार्य नहीं करते। जैसे ही हम सहायता के लिए उनके पास जाते हैं, यीशु तुरंत थाम लेते हैं।
जीवन की भाग-दौड़ जब हमें भटकाती हैं, तो हम सहज ही भूल जाते हैं कि हमारे तूफान के बीच परमेश्वर हमारे साथ हैं। यीशु ने पतरस से पूछा, "तू ने क्यों...?" (पद 31) हम चाहे जिस स्थिति से गुजर रहे हों, वह यहीं हैं। वह हर क्षण हमारे साथ हैं, हमें थाम कर बचाने के लिए तैयार हैं।
मन की भूख
जब मैं अपने पति के साथ कुछ काम से बाहर थी तब फोन पर उस मिठाई की दुकान के विज्ञापन का ईमेल को देख कर हैरान थी, जिसे हमने अभी पार ही किया था। अचानक मेरे पेट से चूहे दौड़ने लगे। मैं हैरान थी कि दुकानदार अपने सामानों से हमें लुभाने के लिए टेक्नालजी का कैसे प्रयोग करते हैं।
विज्ञापन बंद कर मैं सोचने लगी कि किस प्रकार परमेश्वर मुझे अपनी निकटता का अहसास देते हैं। उन्हें हमेशा पता होता है कि मैं कहां हूं और मुझे क्या पसंद है। मैं सोचने लगी कि, क्या मेरा मन परमेश्वर के लिए इतना ही भूखा है जितना मेरा पेट खाने के लिए?
यूहन्ना 6 में, पांच हजार को खिलाने के आश्चर्यकर्म के बाद, चेलों ने बेसब्री से यीशु से सर्वदा "जीवन देने वाली रोटी उन्हें देने को कहा" (पद 33-34)। पद 35 में यीशु ने उत्तर दिया, "जीवन की रोटी...।" कितनी अद्भुत बात है कि यीशु के साथ संबंध होना हमारे रोजमर्रा के जीवन में लगातार पोषण प्रदान कर सकता है!
विज्ञापन का लक्ष्य मेरे मेरे पेट की भूख को जगाना था, परन्तु परमेश्वर का मेरे मन की स्थिति को निरंतर जानना मुझे बाध्य करता है कि मैं समझ सकूं कि मुझे उनकी जरूरत है और वह मन्ना पाऊँ जिसे केवल वो दे सकते हैं।
प्रभु बोलते हैं
दुनिया में दुख क्यों है इसपर लगभग प्रत्येक तर्क हमें अय्यूब की पुस्तक में मिल जाएगा, परन्तु तर्क करना अय्यूब की मदद नहीं करता। उसका संकट संदेह से बढ़कर है-संबंधों का। क्या वह परमेश्वर पर भरोसा कर सकता है? सब से बढ़कर अय्यूब चाहता है: ऐसा कोई जो उसके दुर्भाग्य का कारण बता सके। वह परमेश्वर से स्वयं मिलना चाहता है, आमने-सामने।
अंततः, परमेश्वर स्वयं अय्यूब से मिलते हैं (अय्यूब 38:1)। जब एलीहू विस्तार से अय्यूब को समझा रहा था कि उसे परमेश्वर से मिलने की इच्छा करने का अधिकार क्यों नहीं है तभी परमेश्वर आते हैं।
न तो अय्यूब-नाही उसका कोई मित्र- उसके लिए तैयार है जो परमेश्वर कहने जा रहे हैं। अय्यूब के प्रश्नों की सूची लंबी थी, परन्तु प्रश्न पूछने वाले परमेश्वर हैं, अय्यूब नहीं। आरंभ करते हुए वह कहते हैं "पुरुष की नाईं अपनी...(पद 3) "। दुख की समस्या पर पैंतीस अध्यायों तक चलने वाली बहस के उत्तर में, परमेश्वर प्राकृतिक संसार में बसे चमत्कारों पर एक भव्य कविता कहते हैं।
परमेश्वर का वचन सृष्टि के रचयिता और अय्यूब जैसे निर्बल व्यक्ति के बीच के विशाल अंतर को परिभाषित करता है। उनकी उपस्थिति अय्यूब के सबसे बड़े प्रश्न का उत्तर देती है: क्या कोई है? अब अय्यूब केवल यही कह सकता है, "परन्तु मैं ने तो..." (42:3) "।
रैपिड्स पर सवारी
नदी के किनारे पहुंच कर राफ्टिंग गाइड ने हमारे समूह को लाइफ जैकेट पहनने और पतवार पकड़ने के निर्देश दिए। नदी में आने वाले रैपिड्स (क्षिप्रिकाओं) का सामना करते समय स्थिरता बनाए रखने के लिए उसने नौका पर हमरी सीटें बांट लीं। आगे की जलयात्रा के रोमांच और चुनौतियों के बारे में बता कर, उसने निर्देशों को विस्तार से समझाया जिसे हमारा ध्यानपूर्वक सुनना जरूरी था-ताकि हम प्रभावी तरीके से नाव नियंत्रित कर सकें। उसने आश्वासन दिया कि हालांकि तनावपूर्ण क्षण होंगे, हमारी जलयात्रा रोमांचकारी और सुरक्षित दोनों होगी।
कभी-कभी जीवन एक रिवर राफ्टिंग की तरह होता है, जिसमें अपेक्षा से अधिक रैपिड्स आते हैं। जब समय सबसे बुरा लगे, तो यशायाह द्वारा इस्राएल को दिए परमेश्वर का वादा हमारी भावनाओं का मार्गदर्शक कर सकता है: "जब तू जल में हो कर..." (यशायाह 43:2)। पाप के परिणामस्वरूप जब इस्राएलियों को निर्वासित होना पड़ा, उन्हें परमेश्वर द्वारा त्यागे जाने का भय था। पर इसके बजाय उन्होंने उन्हें आश्वासन दिया और उनसे अपने प्रेम के कारण उनके साथ रहने का वादा किया (2-4)।
बुरे समय में परमेश्वर हमें छोड़ते नहीं हैं। जब हम-भय से और पीड़ादायक परेशानियों से-गुजरते हैं तो मार्गदर्शन के लिए हम उन पर भरोसा कर सकते हैं-क्योंकि वह हमसे भी प्रेम करते हैं और हमारे साथ रहने का वादा करते हैं।
समय का उपहार
पोस्ट ऑफिस जाते हुए मैं जल्दी में था। मेरी लिस्ट में लिखे कई काम करने बाकि थे, परन्तु घुसते ही वहां दरवाजे तक लंबी लाइन देखकर मैं हताश हो गया। घड़ी देखकर मैं बड़बड़ाया "जितनी जल्दी हो रही थी थी उतनी देर लगेगी"।
मेरा हाथ अभी दरवाजे पर ही था कि एक बुजुर्ग अजनबी पीछे एक मशीन की ओर इशारा करते हुए बोला, "इस कापियर में मेरे पैसे तो जा चुके हैं पर मेरी फोटो कॉपी निकली नहीं है।" मैं तुरंत समझ गया कि परमेश्वर क्या चाहते थे। लाइन से निकल कर दस मिनट में मैंने मशीन ठीक कर दी।
मुझे धन्यवाद देकर वह चला गया। जब मैं वापस आया तो पाया कि लाइन अब खत्म हो चुकी थी। मैं सीधे काउंटर पर चला गया।
उस दिन का मेरा अनुभव मुझे यीशु के शब्दों की याद दिलाता है: "दिया करो, तो तुम्हें भी दिया जाएगा: लोग पूरा नाप दबा दबाकर और हिला हिलाकर और उभरता..." (लूका 6:38)।
मेरी प्रतीक्षा की घड़ियाँ खत्म हो गईं क्योंकि किसी अन्य की जरूरत की ओर मेरा ध्यान खींच कर उसे अपना समय देने के लिए मेरी मदद करके परमेश्वर ने मेरी जल्दी में बाधा डाल दी। उन्होंने मुझे एक उपहार दिया। एक ऐसा सबक जिसे मैं जब घड़ी देखूं याद करने की अपेक्षा करता हूँ।
स्वर्ग से सहायता
SOS मोर्सकोड सिग्नल 1905 में बना क्योंकि नाविकों को संकट का सिग्नल देने के लिए एक मार्ग की आवश्यकता थी। 1910 में स्टीमशिप केंटकी जहाज द्वारा छयालिस लोगों को बचाने के किए सिग्नल का प्रयोग किया गया।
SOS हाल ही का आविष्कार है, परन्तु मदद के लिए पुकारना उतना पुराना है जितनी मानवता। जब विजयी इस्राएली उस वायदे के देश में बस रहे थे जो परमेश्वर ने उन्हें दिया था, तब यहोशू ने चौदह वर्षों तक इस्राएलियों का (यहोशू 9:18) और चुनौतीपूर्ण भूभाग (3:15-17) विरोध का सामना किया। इस दौरान "परमेश्वर यहोशू के..." (6:27)।
यहोशू 10 में, जब इसराएली अपने सहयोगी गिबोनियों की सहायता के लिए जाते हैं जिनपर पांच राजाओं ने हमला किया था, तब यहोशू जानता था कि शक्तिशाली शत्रुओं को पराजित करने के लिए परमेश्वर की मदद की ज़रूरत होगी (पद12)। परमेश्वर ने ओले भेजकर उत्तर दिया, यहां तक कि दुश्मनों को पराजित करने का समय देने के लिए सूर्य को थामे रखा। यहोशू 10:14 बताता है, "यहोवा तो इस्राएल...!"
यदि आपके सामने चुनौतियां हैं, तो आप परमेश्वर को SOS भेज सकते हैं। भले ही मिलने वाली मदद यहोशू से अलग हो, शायद एक अप्रत्याशित नौकरी, अच्छा डॉक्टर या दुख में शांति। हियाव बांधेंऍ वह आपकी पुकार का उत्तर दे रहे हैं, और आपके लिए लड़ रहे हैं।
वह मुस्कुराता हुआ व्यक्ति
किराने की दुकान पर जाना मुझे पसन्द नहीं पर रोजमर्रा के जीवन में–यह करना पड़ता है।
मुझे फ्रेड की लाइन में बिलिंग करवाने का इंतजार रहता है। फ्रेड, बिलिंग के कारम को शो-टाइम बना देता है। वह अद्भुत फुर्ती से, होठों पर हमेशा मुस्कुराहट के साथ नाचते-गाते और उछालते हुए सामान को एक प्लास्टिक बैग में डालता है। वह ऐसा काम अनन्दित होकर करता है जिसे सबसे ग़ैरदिलचस्प समझा जाता है। पलभर के लिए ही सही, उसका उत्साह भले ही, लोगों के मन को आनन्दित कर देता है।
काम करने के इस अंदाज से फ्रेड ने मेरे सम्मान और प्रशंसा को जीत लिया है। उसका खुशनुमा आचरण, सेवा की इच्छा, और छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना कुलुस्सियों 3:23 में प्रेरित पौलुस की सलाह के अनुरूप है, कि काम के प्रति हमारा क्या व्यवहार होना चाहिए: "और जो कुछ...।"
जब हमारा संबंध यीशु के साथ हो, तो जो भी काम हमें करना पड़े, वह हमें अपने जीवन में उनकी उपस्थिति को प्रतिबिंबित करने का अवसर देता है। कोई काम बहुत छोटा या बहुत बड़ा नहीं होता! अपनी ज़िम्मेदारियों को निभाते हुए-चाहे वे जो भी हों-आनंदात्मक, रचनात्मकता और उत्कृष्ट तरीके से काम करने से हमें अपने आसपास के लोगों को प्रभावित करने का मौका मिलता है, चाहे हमारा काम जो भी हो।
एक आशा भरा विलाप
बहामास स्थित नासाऊ का क्लिफ्टन हेरिटेज नेशनल पार्क दुखद युग की याद दिलाता है। पत्थर की सीडियां तट से एक चट्टान पर जाती हैं। अठारहवीं शताब्दी में जहाज द्वारा बहामास लाए गए दास इन्हीं सीडियों से अमानवीय आचरण भरे जीवन में प्रवेश करते थे, यहाँ उनका स्मारक है। देवदार के पेड़ों पर गढ़ी स्त्रियों की मूर्तियाँ हैं जिनपर कोडों के निशान हैं, जो दासों की मातृभूमि और परिवरों की ओर मुंह किए समुद्र को निहार रही हैं।
ये मूर्तियां मुझे संसार में व्याप्त अन्याय और टूटी प्रणालियों का विलाप करने के महत्व की याद दिलाती हैं। विलाप का अर्थ यह नहीं कि हम आशाहीन हैं; परन्तु, यह परमेश्वर के साथ सच्चे होने का तरीका है। इसे मसीहियों की परिचित मुद्रा होना चाहिए; लगभग चालीस प्रतिशत भजन विलाप के हैं, विलापगीत में परमेश्वर के लोग आक्रमणकारियों द्वारा शहर के नाश किए जाने पर विलाप करते हैं (3:55)।
विलाप करना दुख की वास्तविकता पर एक उचित प्रतिक्रिया है, जो दुख और परेशानी में हमें परमेश्वर से जोड़ता है। अंततः जब हम अन्याय का विलाप, और स्वयं में और दूसरों में सक्रिय बदलाव की अपेक्षा करते हैं- तो विलाप आशावादी होता है।
नासाउ के मूर्ति-वृक्षों के पार्क का नाम "जेनेसिस" है-विलाप के स्थान को नए आरंभ के स्थान के रूप में जाना जाता है।