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एक बालक की नाई

आराधना के समय वो नन्हीं सी लड़की गलियारे में बड़ी प्रसन्नता और शालीनता से अकेली ही नाच रही थी। उसकी माँ मुस्कुरा रही थी और उसे रोका नहीं।

उसे देख कर मेरा दिल बहुत उत्साहित हो गया, मैं उसका साथ देना चाहती थी लेकिन मैंने ऐसा नहीं किया। बचपन के उस आनन्द और विस्मय की अभिव्यक्ति को मैं कुछ समय पहले खो चुकी हूँ। यद्यपि हमें बचपना छोड़कर परिपक्व बनना चाहिए, तो भी हमें अपने आनंद और विस्मय को नहीं खोना चाहिए, विशेषकर परमेश्वर के साथ हमारे संबंध में।

यीशु के सांसारिक जीवन में उन्होंने छोटे बच्चों का खुली बाहों से स्वागत किया और अपनी शिक्षाओं में उनका उदाहरण दिया (मत्ती 11:25; 18:3;21:16)।  एक अवसर पर उसने अपने चेलों को फटकार लगाई जब वह किसी माता-पिता को अपने बच्चे को उनके पास लाने से रोक रहे थे। बालकों को मेरे पास आने दो... (मरकुस 10:14) यीशु बच्चों के बाल गुणों के बारे में कह रहे थे जो हमें मसीह को ग्रहण करने के लिए तैयार करते हैं -आनन्द और विस्मय, साथ ही सादगी, निर्भरता, विश्वास और विनम्रता।

बच्चों जैसा आनन्द और विस्मय (और इससे भी बड़कर) हमारे हृदय को यीशु को ग्रहण करने के लिए खोलता है वह हमें अपनी बाहों में लेने की प्रतीक्षा करते हैं।

अधिग्रहण या अनुग्रह

छुट्टियों मनाकर घर लौटकर मेरे मित्र आर्ची ने देखा कि उसके पड़ोसी ने एक बाड़ लगाई थी जो उसकी जमीन की सीमा के पांच फुट अंदर थी। उसने हफ्तों कोशिश की, बाड़ हटवाने में मदद करने और लागत बांट लेने की भी पेशकश की, परंतु, पड़ोसी नहीं माना। आर्ची नागरिक प्राधिकारी से अपील कर सकता था। परंतु अपने पड़ोसी को परमेश्वर की कृपा दिखाने के लिए उसने ऐसा न करने का निर्णय किया।

“आर्ची डरपोक है”! आप कहेंगे। नहीं। वह ताकतवर व्यक्ति है। परन्तु उसने अधिग्रहण के उपर अनुग्रह को चुना।

पशु बढ़ जाने के कारण अब्राहम और लूत के बीच झगड़ा हो गया था। तब अब्राहम और लूत...(उत्पत्ति 13:7)। लूत ने उत्तम तराई को चुना और अंत में सब कुछ गवा दिया। अब्राहम ने बचे खुचे को चुना और वायदे का देश पाया (12-17)।

हमारे अधिकार होते हैं और हम उनकी मांग कर सकते हैं। विशेषकर जब दूसरों के अधिकार की बात हो। कभी-कभी हमें उन पर ज़ोर भी देना चाहिए। महायाजक के व्यवस्था के विरूद्ध जाने पर पौलुस ने भी यही किया (प्रेरितों के काम 23:1-3)। परंतु संसार को एक बेहतर तरीका दिखाने के लिए हम अधिकारों को छोड़ने का चुनाव कर सकते हैं। इसे बाइबिल दुर्बलता  नहीं “विनम्रता” कहती है जो परमेश्वर के नियंत्रण की ताकत है।

जब परमेश्वर हमें भरते हैं

“मेरी क्या गलती थी”? यह मेरे लिए सबसे रोमांचक समय होना चाहिए था। कॉलेज के बाद मुझे पहली नौकरी मिली थी घर से सैंकड़ों मील दूर एक अन्य शहर में। परन्तु यह रोमांच जल्दी ही फीका पड़ गया। मेरा फ़्लैट छोटा था, जिसमें फर्नीचर भी नहीं था। अनजान शहर जहाँ मैं किसी को नहीं जानता था। नौकरी रोचक थी पर अकेलापन काटने को दौड़ता था। 

एक रात मैंने अपनी बाइबिल खोली तो भजन-संहिता 16 सामने आ गया, जिसके 11 पद में परमेश्वर हमें भरने का वादा करते हैं। मैंने प्रार्थना की “हे प्रभु, पहले यह नौकरी मुझे सही लगी थी परन्तु अब अकेलापन काटता है। मुझे अपनी निकटता की भावना से भर दें”। मैं कई हफ्तों तक यही प्रार्थना करता रहा। कई रातों में मुझे परमेश्वर की उपस्थिति का गहरा अनुभव होता, परन्तु अन्य रातों में मुझे अकेलेपन का पीड़ा जनक अनुभव होता।

परंतु जब मैं वचन पर अपने हृदय को दृढ़ करता तो परमेश्वर मेरे विश्वास को और गहरा करते, हर रात। मैंने उनकी विश्वासयोगिता को ऐसे महसूस किया जैसे पहले कभी नहीं किया। मैंने सीखा कि मेरा काम है कि अपने हृदय को परमेश्वर के आगे उंडेल दूं...और उनके उत्तर का विनम्रतापूर्वक इंतजार करूं, उनके वादे पर विश्वास करते हुए कि वे हमें अपनी आत्मा से भरेंगे।

परमेश्वर का प्रिय

उसका नाम डेविड था, पर लोग उसे “बाजा बजाने वाला" बुलाते थे। वह अस्त-व्यस्त सा रहने वाला बूढा था जो शहर के लोकप्रिय स्थानों में अक्सर दिख जाता था। वायलिन बजाने के अपने असाधारण कौशल से वह राहगीरों का दिल बहलाता, जो कभी-कभी उसके बक्से में पैसे डाल देते और आभार में सिर हिला कर डेविड मुस्कुरा देता था। 

हाल ही में जब डेविड की निधन-सूचना एक स्थानीय समाचार पत्र में छपी, तो पता चला कि वह कई भाषाएँ बोलने वाला, विश्वविद्यालय से स्नातक प्राप्त और पूर्व चुनाव में राज्यसदन की सीट का उम्मीदवार था। जिन लोगों ने रूपरंग के आधार पर उनका आंकलन किया था, वह उनकी उपलब्धियों पर आश्चर्यचकित थे।

बाइबिल बताती है कि "परमेश्वर ने मनुष्य को अपने स्वरूप में बनाया" (उत्पत्ति 1:27)। इससे हमारे भीतर निहित मूल्य का पता चलता है। हम कैसे भी दिखें, हमारी उपलब्धियां जो हों, या लोग जो भी सोचें, चाहे हमने अपने पाप में परमेश्वर से फिरने का चुनाव भी किया हो। परमेश्वर ने हमें इतना महत्वपूर्ण समझा कि अपने पुत्र को उद्धार के और उनके साथ अनंत जीवन जीने के मार्ग को दिखाने के लिए भेजा।

परमेश्वर हमसे प्रेम करते हैं। हम परमेश्वर के प्रति अपने प्रेम को व्यक्त करने के लिए उसे दूसरों के साथ साझा कर सकते हैं।

फ़ोन का ज़ोन

मोबाइल फ़ोन के कारण दूसरों तक हमारी असीमित पहुंच हो गई है। कई लोग वाहन चलाते हुए फोन या टेक्स्ट करते हैं जिससे कभी-कभी भयानक दुर्घटनाएँ होती हैं। कई देशों में ध्यान भंग करके वाहन चलाना गैरकानूनी है। अमेरिका में  हाईवे पर विशेष ज़ोन बने हैं, जहाँ वाहन रोक कर लोग सुरक्षित रूप से जितना चाहें फ़ोन इस्तेमाल कर सकते हैं।

फ़ोन पर बात करते हुए वाहन चलाने पर प्रतिबंध अच्छा है, पर एक ऐसी बातचीत है जिसे करने पर कोई प्रतिबंध नहीं होता: प्रार्थना। परमेश्वर हमें उनसे बात करने को हर समय आमंत्रित करते हैं, आते-जाते समय या जब हम स्थिर हों। नए नियम में, पौलुस के शब्द हर उस व्यक्ति के लिए हैं जो परमेश्वर से बातचीत करना चाहता हैं, “निरन्तर प्रार्थना मे लगे रहो”। साथ ही वह हमें "सदा आनन्दित” रहने" और "सभी परिस्थितियों में धन्यवाद देने" के लिए प्रोत्साहित करता है (1 थिस्सलुनीकियों 5:16-18)। आनन्दित और धन्यवादित रहना-मसीह के द्वारा परमेश्वर पर हमारे विश्वास की अभिव्यक्ति है, निरन्तर प्रार्थना में जिसका लंगर है।

चाहे रोने के लिए हो या लंबी बातचीत के लिए, परमेश्वर सर्वदा हमारे लिए उपलब्ध होते हैं। वह चाहते हैं हम अपनी खुशियों, आभार, इच्छाओं, प्रश्नों और चिंताओं को निरन्तर उनसे साझा करें (इब्रानियों 4:15-16)। हम निरन्तर प्रार्थना के ज़ोन में होते हैं।

हम नहीं टूटेंगे

कैलिफ़ोर्निया में रहने के नाते मैं सर्द चीजों से दूर रहती हूँ। हालांकि, बर्फ के चित्र देखना मुझे पसंद हैं। इसलिए जब इलिनोइस से मेरी मित्र ने उसकी खिड़की के बाहर के दृश्य का चित्र भेजा तो मैं मुस्कराने लगी। पर चमकीली बर्फ़ की चादर के बोझ से झुकी शाखाओं को देखकर मेरी प्रशंसा उदासीनता में बदल गई। कोई शाख बर्फ़ का बोझ कितनी देर सह पाएगी? उस भार को देखकर मैं अपने कंधों के बारे में सोचने लगी जो चिंताओं के बोझ से झुके हुए थे।

“सर्वोतम धन सांसारिक या अस्थायी नहीं होता”, यह कह कर यीशु हमें अपनी चिंताओं का त्याग कर देने को कहते हैं। ब्रह्मांड का सृष्टिकर्ता और निर्वाहक अपने बच्चों से प्रेम करता है, और उन्हें तृप्त करता है, तो हमें चिंता करके अनमोल समय व्यर्थ करने की आवश्यकता नहीं है। परमेश्वर जानते हैं कि हमें क्या चाहिए और वही हमारी देखभाल करेंगे (मत्ती 6:19-32)। वह सर्वप्रथम हमें उनके पास आने, वर्तमान में उनकी उपस्थिति और प्रावधान पर भरोसा करने, और हर दिन विश्वास से जीने को कहते हैं (पद 33-34)।

जीवन में,  हम परेशानियों और अनिश्चितताओं का सामना करेंगे, जो हमारे कंधों को झुका सकती हैं। जब हम परमेश्वर पर भरोसा करेंगे, तो भले ही चिंता हमें झुका दे पर हमें तोड़ नहीं पाएगी।

खोया था पर मिल गया

एक रिश्तेदार के साथ खरीदारी करते हुए मेरी सास गुम हो गई, तो मेरी पत्नी और मैं अत्यधिक चिंतित थे। उन्हें भूलने और भ्रम की बीमारी थी, पता नहीं ऐसी अवस्था में वह क्या करेंगी। हमने उन्हें खोजना शुरू कर दिया,  और परमेश्वर को यह कहते हुए पुकारा," कृपया उन्हें ढूंढिए"।

कुछ घंटे बाद वह मीलों दूर सड़क पर वह मिल गईं। उन्हें खोजने में सक्षम बनाने में परमेश्वर ने हमें कैसे आशीष दे दीथी। महीनों बाद मसीह ने उन्हें आशीषित किया। अस्सी वर्ष की आयु में, उद्धार पाने के लिए मेरी सास ने यीशु मसीह को ग्रहण किया।

यीशु, मनुष्य की तुलना भेड़ों से करते हुए, कहते हैं: तुम में से कौन है जिस की सौ भेड़ें हों, और उन में से एक खो जाए...(लूका 15:4–6)।

चरवाहों ने अपनी भेड़ों को इसलिए गिना, ताकि हर एक का पता लगा सके। यीशु, जो स्वयं की तुलना उस चरवाहा के साथ करते हैं, हम सभी को मूल्यवान मानते हैं। हम अपने जीवन में भटक रहे हों, खोज कर रहे हों या अपने उद्देश्य के बारे में विचार कर रहे हों तो मसीह के पास जाने के लिए कभी देर नहीं होती। परमेश्वर की यही इच्छा है कि हम उनके प्रेम और आशीषों का अनुभव करें।

भय से छुटकारा

हमारे शरीर भय और डर की भावनाओं पर प्रतिक्रिया करते हैं। श्वास भरते समय दिल की धडकन तेज़ होना और पेट में मरोड़ पड़ना,  ये सब हमारे चिंतित होने का संकेत देते हैं। हमारी शारीरिक प्रकृति हमें संकट को अनदेखा नहीं करने देती।

यीशु के पांच हजार से भी अधिक लोगों को खिलाने के बाद प्रभु ने उन्हें अपने आगे बैतसैदा भेज दिया था जिससे प्रार्थना करने के लिए उन्हें एकांत मिल सके। रात को चेले हवा के विरुद्ध नाव खेत रहे थे जब उन्होंने उसे झील पर चलते देखकर समझा, कि भूत है और चिल्ला उठे...। (मरकुस 6:49–50)। परंतु यीशु ने कहा मत डरो और ढाढ़स बान्धो। जैसे ही यीशु नाव पर आए,  हवा थम गई और नाव घाट पर लग गई। मेरा मानना है कि उनके डर की भावनाएं शांत हो गईं थी क्योंकि उन्होंने उनकी शांति को धारण कर लिया था।

चिंता के कारण जब हमें घुटन हो तो हम यीशु के सामर्थ में आश्वस्त हो सकते हैं। चाहे वे हमारी लहरों को शांत करें या उनका सामना करने का हमें सामर्थ दें, वे हमें शांति का ऐसा वरदान देंगे जो “समझ से परे है” (फिल्लिपियों 4: 7)। जैसे वे हमें भयमुक्त करते हैं हमारी आत्मा और शरीर विश्राम की स्थिति में वापस लौट सकते हैं।

निर्भय होकर देना

मेरा बेटा जेवियर छह साल का था, जब मेरी एक मित्र अपने शिशु के साथ हमारे यहाँ आई थी और जेवियर उसे कुछ खिलौने देना चाहता था। उसकी उदारता देखकर मैं खुश थी जब तक कि वह उसे एकदुर्लभ स्टफ़ टॉय ना देने लगा,  मेरी मित्र ने विनम्रता से मना किया तो उसने कहा, "बाँटने के लिए मेरे डैडी मुझे बहुत खिलौने देते हैं।" उदारता से देने की बात उसने मुझ से सीखी थी,  पर मैंने प्रायः अपनी वस्तुओं को परमेश्वर और अन्य लोगों से छिपा कर रखने की कोशिश की है। परन्तु मेरा स्वर्गीय पिता मुझे सब कुछ देता है इसे स्मरण करके बाँटना आसान हो जाता है।

 

इस्राएलियों को जो परमेश्वर ने उन्हें दिया था उसका एक भाग लेवी याजकों को देने, और उन पर भरोसा करने का आदेश मिला था, जो दूसरों की आवश्यकतानुसार मदद करेंगे। जब लोगों ने मना किया, तो मलाकी नबी ने कहा कि वे परमेश्वर को लूट रहे थे (मलाकी 3:8–9)। यदि वे यह दिखाते हुए, कि उन्हें परमेश्वर के प्रबन्ध और सुरक्षा पर भरोसा है, स्वेच्छा से देंगे (10–11) तब सारी जातियां उन्हें परमेश्वर के धन्य लोग बुलाएंगी (12)।

स्वेच्छापूर्ण और निडर दान, हमारे प्यारे पिता की देखभाल में हमारे आत्मविश्वास को दिखाता है-जो एक महान दानी हैं।