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लुका छुपी

“आप मुझे नहीं देख सकते हैं!”

छोटे बच्चे “लुका छुपी” खेलते समय विश्वास करते हैं कि अपनी आँखों को बंद करने से वे छिप जाते हैं l वे मानते हैं कि यदि वे आपको नहीं देख सकते हैं, तो आप भी उन्हें नहीं देख सकते हैं l

चाहे वयस्कों को वह जितना भी भोला महसूस हो, हम कभी-कभी परमेश्वर के साथ भी ऐसा ही करते हैं l जब हम जानते हुए कुछ गलत करने की इच्छा करते हैं, हमारा अभिप्राय अपने मन की करते हुए परमेश्वर को अलग करना हो सकता है l

नबी यहेजकेल ने परमेश्वर से दर्शन में बेबीलोन में निर्वासित अपने लोगों के विषय यह देखा l प्रभु ने उससे कहा, “क्या तूने देखा है कि इस्राएल के घराने के पुरनिये अपनी नक्काशीवाली कोठरियों के भीतर अर्थात् अंधियारे में क्या कर रहे हैं? वे कहते हैं कि यहोवा हम को नहीं देखता” (यहेज. 8:12) l

किन्तु परमेश्वर सब कुछ देखता है, और यहेजकेल का दर्शन इसका प्रमाण है l फिर भी उनके पाप करने पर, परमेश्वर ने अपने पश्च्तापी लोगों को एक नयी प्रतिज्ञा दी :  “मैं तुमको नया मन दूँगा, और तुम्हारे भीतर नयी आत्मा उत्पन्न करूँगा” (36:26) l

हमारे लिए, परमेश्वर ने क्रूस पर पूर्ण दंड चुकाकर अपनी कोमल करुणा से टूटापन और पाप का विद्रोह ख़त्म किया l यीशु मसीह के द्वारा परमेश्वर हमें केवल नया आरंभ ही नहीं देता है, किन्तु जब हम उसके पीछे चलते हैं वह हमारे हृदय परिवर्तन के लिए हमारे अन्दर काम भी करता है l परमेश्वर कितना अच्छा है! जब हम खोए हुए थे और अपने पाप में छिपे हुए थे, परमेश्वर, यीशु के द्वारा, हमें “ढूढ़ने और [हमारा] उद्धार करने आया” (लूका 19:10; रोमि. 5:8) l

सेवा करें और सेवा लें

मारिलिन कई हफ़्तों तक बीमार रही थी, और अनेक लोगों ने उसे इस कठिन समय में उत्साहित किया था l मैं उनकी नेकी का बदला कैसे दूँगी?  उसकी चिंता थी l तब एक दिन उसने एक लिखित प्रार्थना पढ़ी : “प्रार्थना करें कि [दूसरे] दीनता को बढ़ाएं, केवल सेवा करने के लिए नहीं, किन्तु सेवा लेने के लिए भी l” मारिलिन ने तुरंत महसूस किया कि बराबर करने की ज़रूरत नहीं, किन्तु केवल धन्यवादी होकर दूसरों को सेवा करने का आनंद अनुभव करने दें l

फिलिप्पिय्यों 4 में, पौलुस ने “[उसके] क्लेश में ... सहभागी” होनेवाले सभी को धन्यवाद दिया (पद.14) l वह सुसमाचार प्रचार करते समय और सिखाते समय लोगों की सहायता पर निर्भर था l वह समझ गया कि ज़रूरत के समय मिला उपहार केवल परमेश्वर के प्रेमी लोगों के प्रेम का प्रसार था : “[तुम्हारा उपहार] तो सुखदायक सुगंध, ग्रहण करने योग्य बलिदान है, जो परमेश्वर को भाता है” (पद.18) l

प्राप्त करनेवाला बनना सरल नहीं है-विशेषकर यदि आमतौर पर आप दूसरों को मदद करने में प्रथम रहे हैं l किन्तु दीनता से, हमारी ज़रूरत के समय हम परमेश्वर को अनेक माध्यमों से हमारी देखभाल करने की अनुमति दें l

पौलुस ने लिखा, “मेरा परमेश्वर ... तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा” (पद.19) l यह कुछ ऐसा था जो उसने क्लेश से पूर्ण जीवन में सीखा था l परमेश्वर विश्वासयोग्य है और उसका श्रोत असीमित है l

उसकी उपस्थिति में

अपने समुदाय में रसोइया का कार्य करनेवाला, 17वीं शताब्दी का मठवासी/साधु ब्रदर लॉरेन्स, दिन का काम आरंभ करने से पूर्व, प्रार्थना करता था, “हे मेरे परमेश्वर ... आपकी उपस्थिति में रहने के लिए मुझे अनुग्रह दीजिए l मेरे कार्य में मेरी मदद कीजिए l मेरे सम्पूर्ण मोह को अपना बना लीजिए l” कार्य करते हुए, वह परमेश्वर से निरंतर बातें करता था, उसके मार्गदर्शन पर ध्यान देते हुए अपना काम उसको समर्पित करता था l वह अपनी व्यस्तता में भी, बीच के संतुलित शांत समय में उससे अनुग्रह माँगता था l चाहे कुछ भी होता रहे, उसने अपने सृष्टिकर्ता के प्रेम को ढूंढा और महसूस किया l

भजन 89 के अनुसार, समुद्र पर राज्य करनेवाले और स्वर्गदूतों की सेना द्वारा उपासना प्राप्त करनेवाले सबके सृष्टिकर्ता के प्रति अपना सम्पूर्ण जीवन समर्पित करना ही सटीक प्रतिउत्तर होगा l परमेश्वर कौन है, उसकी खूबसूरती समझने के बाद हम “आनंद की ललकार को” हर समय और हर जगह “दिन भर” सुनते हैं l (पद. 15-16) l

चाहे हम किसी दूकान में अथवा एअरपोर्ट/बस की पंक्ति में खड़े हों, अथवा अपने फ़ोन होल्ड किये हों, हमारे जीवन ऐसे क्षणों से भरे हैं, जब हम परेशान भी हो सकते थे l अथवा हम इन क्षणों को “[उसके] प्रकाश में” चलनेवाले क्षण बना सकते हैं (पद.15) l

हमारे जीवनों के “बर्बाद” किये हुए क्षण, जब हम इंतज़ार करते हैं, बीमार होते हैं अथवा विचारते हैं कि क्या करें, उसकी उपस्थिति के प्रकाश में रहने के पल हो सकते हैं l

और कितना!

अक्टूबर 1915 में, प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ऑस्वाल्ड चैम्बर्स ब्रिटिश राष्ट्रमंडल सैनिकों के लिए, YMCA की ओर से पादरी की सेवा करने मिस्र में काहिरा के निकट एक सेना प्रशिक्षण शिविर, जीटोन  शिविर पहुंचे l चैम्बर्स के द्वारा एक सप्ताह की रात्री धार्मिक सेवा की घोषणा पर, 400 लोग उस बड़े YMCA  झोपड़े में उसका उपदेश सुनने आ गए जिसका शीर्षक था, “प्रार्थना की अच्छाई क्या है?” बाद में, युद्ध के मध्य परमेश्वर को ढूँढ़ने वाले लोगों से व्यक्तिगत रूप से बातें करते हुए, ऑस्वाल्ड ने अक्सर लूका 11:13 का सन्दर्भ दिया, “अतः जब तुम बुरे होकर अपने बच्चों को अच्छी वस्तुएं देना जानते हो, तो स्वर्गीय पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा” (लूका 11:13) l

परमेश्वर के पुत्र, यीशु के द्वारा मुफ्त उपहार क्षमा, आशा, और पवित्र आत्मा द्वारा हमारे जीवनों में उसकी जीवित उपस्थिति है l “क्योंकि जो कोई मांगता है, उसे मिलता है; और जो कोई ढूंढ़ता है, वह पाता है; और जो खटखटाता है, उसके लिए खोला जाएगा” (पद.10) l

नवम्बर 15, 1917 को अचानक अपेंडिक्स(बड़ी आंत का एक अतिरिक्त भाग) के फूटने से ऑस्वाल्ड चैम्बर्स की मृत्यु हो गयी l ऑस्वाल्ड की सेवा के परिणामस्वरुप विश्वास करनेवाला एक सैनिक संगमरमर पत्थर की बनी खुली बाइबिल की एक प्रतिरूप पर लूका 11:13 खुदवाकर उसके कब्र के निकट रख दिया : “स्वर्गीय पिता अपने मांगनेवालों को पवित्र आत्मा क्यों न देगा!”

प्रतिदिन परमेश्वर का यह अद्भुत उपहार हमारे लिए उपलब्ध है l

महान प्रेम

हाल ही में हमने अपनी बाईस महीने की नातिन, मोरिया को उसके बड़े भाइयों के बिना रात भर के लिए अपने घर ले गए l हमनें अधिक प्रेम के साथ उसका ध्यान दिया, और हम उसकी इच्छा पूरी करने में आनंदित हुए l अगले दिन उसको वापस घर पहुंचाने के बाद, हम अलविदा कहकर घर के बाहर निकलने लगे l ऐसा करते समय, मोरिया ने चुपचाप अपना बैग उठाकर(जो अभी भी दरवाजे के निकट बैठी हुयी थी) हमारे पीछे चलने लगी l

वह तस्वीर मेरी यादों में बैठ गयी : मोरिया अपनी चड्डी में और दो अलग-अलग सैंडल पहनी हुयी पुनः नाना-नानी के साथ जाने को तैयार थी l मैं इसके विषय सोचकर मुस्कराती हूँ l वह मेरे संग जाने को उत्सुक, और अधिक व्यक्तिगत ध्यान पाने के लिए तैयार थी l

यद्यपि हमारी नातिन अभी बता नहीं पाती है, वह प्रेम और उसका महत्व अनुभव करती है l एक छोटे रूप से, मोरिया के लिए हमारा प्रेम हमारे लिए अर्थात् उसकी संतान के लिए परमेश्वर के प्रेम की तस्वीर है l “देखो, पिता ने हम से कैसा प्रेम किया है कि हम परमेश्वर की संतान कहलाएं; और हम हैं भी” (1 यूहन्ना 3:1) l

हम यीशु पर अपने उद्धारकर्ता के रूप में विश्वास करके, उसकी संतान बन जाते हैं और हमारे लिए उसकी क्रूसित मृत्यु द्वारा उसके उदार प्रेम को समझने लगते हैं (पद.16) l हमारी इच्छा अपने वचन और कार्यों द्वारा उसको प्रसन्न करने(पद.6)-और उसको प्रेम करने और उसके साथ समय बिताने की होती है l

गुणित उदारता

शेरिल अपनी अगली पिज़्ज़ा पहुंचाते समय चकित हुयी l उसे किसी घर में पहुँचने की आशा थी, किन्तु चर्च में पहुंच गयी l शेरिल पेपरौनी पिज़्ज़ा चर्च में पहुँचा दी, जहाँ उसकी मुलाकात पास्टर से हुयी l

“क्या यह कहना उचित होगा कि तुम्हारे लिए जीवन अच्छा रहा है? पास्टर ने शेरिल से पुछा l शेरिल ने कहा कि नहीं रहा है l इसके साथ, पास्टर दो थालियाँ लेकर आये जिसे चर्च के विश्वासियों ने दान से भर दिए थे l तब पास्टर ने बख्शिश के तौर पर 750 डॉलर शेरिल के  पिज़्ज़ा पहुंचाने वाले थैले में डाल दिया! शेरिल को न बताते हुए, पास्टर ने पिज़्ज़ा की दूकान से सबसे अधिक आर्थिक तंगी में रहनेवाले डेलिवरी मैन को भेजने को कहा था l शेरिल चौंक गयी l वह कई भुगतान करने में असमर्थ थी l

जब यरूशलेम के प्रथम मसीही गरीबी का सामना कर रहे थे, वह तुरंत सहायता पहुँचाने वाला एक चर्च ही था l खुद ज़रूरत में रहने के बावजूद, मेसिडोनिया के मसीही अवसर जानकर उदारता से दान दिए (2 कुरिन्थियों 8:1-4) l पौलुस ने उनकी उदारता को कुरीन्थियों और हमारे अनुसरण के लिए एक नमूना बताया l  जब हम अपनी अधिकता में से दूसरों की सहायता करते हैं, हम यीशु को प्रगट करते हैं, जिसने हमारी आत्मिक गरीबी को मिटाने के लिए अपना धन त्याग दिया (पद.9) l

शेरिल ने उस दिन चर्च की उदारता अपने सभी ग्राहकों को बतायी, और, उस नमूना का अनुसरण करते हुए उस दिन की बख्शिश सभी ज़रुरतमंदों में बाँट दी l उदारता का एक कार्य गुणित हुआ l और मसीह को महिमा मिली l

सर्वोत्तम उपहार क्या है?

मेरे पति ने हाल ही में महत्वपूर्ण जन्म-दिन मनाया, ऐसा जो शून्य में समाप्त होता है l इस विशेष मौके पर मैंने उन्हें सर्वोत्तम तरीके से सम्मानित करना चाहा l मैंने इसे सर्वोत्तम बनाने के लिए अपने बच्चों से अपने विचारों को बाँटा और उनसे सहायता मांगी l  मेरी इच्छा थी कि हमारा उत्सव एक नए दशक के महत्व को दर्शाए और कि वे हमारे परिवार के लिए कितने विशेष हैं l मेरी इच्छा थी कि हमारा उपहार उनके जीवन के इस महत्वपूर्ण अवसर के महत्व के अनुकूल हो l

राजा सुलैमान एक “बड़े जन्मदिन” के योग्य उपहार से कहीं महान उपहार परमेश्वर को देना चाहता था l वह चाहता था कि उसके द्वारा निर्मित मंदिर उसमें परमेश्वर की उपस्थिति के योग्य हो l कच्चे माल के लिए उसने सोर के राजा को सन्देश भेजा l अपने पत्र में, उसने कहा कि मंदिर विशाल होगा “क्योंकि हमारा परमेश्वर सब देवताओं में महान है” (2 इतिहास 2:5) l उसने माना कि परमेश्वर की विशालता और भलाई मनुष्य के हाथों से निर्मित किसी भी वस्तु से कहीं अधिक महान होने पर भी, कार्य प्रेम और उपासना के कारण ठहराया गया है l

हमारा परमेश्वर वास्तव में दूसरे देवताओं से महान है l वह हमारे जीवनों में अद्भुत कार्य करके, भेंट के भौतिक मूल्य के बावजूद, हमारे हृदयों से प्रेमी और बहुमूल्य भेंट लाने को उत्साहित करता है l सुलैमान जानता था कि उसका भेंट परमेश्वर की तुलना में नहीं हो सकता, फिर भी अपना आनंदपूर्वक भेंट उसके सामने लाया; और हम भी ला सकते हैं l

उत्तम पृथ्वी

अन्तरिक्ष यान अपोलो  8 के अन्तरिक्ष यात्री बिल एंडर्स 1968 में चंद्रमा की परिक्रमा करते हुए कर्मी-दल द्वारा चन्द्रमा की धरती के बड़े और पास के दृश्यों का वर्णन किया l उन्होंने उसे “अनिष्ट दर्शन की सीमा ... एक कठोर, और देखने का अनाकर्षक स्थान कहा l” उसके बाद कर्मियों ने बारी-बारी से देख रहे संसार के समक्ष उत्पत्ति 1:1-10 से पढ़ा l कमांडर फ्रैंक बोर्मन ने पद 10, “और परमेश्वर ने देखा की अच्छा है,” को पढ़ कर इस कथन से समाप्त किया, “परमेश्वर आप सभों को आशीष दे, इस अच्छी पृथ्वी पर आप सभों को आशीष दे l”

बाइबिल का आरंभिक अध्याय दो तथ्यों पर बल देता है :

सृष्टि परमेश्वर का कार्य है l  वाक्यांश “और परमेश्वर ने कहा ...,” लय के साथ पूरे अध्याय में दिखाई देता है l सम्पूर्ण भव्य संसार जिसमें हम निवास करते हैं उसके हाथ का रचनात्मक कार्य है l बाइबिल की बाकी बातें उत्पत्ति 1 की बातों की पुनः पुष्टि करते हैं l सम्पूर्ण इतिहास की पृष्ठभूमि में, परमेश्वर है l

सृष्टि अच्छी है l  इस अध्याय में एक और वाक्य लय के साथ गूंजती है l “और परमेश्वर ने देखा कि अच्छा है l” सृष्टि के उस पहले क्षण से बहुत कुछ बदल गया है l उत्पत्ति 1 संसार का ऐसा वर्णन करती है जैसा परमेश्वर इसके बिगड़ने से पूर्व चाहता था l आज हम प्रकृति में जो खूबसूरती देखते हैं वह परमेश्वर की सृष्टि की पूर्व अवस्था की एक धुंधली छाया है l

अपोलो 8 के अतरिक्ष यात्रियों ने पृथ्वी को आकाश में अकेले लटके हुए एक चमकीले रंगीन गेंद की तरह देखा l तुरंत ही वह उन्हें विस्मयकारी सुन्दर और कोमल दिखाई दिया l वह उत्पत्ति 1 में जैसा था वैसा ही दिखायी दिया l

शांति देनेवाला हाथ

नर्स की टिप्पणी में लिखा था, “मरीज़ झगड़ालू स्वभाव का है l”

उसके बाद उसने यह पहचाना कि जटिल ओपन-हार्ट शल्यचिकित्सा के बाद होश में आने पर मुझे एलर्जी हो रही थी l मेरे गले में एक नली डली थी और मैं परेशान था l मेरा शरीर तेजी से कांपने लगा, और मेरे बांहों पर लगे फीते खिंचने लगे, जो इसलिए लगे थे कि मैं अचानक सांस लेनेवाली नली न खींच दूँ l यह डरानेवाली और दुःख देनेवाली घटना थी l एक समय, नर्स की एक सहायिका ने मेरे बिस्तर की दाहिनी ओर झुककर मेरा हाथ पकड़ लिया l यह अचानक हुआ, और वह कोमल स्पर्श था l मुझे शांति मिली, जिससे मेरा शरीर का बुरी तरह कांपना कम हुआ l

दूसरे मरीजों के साथ अनुभव से, नर्स की सहायिका जानती थी कि शांति देनेवाले हाथ मेरी मदद कर सकते थे l यह परमेश्वर का एक दिखाई देनेवाला उदहारण है कि कैसे वह अपने बच्चों को उनके दुःख में शांति देता है l

शांति किसी देखभाल करनेवाले के हाथ में एक ताकतवर और याद रखने योग्य हथियार है, और पौलुस हमसे 2 कुरिन्थियों 1:3-4 में कहता है कि यह परमेश्वर के हथियार के बक्से का महत्वपूर्ण भाग है; किन्तु परमेश्वर शांति के प्रभाव को हमारे द्वारा बढ़ाता भी है जब वह चाहता है कि बीते समयों में जो शांति हमने प्राप्त की है हम उसी प्रकार की स्थितियों में पड़े हुए दूसरे लोगों को शांति देने के लिए करें (पद.4-7) l यह उसके महान प्रेम का केवल एक और चिन्ह है; और जो हम कभी-कभी सरल भाव के द्वारा दूसरों के साथ बाँट सकते हैं l