परम्पराएं और क्रिसमस
इस क्रिसमस के समय जब आप कैंडी(टॉफी) खाते हैं, जर्मनी के लोगों से कहिये, “डंके स्कोन,”क्योंकि यह मिठाई सबसे पहले क्लोन में बनी थी l जब आपको पोइंसेटिया(एक प्रकार का पौधा) अच्छा लगे तो मेक्सिको वासियों से बोलिए “ग्रेसियास,” क्योंकि यह पौधा इसी देश का है l फ्रांस के लोगों से नोएल शब्द के लिए “मर्सीबियाउकूप” बोलें, और अपने मिसलटो(अमर बेल) के लिए अंग्रेजों की “प्रशंसा” करें l
किन्तु क्रिसमस के मौसम की अपनी परम्पराओं और उत्सवों अर्थात ऐसी रीति-रिवाजों को मानते हुए जो पूरे संसार में हैं, हम अपने भले, करुणामय, और प्रेमी परमेश्वर को अपना सबसे सच्चा और हृदयस्पर्शी “धन्यवाद” ज़रूर दें l 2,000 वर्ष से अधिक पहले यहूदा के चरनी में उस बालक के जन्म के कारण हम क्रिसमस उत्सव मानते हैं l एक स्वर्गदूत ने यह कहकर मानव जाति के लिए इस उपहार की घोषणा की थी, “मैं तुम्हें बड़े आनंद का सुसमाचार सुनाता हूँ ... तुम्हारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्मा है” (लूका 2:10-11) l
इस बार क्रिसमस में, क्रिसमस ट्री की जगमगाती रोशनी में और उसके चारों ओर रखे नए उपहारों के बीच, अपना ध्यान यीशु बालक की ओर करने से ही सच्ची ख़ुशी मिलती है, जो “अपने लोगों का उनके पाप से उद्धार” करने आया” (मत्ती. 1:21) l उसका जन्म परम्पराओं से परे है : जब हम इस अवर्णनीय उपहार के लिए परमेश्वर को धन्यवाद देते हुए उसकी प्रशंसा करते हैं वही हमारा केंद्र बिंदु है l
आशा की उत्तेजना
रेजिनाल्ड फेस्सेनडेन ने बेतार रेडियो संचार में सफलता हासिल करने में वर्षों तक कार्य किया l दूसरे वैज्ञानिकों ने उसके विचारों को सनकी और अपरम्परागत मानकर उसकी सफलता पर शक किया l किन्तु उसका दावा था कि दिसंबर 24, 1906 में, रेडियो पर संगीत बजाने वाला वह प्रथम व्यक्ति था l
फेस्सेनडेन ने एक फल कंपनी से अनुबंध किया जिसने केले की खेती करने और उसे बेचने के लिए लगभग बारह नाकाओं में बेतार प्रणालियाँ लगायी थी l उस क्रिसमस की शाम को, फेस्सेनडेन ने नौकाओं में बेतार के चलानेवालों से ध्यान देने को कहा l 9 बजे उन्होंने उसकी आवाज़ सुनी l
बताया जाता है कि उसने संगीत-नाटक का रिकॉर्ड किया हुआ एक लय बजाया, और उसी वक्त उसने अपना वायलिन निकालकर, “ओ पवित्र रात” बजाते हुए उसके अंतिम अन्तरा तक साथ में गाया l आखिरकार, उसने क्रिसमस की शुभकामनाएं देते हुए लूका 2 में उस कहानी को बताया जहाँ बेतलेहम में स्वर्गदूत एक उद्धारकर्ता के जन्म के विषय चरवाहों को बताते हैं l
दो हज़ार वर्ष पहले बेतलहेम के चरवाहे और 1906 में यूनाइटेड कंपनी शिप्स के जहाज़ के नाविकों ने एक अँधेरी रात में आशा के विपरीत एक चकित करनेवाला आशा का सन्देश सुना l हमारे लिए एक उद्धारकर्ता जन्म लिया है जो मसीह प्रभु है!(लूका 2:11) l हम “आकाश में परमेश्वर की महिमा और पृथ्वी पर उन मनुष्यों में जिनसे वह प्रसन्न है शांति मिले”(पद.14) के स्वर द्वारा स्वर्गदूतों और सदियों के विश्वासियों के संगीत मण्डली का साथ दे सकते हैं l
परमेश्वर हमारे साथ
“मसीह हमारे साथ, मसीह हमारे आगे, मसीह हमारे पीछे, मसीह हमारे अन्दर, मसीह हमारे नीचे, मसीह हमारे ऊपर, मसीह हमारे दाहिने, मसीह हमारे बाएँ ... l” यीशु के जन्म के विषय मत्ती का वर्णन पढ़ते समय मुझे, पांचवी शताब्दी के केल्ट मसीही (यूरोपीय लोगों का एक सदस्य जो किसी समय ब्रिटेन और स्पेन और गौल में रहते थे) संत पैट्रिक द्वारा लिखे हुए इस गीत के शब्द याद आते हैं l मैं महसूस करता हूँ जैसे कोई मुझे गले लगा रहा है और याद दिला रहा है कि मैं कभी भी अकेला नहीं हूँ l
मत्ती का वर्णन हमें बताता है कि परमेश्वर का अपने लोगों के बीच निवास करना ही क्रिसमस का केंद्र है l यशायाह का एक बालक के विषय नबूवत का सन्दर्भ देते हुए जो इम्मानुएल, अर्थात् “परमेश्वर हमारे साथ” कहलाएगा(यशायाह 7:14), मत्ती नबूवत की अंतिम पूर्णता बताता है अर्थात् यीशु, जो पवित्र आत्मा की सामर्थ से जन्म लेकर परमेश्वर हमारे साथ निवास किया l इस सच्चाई की विशेषता इस बात में है कि मत्ती इसी से अपने सुसमाचार का आरंभ और अंत करते हुए यीशु द्वारा अपने शिष्यों को कहे शब्दों से समाप्त करता है : “और देखो, मैं जगत के अंत तक सदैव तुम्हारे संग हूँ” (मत्ती 28:20) l
संत पैट्रिक का गीत मुझे याद दिलाता है कि मसीह हमेशा अपनी आत्मा के द्वारा हममें बसते हुए हमारे साथ है l जब मैं घबराता या भयभीत होता हूँ, मैं उसकी प्रतिज्ञाओं को थामें रह सकता हूँ क्यों वह मुझे कभी नहीं छोड़ेगा l जब मैं बेखबर सो रहा होता हूँ, मैं उसकी शांति पर भरोसा कर सकता हूँ l जब मैं उत्सव मनाता हूँ और आनंदित होता हूँ, मैं अपने जीवन में उसके अनुग्रहकारी कार्य के लिए धन्यवाद दे सकता हूँ l
यीशु, इम्मानुएल – परमेश्वर हमारे साथ l
आत्मा के लिए धन्य रात
जोसफ मोर और फ्रान्ज़ ग्रूबर द्वारा लोकप्रिय क्रिसमस गीत “धन्य रात, ”लिखे जाने से बहुत पहले एन्जलस सैलेसियास ने एक कविता लिखी थी :
देखो! रात के अँधेरे में परमेश्वर का बेटा जन्मा है,
और सब खोया हुआ और त्यागा हुआ बचा लिया गया l
ओ मानव क्या तुम्हारी आत्मा एक धन्य रात बन सकती है,
परमेश्वर तुम्हारे मन में जन्म लेकर सब कुछ ठीक कर देगा l
पोलैंड का एक सन्यासी, सैलेसियास ने 1657 में यह कविता चेरुबिक पिलग्रिम (लघु कविताओं का संग्रह) में प्रकाशित किया l हमारे चर्च के वार्षिक क्रिसमस आराधना में, संगीत मण्डली ने “काश आपकी आत्मा धन्य रात बन जाए,” गीत का दूसरा रूप गाया l
क्रिसमस का दोहरा रहस्य यह है कि परमेश्वर हममें से एक के समान बन गया कि हम उसके साथ एक हो जाएँ l यीशु ने हमें सही बनाने के लिए सभी अन्याय सहे l इसलिए प्रेरित पौलुस लिख सका, “इसलिए यदि कोई मसीह में है तो वह नयी सृष्टि है : पुरानी बातें बीत गयी हैं; देखो, सब बातें नयी हो गयी हैं” (2 कुरिं. 5:17-18) l
चाहे हमारे क्रिसमस में परिवार के लोगों और मित्रों की उपस्थिति हो या न हो, जिसकी हम इच्छा करते हैं, किन्तु हम जानते हैं कि यीशु हमारे लिए जन्म लिया l
अहा, काश आपका हृदय उसके जन्म के लिए एक चरनी होता,
परमेश्वर एक बार फिर इस धरती पर एक बच्चे के रूप में जन्म लेता l
क्रिसमस
एक साल क्रिसमस के दिनों में मुझे एक ऐसे जगह पर काम करने जाना पड़ा जहां मेरे मित्र मुझे ढूंढ न सके l कार्य-स्थल से अपने कमरे पर लौटते समय, मैंने काला सागर की सर्द हवा का सामना किया l
अपने कमरे में पहुँचकर, मैं बहुत चकित हुआ l मेरे कला प्रेमी मित्र ने अपने नए प्रोजेक्ट, उन्नीस इंच लम्बी मिट्टी की क्रिसमस ट्री को बना लिया था l उसमें लगी रंगीन बत्तियों से हमारा अँधेरा कमरा जगमगा रहा था l उसे देखकर मैंने महसूस किया, काश आज मैं घर में होता!
अपने भाई एसाव से भागकर याकूब भी अपने को एक अपरिचित और अकेला स्थान में पाया l कठोर भूमि पर सोते हुए, सपने में उसकी मुलाकात परमेश्वर से हुई l और परमेश्वर ने उसे एक घर देने की प्रतिज्ञा देते हुए कहा, “जिस भूमि पर तू लेटा है, उसे मैं तुझ को और तेरे वंश को दूँगा . . . तेरे और तेरे वंश के द्वारा पृथ्वी के सारे कुल आशीष पाएँगे”(उत्प.28:13-14)l
निःसंदेह, याकूब से ही प्रतिज्ञात मुक्तिदाता आने वाला था, जो हमें अपने निकट लाने के लिए अपने घर को छोड़ा l यीशु ने अपने चेलों से कहा, ”मैं . . . फिर आकर तुम्हें अपने यहाँ ले जाऊँगा कि जहां मैं रहूँ वहां तुम भी रहो” (यूहन्ना 14:3) l
मैं दिसम्बर की उस रात के अँधेरे में अपने कमरे में बैठकर उस क्रिसमस ट्री को देख रहा था l शायद निःसंदेह ही मैंने उस ज्योति के विषय सोचा जो हमें घर का मार्ग दिखाने के लिए पृथ्वी पर आयी थी l
ख़ामोशी तोड़ना
पुराने नियम के अंत में, परमेश्वर शांत दिखाई देता है l चार सौ वर्षों तक यहूदी इंतज़ार करते हैं और चकित होते हैं l ऐसा महसूस हो रहा था जैसे परमेश्वर निष्क्रिय, बेखबर, और उनकी प्रार्थनाओं के प्रति अपने कान बंद कर लिये थे l केवल एक आशा बाकी थी : उद्धारकर्ता के आने की प्राचीन प्रतिज्ञा l उसी प्रतिज्ञा पर यहूदी लोग सब कुछ आधारित करते थे l और उसी समय कुछ महत्वपूर्ण बात होती है l एक बालक के जन्म की घोषणा होती है l
आप लूका के सुसमाचार में लोगों के प्रतिउत्तर को पढ़कर उनकी उत्तेजना को महसूस कर सकते हैं l यीशु के जन्म के समय की घटनाएं एक आनंद भरा संगीत सा लगता है l अनेक चरित्र दृश्य में दिखाई देते हैं : एक बूढ़े चाचा (लूका 1:5-25), एक चकित कुवांरी (1:26-38), एक बूढ़ी नबिया, हन्ना (2:36) l मरियम एक सुन्दर गीत गाती है (1:46-55) l यीशु का एक चचेरा भाई जो अभी जन्म नहीं लिया है, अपनी माँ के गर्भ में आनंद से उछल पड़ता है (1:41) l
लूका इन घटनाओं को उद्धारकर्ता के विषय पुराने नियम में लिखी बातों से सीधे जोड़ता है l जिब्राइल स्वर्गदूत यूहन्ना बप्तिस्मा देनेवाले को “एलिय्याह” भी संबोधित करता है जो प्रभु का मार्ग तैयार करने भेजा गया था (1:17) l स्पष्ट रूप से पृथ्वी पर कुछ हो रहा था l रोमी साम्राज्य के एक एकांत गाँव में निराश, पराजित ग्रामीणों के मध्य कुछ अच्छा होने जा रहा है l
अंतिम उपाय
कुछ साल पहले, मेरे साथी का युवा पुत्र शिकागो में यूनियन स्टेशन पर भीड़ में चलते समय खो गया l बताने की ज़रूरत नहीं कि वह एक भयानक अनुभव था l चिंता में, वह फिर से चलती सीढ़ी से ऊपर गयी और अपने छोटे बेटे को खोजने का प्रयास करती रही l अलगाव के क्षण घंटों में बदल गए l धन्यवाद हो कि अचानक उसका बेटा भीड़ से बाहर उसकी बाहों की सुरक्षा में लौट आया l
मैं अपने मित्र के विषय सोचने लगा जो अपने बच्चे को खोजने के लिए सब कुछ करने को तैयार थी l परमेश्वर ने हमें बचाने के लिए अद्भुत काम किया जो मुझे फिर से धन्यवाद करने का मन देता है l जब आदम और हव्वा जिसमें परमेश्वर का रूप था, पाप कर दिये, उसने अपने लोगों के साथ संगती नहीं रख सकने पर दुःख महसूस किया l उसने सम्बन्ध को फिर से जोड़ने के लिए अत्यधिक प्रयास किया l उसने अपने पुत्र को “खोए हुओं को ढूढ़ने और उनका उद्धार करने [भेजा]” (लूका 19:10) l यदि यीशु हमें परमेश्वर के पास लाने के लिए जन्म न लेता और हमारे पापों के लिए मरने को तैयार न होता, क्रिसमस के समय उत्सव मनाने के लिए हमारे पास कुछ नहीं होता l
इसलिए इस क्रिसमस के समय, हम धन्यवादित हों कि परमेश्वर ने यीशु को भेजकर अंतिम उपाय किया कि उसके साथ हमारी संगती पुनः स्थापित हो जाए l यद्यपि हम एक समय खो गए थे, यीशु के कारण हम खोज लिए गए हैं l
अनंत आशा
क्रिसमस से एक सप्ताह पहले, यानि कि मेरी माँ की मृत्यु के दो महीने बाद, छुट्टियों में खरीददारी और घर सजाना मेरी वरीयता सूची में सबसे नीचे थे l मैंने अपने पति द्वारा मुझे शांति देने के प्रयासों का विरोध किया क्योंकि हमारे परिवार की विश्वासी कुलमाता की मृत्यु से मैं अत्यंत दुखी थी l मैं बहुत उदास थी, जब मेरा बेटा, ज़ेवियर हमारे घर के अन्दर क्रिसमस की बत्तियाँ सजा रहा था l बिना कुछ कहे, अपने पिता के साथ कुछ और काम करने से पहले, उसने बत्तियाँ जला दी l
जैसे ही बत्तियाँ जगमगाने लगीं, परमेश्वर ने धीरे से मुझे अन्धकार से बाहर निकाल दिया l चाहे परिस्थितियाँ जितनी भी दुखद हों, मेरी आशा परमेश्वर की सच्चाई की ज्योति में सुरक्षित थी, जो हमेशा उसके अटल चरित्र को प्रगट करता है l
उस कठिन सुबह के समय परमेश्वर ने जो मुझे याद दिलाया, भजन 146 उसकी पुष्टि करता है : मेरी अनंत आशा “परमेश्वर यहोवा पर है,” जो मेरा सहायक, मेरा सर्वशक्तिमान और करुणामय परमेश्वर है (पद.5) l सबका सृष्टिकर्ता होने के कारण, वह “अपना वचन सदा के लिए पूरा करता रहेगा” (पद.6) l वह “पिसे हुओं का न्याय चुकाता है, और भूखों को रोटी देता है” (पद.7) l “यहोवा झुके हुओं को सीधा खड़ा करता है” (पद.8) l वह “रक्षा करता है,” “संभालता है” और ..., “पीढ़ी पीढ़ी राज्य करता रहेगा” (पद.9-10) l
कभी-कभी, क्रिसमस के दिनों में, हमारे दिन बहुत ही आनंद भरे होंगे l कभी-कभी, हमें हानि होगी, हम दुःख का अनुभव करेंगे, अथवा अकेलापन महसूस करेंगे l किन्तु परमेश्वर हमेशा अन्धकार में ज्योति बनने की और वास्तविक सहायता और अनंत आशा देने की प्रतिज्ञा की है l
नम्रता
जीवन की परेशानियाँ हमें चिड़चिड़ा और तुनक मिजाज बना देती है, किन्तु हमें ऐसे बुरे आचरण से बार-बार होनेवाले प्रभाव से बचना चाहिए, क्योंकि ये हमारे प्रेमियों के हृदयों के उत्साह को कम करके हमारे चारों ओर दुःख फैलाते हैं l अगर हम दूसरों के प्रति मनोहर नहीं हैं हमनें अपना कर्तव्य पूरा नहीं किया l
नया नियम उस सद्गुण के लिए नम्रता शब्द उपयोग करता है जो हमारे मनमुटाव को ठीक कर सकता है, अर्थात् जो एक दयालू और अनुग्रहकारी हृदय को दर्शाता है l इफिसियों 4:2 हमें याद दिलाता है , “सारी दीनता और नम्रता सहित, ... एक दूसरे की सह लो l”
नम्रता दूसरों के प्रति क्रोध प्रगट किये बगैर अपनी सीमाओं और पीड़ाओं को स्वीकार करने की इच्छा है l यह सबसे छोटी सेवा के लिए धन्यवादित होना है, और जिन्होंने हमारी अच्छी तरह सेवा नहीं की उनको सहन करना है l यह तंग करनेवालों को विशेषकर शोर मचानेवालों, उपद्रवी बच्चों को सहन करने की शक्ति देती है; क्योंकि बच्चों के प्रति दयालुता दिखाना भले और नम्र लोगों के जीवनों का उत्तम चिन्ह है l यह उत्तेजना का सामना नम्रता से करता है l यह शांत भी रह सकता है l शांति के लिए, कठोर शब्दों का उत्तर अचल शांति से देना सर्वोत्तम है l
यीशु “नम्र और मन में दीन है” (मत्ती 11:29) l यदि हम उससे कहते हैं, वह ठीक समय में हमें अपने स्वरुप में बदल देगा l स्कॉटलैंड का लेखक जॉर्ज मैकडॉनल्ड कहता है, हमने दूसरों को परेशान किया, जिससे दूसरों को दुःख हुआ l परमेश्वर हमारे अन्दर की ऐसी आवाज़ नहीं सुनना चाहता है . . . यीशु ऐसे पापों से और सभी पापों से हमें छुड़ाने आया l”