आशा की निश्चित बुनियाद
विश्वास के सबक अनापेक्षित स्थानों से भी मिल सकते हैं-जैसे मैंने एक सबक अपने 110 पाउन्ड के लेब्राडोर रिट्रीवर “बेयर” से सीखाl बेयर का पानी का कटोरा रसोई के एक कोने में रखा हुआ थाl जब कभी यह खाली होता था, तो वह भौंकता या अपने पंजे से इसकी ओर इशारा करता थाl या वह इसके पास चुपचाप लेट जाता और इन्तजार करता थाl कई बार तो उसे अनेक मिनटों तक इन्तजार करना पड़ता था, परन्तु बेयर ने भरोसा करना सीख लिया था कि आखिरकार मैं कमरे में आऊँगा, उसे वहाँ देखूँगा, और जो कुछ उसे चाहिए वह उसे उपलब्ध करवाऊंगाl उसके साधारण से विश्वास ने मुझे परमेश्वर पर भरोसा रखने की जरूरत को याद दिलायाl
बाइबल बताती है कि “विश्वास आशा की गई वस्तुओं का निश्चय और अनदेखी वस्तुओं का प्रमाण है” (इब्रानियों 11:1)l इस निश्चय और आश्वासन की बुनियाद स्वयं परमेश्वर है, जो “अपने खोजनेवालों को प्रतिफल देता है” (पद 6)l उन सभी के लिए अपने वायदों को पूरा करने में परमेश्वर वफादार है जो विश्वास करते और यीशु के द्वारा उसके पास आते हैंl
कई बार “अनदेखी” वस्तुओं पर विश्वास करना आसान नहीं होता हैl परन्तु हम परमेश्वर की भलाई और उसके प्रेमी स्वभाव पर यह भरोसा करते हुए निर्भर हो सकते हैं कि उसकी बुद्धी सब बातों में सिद्ध है—तब भी जब हमें इन्जार करना पड़ता हैl जो वह कहता है उसे पूरा करने में वह वफादार है: हमारी अनन्त आत्माओं को बचाने और हमारी गम्भीर जरूरतों को पूरा करने में, इसी समय और सर्वदा के लिएl
केंकड़े की दूर्दशा
जब मेरे चचेरे भाई ने मुझे क्रेफिश पकड़ने में उसके साथ चलने के लिए आमन्त्रित किया, मैं और कुछ सहायता तो नहीं कर सका, परन्तु उत्तेजित हो गयाl मैंने अपने दांत पीस लिए जब उसने मुझे एक प्लास्टिक का बर्तन पकड़ायाl “जिसपर कोई ढक्कन नहीं था?”
“तुम्हें उसकी जरूरत नहीं पड़ेगी,” मछली पकड़ने की डोरियों और मुर्गियों के टुकड़ों के एक छोटे थैले, जिसे हम चारे के रूप में प्रयोग करने वाले थे, को उठाते हुए उसने कहाl
बाद में, जब मैंने उन मछलियों को लगभग आधी बाल्टी में एक दूसरे पर चढ़ कर निकलने का असफल प्रयास करते हुए देखा, तब मुझे अहसास हुआ कि हमें ढक्कन की ज़रूरत क्यों नहीं पड़ेगीl जब भी एक क्रेफिश ऊपर तक पहुँचती थी, दूसरी उसे नीचे खींच लेती थीl
क्रेफिश की दुर्दशा मुझे याद दिलाती है कि सम्पूर्ण समुदाय के लाभ के स्थान पर मात्र अपने ही लाभ की चिन्ता करना कितना विनाशकारी हो सकता हैl पौलुस ऊपर उठाने वाले परस्पर सम्बन्ध को समझ गया था, जब उसने थिस्सलुनिका के विश्वासियों के लिए पत्र लिखाl उसने उनसे आग्रह किया, “जो ठीक चाल नहीं चलते उनको समझाओ कायरों को ढाढस दो, निर्बलों को सम्भालो, सब की ओर सहनशीलता दिखाओl” (1 थिस्सलुनीकियों 5:14)l
उनके देखभाल करने वाले समुदाय की सराहना करते हुए (पद 11), पौलुस ने उन्हें और प्रेमी और शांतिपूर्ण सम्बन्धों के लिए प्रेरित किया (पद 13-15)l क्षमा, करुणा और दया की एक संस्कृति का निर्माण करने के प्रयास के द्वारा परमेश्वर और अन्य लोगों के साथ उनका सम्बन्ध मज़बूत होगा (पद 15, 23)l
इस प्रकार की प्रेम से भरी हुई एकता के द्वारा कलीसिया बढ़ोत्तरी और मसीह की गवाही दे सकती हैl जब विश्वासी दूसरों को नीचे खींचने के स्थान पर दूसरों को ऊपर उठाने के लिए समर्पित होने के द्वारा परमेश्वर का सम्मान करते हैं, तो हम और हमारे समुदाय फलते-फूलते हैंl
यीशु ठीक आपके पीछे है
मेरी बेटी स्कूल जाने के लिए सामान्य से थोड़ी देर पहले ही तैयार हो गई थी, इसलिए उसने पूछा कि क्या हम मार्ग में कॉफी की दूकान पर रुक सकते हैंl जिसपर मैं सहमत हो गईl जब हम उस दूकान पर पहुँचे, तो मैंने कहा, “क्या आज सुबह तुम कुछ खुशी फैलाना चाहोगी?” उसने कहा, “बिलकुलl”
हम ने अपना आर्डर दिया और खिड़की को खोला तो बारिस्ता वाले ने हमें बताया कि हम ने कितना भुगतान करना हैl मैंने कहा, “हम हमारे पीछे वाली लड़की के लिए भी भुगतान करना चाहते हैंl” मेरी बेटी के चेहरे पर एक बड़ी सी मुस्कुराहट थीl
बड़ी-बड़ी चीज़ों में हो सकता है एक कप कॉफ़ी कोई बड़ी बात प्रतीत न होl या क्या यह हो सकती है? मुझे अचम्भा होगा कि क्या यह हमारे लिए उन लोगों की देखभाल करने के लिए यीशु की इच्छा को पूरा करना हो सकता है, जिन्हें उसने “छोटे से छोटा” कहा था? (मत्ती 25:40)l मेरा एक विचार है: लाइन में हमारे पीछे या साथ वाले व्यक्ति को एक उपयुक्त व्यक्ति समझने के बारे में क्या विचार है? और उसके बाद “जो सही लगे” वह करो—हो सकता है यह एक कप कॉफ़ी हो या इससे कुछ अधिक हो या इससे कुछ कम होl परन्तु जब यीशु ने कहा “तुम ने एक के साथ किया” (पद 40) यह हमें दूसरों की सेवा करने में उसकी सेवा करने की एक आज़ादी प्रदान करता हैl
जब हम वहाँ से निकले हम ने हमारे पीछे वाली महिला और बारिस्ता वाले के चेहरे को देखा जब उसने उस महिला के हाथ में वह कॉफी दीl दोनों के चेहरों पर एक बड़ी मुस्कुराहट थीl
असीमित आयाम
मैं शान्त हो कर विनाइल से ढकी हुई चटाई पर लेटी हुई थी, जब संकेत देने पर मशीन घरघराई और आवाज़ की, तो मैंने अपनी साँस रोक लीl मुझे पता था कि अनेक लोग एमआरआई का सामना कर चुके हैं, परन्तु मेरे जैसे घबराए हुए व्यक्ति के लिए इस अनुभव में डटे रहने के लिए मुझ से कहीं अधिक साहसवान व्यक्ति की आवश्यकता थीl मेरे मस्तिष्क में, पवित्रशास्त्र से एक वाक्यांश--उसके प्रेम की... चौड़ाई, और लम्बाई, और ऊंचाई, और गहराई कितनी है” (इफिसियों 3:18) मशीन की घरघराहट के साथ तालमेल में चल रहा थाl इफिसियों की कलीसिया के लिए पौलुस की प्रार्थना में उसने परमेश्वर के प्रेम और उसकी उपस्थिति के अनन्त मापदण्ड पर बल देने के लिए परमेश्वर के प्रेम के चार आयामों का वर्णन कियाl
एमआरआई की मशीन पर लेटे हुए मेरी स्थिति ने मेरी समझ को एक नया रूप उपलब्ध करवायाl चौड़ा: दोनों ओर छ: इंच जहाँ उस ट्यूब में मेरी दोनों बाँहों को कस कर मेरे शरीर से बांधा गया थाl लम्बा: उस सिलेण्डर के दोनों ओर के छेदों की लम्बाई, जो मेरे सिर से पैरों तक थीl ऊँचा: मेरी नाक से उस ट्यूब की छत तक l गहरा: उस ट्यूब का सहारा, जिससे वह ट्यूब मेरे नीचे भूमी पर टिकी हुई थी, जिसने मुझे ऊपर थामा हुआ थाl चारों आयाम परमेश्वर की उपस्थिति का उदाहरण प्रस्तुत कर रहे थे, जिसने मुझे एमआरआई की उस ट्यूब—और जीवन की प्रत्येक परिस्थिति में घेर और थाम रखा थाl
परमेश्वर का प्रेम हमारे चारों ओर हैl चौड़ा: वह हर स्थान के लोगों तक पहुँचने के लिए अपनी बाँहों को फैलाता है l लम्बा: उसका प्रेम कभी समाप्त नहीं होता हैl ऊँचा: वह हमें ऊँचा उठाता हैl गहरा: हमें हर परिस्थिति में थमे रखने के लिए वह नीचे झुक जाता हैl हमें कुछ भी उससे अलग नहीं कर सकता! (रोमियों 8:38-39)l
हमारा स्वागत करने वाला परमेश्वर
हमारी कलीसिया एक पुराने प्राथमिक विद्यालय में इकठ्ठी होती है, जो स्कूल यूएस न्यायालय के एक आदेश (अफ्रीकी अमरीकी विद्यार्थियों को उस स्कूल में आने देने का था, जिसमें पहले मात्र अमेरीकी विद्यार्थी ही आते थे) को न मानने के कारण 1958 में बन्द हो गया थाl अगले वर्ष, स्कूल दोबारा खुला और एल्वा, हमारी कलीसिया की एक सदस्य, उन अश्वेत विद्यार्थियों में से एक थी, जिन्हें एक श्वेत संसार में धकेल दिया गया थाl “मुझे मेरे सुरक्षित समुदाय के साथ-साथ उन शिक्षकों, जो मेरे जीवन का एक हिस्सा थे, से बाहर निकाल कर केवल एक अन्य अश्वेत विद्यार्थी के साथ एक कक्षा के भयावह वातावरण में डाल दिया” एल्वा स्मरण करती हैl एल्वा ने कष्ट उठाया, क्योंकि वह भिन्न थी, परन्तु वह साहस, विशवास और क्षमा करने वाली एक महिला बनीl
उसकी गवाही अत्यन्त गम्भीर है, क्योंकि उसने समाज के कुछ सदस्यों के हाथों बहुत बुराई को सहन किया, जिस समाज ने इस सत्य को अस्वीकार कर दिया था कि प्रत्येक मनुष्य को, नस्ल और विरासत पर ध्यान दिए बिना, परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया जाता हैl आरम्भिक कलीसिया के कुछ स्स्दस्यों ने इसी सत्य के साथ संघर्ष किया, उन्होंने इस बात पर विश्वास किया कि कुछ लोगों को जन्म के कारण ही परमेश्वर के द्वारा प्रेम किया जाता है, जबकि दूसरों को अस्वीकार कर दिया जाता हैl एक दिव्य प्रकाशन प्राप्त होने के पश्चात, पतरस ने सभी को हैरान कर दिया, जिसने उसके इस चौंका देने वाले प्रकाशन को सुना: “अब मुझे निश्चय हुआ कि परमेश्वर किसी का पक्ष नहीं करता, वरन् हर जाति में जो उससे डरता और धर्म के काम करता है, वह उसे भाता है (प्रेरितों के काम 10:34-35)l
परमेश्वर अपने प्रेम को प्रत्येक व्यक्ति की ओर बढ़ाने के लिए अपनी बाहें फैलाता हैl प्रभु करे कि उसकी सामर्थ्य में होकर हम भी वैसा ही करेंl
वह किस प्रकार का उद्धारकर्ता है?
पिछले वर्ष, कुछ मित्रों ने और मैंने तीन महिलाओं की चंगाई के लिए प्रार्थना की, जो कैंसर के साथ संघर्ष कर रही थींl हम जानते थे कि परमेश्वर में ऐसा करने की सामर्थ थी और हम ने उससे ऐसा करने के लिए प्रतिदिन प्रार्थना कीl हम ने बीते समय में उसे कार्य करते हुए देखा था और हमें विश्वास था कि वह ऐसा फिर से कर सकता थाl हम में से प्रत्येक के संघर्ष में ऐसे दिन आए, जिनमें ऐसा लगा कि चंगाई वास्तविकता में बदल गई है और हम सभी ने खुशी मनाईl परन्तु उस पतझड़ में उन सभी की मृत्यु हो गईl कुछ लोगों ने कहा कि यही “अन्तिम चंगाई” थी और एक तरह से यह थी भीl परन्तु फिर भी उस हानि ने हमें गहरा दुःख पहुँचायाl हम चाहते थे वह उन सभी को-यहीं और अभी-चंगा कर दे, परन्तु क्या कारण रहे यह हम कभी भी नहीं समझ पाए, कि कोई चमत्कार नहीं हुआl
कुछ लोग उन चमत्कारों के कारण, जो उसने किए और अपनी आवश्यकताओं को पूरा करवाने के लिए यीशु के पीछे आए (यूहन्ना 6:2, 26)l कुछ लोगों ने उसे बस एक बढ़ई के पुत्र के रूप में देखा (मत्ती 13:55-58), और कुछ लोगों ने उससे उनके राजनीतिक अगुवे होने की आशा की (लूका 19:37-38)l कुछ लोगों ने उसे एक महान शिक्षक माना (मत्ती 7:28-29), जबकि कुछ लोगों ने उसके पीछे आना समाप्त कर दिया क्योंकि उसकी शिक्षा समझने में कठिन थी (यूहन्ना 6:66)l
यीशु अब भी हमारी उन सब अपेक्षाओं को हमेशा पूरा नहीं करता जो हम उससे रखते हैंl तौभी, वह हमारी कल्पना से बहुत बढ़कर हैl वह अनन्त जीवन प्रदान करने वाला है (पद 47-48) l वह भला और बुद्धिमान है; और वह प्रेम करता है, क्षमा करता है, हमारे निकट रहता है और हमें आराम प्रदान करता हैl ऐसा हो हम यीशु में जैसा वह है, वैसे में ही आराम प्राप्त करें और उसके पीछे चलते रहेंl
चिन्ता के लिए एक विकल्प
कानून को मानने वाले एक ईमानदार व्यक्ति को एक वायस मेल प्राप्त हुई, जो इस प्रकार थी, “मैं पुलिस विभाग से________अधिकारी बोल रहा हूँl कृपया मुझे इस नम्बर पर फोन करेंl” उसी समय उस व्यक्ति ने चिन्ता करनी आरम्भ कर दी—वह डरा हुआ था कि कहीं न कहीं उसने कुछ गलत कर दिया हैl वह वहाँ फोन करने से डर रहा था, यहाँ तक कि वह अनेक प्रकार की सम्भव परिस्थितियों पर विचार करते हुए अनेक रातों तक जागता रहा—वह चिन्ता कर रहा था कि वह किसी न किसी प्रकार की समस्या में थाl उस अधिकारी ने कभी दुबारा फोन नहीं किया, परन्तु उस चिन्ता को जाने में हफ्तों का समय लगाl
चिन्ता के विषय में यीशु ने एक रोचक प्रश्न किया: “तुम में कौन है जो चिन्ता करके अपनी आयु में एक घड़ी भी बढ़ा सकता है? (मत्ती 6:27)l सम्भवतः यह हमारी चिन्ता करने की प्रवृति पर पुन: विचार करने में हमारी सहायता कर सकता है, क्योंकि यह सलाह देता है कि उस परिस्थिति के बारे में चिन्ता करने से कोई लाभ नहीं है, जिसके बारे में हम चिन्ता कर रहे हैंl
हमारे जीवन में जब समस्याएँ चरम पर होती हैं, तो उस समय हम इस दो कदम वाले निम्नलिखित प्रस्ताव को अपना कर देख सकते हैं: कार्य करो और परमेश्वर पर भरोसा रखोl यदि हम समस्या से बचने के लिए कुछ कर सकते हैं, तो हम उसका प्रयास कर सकते हैंl हम परमेश्वर से उस कार्य को करने के लिए, जो हमें करना चाहिए, सहायता प्रदान करने के लिए मार्गदर्शन माँग सकते हैंl परन्तु यदि हम कुछ भी नहीं कर सकते हैं, तो हम यह जानकर शान्ति के साथ रह सकते हैं कि परमेश्वर स्वयं को ऐसी अवस्था में कदापि नहीं रखताl वह सर्वदा ही हमारे पक्ष में कार्य कर सकता हैl हम भरोसे और आत्मविश्वास के साथ अपनी परिस्थिति को उस पर डाल सकते हैंl
जब चिन्ता करने जैसा महसूस हो, तो हम राजा दाऊद के प्रेरित शब्दों की ओर जाएँ, जिसने अपनी कठिनाइयों और चिन्ताओं का सामना किया, परन्तु यह निष्कर्ष निकाला: “अपना बोझ यहोवा पर डाल दे वह तुझे सम्भालेगा” (भजन संहिता 55:22) l चिन्ता के लिए कितना उत्तम विकल्प!
एक साधारण व्यक्ति
विलियम केरी इंग्लैंड के नार्थएम्पटन के निकट एक गरीब परिवार में जन्मा एक रोगिहा लड़का थाl उसका भविष्य ज्यादा उज्जवल प्रतीत नहीं होता थाl परन्तु परमेश्वर की उसके लिए योजनाएँ थींl समस्त बाधाओं के बावजूद, वह भारत आया, जहाँ वह अतुलनीय सामाजिक बदलाव लाया और बाइबिल का अनेक भारतीय भाषाओँ में अनुवाद कियाl उसने परमेश्वर और लोगों से प्रेम किया और परमेश्वर के लिए अनेक कार्य पूर्ण किएl
यिशै का पुत्र, दाऊद अपने परिवार में सबसे छोटा एक साधारण सा लड़का थाl वह बैतलहम की पहाड़ियों पर एक मामूली सा चरवाहा प्रतीत होता था (1 शमूएल 16: 11-12) l फिर भी परमेश्वर ने दाऊद के हृदय को देखा और उसके पास दाऊद के लिए एक योजना थीl राजा शाऊल को अनाज्ञाकारिता के कारण परमेश्वर के द्वारा अस्वीकार कर दिया गया थाl नबी शमूएल शाऊल के चुनावों के कारण दुखी था, परन्तु परमेश्वर ने शमूएल को एक अन्य राजा, यिशै के पुत्रों में से एक को अभिषिक्त करने के लिए बुलायाl
जब शमूएल ने सुन्दर और लम्बी कद-काठी वाले एलीआब को देखा, उसने स्वाभाविक रूप से विचार किया, “निश्चय यह जो यहोवा के सामने है वही उसका अभिषिक्त होगा” (पद 6) l परन्तु राजा का चुनाव करने के लिए परमेश्वर की युक्ति शमूएल से भिन्न थीl परमेश्वर ने यिशै के छोटे पुत्र को छोड़ प्रत्येक पुत्र के लिए मना कर दियाl दाऊद को राजा चुनना परमेश्वर की ओर से एक योजनाबद्ध रीति किया गया कार्य निश्चयत नहीं लगता; या पहली नज़र में यह ऐसा ही प्रतीत होता हैl एक युवा चरवाहे के पास अपने समुदाय को देने के लिए क्या होगा, बस अपने राष्ट्र को अलग-थलग कर देने के अलावा?
यह जानना कितना आरामदायक है कि परमेश्वर हमारे हृदयों को जानता है और उसके पास हमारे लिए योजनाएँ हैंl
महानतम महिमा
कैसर अगस्तुस को रोमी सम्राटों के पहले और महान सम्राट के रूप में याद किया जाता हैl राजनीतिक दक्षता और सैन्य शक्ति के द्वारा उसने अपने शत्रुओं को मार डाला, अपने साम्राज्य को फैलाया और रोम को अपने ठहरे हुए पड़ोसियों के कौलाहल से संगमरमर की मूर्तियों और मन्दिरों के एक नगर में बदल दियाl रोमी नागरिकों के अगस्तुस को मानवजाति के दिव्य पिता और रक्षक के रूप में श्रद्धा रखने के रूप में जाना जाता हैl जब उसके चालीस वर्ष के राज्य का अन्त हुआ, उसके औपचारिक शब्द थे, “मुझे रोम एक मिट्टी के नगर के रूप में मिला, परन्तु मैंने इसे एक संगमरमर का नगर बना दियाl” परन्तु उसकी पत्नी के अनुसार उसके अन्तिम शब्द ये थे, “क्या मैंने सही कार्य किए? तो अब जब मैं जा रहा हूँ, तो तब ही सराहना करनाl”
जो अगस्तुस को पता नहीं था वह बात यह थी कि उसे एक बड़ी कहानी में एक सहयोग की भूमिका अदा करने के लिए दी गई थीl उसके राज्य में रोमी सेना की विजय, मन्दिर, स्टेडियम या महल से एक बड़ी बात को प्रकट करने के लिए एक बढ़ई का पुत्र पैदा हुआ था (लूका 2:1) l
परन्तु उस वैभव को कौन समझ सका जिसके लिए यीशु ने उस रात प्रार्थना की जिस रात उसके देशवासियों ने रोमी हत्यारों द्वारा उसे क्रूस पर चढ़ा देने की माँग की थी? (यूहन्ना 17:4-5)l बलिदान के उस छिपे हुए आश्चर्य को कौन देख सकता था जिसकी सराहना आकाश और पृथ्वी पर सर्वदा की जाएगी?
यह एक कहानी मात्र हैl हमारा परमेश्वर हमें मूर्खता भरे सपनों और अपने आप से झगड़ते हुए पाता हैl वह हमें एक पुरानी क्रूस के बारे में गाते हुए छोड़ कर गया थाl