आपके व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद!
जब मैं एक कैंसर केंद्र में रहकर अपनी माँ की देखभाल करती थी, मेरा परिचय एक और देखभाल करनेवाली महिला, लॉरी से हुआ जो हमारे घर के आगेवाले गलियारे में अपने पति के साथ रहती थी l मैं सामान्य स्थान पर लॉरी के साथ बातचीत करती थी, हँसती थी, अपने दिल की बात बताती थी और प्रार्थना करती थी l अपने प्रियों की सेवा करते वक्त हम एक दूसरे का सहयोग करने का आनंद उठाते थे l
एक दिन, किराना का सामान खरीदने के लिए निवासियों को ले जानेवाला वाहन मुझसे छूट गया l देर शाम लॉरी ने मुझे वहाँ ले जाने की पेशकश की l कृतज्ञ हृदय से, मैंने उसकी पेशकश स्वीकार कर ली l मैंने कहा, “ तुम्हारे व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद l” जैसी वह थी मैंने केवल एक मित्र के रूप में मेरी मदद करने के लिए ही नहीं, किन्तु सच्चाई से उसके व्यक्तित्व की सराहना की l
भजन 100 परमेश्वर के वास्तविक व्यक्तित्व की सराहना है, केवल उसके काम की नहीं l भजनकार “सारी पृथ्वी के लोगों [को](पद.1) निश्चित रूप से जानने के लिए “कि यहोवा ही परमेश्वर है” (पद.3) . . . आनंद से यहोवा की आराधना [करने के लिए]” (पद.2) नेवता देता है l हमारा सृष्टिकर्ता हमें “[उसको] धन्यवाद [देने] और [उसकी] स्तुति [करने के लिए]” (पद.4) अपनी उपस्थिति में बुलाता है l वास्तव में, हमारा प्रभु निरंतर हमारे कृतज्ञता का हकदार है क्योंकि वह “भला है,” उसकी करुणा सदा की है,” और उसकी “सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (पद.5) l
परमेश्वर हमेशा इस जगत का सृष्टिकर्ता और पालक और हमारा घनिष्ठ प्रेमी पिता रहेगा l वह हमारे असली ख़ुशी से पूर्ण कृतज्ञता के योग्य है l
एक सुरक्षित स्थान
मेरा भाई और मैं पश्चिम वर्जिनिया में एक वृक्षयुक्त पहाड़ी की ढाल पर पले और बड़े हुए जिसने हमारी कल्पनाओं के लिए उपजाऊ परिदृश्य प्रदान किया l चाहे टार्जन की तरह बेलों से झुलना हो या स्विस परिवार रोबिनसन की तरह ट्री हाउस बनाना हो, हमने उन कहानियों के परिदृश्यों को निभाया जो हमने पढ़ी थीं और जो फिल्मों में देखा था l हमारे पसंदीदा में से एक था किले बनाकर मान लेना कि हम आक्रमण से सुरक्षित हैं l वर्षों बाद, मेरे बच्चे काल्पनिक शत्रुओं से बचाव के लिए अपने लिए कम्बलों, चादरों, और तकियों से किले अर्थात् “सुरक्षित स्थान” बनाए l एक छिपने का स्थान स्वाभाविक महसूस होता है जहाँ आप सुरक्षित और महफूज़ महसूस कर सकें l
जब इस्राएल का गायक-कवि राजा दाऊद, एक सुरक्षित स्थान ढूंढता था, वह परमेश्वर के आलावा और कहीं नहीं गया l भजन 46:1-2 दावा करते हैं, “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक l इस कारण हम को कोई भय नहीं l जब हम दाऊद के जीवन के विषय पुराना नियम के वृतान्त पर विचार करते हैं, और लगभग निरंतर खतरों का सामना करता था, ये शब्द परमेश्वर में भरोसा का एक अद्भुत स्तर प्रगट करते हैं l उन खतरों के बावजूद, वह निश्चित था उसकी सच्ची सुरक्षा परमेश्वर में ही थी l
हम भी उस भरोसे को जान सकते हैं l परमेश्वर जो हमें कभी नहीं छोड़ने या त्यागने का वादा करता है (इब्रानियों 13:5) हम प्रतिदिन अपने जीवन से उसी पर भरोसा रखते हैं l यद्यपि हम एक खतरनाक संसार में रहते हैं, हमारा परमेश्वर हमें शांति और आश्वासन देता हैं – अभी और हमेशा के लिए l वह हमारा सुरक्षित स्थान है l
परमेश्वर सुनता है
जब समूह के अन्य लोग चुनौतियों अथवा बीमारी से जूझ रहे अपने परिजनों और मित्रों के लिए मांग रहे थे डाईएन सुन रही थी l उसके परिवार का एक सदस्य वर्षों से नशे की लत से संघर्ष कर रहा था l किन्तु डाईएन ने अपना निवेदन साझा नहीं किया l उसकी ऊँची आवाज़ में बोले गए शब्दों के प्रतिउत्तर में लोगों के चेहरों के भाव या उनका प्रश्न पूछना या उनकी सलाह वह सहन नहीं कर पाती थी l उसने महसूस किया कि उसका निवेदन नहीं बताना और चुप रहना ही बेहतर था l दूसरे समझ नहीं पाए कि उसका प्रिय यीशु का विश्वासी होकर भी दैनिक संघर्ष कैसे कर सकता था l
यद्यपि डाईएन ने समूह के साथ अपना निवेदन साझा नहीं किया, उसने कुछ भरोसेमंद मित्रों से उसके साथ प्रार्थना करने को कहा l उनके साथ मिलकर उसने परमेश्वर से अपने प्रिय के लिए नशे की वास्तविक बंधन से छुटकारा माँगा कि वह मसीह में स्वतंत्रता का अनुभव कर सके – और कि परमेश्वर डाईएन को आवश्यक शांति और धीरज दे l प्रार्थना करने पर, उसने अपने प्रिय के साथ अपने सम्बन्ध में आराम और सामर्थ्य महसूस किया l
हममें से अनेक के पास वास्तविक, दृढ़ प्रार्थना निवेदन होते हैं जो अनुत्तरित महसूस होते हैं l किन्तु हम आश्वास्त हों कि परमेश्वर ध्यान देता ही है और वह हमारे सभी निवेदन सुनता ही है l वह हमसे “आशा में आनन्दित, क्लेश में स्थिर, प्रार्थना में नित्य लगे” (रोमियों 12:12) रहकर उसके निकट चलने को प्रेरित करता है l हम उसपर भरोसा कर सकते हैं l
उस क्षण का प्रभु
कुछ समय पूर्व मैं अपने पुत्र के घर से तीन घंटे की दूरी पर एक निर्माण परियोजना में काम करता था l काम पूरा होने में अपेक्षाकृत अधिक दिन लग गए, और हर सुबह मेरी प्रार्थना होती थी हम सूर्यास्त तक काम ख़त्म कर लेंगे l किन्तु प्रत्येक शाम करने के लिए और काम निकल आते थे l
मैं सोचने लगा क्यों l क्या विलम्ब के लिए कोई कारण हो सकता था? अगली सुबह एक उत्तर मिला l औज़ार उठाते समय एक अपरिचित का फोन आया जिसे बहुत जल्दी थी : तुम्हारी बेटी के साथ दुर्घटना हो गयी है l तुम्हें तुरंत आना है l"
वह मेरे पुत्र के घर के निकट ही रहती थी, इसलिए मुझे उसके पास पहुँचने में केवल चौदह मिनट लगे l यदि मैं अपने घर पर होता, मुझे पहुँचने में तीन घंटे लगे होते l मैं एम्बुलेंस के साथ-साथ गया और सर्जरी से पहले उसे ढाढ़स दिया l जब मैं उसके हाथों को थामे हुए था मैं समझ गया कि यदि मेरी परियोजना विलंबित नहीं होती, मैं वहाँ नहीं होता l
हमारे क्षण परमेश्वर के हैं l इस तरह का अनुभव उस स्त्री का था जिसके पुत्र को परमेश्वर ने एलिशा नबी द्वारा जिलाया था (2 राजा 4:18-37) l उसने अकाल के कारण देश छोड़ दिया था और वर्षो बाद लौटकर राजा से अपनी भूमि मांगी l ठीक उसी समय राजा नबी के सेवक गहेजी से बात कर रहा था l "जब वह [गहेजी] राजा से यह वर्णन कर ही रहा था कि एलिशा ने . . . स्त्री के बेटे को . . . जिलाया था" वह स्त्री अन्दर आ गयी (8:5) l उसका अनुरोध पूरा किया गया l
हम नहीं जानते अगला क्षण क्या लेकर आएगा, किन्तु परमेश्वर हर एक स्थिति को भलाई में बदल देता है l परमेश्वर हमें आज हमारे लिए उसकी नियुक्तियों में उम्मीद से चलने के लिए अनुग्रह दे l
एक मजबूत आधार
पिछली गर्मियों में हम दोनों पति-पत्नी फालिंग वॉटर(Fallingwater) घूमने गए, ग्रामीण पेन्सिल्वेनिया में एक घर जिसे वास्तुकार फ्रैंक लोयड राइट ने 1935 में अभिकल्पित किया था l मैंने ऐसा कभी नहीं देखा है l राइट जैविक/कार्बोनिक रूप से परिदृश्य से उदित होनेवाले घर को बनाना चाहता था, मानो वह वहीं पर विकसित हुआ हो - और उसने अपने लक्ष्य को प्राप्त कर लिया l उसने घर को वहाँ मौजूद एक झरने के चारोंओर निर्मित किया, और निकट के चट्टान का किनारा उसके शैली दर्पण (style mirrors) के रूप में l हमारे गाइड ने हमें समझया कि निर्माण किस प्रकार सुरक्षित किया गया है : उसने बताया, "घर का सम्पूर्ण सीधा भाग शिलाखंडों पर आधारित है l"
उसके शब्दों को सुनकर, मैंने यीशु के शब्दों को याद किया जो उसने शिष्यों से कहा था l यीशु ने पहाड़ी उपदेश में उनको बताया कि उसकी शिक्षा उनके जीवनों में निश्चित आधार होगी l यदि वे उसके शब्दों को सुनकर उसका अभ्यास करेंगे, वे किसी भी तूफ़ान का सामना कर पाएंगे l इसके विपरीत, जो सुनकर उसपर नहीं चलेंगे, बालू पर घर बनाने वाले की तरह होंगे (मत्ती 7:24-27) l बाद में, पौलुस ने भी यही बात कही, कि मसीह नींव है, और हमें उसी पर टिकाऊ निर्माण करना है (1 कुरिन्थ्यों 3:11) l
जब हम यीशु की बातें सुनकर उनका अभ्यास करते हैं, हम अपने जीवनों को अटल चट्टान के बुनियाद पर बनाते हैं l शायद हमारे जीवन फालिंग वॉटर(Fallingwater), की तरह, सुन्दर और चट्टान पर टिके रहने वाला हो l
सूखी घास डालना
जब मैं कॉलेज में था, मैंने कोलोराडो में एक खेत पर गर्मियों में काम किया l एक शाम, खेत की लवाई करते हुए एक लम्बे दिन के अंत में थका और भूखा, मैंने ट्रैक्टर को यार्ड में घुसेड़ दिया l खुद को तेज़ निशानेबाज़ मानकर, मैंने स्टीयरिंग व्हील को दृढ़ता से बाईं ओर घुमाया, बाईं ब्रेक को दबाया, और ट्रैक्टर मोड़ दिया l
हँसिया नीचे था जिससे निकट रखे 500 गैलन डीजल टैंक के नीचे के पाँव खिसक गए l टैंक बड़ी आवाज़ के साथ धरती पर गिरा, उसके जोड़ खुल गए, और पूरा तेल बह गया l
मैं ट्रैक्टर से उतरा, अस्पष्ट आवाज़ में क्षमा मांगी, और - इसलिए कि मेरे मन में वह पहली बात आयी थी - बिना वेतन के पूरी गर्मी काम करने का प्रस्ताव रखा l
वृद्ध किसान एक पल के लिए उस बर्बादी को देखता रहा और घर की ओर मुड़ा l "चलो चलकर रात्रि भोजन खाते हैं," उसने कहा l
यीशु की बतायी हुयी कहानी का एक भाग मेरे मन में आया - एक युवा की कहानी जिसने एक बहुत ही ख़राब काम किया था : "पिता, मैंने स्वर्ग और आपके विरुद्ध पाप किया है," वह चिल्लाया l उसने आगे और बोलने की कोशिश की, " मुझे अपने एक मजदुर के समान रख लें," किन्तु अपने मुँह से सम्पूर्ण शब्दों को उच्चारित करने से पहले उसके पिता ने हस्तक्षेप किया l संक्षेप में, उसने कहा, "चलो चलकर रात्रि भोजन खाते हैं" (लूका 15:17-24) l
परमेश्वर का अनुग्रह ऐसा ही है l
परमेश्वर यहाँ है
हमारे घर में एक स्मृति-पट्टिका पर "पुकारे या न पुकारे, परमेश्वर उपस्थित है," अंकित है l उसका आधुनिक संस्करण कुछ इस प्रकार हो सकता है, "स्वीकारें या न स्वीकारें, परमेश्वर यहाँ है l"
ई.पु. आठवीं शताब्दी के आखरी भाग(755-715) में रहनेवाला पुराना नियम का नबी होशे ने, इब्री राष्ट्र को समरूप शब्दों में संबोधित किया l वह इस्राएलियों से परमेश्वर को स्वीकारने हेतु "यत्न"(होशे 6:3) करने को उत्साहित करता है क्योंकि वे उसे भूल गए थे (4:1) l जैसे-जैसे लोग परमेश्वर की उपस्थिति भूल गए, वे उससे दूर होते गए (पद.12) और जल्द ही उनके विचारों में परमेश्वर नहीं रह गया (देखें भजन 10:4) l
परमेश्वर को स्वीकारने के लिए होशे की सरल लेकिन गहन अंतर्दृष्टि हमें याद दिलाती है कि वह आनंद और संघर्ष दोनों में, हमारे जीवन में निकट है और काम करता है l
परमेश्वर को स्वीकार करने का अर्थ हो सकता है कि जब हम काम में पदोन्नति प्राप्त करते हैं, तो हम मानते हैं कि परमेश्वर ने हमें समय पर और बजट के भीतर अपना काम पूरा करने की अंतर्दृष्टि दी l अगर हमारा आवास आवेदन ख़ारिज हो जाता है, तो परमेश्वर को स्वीकारने से हमें सहायता मिलती है जब हम उसे हमारी भलाई के लिए काम करने के लिए भरोसा करते हैं l
यदि हमें हमारे मन का कॉलेज नहीं मिलता है, हम परमेश्वर को स्वीकार करें वह हमारे साथ है और अपनी निराशा में भी उसकी उपस्थिति में सुख प्राप्त करें l रात्रि भोजन खाते समय, परमेश्वर को स्वीकारना उसके द्वारा भोजन की सामग्रियों का प्रबंधन और भोजन तैयार करने के लिए रसोई की याद दिलाता है l
जब हम परमेश्वर को स्वीकार करते हैं, हम अपने जीवनों में बड़ी या छोटी सफलता और उदासी दोनों में ही उसकी उपस्थिति को याद करते हैं l
शांत गवाह
एमी एक बंद देश में रहती है जहाँ सुसमाचार प्रचार करना निषेध है l वह एक प्रशिक्षित नर्स है और एक बड़े हॉस्पिटल में नौकरी करती है, जहां नवजात शिशुओं की देखभाल की जाती है l वह इतनी समर्पित है कि उसका कार्य प्रगट है, और बहुत सी महिलाएँ उसके विषय उत्सुक हैं l वे उससे व्यक्तिगत रूप से प्रश्न पूछने को विवश होती हैं l ऐसे समय में एमी खुले तौर पर अपने उद्धारकर्ता के विषय साझा करती है l
उसके अच्छे काम का कारण, कुछ सहकर्मी ईर्ष्या करते हुए उसपर कुछ दवाईयाँ चोरी करने का दोष लगाया l उसके अधिकारियों ने उनकी बातों पर विश्वास नहीं किया, और अधिकारियों ने आख़िरकार दोषी को खोज लिया l इस घटना ने साथी नर्सों को उससे उसके विश्वास के विषय पूछने लगीं l उसका उदाहरण मुझे पतरस की बातें याद दिलाते हैं, "हे प्रियों, . . . . अन्यजातियों(गैर-मसीहियों) में तुम्हारा चाल-चलन भला हो; ताकि जिन-जिन बातों में वे तुम्हें कुकर्मी जानकार बदनाम करते हैं, वे तुम्हारे भले कामों को देखकर उनके कारण कृपा-दृष्टि के दिन परमेश्वर की महिमा करें" (2 पतरस 2:11-12) l
घर पर, हमारे काम के माहौल में, या स्कूल में हमारे दैनिक जीवन दूसरों पर प्रभाव डालते हैं जब हम परमेश्वर को अपने अन्दर काम करने देते हैं l हम उन लोगों से घिरे हुए होते हैं जो हमारे बातचीत और व्यवहार पर ध्यान देते हैं l हम परमेश्वर पर भरोसा रखकर उसे अपने कार्यों और विचारों पर अधिकार रकने दें l तब जो अविश्वासी हैं उनको हम प्रभावित करेंगे और संभवतः कुछ यीशु में विश्वास करेंगे l
सनातन सहायक
रीढ़ की हड्डी की चोट से लकवाग्रस्त होने के बाद, मार्टी ने एमबीए अर्जित करने के लिए कॉलेज जाने का फैसला किया l मार्टी की माँ, जूडी, ने उसके लक्ष्य को वास्तविकता बनाने में सहायता की l वह उसके साथ निरंतर बैठकर हर व्याख्यान और अध्ययन नोट्स लिखने और प्रोद्योगिकी मुद्दों को समझने में उसकी सहायता की l उसने उसे मंच पर पहुँचाकर डिप्लोमा प्राप्त करने में उसकी सहायता की l मार्टी ने व्यवहारिक सहायता से अप्राप्य को संभव कर लिया l
यीशु जानता था उसके पृथ्वी से जाने के बाद उसके चेलों को उसी प्रकार की सहायता की ज़रूरत होगी l उसने अपनी शीघ्र घटित होनेवाली अनुपस्थिति की बात कही, उसने कहा वे पवित्र आत्मा द्वारा परमेश्वर के साथ एक नए प्रकार का सम्बन्ध प्राप्त करेंगे l आत्मा उन्हें पल-पल मदद करेगा - एक शिक्षक और मार्गदर्शक जो केवल उनके साथ निवास ही नहीं करेगा किन्तु उनमें बसेगा भी (यूहन्ना 14:17, 26) l
आत्मा परमेश्वर की ओर से यीशु के शिष्यों को आंतरिक सहायता पहुंचाएगा, जो उन्हें सुसमाचार सुनाते समय उनको वह सब बातें सहने की शक्ति देगा जिसे वे अपने बल पर बर्दाश्त नहीं कर सकते हैं l संघर्ष के क्षणों में, आत्मा उनको यीशु की कही बातें स्मरण दिलाएगा (पद.26) : तुम्हारे मन व्याकुल न हों . . . एक दूसरे से प्रेम करो . . . पुनरुत्थान और जीवन मैं हूँ l
क्या आप अपनी सामर्थ्य और योग्यता से बाहर कुछ सहन कर रहे हैं? आप आत्मा की सनातन सहायता पर निर्भर हो सकते हैं l आपके अन्दर पवित्र आत्मा का काम उसे [परमेश्वर को] उचित महिमा देगा l