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“यहोवा का”

इन दिनों टैटू (tattoos) लगा कर लोगों की नज़रों में आना सामान्य है l कुछ टैटू इतने छोटे होते हैं कि दूसरे उसे शायद ही देख सकें l अन्य लोग जैसे खिलाड़ी, अभिनेता/अभिनेत्री से लेकर सामान्य लोग भी अपने शरीर का अधिकाँश भाग शब्दों, और डिजाईनों से बहुरंगी बना लेते हैं l ऐसी प्रवृति जो शायद स्थायी दिखाई देता है, प्रवृति जिसने 2014 में 3 अरब डॉलर राजस्व कमाने के साथ-साथ टैटू हटाने के लिए अलग से 66 करोड़ डॉलर कमाया l

टैटू के विषय आप क्या महसूस करते हैं के बावजूद, यशायाह 44 अलंकारिक रूप से लोगों का अपने हाथों पर कुछ लिखने के विषय कहता है : “यहोवा का” (पद.5) l यह आत्म-टैटू सम्पूर्ण परिच्छेद का उत्कर्ष है जो परमेश्वर के चुने हुए लोगों के लिए उसकी देखभाल दर्शाता है (पद.1) l वह उसकी देखभाल पर भरोसा कर सकते थे (पद.2); और उनकी भूमि और वंशजों को आशीष के लिए चिन्हित किया गया था (पद.3) l दो साधारण, शक्तिशाली शब्द, “यहोवा का,” निश्चित कर दिया कि परमेश्वर के लोग जानते थे वे उसकी संपत्ति हैं और कि वह उनकी देखभाल करेगा l

यीशु मसीह में विश्वास करके परमेश्वर के पास आनेवाले अपने विषय दृढ़ता से बोल सकते हैं, “यहोवा का!” हम उसके लोग, उसकी भेड़, उसकी संतान, उसकी मीरास, उसका निवास स्थान हैं l हम अपने जीवन के विभिन्न ऋतुओं में इन बातों को ही थामें रहते हैं l यद्यपि हमारे पास कोई बाहरी चिह्न या टैटू नहीं होगा, हमें यह भरोसा है कि हमारे हृदयों में परमेश्वर की आत्मा की गवाही है कि हम उसके हैं (देखें रोमियों 8:16-17) l

दृढ़ प्रेम

“मैं तुमसे प्यार करता हूँ!” मेरे पिता बोले जब मैं कार के दरवाजे को ज़ोर से बंद करके स्कूल की ओर चल दी l मैं छठी कक्षा में थी, और महीनों से हर सुबह एक ही स्थिति थी l स्कूल पहुँचने पर पिता कहते थे, “तुम्हारा दिन अच्छा हो! मैं तुमसे प्यार करता हूँ!” और मैं केवल कहती थी, “अलविदा l” मैं उनसे नाराज़ नहीं थी या उनकी उपेक्षा नहीं करती थी l अपने विचारों में अत्यधिक मशगूल होने के कारण मैं उनके शब्दों पर ध्यान नहीं देती थी l फिर भी, मेरे पिता का प्रेम दृढ़ बना रहा l

परमेश्वर का प्रेम ऐसा ही है – उससे भी अधिक l वह सदा स्थिर रहता है l इस प्रकार के प्रेम के लिए इब्रानी शब्द हेसेद है l पुराना नियम में यह शब्द बार-बार दोहराया गया है, और केवल भजन सहिंता 136 में छब्बीस बार! कोई भी आधुनिक शब्द इसका अर्थ स्पष्ट नहीं कर सकता है; हम इसका अर्थ “दयालुता,” “करुणा,” “दया,” या निष्ठा” लगाते हैं l हेसेद ऐसा प्रेम है जो वाचा प्रतिबद्धता पर आधारित है; प्रेम जो निष्ठावान और विश्वासयोग्य है l परमेश्वर के लोगों द्वारा पाप करने के बावजूद, वह उनसे प्रेम करने में विश्वासयोग्य था l दृढ़ प्रेम परमेश्वर के चरित्र का एक अभिन्न भाग है (निर्गमन 34:6) l

जब मैं बच्ची थी, मैं अपने पिता के प्रेम को अनुदत्त/स्वीकार्य मान लेती थी l कभी-कभी वर्तमान में भी मैं अपने स्वर्गिक पिता के प्रेम के साथ ऐसा ही करती हूँ l मैं परमेश्वर की नहीं सुनती हूँ और उत्तर नहीं देती हूँ l मैं धन्यवादी होना भूल जाती हूँ l फिर भी मैं जानती हूँ कि मेरे लिए परमेश्वर का प्रेम दृढ़ है – एक सच्चाई जो मेरे पूरे जीवन के लिए एक निश्चित आधार है l

घर

हाल ही में एक मित्र की कैंसर से मृत्यु हो गयी जो अपनी आजीविका के लिए मकान बेचा करती थी l पैट्सी के विषय अपनी यादें तरोताज़ा करते समय, मेरी पत्नी सू ने याद किया कि बहुत वर्ष पूर्व पैट्सी ने एक व्यक्ति को मसीह में विश्वास करने में मार्गदर्शन किया था और वह हमलोगों का अच्छा मित्र बन गया था l

यह याद करना कितना उत्साहजनक है कि पैट्सी न केवल परिवारों को हमारे समुदाय में रहने के लिए घर पाने में सहायता करती थी, बल्कि वह दूसरों को यह सुनिश्चित करने में भी सहायता करती थी कि उनके पास एक अनंत घर है l

हमारे लिए क्रूस तक जाने की तैयारी करते समय, यीशु ने हमारे अनंत घर के विषय भी गहरी रूचि दिखायी l उसने अपने शिष्यों से कहा, “मैं तुम्हारे लिए जगह तैयार करने जाता हूँ” और उनको याद दिलाया कि उसपर विश्वास करनेवालों के लिए उसके पिता के घर में पर्याप्त स्थान है (यूहन्ना 14:2) l

हम इस जीवन में रहने के लिए एक सुन्दर घर चाहते हैं – अपने परिवार के भोजन, विश्राम, और संगति के लिए एक विशेष स्थान l लेकिन विचार करें कि यह कितना आश्चर्यजनक होगा जब हम अगले जीवन में पहुँच कर यह जानेंगे कि परमेश्वर ने हमारे लिए अनंत घर का प्रबंध किया है l परमेश्वर की स्तुति हो जिसने हमें “बहुतायत का” जीवन के साथ-साथ वर्तमान में अपनी उपस्थिति देता है और उस स्थान पर भी देगा जो वह हमारे लिए तैयार कर रहा है (14:3) l

विचार करते हुए कि परमेश्वर ने यीशु पर विश्वास करनेवालों के लिए क्या रखा है, पैट्सी की तरह कार्य करने और दूसरों का यीशु से परिचय कराने के लिए चुनौती देता है l

परमेश्वर का छिपा हुआ हाथ

मेरे एक मित्र को एक अमरीकी मिशनरी जोड़े ने गोद लिया था और उसकी परवरिश घाना में हुयी थी l उसके परिवार के अमरीका लौटने के बाद, उसने कॉलेज की पढ़ाई आरम्भ की किन्तु किसी कारण से उसे छोड़ना पड़ा l बाद में, वह सेना में भर्ती हो गया, जिससे आख़िरकार वह कॉलेज की फीस दे सका और पूरा संसार घूम सका l इस दौरान, परमेश्वर कार्य कर रहा था, और एक विशेष भूमिका के लिए उसे तैयार कर रहा था l आज, वह अंतर्राष्ट्रीय पाठकों के लिए मसीही साहित्य लिखता और सम्पादित करता है l

उसकी पत्नी के जीवन की कहानी भी रुचिकर है l मिर्गी की बीमारी के लिए तेज़ दवाइयां लेने से वह अपने कॉलेज के प्रथम वर्ष में रसायन की परीक्षा में विफल रही l कुछ सावधानीपूर्वक विचारणा के बाद, उसने विज्ञान का अध्ययन छोड़कर अमरीकी संकेत भाषा की पढ़ाई शुरू कर दी जो उसके लिए संभव दिखाई दिया l उस अनुभव पर विचार करते हुए, वह कहती है, “परमेश्वर मेरे जीवन को एक बड़े उद्देश्य की ओर ले जा रहा था l” आज, वह बधिरों तक परमेश्वर का जीवन परिवर्तन करनेवाला वचन पहुंचा रही है l

क्या आपको कभी आश्चर्य होता है कि परमेश्वर आपको कहाँ ले जा रहा है? भजन 139:16 हमारे जीवनों में परमेश्वर के संप्रभु हाथ को स्वीकारता है : “तेरी आँखों ने मेरे बेडौल तत्व को देखा; और मेरे सब . . . दिन . . . तेरी पुस्तक में लिखे हुए थे l” हमें नहीं मालूम परमेश्वर हमारे जीवनों की परिस्थितियों का उपयोग किस प्रकार करेगा, किन्तु हम इस ज्ञान में विश्राम पाते हैं कि परमेश्वर हमारे विषय सब कुछ जानता है और हमारे क़दमों को मार्गदर्शित करता है l उसके संप्रभु हाथ छिपे होने के बावजूद, वह सर्वदा उपस्थित है l

अकेला क्रिसमस

मैंने अपना सबसे अकेला क्रिसमस उत्तरी घाना के साकोगु के निकट अपने दादा के छोटे घर में बिताया था l मैं केवल पंद्रह वर्ष का था, और मेरे माता-पिता और भाई-बहन एक हज़ार किलोमीटर दूर थे l बीते वर्षों में, जब मैं उनके साथ और गाँव के मित्रों के साथ था, क्रिसमस हमेशा बड़ा और यादगार होता था l किन्तु यह क्रिसमस शांत और अकेला था l जब मैं सुबह क्रिसमस के दिन अपनी चटाई पर लेता हुआ था, मुझे एक स्थानीय गीत याद आ गया : साल ख़त्म हो गया है, क्रिसमस आ गया है; परमेश्वर का बेटा जन्मा है; शांति और आनंद सब के लिए l शोकाकुल ढंग से मैंने इसे बार बार गाया l

मेरे दादा ने आकर मुझसे पूछे, “यह कैसा गीत है?” मेरे दादा क्रिसमस– या मसीह के विषय नहीं जानते थे l इसलिए क्रिसमस के विषय जितना मैं जानता था उन्हें बता दिया l उन क्षणों ने मेरे अकेलेपन को रोशन कर दिया l

केवल भेंड़ और कभी-कभी परभक्षियों के साथ खेतों में, युवक चरवाहा दाऊद ने अकेलापन अनुभव किया l यह एकमात्र समय नहीं रहा होगा l बाद में उसने अपने जीवन में लिखा, “मैं अकेला और दीन हूँ” (भजन 25:16) l लेकिन दाऊद ने अकेलेपन को निराश करने की अनुमति नहीं दिया l इसके बदले, उसका गीत था : मुझे तेरी ही आशा है” (पद.21) l

समय-समय से हम सब अकेलापन का अनुभव करते हैं l आप क्रिसमस में कहीं भी रहें, अकेले या साथ में, आप मसीह के साथ इस मौसम का आनंद ले सकते हैं l

मदद

हमारे बच्चों ने इदाहो की ठंडी सर्दियों में पीछे के आँगन में आइस-स्केटिंग दौड़ के रोमांच का आनंद उठाया है l बचपन में, स्केटिंग सीखना उनके लिए चुनौती थी : बर्फ के कठोर सतह पर जानबूझ कर पैर रखने के लिए उन्हें विवश करना कठिन था क्योंकि वे गिरने की पीड़ा जानते थे l हर समय उनके पैर फिसलने पर, हम दोनों पति-पत्नी उनको पैर पर सीधे खड़े होने औरउनके शरीर को सीधा करने में सहायता करते थे l

गिरने पर हमें उठानेवाले सहयोगी हाथ एक वरदान है जो सभोपदेशक की पुस्तक में दिखाई देता है l दूसरे के साथ मिलकर काम करना हमारे कार्य को और मधुर और अधिक प्रभावशाली बना देता है (4:9), और मित्र हमारे जीवनों को स्नेही बनाते हैं l चुनौतियों का सामना करते समय, किसी की व्यवहारिक और भावनात्मक सहायता से मदद मिलती है l ऐसे सम्बन्ध हमें शक्ति, उद्देश्य, और आराम देते हैं l

जब हम जीवन की कठिनायों के ठन्डे बर्फ पर खुद को पराजित पाते हैं, क्या कोई सहायता करनेवाला हाथ आपके निकट होता है? यदि हाँ, तो यह परमेश्वर की ओर से है l या जब किसी और को मित्र की ज़रूरत हो, क्या हम उनको उठाने के लिए परमेश्वर की ओर से उत्तर हैं? सहचर बनकर, हमें भी अक्सर सहयोगी मिल जाता है l यदि हमें उठाने वाला कोई नहीं है, हम इस बात में विश्राम पाते हैं कि परमेश्वर हमारा अति सहज से मिलनेवाला सहायक है (भजन 46:1) l जब हम उसे पुकारते हैं, वह अपनी मजबूत पकड़ से हमें थाम लेता है l

क्रिसमस के समय प्रश्न

कैलेंडर में दिसम्बर माह आने से पहले ही, हमारे उत्तरी शहर में क्रिसमस की खुशियों के बुलबुले फूटने लगते हैं l एक चिकित्सा ऑफिस अपने परिसर के पेड़ों और झाड़ियों को अलग-अलग रंगों की बत्तियों से सजा देता है, जिससे आसपास का परिदृश्य रोशन होकर लुभावना दिखाई देता है l एक और व्यवसाय अपनी इमारत को एक विशाल, असाधारण रूप से क्रिसमस के उपहारों से लिपटा हुआ दिखने के लिए सजाते हैं l क्रिसमस की भावना हर जगह दिखाई देती है – या कम से कम मौसमी व्यापार तो दिखाई देता ही है l

कुछ लोग इन भव्य प्रदर्शनों को पसंद करते हैं l दूसरों के दृष्टिकोण आलोचनात्मक होते हैं l किन्तु महत्वपूर्ण सवाल यह नहीं है कि दूसरे क्रिसमस को किस दृष्टि से देखते हैं l इसके बजाए, हममें से प्रत्येक को यह विचार करने की ज़रूरत है कि उस्तव हमारे लिए क्या अर्थ रखता है l

यीशु ने अपने जन्म से तीस वर्ष से थोड़ा अधिक समय बाद अपने शिष्यों से पूछा, “लोग मनुष्य के पुत्र को क्या कहते हैं?” (मत्ती 16:13) l उन्होंने दूसरों के प्रतिउत्तर दोहराए : यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला, एलिय्याह, और संभवतः कोई और नबी l उसके बाद यीशु ने उस प्रश्न को व्यक्तिगत बनाया : “परन्तु तुम मुझे क्या कहते हो?” (पद.15) l पतरस ने उत्तर दिया, “तू जीवते परमेश्वर का पुत्र मसीह है” (पद.16) l

इस वर्ष, अनेक लोग इस विचार के बिना कि बालक कौन है, क्रिसमस मनाएंगे l जब हम उनसे बातचीत करते हैं, हम उनको इन महत्वपूर्ण प्रश्नों पर विचार करने में सहायता कर सकते हैं : क्या क्रिसमस गौशाले में एक बच्चे के जन्म के विषय हृदय को आनंदित करनेवाली कहानी है? या सृष्टिकर्ता वास्तव में अपनी सृष्टि में आकर हमारे समान ही बन गया?

आपके व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद!

जब मैं एक कैंसर केंद्र में रहकर अपनी माँ की देखभाल करती थी, मेरा परिचय एक और देखभाल करनेवाली महिला, लॉरी से हुआ जो हमारे घर के आगेवाले गलियारे में अपने पति के साथ रहती थी l मैं सामान्य स्थान पर लॉरी के साथ बातचीत करती थी, हँसती थी, अपने दिल की बात बताती थी और प्रार्थना करती थी l अपने प्रियों की सेवा करते वक्त हम एक दूसरे का सहयोग करने का आनंद उठाते थे l

एक दिन, किराना का सामान खरीदने के लिए निवासियों को ले जानेवाला वाहन मुझसे छूट गया l देर शाम लॉरी ने मुझे वहाँ ले जाने की पेशकश की l कृतज्ञ हृदय से, मैंने उसकी पेशकश स्वीकार कर ली l मैंने कहा, “ तुम्हारे व्यक्तित्व के लिए धन्यवाद l” जैसी वह थी मैंने केवल एक मित्र के रूप में मेरी मदद करने के लिए ही नहीं, किन्तु सच्चाई से उसके व्यक्तित्व की सराहना की l

भजन 100 परमेश्वर के वास्तविक व्यक्तित्व की सराहना है, केवल उसके काम की नहीं l भजनकार “सारी पृथ्वी के लोगों [को](पद.1) निश्चित रूप से जानने के लिए “कि यहोवा ही परमेश्वर है” (पद.3) . . . आनंद से यहोवा की आराधना [करने के लिए]” (पद.2) नेवता देता है l हमारा सृष्टिकर्ता हमें “[उसको] धन्यवाद [देने] और [उसकी] स्तुति [करने के लिए]” (पद.4) अपनी उपस्थिति में बुलाता है l वास्तव में, हमारा प्रभु निरंतर हमारे कृतज्ञता का हकदार है क्योंकि वह “भला है,” उसकी करुणा सदा की है,” और उसकी “सच्चाई पीढ़ी से पीढ़ी तक बनी रहती है” (पद.5) l

परमेश्वर हमेशा इस जगत का सृष्टिकर्ता और पालक और हमारा घनिष्ठ प्रेमी पिता रहेगा l वह हमारे असली ख़ुशी से पूर्ण कृतज्ञता के योग्य है l

एक सुरक्षित स्थान

मेरा भाई और मैं पश्चिम वर्जिनिया में एक वृक्षयुक्त पहाड़ी की ढाल पर पले और बड़े हुए जिसने हमारी कल्पनाओं के लिए उपजाऊ परिदृश्य प्रदान किया l चाहे टार्जन की तरह बेलों से झुलना हो या स्विस परिवार रोबिनसन की तरह ट्री हाउस बनाना हो, हमने उन कहानियों के परिदृश्यों को निभाया जो हमने पढ़ी थीं और जो फिल्मों में देखा था l हमारे पसंदीदा में से एक था किले बनाकर मान लेना कि हम आक्रमण से सुरक्षित हैं l वर्षों बाद, मेरे बच्चे काल्पनिक शत्रुओं से बचाव के लिए अपने लिए कम्बलों, चादरों, और तकियों से किले अर्थात् “सुरक्षित स्थान” बनाए l एक छिपने का स्थान स्वाभाविक महसूस होता है जहाँ आप सुरक्षित और महफूज़ महसूस कर सकें l

जब इस्राएल का गायक-कवि राजा दाऊद, एक सुरक्षित स्थान ढूंढता था, वह परमेश्वर के आलावा और कहीं नहीं गया l भजन 46:1-2 दावा करते हैं, “परमेश्वर हमारा शरणस्थान और बल है, संकट में अति सहज से मिलनेवाला सहायक l इस कारण हम को कोई भय नहीं l जब हम दाऊद के जीवन के विषय पुराना नियम के वृतान्त पर विचार करते हैं, और लगभग निरंतर खतरों का सामना करता था, ये शब्द परमेश्वर में भरोसा का एक अद्भुत स्तर प्रगट करते हैं l उन खतरों के बावजूद, वह निश्चित था उसकी सच्ची सुरक्षा परमेश्वर में ही थी l

हम भी उस भरोसे को जान सकते हैं l परमेश्वर जो हमें कभी नहीं छोड़ने या त्यागने का वादा करता है (इब्रानियों 13:5) हम प्रतिदिन अपने जीवन से उसी पर भरोसा रखते हैं l यद्यपि हम एक खतरनाक संसार में रहते हैं, हमारा परमेश्वर हमें शांति और आश्वासन देता हैं – अभी और हमेशा के लिए l वह हमारा सुरक्षित स्थान है l