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सिद्ध पिता

भीड़ भरे एक स्टोर के गलियारे में खड़ी, मैं पिता दिवस का सबसे अच्छा कार्ड खोज रही थी l यद्यपि वर्षों बाद हम दोनों बाप बेटी ने एक तनावपूर्ण सम्बन्ध के बाद मेल-मिलाप कर लिया था, किन्तु मैं कभी भी अपने पिता से निकट सम्बन्ध नहीं रख पायी थी l

मेरे निकट खड़ी उस महिला ने आह भरकर उस कार्ड को फिर से उस शेल्फ में रख दिया l “वे उन लोगों के लिए कार्ड क्यों नहीं बनाते जिनका सम्बन्ध अपने पिता से ठीक नहीं है, किन्तु सही सम्बन्ध बनाने का प्रयास कर रहे हैं?”

मेरे उत्तर देने से पहले ही वह जल्दी से दूकान से बाहर चली गयी, इसलिए मैंने उसके लिए प्रार्थना किया l मैंने परमेश्वर को धन्यवाद दिया कि केवल वही सिद्ध पिता है l मैंने उससे अपने पिता से सम्बन्ध मजबूत करने के लिए सामर्थ्य मांगी l

मैं अपने स्वर्गिक पिता से गहरा सम्बन्ध रखने की भी चाहत रखती हूँ l मैं परमेश्वर की नित्य उपस्थिति, सामर्थ्य, और सुरक्षा के लिए दाऊद का भरोसा चाहती हूँ (भजन 27:1-6) l

जब दाऊद ने सहायता माँगी, वह परमेश्वर के उत्तर की आशा रखता था (पद.7-9) l यद्यपि संसार के माता-पिता अपने बच्चों को त्याग देते हैं, छोड़ देते हैं अथवा उनकी उपेक्षा करते हैं, दाऊद ने परमेश्वर की शर्तहीन स्वीकार्यता की घोषणा करता है (पद.10) l वह परमेश्वर की भलाई की निश्चितता में जीता था (पद.11-13) l हममे से कईयों की तरह, दाऊद भी संघर्ष करता था, किन्तु पवित्र आत्मा उसे भरोसा रखने और प्रभु पर निर्भरता कायम रखने में उसकी सहायता करता था (पद.14) l

अनंत के इस ओर हम सब कठिन संबंधों का सामना करेंगे l किन्तु जब लोग चूक करें, हमें छोड़ दें, उस स्थिति में भी हमारा एक मात्र सिद्ध पिता हमसे पूर्ण प्रेम करता है और सुरक्षा देता है l

चेहरे

जब हमारी पौत्री सारा छोटी थी, उसने मुझे समझाया कि मृत्यु के बाद क्या होता है : “केवल आपका चेहरा स्वर्ग जाता है, आपका शरीर नहीं l आपको नया शरीर मिलता है, किन्तु चेहरा वही होता है l”

वास्तव में, हमारे अनंत की स्थिति के विषय में सारा का विचार एक बच्चे की समझ थी, किन्तु वह एक विशेष सच्चाई समझ गयी थी l एक अर्थ में, हमारे चेहरे अदृश्य आत्मा का दृश्य प्रतिबिम्ब है l

मेरी माँ कहती थी कि किसी दिन क्रोधित रूप मेरे चेहरे पर ठहर जाएगा l वह अपने ज्ञान से बुद्धिमान थी l एक चिंतित ललाट, हमारा क्रोधित चेहरा, हमारी आँखों में एक कुटिल दृष्टि एक दयनीय आत्मा को दर्शाती है l  दूसरी ओर, झुर्री, दाग़, और अन्य कुरूपता के बावजूद दयालु आँखें, एक कोमल दृष्टि, स्नेही और स्वागत करनेवाली मुस्कराहट आंतरिक रूपांतरण के चिन्ह बन जाते हैं l

जिस चेहरे के साथ हम जन्म लिए हैं उसके विषय में हम अधिक कुछ नहीं कर सकते हैं, किन्तु हम जिस तरह के व्यक्ति बन रहे हैं उसके विषय ज़रूर कुछ कर सकते हैं l हम नम्रता, धीरज, दयालुता, धीरज, कृतज्ञता, क्षमा, शांति, और प्रेम के लिए प्रर्थना कर सकते हैं (गलातियों 5:22-26) l

परमेश्वर की सहायता से, और उसके नाम में, आप और मैं अपने प्रभु के आंतरिक स्वरुप में बढ़ते जाएं, एक सादृश्यता जो दयालु, वृद्ध चेहरे में झलकता है l इसलिए, जिस तरह अंग्रेजी कवी जॉन डॉन (1572-1631) ने कहा है, कि उम्र “आखिरी दिन में सबसे खुबसूरत” हो जाती है l

और सच्चाई में

वर्षों पूर्व, मैं एक ऐसे विवाह में शामिल हुआ जिसमें भिन्न देशों के दो लोगों का विवाह हुआ l संस्कृतियों का ऐसा मिलन खुबसूरत हो सकता है, किन्तु इस समारोह में मसीही परम्पराओं के साथ ऐसे विश्वास की रीति रिवाजों का समावेश था जिसमें अनेक देवताओं की उपासना शामिल थी l

नबी सपन्याह ने एक सच्चे परमेश्वर में विश्वास के साथ दूसरे धर्मों की मिलावट(जिसे कभी-कभी समन्वयता[syncretism] कहा जाता है) की स्पष्ट रूप से निंदा की l यहूदा के लोग एक सच्चे परमेश्वर की उपासना के साथ-साथ मोलेक देवता पर भी  भरोसा करते थे (स्पन्याह 1:5) l स्पन्याह उनके द्वारा मूर्तिपूजक संस्कृति को अपनाने का वर्णन करते हुए(पद.8) चेतावनी देता है कि इसके परिणाम स्वरुप परमेश्वर यहूदा के लोगों को उनके अपने देश से निर्वासित कर देगा l
इसके बावजूद भी परमेश्वर ने अपने लोगों से प्रेम करना नहीं छोड़ा l उसका न्याय यह प्रगट कर रहा था कि उनको उसकी ओर लौटना होगा l इसलिए स्पन्याह यहूदा के लोगों से कहता है “धर्म को ढूढों, नम्रता को ढूढों” (2:3) l उसके बाद परमेश्वर ने कोमल शब्दों में उनकी पूर्ण पुनर्स्थापन की प्रतिज्ञा की : “उसी समय मैं तुम्हें ले जाऊँगा, और उसी समय मैं तुम्हें इकठ्ठा करूँगा” (3:20) l
जिस विवाह में मैं शामिल हुआ था उसमें प्रगट धर्मों की मिलावट के उदहारण की निंदा करना सरल है l किन्तु वास्तविकता में, हम सभी  परमेश्वर की सच्चाई को हमारी संस्कृति की मान्यताओं के साथ सरलता से मिला देते हैं l हमें सच्चाई पर भरोसा और प्रेम के साथ खड़े रहने हेतु अपने विश्वास की जांच पवित्र आत्मा के मार्गदर्शन में और परमेश्वर के वचन की सत्यता के प्रकाश में करनी होगी l हमारा पिता हरेक को गले लगाता है जो आत्मा और सच्चाई से उसकी उपासना करता है (देखें यूहन्ना 23-24) l

साथ-साथ

प्राचीन काल में, टूटी दीवारों वाला शहर खतरा और शर्म के साथ-साथ पराजित लोगों का चिन्ह होता था l इसी कारण यहूदियों ने यरूशलेम की दीवारों का पुनः निर्माण किया l कैसे? पास-पास रहकर कार्य करते हुए, जो नहेम्याह 3 में खूबसूरती से व्यक्त है l

पहली झलक में, अध्याय 3 पुनः निर्माण में किसने क्या किया का उबाऊ वर्णन महसूस हो सकता है l हालांकि, निकट अवलोकन स्पष्ट करता है कि लोग किस तरह एक दुसरे के निकट  रहकर कार्य किए l याजक लोग शासकों के निकट रहकर कार्य कर रहे थे l इत्र बनानेवालों के साथ-साथ सुनारों ने भी कार्य किया l निकट के शहरों के लोग भी सहायता करने आ गए l दूसरों ने अपने घरों के सामने मरम्मत की l जैसे, शल्लूम की बेटियों ने पुरुषों के साथ कार्य में सहयोग दिया (3:12), और तकोइयों की तरह, कुछ लोगों ने दो भागों की मरम्मत की (पद.5,27) l

इस अध्याय से दो  बातें स्पष्ट हो जाती हैं l पहली, एक सामूहिक कार्य के लिए सभी ने  साथ-साथ काम किया l दूसरी बात, दूसरों की तुलना में किसने कितना अधिक अथवा कम किया की जगह उस काम को पूर्ण करने के लिए सभी की सराहना की गयी है l

आज हम बिगड़े परिवार और टूटा समाज देखते हैं l किन्तु यीशु लोगों के जीवन को बदल कर  परमेश्वर के राज्य को बनाने आया था l हम लोगों को, यीशु में आशा और नया जीवन देकर अपने पड़ोस का पुनः निर्माण कर सकते हैं l हम सभी को कुछ करना ही है l इसलिए काम छोटा या बड़ा हो, हम साथ-साथ रहकर अपना उत्तरदायित्व पूरा करते रहें जिससे हम प्रेमी समाज की रचना कर पाएंगे जहाँ लोग यीशु से मिल सकेंगे l

एक अंधे का आग्रह

कुछ वर्ष पूर्व, एक सह-यात्री ने ध्यान दिया कि मुझे दूर की वस्तुएं देखने में कठिनाई हो रही है l उसके बाद जो उसने किया वह सरल किन्तु जीवन बदलने वाला था l उसने अपना चश्मा उतार कर मुझे दिया और कहा, “इनको पहनकर देखिये l” उसका चश्मा पहनकर, मेरी धुंधली दृष्टि स्पष्ट हो गयी l मैं आँखों के डॉक्टर के पास गया जिसने मेरी दृष्टि की समस्या को ठीक करने के लिए मुझे चश्मा पहनने का सुझाव किया l

आज के पाठ लुका 18 में एक दृष्टिहीन व्यक्ति दिखाई देता है जो पूर्ण अन्धकार में रहते हुए अपनी जीविका के लिए भीख मांगने को मजबूर था l लोकप्रिय शिक्षक और आश्चर्यकर्म करनेवाले, यीशु की खबर उस अंधे भिखारी के कानों तक पहुँच गयी थी l इसलिए जब यीशु उस मार्ग पर गया जहां वह दृष्टिहीन भिखारी बैठा हुआ था, उसके मन में आशा जाग उठी l उसने पुकारा, “हे यीशु, दाऊद की संतान, मुझ पर दया कर!” (पद.38) l शारीरिक रूप से दृष्टिहीन होने के बावजूद, इस व्यक्ति में आत्मिक अंतर्दृष्टि थी कि यीशु कौन है और वह उसकी ज़रूरत पूरा कर सकता है l विशवास से विवश होकर, “वह और भी चिल्लाने लगा, ‘हे दाऊद की संतान, मुझ पर दया कर!’” (पद.39) l परिणाम? उसकी दृष्टिहीनता चली गयी, और अब वह अपनी जीविका के लिए भीख नहीं मांगता था और दृष्टि प्राप्त करके दूसरों के लिए परमेश्वर की आशीष बन गया था (पद.43) l

अन्धकार के क्षण और काल में, आप किस दिशा में मुड़ते हैं? आप किस पर भरोसा करते हैं और किसको पुकारते हैं? दृष्टि में सुधार के लिए चश्मा है, किन्तु परमेश्वर के पुत्र यीशु का स्पर्श ही है, जो लोगों को आत्मिक दृष्टिहीनता से प्रकाश में लाता है l

हमारी आँखें खोल दीजिए

जब मैं पहली बार इस्तांबुल में अत्यधिक खुबसूरत चोरा चर्च देखने गयी, मैं चर्च के छत पर बनी यूनानी साम्राज्य के दिनों की भित्तिचित्रों और मोज़ाइक चित्रों को पहचाना जो बाइबल की कहानियाँ बता रहीं थीं l किन्तु मैं बहुत कुछ देखने से रह गयी l हलाकि, दूसरी बार, एक गाइड की सहायता से मैंने सभी विवरण जान लिए और तब अचानक पूरी बातें समझ में आ गयीं l जैसे, पहला गलियारा लूका रचित सुसमाचार में वर्णित यीशु का जीवन प्रदर्शित कर रहा था l

कभी-कभी बाइबल पढ़ते समय हम मौलिक कहानियों को समझते हैं, किन्तु उन कहानियों के बीच सम्बन्धों के विषय में भी समझना होगा जो बाइबल को एक कहानी में बांधती हैं? बिलकुल, हमारे पास बाइबल टिकाएं और अध्ययन करने के सहायक साधन हैं, किन्तु हमें एक गाइड चाहिए अर्थात् कोई जो हमारी आँखें खोल सके और हमें  परमेश्वर के लिखित प्रकाशन में अद्भुत बातें दिखा सके l पवित्र आत्मा हमारा गाइड है जो “सब बातें” समझाता है (यूहन्ना 14:26) l पौलुस कहता हैं कि वह “पवित्र आत्मा की सिखाई हुई बातों में आत्मिक बातें, आत्मिक बातों से मिला मिलकर सुनाते हैं” (1 कुरिं. 2:13) l  

बाइबल के लेखक द्वारा हमें उसमें की अद्भुत बातें बताना कितना अद्भुत है! परमेश्वर ने हमें केवल लिखित वचन और अपना प्रकाशन ही नहीं दिया है किन्तु वह उसे समझने और उससे सीखने में मदद करता है l  इसलिए हम भजनकार के साथ प्रार्थना करें, “मेरी आँखें खोल दे, कि मैं तेरी व्यवस्था की अद्भुत बातें देख सकूँ” (भजन 119:18) l

घड़ियाँ और कैलेंडर

मेरे पिता की मृत्यु 58 वर्ष की उम्र में हुई l उस समय से, मैं ठहर कर उस तारीख को अपने पिता और मेरे जीवन पर उनके प्रभाव को याद करता हूँ l जब मैंने पहचाना कि मैंने उनके साथ  रहने से अधिक उनके बिना  जीवन बिताया है, तो मैंने अपने जीवन की संक्षिप्तता पर विचार करने लगा l

पिछली बातों पर विचार करते समय, हम समय के किसी घटना और हमारे हृदयों में उससे उत्पन्न होने वाली भावनाओं से भी संघर्ष करते हैं l समय को घड़ियों और कैलन्डरों की सहायता से मापने  के बावजूद भी हम घटनाओं के कारण समय को याद करते हैं l जीवन के उन क्षणों में जो गहरी भावनाएं उत्पन्न करता हैं, हम आनंद, हानि, आशीष, पीड़ा, सफलता, और पराजय का अनुभव कर सकते हैं l

बाइबल हमें उत्साहित करती है : “हे लोगों, हर समय उस पर भरोसा रखो; उससे अपने अपने मन की बातें खोलकर करो; परमेश्वर हमारा शरणस्थान है” (भजन 62:8) l यह कथन आरामदायक समय का नहीं है l शत्रुओं से घिरे हुए दाऊद ने इन शब्दों को लिखा (पद.3-4) l ऐसी स्थिति में भी, वह परमेश्वर के सामने ठहरा रहा (पद.1,5) जिससे हम याद करते हैं कि परमेश्वर का अपराजित प्रेम (पद.12) संघर्ष के उन सभी समयों से कहीं महान है जिसका हम सामना करते हैं l

हर एक घटना में, हमें यह भरोसा है : हमारा परमेश्वर हमारे साथ खड़ा है, और वह हमारे जीवनों के सभी क्षणों में भरोसेमंद से कहीं बढ़कर है l जब जीवन के समय हमें पराजित करने की कोशिश करें, उसकी सहायता सही समय पर मिलेगी l

दाँत निकलने के दिन

मेरी पत्नी ने मुझे लेब्राडोर जाति का एक पिल्ला दिया जिसका नाम हमने मैक्स रखा l एक दिन चिंतन करते समय मेरे कमरे में मुझे अपने पीछे कागज़ के चबाने की आवाज़ आयी l मैं मुड़कर मैक्स को देखा जिसने गलती की थी l उसके सामने एक पुस्तक खुली थी और उसके मुँह से एक पन्ना लटक रहा था l

हमारे पशु चिकित्सक के अनुसार मैक्स के “दूध के दाँत टूटकर नए दाँत निकल रहे” हैं l कुत्ते के बच्चों के दूध के दाँत टूटकर स्थायी दाँत निकलते समय वे अपने मसूड़ों को आराम देने के लिए कुछ भी चबा लेते हैं l हमें मैक्स पर ध्यान देकर निश्चित करना था कि वह ऐसा कुछ भी न कुतरे जिससे उसका नुक्सान हो l हमें उसके बदले उसे स्वास्थ्यप्रद आदतें सिखानी होगी l

मैक्स के चबाने की आदत और उस पर ध्यान देने की मेरी ज़िम्मेदारी मुझे सोचने को विवश करती है कि हम अपने मनों और हृदयों में क्या “चबाते” हैं l क्या हम वेब अथवा टीवी देखते समय ध्यानपूर्वक विचार करते हैं कि हमारी अनंत आत्मा क्या ग्रहण कर रही है? बाइबल हमें उत्साहित करती है, “नए जन्मे हुए बच्चों के सामान निर्मल आत्मिक दूध की लालसा करो, ताकि उसके द्वारा उद्धार पाने के लिए बढ़ते जाओ, क्योंकि तुम ने प्रभु की कृपा का स्वाद चख लिया है”(1 पतरस 2:2-3) l यदि हम मसीह के अनुयायी बनकर रहना चाहते हैं तो हमें प्रतिदिन खुद को परमेश्वर के वचन और सच्चाई से भरना होगा l तब ही हम उसमें बढ़कर परिपक्व हो सकते हैं l  

एक साल में बाइबल

मेरी सहेली और मैं सर्वदा-लयबद्ध समुद्र के निकट रेत पर बैठे हुए थे l सूर्य जैसे- जैसे दूर अस्त हो रहा था, लहरें बार-बार मुड़कर हमारे पावों के निकट आकर ठहर जाती थीं l “मुझे समुद्र पसंद है,” वह मुस्करा कर बोली l “उसमें गति है इसलिए मुझे गतिमान होने की ज़रूरत नहीं l”

कितना अच्छा विचार! हममें से कितने लोग ठहरने  के लिए संघर्ष करते हैं l हम इस भय से अत्यधिक प्रयास करते जाते हैं, कि कहीं हमारे प्रयासों के विफल होने से हमारा अस्तित्व ही न मिट जाए l अथवा हमारा सामना उन वर्तमान सच्चाइयों से होगा जिनसे हम दूरी बनाकर रखना चाहते हैं l

भजन 46:8-9 में, परमेश्वर अपने सर्वसामर्थी ताकत का उपयोग करके अपनी सामर्थ्य का प्रदर्शन करता है l “आओ, यहोवा के महाकर्म देखो . . . . वह पृथ्वी की छोर तक की लड़ाइयों को मिटाता है; वह धनुष को तोड़ता, और भाले को दो टुकड़े कर डालता है l” परमेश्वर एक व्यस्त परमेश्वर है, जो हमारे अव्यवस्थित दिनों को शांत करता है l

और उसके बाद हम पद 10 में पढ़ते है, “चुप हो जाओ, और जान लो कि मैं ही परमेश्वर हूँ l”

अवश्य ही अव्यवस्थित दिनों में भी परमेश्वर को जानना संभव है l किन्तु खुद के प्रयासों को विराम देने का भजनकार का निमंत्रण हमें एक भिन्न प्रकार का बोध कराता है l यह जानना कि हम अपने प्रयासों को विराम देकर भी अस्तित्व में रह सकते हैं क्योंकि परमेश्वर कभी भी नहीं रुकता है l यह जानना कि यह परमेश्वर की सामर्थ्य है जो हमें असली महत्त्व, सुरक्षा, और शांति देती है l