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अनावश्यक बुद्धि

कुछ साल पहले, एक महिला ने मुझे अपने 13 वर्ष से कम के बेटे के विषय बताया जो एक हिंसात्मक घटना सम्बंधित समाचार देख रहा था l स्वाभाविक बुद्धि से, उसने उससे रिमोट छीनकर चैनल बदल दिया l “तुम्हें इस तरह की बातें नहीं देखनी चाहिए,” वह उससे रूखेपन से बोली l इसके बाद वाद-विवाद शुरू हो गया, और अंततः वह बोली कि उसे अपने बेटे के दिमाग़ में “जो जो बातें उचित हैं, और जो जो बातें पवित्र हैं, और जो जो बातें सुहावनी हैं . . . ” डालनी होगी(फिलिप्पियों 4:8) l रात के भोजन के बाद, वह अपने पति के साथ समाचार देख रही थी जब अचानक उनकी पांच वर्षीय बेटी अन्दर आकर टेलीविजन बंद कर दी l “तुम्हें ये बातें नहीं देखनी चाहिए,” वह बेहतरीन तरीके से अपनी “माँ” की आवाज़ में बोली l “अब, बाइबल की बातों पर विचार कीजिए !”

व्यस्क के रूप में, हम अपने बच्चों से बेहतर तरीके से समाचार को समझ और जान सकते हैं l फिर भी, उनकी बेटी दिलचस्प और बुद्धिमान थी जब उसने माँ की बातें दोहरायी l परिपक्व व्यस्क भी जीवन के नकारात्मक पक्ष के प्रभाव से धीरे-धीरे प्रभावित हो सकता है l फिलिप्पियों 4:8 में वर्णित पौलुस की सूची पर चिंतन करना उस अंधेरेपन का इलाज है जो हम पर स्थायी प्रभाव डालता है यदि हम संसार की स्थिति पर नज़र डालते हैं l

परमेश्वर का आदर करने का सर्वोत्तम तरीका उन बातों के विषय सावधान निर्णय करना है जिन्हें हमारे मनों में रहना चाहिए और जिससे हमारे हृदय भी सुरक्षित रहेंगे l

करवटें बदलना

कौन सी बात आपको रात में जगा के रखती है? हाल ही में मैंने नींद खोयी है, और बिस्तर पर करवटें बदलते हुए इस समस्या का हल खोजने का प्रयास किया है l आखिरकार अगले दिन की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रयाप्त आराम नहीं मिलने से मैं खीज जाती हूँ!

जाना-पहचाना महसूस होता है? समस्याग्रस्त सम्बन्ध, अज्ञात भविष्य, जो भी हो – हम कभी न कभी चिंता करते ही हैं l भजन 4 को लिखते हुए राजा दाऊद अवश्य ही कठिनाई में था l लोग झूठे आरोप लगाकर उसकी इज्ज़त को बर्बाद कर रहे थे (पद.2) l और कुछ लोग उसके शासन करने की योग्यता पर प्रश्नचिन्ह लगा रहे थे (पद.6) l संभवतः दाऊद इस तरह के अन्यायपूर्ण व्यवहार से क्रोधित था l अवश्य ही वह कई रात तक इसके विषय बेचैन रह सकता था l फिर भी हम उसके इन अद्भुत शब्दों को पढ़ते हैं : “मैं शांति से लेट जाऊँगा और सो जाऊँगा” (पद.8) l

चार्ल्स स्पर्जन खूबसूरती से पद 8 की व्याख्या करते हैं : “इस तरह लेटकर , . . . [दाऊद] खुद को किसी के बाहों में डाल देता है; वह पूरी तरह ऐसा करता है, क्योंकि समस्त चिंताओं के अभाव में, वह सो सका; यहाँ पूर्ण भरोसा दिखाई देता है l”

इस भरोसा के पीछे कौन सी प्रेरणा है? आरम्भ से, दाऊद को भरोसा था कि परमेश्वर उसकी प्रार्थना सुनेगा (पद.3) l और वह निश्चित था कि परमेश्वर ने उससे प्रेम करने के लिए उसे चुना है, और वह उसकी ज़रूरतें भी पूरी करेगा l

चिंता के समय परमेश्वर हमें अपनी सामर्थ्य और उपस्थिति में आराम दे l उसके प्रभुत्व करनेवाले और प्रेमी बाहों में, हम “लेट” और “सो” जाएंगे l

बाबुश्का महिला

1963 में अमरीकी राष्ट्रपति जॉन एफ. कैनेडी की हत्या सम्बंधित रहस्यों में “बाबुश्का महिला” एक रहस्य है l मूवी कैमरा द्वारा उन घटनाओं की ली गयी तस्वीरों में, वह पकड़ में नहीं आयी है l यह रहस्यमयी महिला, जो एक ओवरकोट और स्कार्फ(रुसी बूढ़ी महिला  की तरह दिखाई देती हुई) पहनी हुई दिखाई देती है, की पहचान नहीं हुई है और उसकी फिल्म कभी नहीं देखी गयी है l दशकों से, इतिहासकार और विद्वानों का अनुमान है कि भय ने “बाबुश्का महिला” को उस नवम्बर की दुखद शाम की अपनी कहानी बताने से रोका है l

यीशु के शिष्यों के छिप जाने के पीछे किसी तरह का अनुमान लगाना ज़रूरी नहीं है l वे उन अधिकारियों के भय से जिन्होंने उनके स्वामी की हत्या की थी दुबक गए थे (यूहन्ना 20:19) और सामने आकर अपने अनुभव बताने से हिचकिचा रहे थे l किन्तु तब ही यीशु मृतकों में से जी उठा l पवित्र आत्मा के आने के बाद मसीह के अनुयायियों का जो एक समय डरे हुए थे अब शांत रखना असंभव था! पेंतिकुस्त के दिन, पवित्र आत्मा की सामर्थ्य से पूर्ण शमौन पतरस ने घोषणा की, “अतः अब इस्राएल का सारा घराना निश्चित रूप से जान ले कि परमेश्वर ने उसी यीशु को जिसे तुम ने क्रूस पर चढ़ाया , प्रभु भी ठहराया और मसीह भी” (प्रेरितों 2:36) l

यीशु के नाम में निडरतापूर्वक बोलने का अवसर निर्भीक लोगों अथवा सेवा को जीविका के रूप में लेने का प्रशिक्षण प्राप्त करनेवालों तक सीमित नहीं है l यह तो अन्तर्निवास करनेवाला पवित्र आत्मा है जो यीशु का सुसमाचार बताने की योग्यता देता है l उसकी सामर्थ्य से, हम साहस का अनुभव करके दूसरों के साथ अपने उद्धारकर्ता के विषय में बताते हैं l  

पेड़ के ऊपर

मेरी माँ ने मेरी बिल्ली, वेलवेट को रसोई के चौके पर घर में बनी ब्रेड खाते देखा l उससे तंग आकर, उन्होंने उसे दरवाजे से बाहर कर दिया l कुछ घंटों बाद, हमने उस खोयी हुई बिल्ली को ढूंढा पर वह नहीं मिली l उसकी हलकी सी आवाज़ सुनाई दी, और मैंने उसे एक पोपुलर पेड़ की चोटी पर एक झुकी हुई डाली पर बैठे देखा l

मेरी माँ ने जब उसकी आदत से तंग आकर उसे घर के बाहर किया, वेलवेट(बिल्ली) ने एक खतरनाक चुनाव किया l क्या यह संभव नहीं कि हम भी कभी-कभी कुछ वैसा ही करते हैं – अपनी गलती से भाग कर खुद को खतरे में डालते हैं? ऐसे समय में भी परमेश्वर हमें बचाने आता है l

योना नबी अनाज्ञाकारिता में नीनवे में प्रचार करने की परमेश्वर की बुलाहट से भागा, और एक महामच्छ ने उसे निगल लिया l “तब योना ने उसके पेट में से अपने परमेश्वर यहोवा से प्रार्थना की l ‘मैं ने संकट में पड़े हुए यहोवा की दोहाई दी, और उस ने मेरी सुन ली है’” (योना 2:1-2) l परमेश्वर ने योना का निवेदन सुनकर मच्छ को आज्ञा दी, और उसने योना को स्थल पर उगल दिया” (पद.10) l उसके बाद परमेश्वर ने योना को एक और अवसर दिया (3:1) l

वेलवेट को नीचे उतारने के लिए काफी प्रयास करने के बाद, हमने स्थानीय अग्निशमन सेवा(फायर ब्रिगेड) को बुलाया l सबसे लम्बी सीढ़ी की सहायता से, एक दयालु व्यक्ति ऊपर चढ़कर मेरी बिल्ली को नीचे मेरे सुरक्षित बाहों में दे दिया l

परमेश्वर अपने बचानेवाले प्रेम से ऊँचाइयों और गहराइयों में जाकर हमें बचाता है!

क्षमा की याचना

1960 में, छः वर्ष की रूबी ब्रिड्जेस पहली अफ़्रीकी अमरीकी लड़की थी जिसको अमरीका के दक्षिणी भाग के एक पब्लिक प्राथमिक विद्यालय में दाखिला मिला जिसमें केवल श्वेत बच्चे ही पढ़ सकते थे l कई महीनों तक, शासकीय उच्च अधिकारी रूबी को स्कूल पहुंचाते थे l सड़क पर क्रोधित अभिभावक उसे श्राप देते थे, धमकाते थे और उसको अपमानजनक शब्दों से संबोधित करते थे l अन्दर कक्षा में वह सुरक्षित रहकर शिक्षिका बारबरा हेनरी से पढ़ती थी जो उसे पढ़ाने को सहमत थी, जबकि अभिभावक अपने बच्चों को रूबी के साथ पढ़ाना नहीं चाहते थे l  

बच्चों के मशहूर मनोचिकित्सक रोबर्ट कोल्स कई महीनों तक रूबी को भय और तनाव के अनुभव से निकलने में सहायता करते रहे l वे रूबी की प्रार्थना से बहुत अधिक प्रभावित थे जो वह स्कूल जाते समय और लौटते समय करती थी l “परमेश्वर, कृपया, आप उन्हें क्षमा करें क्योंकि वे नहीं जानते कि वे क्या कर रहे हैं” (देखें लूका 23:34) l

क्रूस पर से यीशु के शब्द लोगों के घृणा और अपमान के शब्दों से ताकतवर थे l  जीवन के सबसे अधिक पीड़ादायक क्षण में, यीशु ने स्वाभाविक प्रतिउत्तर दिया जो उसने अपने शिष्यों को सिखाये थे : “अपने शत्रुओं से प्रेम रखो; जो तुम से बैर करें, उनका भला करो l जो तुम्हें श्राप दें, उनको आशीष दो; जो तुम्हारा अपमान करें, उनके लिए प्रार्थना करो l जैसा तुम्हारा पिता दयावंत है, वैसे ही तुम भी दयावंत बनो” (लूका 6:27-28, 36) l

इस प्रकार का स्वभाव केवल वहां संभव है जहाँ हम यीशु द्वारा प्राप्त सामर्थी प्रेम पर विचार करते हैं – वह प्रेम जो गहरे से गहरे घृणा से भी ताकतवर है l

रूबी ब्रिड्जेस ने हमें मार्ग दिखाया है l

एक नया समुदाय

मेरी सहेली कैरी की पांच वर्षीय बेटी, माइजा का खेल के समय के विषय अलग तरीका था l वह अलग-अलग गुड़ियों को मिलाकर उनका एक अलग समूह बनाती थी l कल्पना के संसार में, सब कुछ को एक साथ लाया जा सकता है l गुड़ियाँ उसकी थीं l उसका मानना है कि अलग-अलग आकार और प्रकार के बावजूद भी साथ रहने से वे सभी सबसे अधिक प्रसन्न रहती हैं l

परमेश्वर की रचनात्मकता मुझे कलीसिया के विषय उसका उद्देश्य याद दिलाता है l लूका कहता है, पिन्तेकुस्त के दिन “आकाश के नीचे की हर एक जाति में से भक्त यहूदी यरूशलेम  में रह रहे थे” (प्रेरितों 2:5) l यद्यपि ये लोग भिन्न संस्कृति से आते थे और अलग-अलग भाषा बोलते थे, पवित्र आत्मा के आगमन ने उन्हें एक नूतन समुदाय बना दिया, अर्थात् कलीसिया l उसके बाद से, वे एक देह कहलाने वाले थे, जिन्हें यीशु की मृत्यु और पुनरुत्थान ने एक किया था l

इस नए देह के अगुए लोगों का एक समूह अर्थात् चेले थे जिन्हें यीशु ने इस पृथ्वी पर रहते हुए जोड़ा था l  यदि यीशु उन्हें नहीं जोड़ा होता, तो ऐसा बहुत हद तक संभव था कि वे एक समूव बन ही नहीं पाते l अब और लोग भी अर्थात् “तीन हज़ार” (2:41) मसीह के अनुयायी बन गए l पवित्र आत्मा को धन्यवाद, जो एक समय विभाजित समूह थे अब “उनकी सब वस्तुएं साझे में थीं” (पद.44) l जो कुछ उनके पास था वह एक दूसरे के साथ बांटने के लिए तैयार थे l

आज भी पवित्र आत्मा मानव समूहों के बीच अंतर को पाट रहा है l हर समय हमारे विचार समान नहीं होंगे, न ही हमारी समझ l किन्तु मसीह के विश्वासी होने के कारण, हम एक दूसरे के अंग है l

के बावजूद भी

कभी-कभी ज़िन्दगी हम पर भयानक वार करती है l अन्य समयों में आश्चर्यजनक होता है l

बेबीलोन में तीन युवक, उस देश के भयंकर राजा के सामने साहसपूर्वक डटे रहे और अपने सामने खड़ी सोने की बड़ी मूरत को किसी भी स्थिति में दण्डवत् करने से इनकार किया l वे एक साथ बोले : “इस विषय में तुझे उत्तर देने का हमें कुछ प्रयोजन नहीं जान पड़ता l हमारा परमेश्वर, जिसकी हम उपासना करते है वह हम को उस धधकते हुए भट्ठे की आग से बचाने की शक्ति रखता है; वरन् हे राजा, वह हमें तेरे हाथ से भी छुड़ा सकता है l परन्तु यदि नहीं, तो हे राजा, तुझे मालूम हो, कि हम लोग . . . उपासना नहीं करेंगे, और न तेरी खड़ी कराई हुई . . .  मूरत को दण्डवत् करेंगे” (दानिय्येल 3:16-27) l

ये तीन युवक – शद्रक, मेशक, और अबेदनगो – धधकते हुए भट्ठे में फेंक दिए गए; और परमेश्वर ने आश्चर्जनक रूप से उनको छुड़ाया और उनके सिर का एक बाल भी न झुलसा और न ही उनके कपड़ों से जलने की गंध आई (पद.19-27) l  वे मृत्यु के लिए तैयार किये गए थे किन्तु परमेश्वर में उनका विश्वास अटल था – यदि वह उनको नहीं बचाता “तो भी l”

परमेश्वर की यह इच्छा है कि हम उससे लिपटे रहें –मेरे किसी प्रिय को चंगाई नहीं मिलने के बावजूद भी, हमारी नौकरी चले जाने के बावजूद भी, हमारे सताए जाने के बावजूद भी l कभी-कभी इस जीवन में परमेश्वर हमें बचाता है, और कभी-कभी नहीं भी बचाता है l लेकिन हमें इस सच्चाई पर अडिग रहना है : “परमेश्वर जिसकी हम सेवा करते हैं वह सक्षम है, और . . . . के बावजूद भी  “हमें प्यार करता है, और हमारे कठिनतम परीक्षा में हमारे साथ है l

उमड़ना (परिपूर्ण)

“नहीं! नहीं! नहीं! नहीं!”  मैं चिल्लाया l मुझे किसी प्रकार की मदद नहीं मिली l बिलकुल नहीं l मैंने अपनी तेज़ बुद्धि से अपने फ्लश शौचालय की टंकी की मरम्मत की किन्तु पानी का बहना नहीं रुका l  

कितनी बार हमारे बच्चे दूध ढालते समय गिरा देते हैं, और वह सब जगह फ़ैल जाता है l अथवा हमारी भूल से सोडा की 2 लीटर की बोतल बॉक्स में खुल जाती है जिसका परिणाम चौंकानेवाला होता है l

किसी तरल वस्तु का छलककर फ़ैल जाना अच्छी बात नहीं l बिलकुल नहीं l किन्तु एक अपवाद हो सकता है l पौलुस ऐसे लोगों के लिए परिपूर्णता(उमड़ना) का चित्र उपयोग करता है जो परमेश्वर की आत्मा से उमड़ रहे हैं  और जिसका स्वाभाविक परिणाम आशा है (रोमियों 15:13) l हमारे जीवनों में परमेश्वर की प्रबल उपस्थिति के कारण आनंद, शांति, और विश्वास से भरे होने के चित्र को मैं पसंद करता हूँ l इस सीमा तक, वास्तव में, हम अपने स्वर्गिक पिता में बहुतायत का और सुखद भरोसा दर्शा सकते हैं l यह हमारे जीवनों के खूबसूरत, प्रसन्नचित्त काल में हो सकता है l अथवा जब हमारे जीवनों को झटका लगता है l दोनों में से कोई भी, उमड़ कर गिरनेवाला ही हमारे चारो-ओर के लोगों को आशा देता है जिससे वे “सराबोर” हो जाते हैं l

परमेश्वर की भलाइयों की प्रशंसा

हमारे बाइबल अध्ययन समूह के एक व्यक्ति ने सलाह दी, “आइये हम अपने भजन लिखें!” पहले तो कुछ लोगों ने विरोध किया कि उनके पास लिखने का गुण नहीं है,  किन्तु कुछ प्रोत्साहन के बाद हर एक ने अपने जीवन में परमेश्वर के कार्य का वर्णन करते हुए एक मार्मिक काव्यात्मक गीत लिखा l परीक्षा, सुरक्षा, प्रबन्ध, पीड़ा और आँसू के परिणाम स्वरुप  निकले स्थायी संदेशों ने हमारे भजनों को चिताकर्षक प्रसंग दिए l भजन 136 की तरह, प्रत्येक भजन ने दर्शाया कि परमेश्वर की करुणा सदा की है  l  

हममें से हर एक के पास परमेश्वर के प्रेम की कहानी है – चाहे हम उसे लिखते हैं या गाते हैं या बताते हैं l कुछ लोगों के लिए, हमारे अनुभव रोमांचक अथवा भावुक हो सकते हैं – भजन 136 के लेखक की तरह जिसने याद किया कि किस तरह परमेश्वर ने अपने लोगों को दासत्व से छुड़ा कर अपने दुश्मनों पर विजय प्राप्त की (पद.10-15) l अन्य लोग केवल परमेश्वर की अद्भुत सृष्टि का वर्णन करेंगे; जिसने “अपनी बुद्धि से आकाश बनाया . . . पृथ्वी को जल के ऊपर फैलाया . . . बड़ी बड़ी ज्योतियाँ बनायीं, - . . . दिन पर प्रभुता करने के लिए सूर्य को बनाया . . . और रात पर प्रभुता करने के लिए चंद्रमा और तारागन को बनाया” (पद.5-9) l

यह याद करना कि परमेश्वर कौन है और उसने क्या किया प्रशंसा और धन्यवाद लेकर आता है जिससे उसकी महिमा होती है l तब हम प्रभु की भलाइयों के विषय जिसकी करुणा सदा की है  -  “आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत”  गाते हैं (इफिसियों 5:19) l

परमेश्वर और उसके कार्यों को स्मरण करने का परिणाम प्रशंसा और धन्यवाद होता है जिससे वह महिमामंडित होता है l तब हम प्रभु की भलाइयों का जिसकी करुणा सदा की है “आपस में भजन और स्तुतिगान और आत्मिक गीत गाया [करें]” (इफि.5:19) l परमेश्वर के प्रेम के अपने अनुभव को अपनी प्रशंसा के गीत बनाइये और उसके अनवरत भलाइयों का आनंद उठाइये l