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आगे बढ़ते रहें

द अमेजिंग रेस  मेरा एक पसंदीदा टेलेविज़न कार्यक्रम है l इस रियलिटी शो में, दस जोड़ों को एक दूसरे देश में भेजा जाता है जहाँ उनको रेल, बस, कार, बाइक, और पैदल चलकर एक बिंदु से दूसरे बिंदु तक अगली चुनौती के लिए पहुंचना होता है l समापन बिंदु पर पहले पहुँचने वाले जोड़े को दस लाख डॉलर पुरस्कार मिलता है l

प्रेरित पौलुस मसीही जीवन की तुलना एक दौड़ से करके समापन रेखा तक नहीं पहुंचना स्वीकारता है l “उसने कहा, “हे भाइयों, मेरी भावना यह नहीं कि मैं पकड़ चुका हूँ; परन्तु केवल यह एक काम करता हूँ कि जो बातें पीछे रह गई हैं उनको भूल कर, आगे की बातों की ओर बढ़ता हुआ, निशाने की ओर चौड़ा चला जाता हूँ, ताकि वह इनाम पाऊं” (फ़िलि. 3:13-14) l पौलुस मुड़कर पीछे नहीं देखा और अपने पिछले पराजयों को उसे दोष की भावना से दबाने नहीं दिया, न ही अपने वर्तमान सफलताओं से खुद को प्रयासशीन बनने दिया l वह यीशु की तरह और भी बनने के लिए लक्ष्य की ओर दौड़ता गया l

हम भी दौड़ में हैं l हमारी पिछली असफलताओं अथवा सफलताओं के बावजूद, हम आगे यीशु की तरह बनने के अपने अंतिम लक्ष्य की ओर दौड़ते रहें l हम किसी सांसारिक इनाम के लिए नहीं दौड़ रहे, किन्तु हमेशा उसका आनंद लेने के अंतिम लक्ष्य के लिए l

संपूर्ण अनुग्रह

यीशु ने कभी भी परमेश्वर के सिद्ध आदर्श को कम नहीं किया l धनी युवक को उत्तर देते समय, उसने कहा, “तुम सिद्ध बनो, जैसा तुम्हारा स्वगीय पिता सिद्ध है” (मत्ती 5:48) l सबसे महान आज्ञा के विषय पूछने वाले व्यवस्थापक से उसने कहा, “तू परमेश्वर अपने प्रभु से अपने सारे मन और अपने सारे प्राण और अपनी सारी बुद्धि के साथ प्रेम रख” (22:37) l किसी ने इन आज्ञाओं को पूरी तरह नहीं माना l

फिर भी वही यीशु ने कोमलता से सम्पूर्ण अनुग्रह दिया l उसने व्यभिचारिणी को, क्रूस पर एक चोर को, उसे पूर्णरूपेण अस्वीकार करनेवाले एक शिष्य को, और शाऊल नामक एक व्यक्ति, जो मसीहियों का सतानेवाला बन गया था, को क्षमा किया l अनुग्रह सम्पूर्ण है और यीशु को क्रूसित करने वालों तक पहुंचा l “हे पिता, इन्हें क्षमा कर, क्योंकि ये जानते नहीं कि क्या कर रहे हैं” इस पृथ्वी पर कहे गए उसके कुछ अंतिम शब्द थे (लूका 23:34) l

वर्षों तक मैंने यीशु के सम्पूर्ण आदर्शों पर विचार करते समय खुद को अत्यधिक अयोग्य समझा कि मैं उस अनुग्रह के किसी-न-किसी अभिप्राय से चुक गया l एक बार, हालाँकि, इस दोहरे सन्देश को समझकर मैंने लौटकर महसूस किया कि अनुग्रह का सन्देश यीशु के जीवन और शिक्षाओं में भरपूर था l

अनुग्रह आशाहीन, ज़रूरतमंद, टूटे हुओं के लिए है, जो अपने आप में अयोग्य हैं l अनुग्रह हमारे लिए है l

वाइरल सुसमाचार

बोस्टन के नार्थईस्टर्न यूनिवर्सिटी में वायरल विषय वस्तु प्रोजेक्ट यह अध्ययन कर रहें है कि 1800 के दशक में मुद्रित विषय अखबारों द्वारा-उस काल का सोशल मीडिया नेटवर्क-कैसे फैलता था l यदि एक लेख पुनः 50 से अधिक बार छपती थी, वे उसे उस ओद्योगिक काल में “वाइरल” मानते थे l स्मिथसोनियन  पत्रिका में लिखते हुए, ब्रिट पीटरसन ने पाया कि यीशु के किस अनुयायी की मृत्यु विश्वास के कारण कैसे हुई, एक उन्नीसवीं-शताब्दी के खबर लेख कम-से-कम 110 भिन्न प्रकाशनों में दिखाई दिया l

थिस्सलुनीके के मसीहियों को लिखते हुए प्रेरित पौलुस ने, उन्हें यीशु का साहसिक और आनंदित साक्षी बनने के लिए सराहाना की l  “तुम्हारे यहाँ से न केवल मकिदुनिया और अखया में प्रभु का वचन सुनाया गया, पर तुम्हारे विश्वास की जो परमेश्वर पर है, हर जगह ऐसी चर्चा फ़ैल गई है” (1 थिस्स.1:8) l यीशु मसीह द्वारा रूपांतरित इन लोगों के जीवन द्वारा सुसमाचार वायरल हो गया l कठिनाई और सताव के बावजूद, वे शांत न रह सके l

हम प्रभु को जाननेवाले करुणामय हृदयों, मददगार हाथों, और ईमानदार शब्दों द्वारा मसीह में क्षमा और अनंत जीवन को फैलाते हैं l सुसमाचार हमें और हमसे मिलने वालों के जीवन रूपांतरित करता है l

आज भी हम सभों द्वारा सुसमाचार फैलता जाए!

नदी किनारे का वृक्ष

यह वह वृक्ष था जिससे लोग ईर्ष्या करते l नदी के सामने भूमि में बढ़ता हुआ, इसे मौसम की सूचना, विध्वंशकारी तापमान, अथवा अनिश्चित भविष्य की चिंता नहीं थी l उसे नदी द्वारा पोषण और ठंडक मिलती थी, वह सूर्य की ओर अपनी टहनियाँ फैलाए और भूमि को जड़ों से पकड़े हुए, अपनी पत्तियों द्वारा हवा को स्वच्छ करते हुए, और सूर्य से ज़रुरतमंदों को छाया देकर अपने दिन बिताता था l 

इसके विपरीत, नबी यिर्मयाह एक अधमरे पेड़ की ओर इशारा करता है (यिर्म. 17:6) l जब वर्षा रूक गयी और तपन ने धरती को धुल में बदल दिया, अधमरा पेड़ मुरझा कर, किसी को भी छाया और फल न दे सका l

नबी तंदुरुस्त वृक्ष की तुलना एक अधमरे पेड़ से क्यों करता है? मिस्र के दास स्थलों से आश्चर्यजनक छुटकारे के समय के बाद क्या हुआ, नबी लोगों को याद दिलाना चाहता था l निर्जन प्रदेश में चालीस वर्षों तक, उन्होंने नदी के निकट लगे वृक्ष की तरह जीवन बिताया (2:4-6) l फिर भी अपने प्रतिज्ञात देश की समृद्धि में वे अपनी कहानी भूल गए; उन्होंने खुद पर और अपने बनाए देवताओं पर भरोसा किया (पद.7-8), और मदद के लिए मिस्र जाने की लालसा की (42:14) l

इसलिए यिर्मयाह के द्वारा परमेश्वर, भुलक्कड़ इस्राएलियों और हमसे प्रेमपूर्ण अपील करता है कि हम उस पर आशा और भरोसा रखकर उस अधमरे पेड़ की तरह नहीं वरन् तंदुरुस्त वृक्ष की तरह बने l  

पिनाटा से बेहतर

पिनाटा अर्थात् टोफियों और मिठाइयों से भरा गत्ते का एक डिब्बा अथवा मिट्टी के पात्र के बगैर मिक्सिको का उत्सव अधुरा है l बच्चे एक छड़ी से उसे तोड़कर टोफियाँ आदि पाने का प्रयास करते हैं l  

मठवासी पिनाटा द्वारा सोलहवीं शताब्दी में मैक्सिकों के मूल निवासियों को सिखाते थे l पिनाटा सात भयंकर पाप दर्शानेवाले सात बिंदु वाले तारे होते थे l पिनाटा को तोड़ना बुराई से लड़ाई दर्शाता था, और उसके अन्दर की वस्तुएं बाहर गिर जाती थीं, लोग उसे विश्वास को बचाए रखने के पुरुस्कार के तौर पर अपने घर ले जाते थे l

किन्तु हम बुराई से नहीं लड़ सकते l परमेश्वर अपनी करुणा दिखाने के लिए हमारे प्रयास नहीं चाहता l इफिसियों हमें शिक्षा देता है कि “ विश्वास के द्वारा अनुग्रह ही से तुम्हारा उद्धार हुआ है  ... वरन् परमेश्वर का दान है” (2:8) l हम नहीं; मसीह ने पाप को हराया है l  

बच्चे पिनाटा के अन्दर की मोमबत्तियों चाहते हैं, किन्तु परमेश्वर के वरदान हमें यीशु में विश्वास से मिलते हैं l परमेश्वर ने “हमें ... सब प्रकार की आत्मिक आशीष दी हैं” (1:3) l हमारे पास पाप क्षमा, छुटकारा, लेपलाकपन, नया जीवन, आनंद, प्रेम, और बहुत कुछ है l ये आत्मिक आशीषें हमें विश्वास को बचाने और मजबूत बने रहने से नहीं किन्तु यीशु में विश्वास से मिली हैं l आत्मिक आशीषें केवल अनुग्रह अर्थात् जिसके हम योग्य नहीं हैं, से आतीं हैं l

ज्योतिस्तंभ

रुवान्डा में सेवा केंद्र “लाइट हाउस” अपने अस्तित्व से ही छुटकारा को दर्शाता है l यह उस भूमि पर स्थित है जहाँ 1994 में हुए जातिसंहार के दौरान देश के राष्ट्रपति का भव्य मकान था l नया भवन, हालाँकि, मसीहियों ने ज्योति और आशा के ज्योतिस्तंभ के रूप में बनाया है l वहां नयी पीढ़ी के मसीही अगुए तैयार करने के लिए एक बाइबिल संस्थान के साथ एक होटल, रेस्टोरेंट, और समाज के लिए अन्य सेवाएँ उपलब्ध हैं l राख में से नया जीवन आया l “लाइट हाउस” को बनानेवाले यीशु को अपनी आशा और छुटकारे का श्रोत मानते हैं l

यीशु जब सब्त के दिन नासरत के आराधनालय में गया, उसने यशायाह की पुस्तक पढ़कर घोषणा की कि प्रभु की प्रसन्नता की घोषणा करने वाला अभिषिक्त वही है (देखें लूका 4:14-21) l वह ही कुचलों को छुड़ाने और छुटकारा और क्षमा देने आया l यीशु में हम राख से सुन्दरता निकलते देखते हैं (यशा. 61:3) l

हम रुवान्डा के जातिसंहार की क्रूरता देखते हैं, जब जनजातियों के बीच लड़ाई में पाँच लाख से अधिक लोग मारे गए, भयानक और खौफनाक, और हम इसके विषय कुछ नहीं कह सकते l फिर भी हमें ज्ञात है कि प्रभु  क्रूरता से छुटकारा दे सकता है-इस पृथ्वी पर या स्वर्ग में l विलाप के बदले हर्ष का तेल देनेवाला हमें अंधकारमय स्थितियों के मध्य आशा देता है l

कल की ओर दृष्टि

मुझे खुला नीला आसमान देखना पसंद है l आसमान हमारे महान सृष्टिकर्ता की श्रेष्ठ कृति का एक सुन्दर भाग है l कल्पना करें पायलट इस दृश्य को कितना पसंद करते होंगे l वे उड़ान भरने के लिए खुले आसमान का वर्णन करने के लिए अनेक वैमानिक शब्दों का उपयोग करते हैं, किन्तु मेरा पसंदीदा है, “कल की ओर दृष्टि l”

“कल की ओर दृष्टि” हमारे देखने से परे है l हम कभी-कभी आज क्या होगा भी जानने अथवा समझने में संघर्ष करते हैं l बाइबिल कहती है, “और यह नहीं जानते कि कल क्या होगा ... जीवन है ही क्या? तुम तो भाप के सामान हो, जो थोड़ी देर दिखाई देती है फिर लोप हो जाती है” (याकूब 4:14) l

किन्तु हमारी सीमित दृष्टि निराशा का कारण नहीं l इसके बिल्कुल विपरीत l हमारा विश्वास हमारे कल को पूरी तौर से देखने वाले परमेश्वर पर है-और हमारे भविष्य की चुनौतियों की ज़रूरतों को जाननेवाला l प्रेरित पौलुस यह जानता था l इसलिए पौलुस आशापूर्ण शब्दों से उत्साहित करता है, “हम रूप को देखकर नहीं, पर विश्वास से चलते हैं” (2 कुरिन्थियों 5:7) l

जब हम अपने आज और आनेवाले कल के लिए परमेश्वर पर भरोसा करते हैं, हम अपने जीवन में आनेवाली किसी बात के लिए चिंतित नहीं होते l हम भविष्य जानने वाले के साथ चलते हैं l वह भविष्य को सँभालने में सामर्थी और बुद्धिमान है l

कबाड़खाना निपुण

नोआ प्युरिफोय ने “संग्रह” कलाकार के रूप में लॉस एंजेल्स के वाट्स क्षेत्र में 1965 के

दंगे के बाद इकट्ठी की गई तीन टन मलबा से अपना कार्य आरंभ किया l साइकिल के टूटे पहिये और फेंकने योग्य गेंद से लेकर अलग किये गए टायर्स और ख़राब टी.वी.-अनुपयोगी वस्तुएं-उसने  और उसके सहयोगी ने आधुनिक समाज में ठुकराए हुए लोगों के साथ व्यवहार के विषय सशक्त सन्देश देने वाली प्रतिमाएँ बनाईं l एक संवाददाता ने श्री पुरिफोय को “कबाड़खाना निपुण” संबोधित किया l

यीशु के काल में बीमार और शारीरिक समस्याओं से ग्रस्त लोग परमेश्वर द्वारा दण्डित पापी माने जाते थे l उनको अस्वीकृत और उपेक्षित माना जाता था l किन्तु यीशु और उसके शिष्यों के जन्म से दृष्टिहीन एक व्यक्ति से मुलाकात के बाद, यीशु ने बताया कि उसकी स्थिति पाप का परिणाम नहीं है, किन्तु परमेश्वर की सामर्थ्य देखने का एक अवसर l “जब तक मैं जगत में हूँ , तब तक जगत की ज्योति हूँ” (यूहन्ना 9:5) l यीशु के निर्देशों के अनुसरण पश्चात, दृष्टिहीन देखने लगा l

धार्मिक अधिकारीयों के प्रश्न करने पर, उस व्यक्ति ने सरलता से जवाब दिया, “मैं एक बात जानता हूँ कि मैं अँधा था और अब देखता हूँ”(पद.25) l

यीशु आज भी संसार में  “कबाड़खाना निपुण” है l हम सब पाप द्वारा बिगड़े हुए हैं, किन्तु वह हमारे टूटे जीवन को नयी सृष्टि बनाता है l

छोटी झूठ और बिलौटे

माँ ने चार वर्षीय एलियास को नवजात बिलौटों के पास से भागते हुए देखा l क्योंकि उसे छूने को मना किया था l पूछने पर एलियास झूठ बोला l

माँ के फिर पूछने पर कि क्या वे मुलायम थे?

उसने कहा, “हाँ और काला वाला म्याऊँ करता है l”

हम बच्चे के ऐसे झूठ पर हँसते हैं l किन्तु यह अनाज्ञाकारिता मानव स्थिति है l चार वर्षीय बच्चे को कोई झूठ बोलना नहीं सिखाता l “दाऊद अपने आदर्श पापस्वीकार में लिखता है, “मैं अधर्म के साथ उत्पन्न हुआ, “[हाँ] पाप के साथ अपनी माता के गर्भ में पड़ा” (भजन 51:5) l प्रेरित पौलुस ने कहा, जब आदम ने पाप किया, पाप [संसार] में प्रवेश किया l उसके पाप से ... मृत्यु फ़ैल गई, ... क्योंकि सबने पाप किया” (रोमि. 5:12 NLT) l यह निराजनक खबर सब पर लागू है l

किन्तु आशा बहुत है! “पौलुस लिखता है, “[व्यवस्था] इसलिए दी गई जिससे सब देख सकें कि वे ... कितने असफल रहे हैं l परन्तु जितना अधिक हम अपनी पापमय अवस्था को देखते हैं, उतना ही अधिक हम परमेश्वर के अपार अनुग्रह पर ध्यान करते हैं” (रोमि.5:20 NLT) l

परमेश्वर हमारी गलती करने के लिए ठहरता नहीं कि वह हम पर झपट्टा मारे l वह अनुग्रह, क्षमा, और पुनःस्थापन करता है l हमें केवल जाने कि हमारे पाप सुन्दर और बहाने के योग्य नहीं और हमें विश्वास और पश्चाताप में उसके निकट आना है l