सर्वोत्तम समाचार!
स्थानीय समाचार-पत्र का अनुच्छेद छोटा था, परन्तु यह दिल को छू लेने वाला था। सुदृढ़ पारिवारिक सम्बन्धों पर विश्वास पर आधारित एक कार्यक्रम में भाग लेने के पश्चात जेल के कुछ कैदियों को उनके परिवारों से मिलने के एक सुअवसर प्रदान किया गया था। कुछ कैदियों ने तो अपने बच्चों को सालों से नहीं देखा था। एक शीशे की खिड़की से बात करने के स्थान पर वे अपने प्रियों को छू और गले से लगा सकते थे। जब वे परिवार निकट आए तो आँसू बहने लगे और ज़ख्म चंगे होने शुरू हो गए।
अधिकत्तर पाठकों के लिए, यह मात्र एक कहानी थी। परन्तु इस परिवारों के लिए एक-दूसरे को थामना एक जीवन परिवर्तक घटना थी-और कुछ के लिए क्षमा करने और पुनर्मेल की प्रक्रिया आरम्भ हो गई थी।
परमेश्वर का हमारे पापों को क्षमा करना और पुनर्मेल का प्रस्ताव देना, उसके पुत्र के द्वारा ही सम्भव हुआ और यह मसीही विश्वास का एक तथ्य मात्र होने से कहीं अधिक है। समाचार पत्र के पुनर्मेल का वह अनुच्छेद हमें याद दिलाता है कि यीशु का बलिदान संसार के लिए मात्र एक सर्वोत्तम समाचार ही नहीं, परन्तु आपके और मेरे लिए भी है।
कईबार हम उस अपराध के द्वारा दबे होते हैं, जो हम ने किया होता है, परन्तु यही वह समाचार है जिसे हम हताशा के साथ थामे रख सकते हैं। तभी परमेश्वर की कभी न समाप्त होने वाली दया का तथ्य एक व्यक्तिगत समाचार बन जाता है: यीशु के हमारे लिए मरने के कारण हम पिता के समक्ष साफ़-सुथरे बन कर आ सकते हैं, “हिम से भी श्वेत” (भजन संहिता 51:7) । ऐसे समयों में, जब हम जानते हैं कि हम उसकी दया के योग्य नहीं हैं तो हम एक ही बात को थाम सकते हैं, जिस पर हम निर्भर हो सकते हैं: परमेश्वर की करुणा और बड़ी दया (पद 1) ।
बच्चों के मूँह से
दस वर्ष की विओला को एक पेड़ की शाखा को एक माइक्रोफोन की तरह इस्तेमाल करके एक प्रचारक की नक्ल करते हुए देखने के बाद, मिशेल ने विओला को एक गाँव में प्रचार के दौरान “प्रचार करने” का मौका देने का निर्णय किया। विओला ने स्वीकार कर लिया। दक्षिण सूडान में एक मिशनरी, मिशेल ने लिखा, “भीड़ भावविभोर हो गई...एक छोटी बच्ची जिसे छोड़ दिया गया था, उनके सामने राजाओं के राजा की बेटी के रूप में अधिकार के साथ खड़ी हुई और सामर्थ के साथ परमेश्वर के राज्य के बारे में बताया। आधी भीड़ यीशु को स्वीकार करने के लिए आगे आई” (मिशेल पैरी, लव हैज़ ए फेस ) ।
उस दिन उस भीड़ ने एक बच्चे को प्रचार करते हुए सुनने की आशा नहीं की थी। यह घटना मन में एक ही वाक्य ले कर आती है, “बच्चों और दूध पिउवों के मुँह से” जो भजन संहिता 8 में पाया जाता है दाऊद ने लिखा, “तू ने अपने बैरियों के कारण बच्चों और दूध पिउवों के द्वारा सामर्थ्य की नींव डाली है, ताकि तू शत्रु और पलटा लेनेवालों को रोक रखे” (पद 2)। बाद में मत्ती 21:16 में यीशु ने इस पद का सन्दर्भ दिया, जब महायाजकों और शास्त्रियों ने यरूशालेम के मन्दिर में बच्चों के यीशु की प्रशंसा करने की आलोचना की। इन अगुवों के लिए बच्चे एक सरदर्द थे। इस पवित्रशास्त्र के अंश का सन्दर्भ देने के द्वारा यीशु ने दर्शाया कि परमेश्वर ने इन बच्चों की प्रशंसा को गम्भीरता से लिया। उन्होंने वही किया जो वे अगुवे करने के लिए अनिच्छुक थे: इच्छित मसीह को महिमा देना।
जैसे विओला और मन्दिर के बच्चों ने दर्शाया, परमेश्वर एक बच्चे को भी अपनी महिमा करवाले के लिए इस्तेमाल कर सकता है। उनके इच्छित हृदयों से प्रशंसा का एक झरना बह निकला।
गलत सूचना के साथ कार्य करना
हाल ही में न्यूयार्क के एक भ्रमण पर मेरी पत्नी और मैं एक बर्फीली शाम को बाहर जाना और तीन मील दूर एक क्यूबन रेस्तरां में जाने के लिए एक टैक्सी लेना चाहते थे। टैक्सी सर्विस ऐप में समस्त विवरण देने के बाद मेरी साँस ही अटक गई जब मैंने हमारे छोटे से सफर के लिए स्क्रीन पर आए 1,547.26 के बिल को देखा। इस झटके से उबरने के बाद मैंने देखा कि मैंने कई मील दूर अपने घर के लिए गलती से टैक्सी की याचना कर दी थी!
यदि आप गलत सूचना के साथ कार्य कर रहे हैं, तो आपको विनाशकारी परिणाम मिल सकते हैं। हमेशा। इसीलिए नीतिवचन हमें “अपना हृदय शिक्षा की ओर, और अपने कान ज्ञान की बातों की ओर लगाने”-परमेश्वर की बुद्धि की ओर लगाने के लिए प्रोत्साहित करता है (नीतिवचन 23:12)। इसके स्थान पर यदि हम उन लोगों से परामर्श ले लेते हैं, जो मूर्ख हैं, वे जो ऐसा दिखाते हैं कि बहुत कुछ जानते हैं, परन्तु वास्तव में ऐसा नहीं है और जिन्होंने परमेश्वर की ओर पीठ मोड़ ली है, तो हम कठिनाई में पड़ जाएँगे। वे “बुद्धि के वचनों को तुच्छ...” जानते हैं और हमें असहायक, गलत दिशा वाली या धोखे से भरी हुई सलाह के साथ बर्बादी की ओर ले जा सकते हैं (पद 9) ।
इसके स्थान पर हम “अपने कान ज्ञान की बातों की ओर” लगा सकते हैं (पद 12) । हम अपने दिल को खोल और परमेश्वर की आज़ाद करने वाले निर्देशों, स्पष्टता और आशा के वचनों को प्राप्त कर सकते हैं। जब हम उन लोगों की सुनते हैं, जो परमेश्वर के गहरे मार्गों को जानते हैं, तो वे हमें परमेश्वर की बुद्धि को प्राप्त करने और उस पर चलने में सहायता करते हैं। और परमेश्वर की बुद्धि हमें कभी विनाश की ओर नहीं ले जाएगी परन्तु हमें सर्वदा जीवन और पूर्णता की ओर ले कर जाती और इसके लिए प्रोत्साहित करती है।
फिका की विचारधारा
मेरे घर के पास के एक नगर में फिका नामक एक कॉफ़ीहाउस है। यह एक स्वीडिश शब्द है जिसका अर्थ कॉफ़ी और पेस्ट्री के साथ, परिवार, सहकर्मियों या मित्रों के साथ थोड़ी देर ठहरना है। मैं स्वीडन से नहीं हूँ, फिर भी फिका की आत्मा एक बात का उल्लेख करती है, जो मुझे यीशु के बारे में बहुत पसन्द है-दूसरों के साथ खाने और आराम करने के लिए ठहरना।
विद्वान बताते हैं कि यीशु का भोजन अनियमित नहीं था। थियोलॉजियन मार्क ग्लैनविल उन्हें इस्राएल के पर्वों और पुराना नियम में त्यौहार मनाने का एक “दूसरा स्तर” कहते हैं। मेज पर यीशु ने वह जीवन जिया , जिसकी इच्छा परमेश्वर ने इस्राएल के लिए की थी: “सम्पूर्ण संसार के लिए आनन्द, ख़ुशी, और न्याय का केन्द्र।”
5,000 को खिलाने से प्रभु भोज तक-यहाँ तक कि पुनरुत्थान के बाद दो विश्वासियों के साथ भोजन (लूका 24:30)-यीशु की मेज़ की सेवा हमें हमारी निरन्तर प्रयास करते रहने को रोकने और उस पर निर्भर होने के लिए आमन्त्रित करती है। वास्तव में, यीशु के साथ खाने तक उन दो विश्वासियों ने नहीं पहचाना कि वह प्रभु थे। “जब वह उनके साथ भोजन करने बैठा, तो उसने रोटी लेकर धन्यवाद किया और उसे तोड़कर उनको देने लगा। तब उनकी आँखें (जीवित मसीह के प्रति) खुल गईं (पद 30-31) ।
हालही में फिका में एक मित्र के साथ बैठे गर्म चाकलेट और रोल्स का आनन्द लेते हुए, हम ने एक-दूसरे को यीशु की बातें करते हुए पाया। वह जीवन की रोटी है। प्रभु करे कि हम उसकी मेज़ पर जाएँ और उसे और अधिकता से प्राप्त करें।
शान्त भय
मेरा जीवन प्राय: उन्माद और जल्दबाज़ी से भरा रहता है। मैं एक जिम्मेदारी से दूसरी जिम्मेदारी की ओर भागती रहती, अपने मार्ग में ही फोन करने और अपने कभी न समाप्त होने वाले कामों की सूची में चीज़ें देखती रहती हूँ। एक रविवार को बहुत जल्दबाज़ी में मैं अपने घर के पीछे के आंगन में गिर गई। मेरा फोन अन्दर था और मेरे बच्चे और पति भी अन्दर ही थे। पहले तो मैंने एक या दो मिनट के लिए बैठे रहने का सोचा, परन्तु उस अबाधित स्थिरता में मैंने कई बातों पर ध्यान दिया, जिन्होंने मुझे वहीं लम्बे समय तक रुकने के लिए आमन्त्रित किया। मैं हेमरॉक के धीरे धीरे हिलने, लैवेंडर के फूल पर मधुमक्खी के भिनभिनाने और मेरे सिर के ऊपर पक्षी के पंख फड़फड़ाने को सुन सकती थी। आकाश गहरा नीला था और पवन से बादल उड़ रहे थे।
जो कुछ परमेश्वर ने बनाया है उसको देखकर मेरी आँखों में आँसू आ गए। जब मैं अपनी आँखों और कानों में अनेक अद्भुत चीज़ें देखने के लिए पर्याप्त समय के लिए ठहरी, तो मैं परमेश्वर की रचनात्मक सामर्थ के लिए धन्यवाद के साथ उसकी आराधना करने के लिए उत्साहित हो गई। भजन संहिता 104 का लेखक भी इसी समान परमेश्वर की हस्तकला के द्वारा नम्र हो गया था, “तेरे कामों के फल से पृथ्वी तृप्त रहती है” (पद 13) ।
भागदौड़ के जीवन में एक शान्त क्षण हमें परमेश्वर की रचनात्मक सामर्थ को याद दिला सकता है। वह अपनी सामर्थ और नम्रता के प्रमाणों से हमें घेरे रहता है; उसी ने ऊँचे पर्वत और पक्षियों के लिए डालियाँ बनाई हैं। “इन सब वस्तुओं को तू ने बुद्धि से बनाया है (पद 24)।
परमेश्वर की कहानी में जीना
अर्नेस्ट हेमिंग्वे से पूछा गया कि क्या वे छह शब्दों में एक कायल कर देने वाली कहानी लिख सकते हैं। उनका उत्तर था: “बिक्री के लिए बच्चों के जूते, जिन्हें कभी पहना नहीं गया।” हेमिंग्वे की कहानी जबरदस्त है क्योंकि यह हमें बीच के खाली स्थानों को अपने आप भरने के लिए प्रेरित करती है। क्या उन जूतों की एक स्वस्थ बच्चे को आवश्यकता नहीं थी? या क्या कोई दुखद घटना हो गई थी-कुछ ऐसा जिसमें परमेश्वर के गहन प्रेम और आराम की जरूरत थी?
सर्वोत्तम कहानियाँ हमारी कल्पना को उत्पन्न करती हैं, तो यह आश्चर्य की बात नहीं है कि अब तक की बताई गई सर्वोत्तम कहानी हमारी रचनात्मकता को उत्तेजित करती है। परमेश्वर की कहानी में एक केन्द्रीय कथावस्तु है; हम (मानवजाति) पाप में गिर गए; यीशु पृथ्वी पर आया और मारा गया और हमें हमारे पापों से बचाने के लिए पुनर्जीवित हो गया; और अब हम उसके लौटने और सभी वस्तुओं को पुनर्स्थापित कर देने की प्रतीक्षा कर रहे हैं।
यह जानते हुए कि पहले क्या हो चुका है और आगे क्या होने वाला है, हमें कैसे जीना चाहिए? यदि यीशु अपनी सम्पूर्ण सृष्टि को बुराई के पंजे से छुड़ा रहा है, तो अनिवार्य है कि “हम अन्धकार के कामों को त्याग कर ज्योति के हथियार बाँध लें।” (रोमियों 13:12)। इसमें परमेश्वर की सामर्थ से पाप से मुड़ना और उससे और दूसरों से भी प्रेम करना सम्मिलित है (पद 8-10) ।
एक विशेष रूप से यीशु के साथ बुराई के विरुद्ध लड़ना इस बात पर निर्भर करता है कि हमारे पास कौन से वरदान हैं और हम किन जरूरतों को देखते हैं। आइए हम अपनी कल्पना शक्ति का प्रयोग करें और अपने आस-पास देखें। आइए घायलों और विलापितों को खोजें और परमेश्वर के न्याय, प्रेम और आराम को फैलाएं, जिस भी तरह से वह हमारा मार्गदर्शन करता है।
वह हमारे हाथ को थामे रहता है
चर्च में रविवार को जिस छोटी लड़की ने सीढ़ियों के लिए मार्ग निर्देशन किया, वह बहुत सुन्दर, साहसी और आत्मनिर्भर थी। एक के बाद एक बच्चे-जो दो वर्षों से बड़ा दिखाई दे रहा था-ने नीचे जाने के लिए कदम बढ़ाए। सीढ़ियों से नीचे जाना उसका मिशन था और उसने इसे पूरा किया। मैं मन ही मन मुस्कुराया जब मैंने इस निडर बच्ची की साहसी आत्मनिर्भरता पर ध्यान किया। बच्ची डरी हुई नहीं थी क्योंकि वह जानती थी कि उसकी देखभाल करने वाली माँ की निगरानी करने वाली आँखें और उसका प्रेम भरा हाथ उसकी सहायता के लिए फैला हुआ था। यह उपयुक्त रूप से प्रभु की उसके बच्चों की मुस्तैदी से सहायता करने की तस्वीर प्रस्तुत करता है, जब वे जीवन की भिन्न-भिन्न प्रकार की अनिश्चितताओं के साथ अपने मार्ग पर चलते हैं।
पवित्रशास्त्र के आज के पद में “दो तरफ़ा” सन्दर्भ हैं। अपने पुरातन लोगों को भयभीत या हतोत्साहित न होने की चेतावनी देने के बाद प्रभु ने उन्हें बताया, “अपने धर्ममय दाहिने हाथ से मैं तुझे सम्भाले रहूँगा।” (यशायाह 41:10)। अनेक चिन्तित और भयभीत बच्चे माता-पिता की सामर्थ के द्वारा सम्भाले गए हैं यहाँ परमेश्वर की सामर्थ देखने को मिलती है। दूसरी तरफ के सन्दर्भ में भी यह प्रभु ही है जो अपने लोगों की सुरक्षा को कायम रखने के लिए कार्य करता है। “मैं तेरा परमेश्वर यहोवा, तेरा दाहिना हाथ पकड़कर कहूँगा” (पद 13)। जबकि जीवन की परिस्थितियाँ और समय बदलते हैं, परन्तु प्रभु नहीं बदलता है। हमें डरने की आवश्यकता नहीं है (पद 10) क्योंकि प्रभु हमें अपनी प्रतिज्ञा और उन शब्दों के साथ आश्वासन देता है, जो हम हताशा के साथ सुनना चाहते हैं: “मत डर मैं तेरी सहायता करूँगा (पद 10,13) ।
जीवित बलिदान
मेरी आंटी की विज्ञापन की एक रोमांचक नौकरी थी और वह शिकागो से न्यू यॉर्क सिटी के बीच यात्रा करती थी। परन्तु उन्होंने अपने माता-पिता के लिए अपने उस करियर को छोड़ देने को चुना। वे मिनेसोटा में रहते थे और उन्हें देखभाल की जरूरत थी। उनके दोनों भाइयों की युवावस्था में ही दुखद परिस्थितियों में मृत्यु हो गई थी और वह उनके माता-पिता की बची हुई एकलौती सन्तान रह गई थी। उनके लिए अपने माता-पिता की देखभाल करना उनके विश्वास का प्रकटन था।
रोम की कलीसिया को प्रेरित पौलुस के पत्र ने विश्वासियों को एक “जीवित और पवित्र और परमेश्वर को भावता हुआ बलिदान” होने का आग्रह किया (रोमियों 12:1) । उसने आशा की कि वे मसीह के त्यागमय प्रेम को एक-दूसरे को दिखाएँगे। और उसने उन्हें अपने आप को जैसा समझना चाहिए उससे बढ़कर अपने आप को न समझने के लिए कहा (पद 3) ।जब उनमें मतभेद और विभाजन आ गया, तो उसने उन्हें घमण्ड को त्याग देने को कहा क्योंकि “वैसा ही हम जो बहुत हैं, मसीह में एक देह होकर आपस में एक दूसरे के अंग हैं।” (पद 5) । उसने विनती की कि वे एक-दूसरे को त्यागमय प्रेम दिखाएँ।
हर दिन हमारे पास एक-दूसरे की सेवा करने का अवसर होता है। उदाहरण के लिए, हम कतार में किसी को हमारे से पहले जाने दे सकते हैं या हम, मेरी आंटी के समान किसी बिमार की देखभाल कर सकते हैं। या हम अपने अनुभव से किसी को सलाह या मार्गदर्शन दे सकते हैं। जब हम अपने आप को एक जीवित बलिदान के रूप में चढ़ाते हैं, तो हम परमेश्वर का आदर करते हैं।
इसे एक पत्र में भेज दें
अधिकतर चार साल के बच्चों के समान रूबी को दौड़ना, गाना, और खेलना पसन्द था। परन्तु उसने घुटने में दर्द की शिकायत करना शुरू कर दिया। रूबी के माता-पिता उसे जाँच के लिए ले गए। जाँच के परिणाम आश्चर्यचकित कर देने वाले थे, उसे 4 स्तर का न्युरोब्लास्टोमा का कैंसर बताया गया था। रूबी कठिनाई में थी। उसे शीघ्र ही अस्पताल में भर्ती करवा दिया गया।
अस्पताल में रूबी का रुकना लम्बा होता गया, यह क्रिसमस के समय तक पहुँच गया, वह समय जब घर से दूर रहना बहुत ही कठिन होता है। रूबी की नर्सों में से एक को रूबी के कमरे के बाहर एक लेटर बॉक्स रखने का विचार आया ताकि उसका परिवार उसके लिए प्रार्थनाओं और प्रोत्साहन से भर पत्र उसके लिए भेज सके। उसके बाद एक विनती का संदेश फेसबुक पर भी चला गया, तो मित्रों और पूरी तरह से अजनबियों से आने वाले पत्रों की संख्या ने सभी को आश्चर्यचकित कर दिया, और सबसे अधिक रूबी को। उसे मिले हुए प्रत्येक पत्र (कुल मिलाकर 100,000 से भी अधिक) से रूबी प्रोत्साहित होती गई और अंततः वह घर जा पाई।
कुलुस्से के लिए पौलुस का पत्र-एक पत्र भी ऐसा ही था। पृष्ठ पर पेन से लिखे गए शब्द जो निरन्तर फलदायी होने और पहचान और सामर्थ और धीरज और सहनशीलता की आशाएँ ले कर आए (पद 10-11) । क्या आप कल्पना कर सकते हैं कि ऐसे शब्द कुलुस्से के वफ़ादार लोगों के लिए एक कितनी अच्छी औषधि की खुराक जैसे रहे होंगे? बस इतना जानना, कि कोई उनके लिए बिना रुके प्रार्थना कर रहा था, यीशु में उनके विशवास में स्थिर रहने के लिए सशक्त बने रहने के लिए काफ़ी था।
प्रोत्साहन के हमारे शब्द जरुरतमंदों की नाटकीय रूप से सहायता कर सकते हैं।