खरापन
दक्षिण एशियाई खेलों में मैराथन दौड़ के दौरान सिंगापुर के एशले लियू बढ़त बनाने पर समझ गए कि गलत मोड़ लेने के कारण अग्रणी धावक पीछे रह गए थे। एशले उनकी गलती का लाभ उठा सकते थे परंतु उनकी खिलाड़ी-भावना ने कहा कि यह वास्तविक जीत ना होगी। वह इसलिए जीतना चाहते थे क्योंकि तेज धावक थे-किसी की गलती के कारण नहीं। अपनी भावना पर उन्होंने गति धीमी कर दी ताकि दूसरे उनके बराबर पहुंच सके।
अंततः एशले दौड़ और पदक हार गए। परंतु उन्होंने अपने देशवासियों के दिलों को-और निष्पक्ष खेल के लिए अंतर्राष्ट्रीय पुरस्कार जीता। मसीही के रूप में यह उनके विश्वास की अच्छी गवाही थी, जिससे कईयों ने पूछा होगा, “ वह क्या था जिसने उनसे ऐसा करवाया?"
उनका यह काम मुझे मेरे कामों से अपने विश्वास को बाँटने की चुनौती देता है। विचारशीलता, दया, या क्षमा जैसे छोटे-छोटे काम परमेश्वर को महिमा दे सकते हैं। जैसे पौलुस कहते हैं, “सब बातों में... (तीतुस 2:7–8)।
दूसरों के लिए किए हमारे सकारात्मक काम संसार को दिखा सकते हैं कि अपने भीतर पवित्र आत्मा के कार्य के कारण हम दूसरों से अलग जीवन जी सकते हैं। अभक्ति और सांसारिक अभिलाषाओं से मन फेर कर संयम और धर्म और भक्ति से जीवन जीने का हमें वह अनुग्रह देंगे (पद 11-12)।
शान्ति को बाँटा गया
"परमेश्वर ने तुम्हें आज मेरे पास भेजा है!"
विमान के शिकागो पहुंचकर कर विदा लेते हुए उस महिला ने यह शब्द कहे। विमान में वह मेरे सामने बैठी थी, जहां मैंने उसके कई उड़ानों के बाद अब वापस लौटने के बारे में जाना। “बुरा ना मानें तो क्या मैं पूछ सकता हूं कि इतनी जल्दी वापसी का क्या कारण है”? मैंने पूछा। नीचे देखते हुए उसने कहा, “अपनी बेटी की नशे की लत के कारण मैंने उसे आज नशा मुक्ति केंद्र में डाला है”।
मैंने विनम्रता से उसे अपने बेटे की हेरोइन ड्रग से संघर्ष की कहानी सुनाई और कहा कि कैसे यीशु ने उसे मुक्त किया था। यह सुनकर, आंखों में आंसू होते हुए भी वह मुस्कुराने लगी। विमान उतरने के बाद हमने परमेश्वर से उसकी बेटी की बेड़ियों को तोड़ देने के लिए प्रार्थना की।
बाद में मैंने 2 कुरिन्थियों 1: 3-4 में पौलुस के शब्दों के बारे में सोचा:”हमारे प्रभु यीशु मसीह के परमेश्वर...:।
हमारे आस-पास ऐसे लोग हैं जिन्हें उस शांति से प्रोत्साहन पाने की आवश्यकता है जिसे केवल परमेश्वर दे सकते हैं। उनकी इच्छा है कि हम दयालु करुणा के साथ उनके पास जाकर उस प्रेम को साझा करें जिसे उन्होंने हमसे बांटा है। परमेश्वर आज हमें उन लोगों तक भेजें जिन्हें उनकी शांति की आवश्यकता है।
जो हम सुनना चाहते हैं
हमारी प्रवृति अपने विचारों से मेल खाती जानकारी खोजने की होती है। अनुसंधान दिखाते हैं कि अपनी स्थिति से मेल खाती जानकारी खोजने की संभावना वास्तव में दो गुना अधिक होती है। अपनी सोच के प्रति अत्यंत प्रतिबद्ध होने के कारण हम उन विचारों से बचते हैं जो हमारी स्थिति के प्रतिकूल हों।
इस्राएल के राजा अहाब ने और यहूदा के राजा यहोशापात ने गिलाद के रामोत पर चढ़ाई की चर्चा की, तो अहाब ने अपने 400 भविष्यवक्ताओं को एकत्रित किया-जिन्हें उसने इस भूमिका के लिए स्वयं नियुक्त किया था, जो वही कहेंगे जिसे वह सुनना चाहता था-निर्णय में उसकी सहायता के लिए। उन्होंने उत्तर दिया चढ़ाई कर...(2 इतिहास 18:5)। यहोशापात के पूछने पर कि, क्या यहोवा का चुना और कोई नबी है जिससे पूछ लें? इस्राएल के राजा ने यहोशापात से...(पद 7)। मीकायाह ने कहा...(पद 16)।
मैं देखती हूं कि उनकी कहानी के समान मैं भी कैसे,बुद्धिमानी से भरी सलाह से बचने की प्रवृति रखती हूं, यदि वह वो ना हो जिसे मैं सुनना चाहती हूं। अहाब का उसके “चापलूस”-400 भविष्यवक्ताओं-को सुनने का परिणाम-विनाशकारी हुआ (पद 34)। हम बाइबिल में परमेश्वर के वचन की सच्ची वाणी की खोज करें और उसे सुनने के लिए तैयार रहें भले ही वह हमारी व्यक्तिगत प्राथमिकताओं के विपरीत क्यों ना हो।
बरामदे में राहत
एक अत्यधिक गर्म दिन पर, आठ वर्षीय कारमाइन सुनिश्चित करना चाहता था कि डाकिया आए तो उसे कुछ ठंडा पीने को मिले, इसलिए उन्होंने बरामदे में एक कूलर में स्पोर्ट्स ड्रिंक और पानी रख दिया। सुरक्षा कैमरे ने उसकी प्रतिक्रिया रिकॉर्ड की: "ओह, पानी और गेटोरेड। परमेश्वर का शुक्र है; धन्यवाद!"
उसकी माँ कहती है, "कारमाइन डाकिये को ठण्डा पिलाकर तृप्त करना अपना कर्तव्य समझता है, चाहे वे घर पर न हों।"
यह कहानी हमारा दिल छूने के साथ यह याद दिलाती है कि कोई है जो, पौलुस के शब्दों में, “तुम्हारी हर एक घटी को पूरी करेगा”। यद्यपि पौलुस जेल में और भविष्य के प्रति अनिश्चित था, तो भी फिलिप्पी के मसीहियों के लिए आनन्दित था क्योंकि उनके धन के उपहारों के माध्यम से परमेश्वर ने उसकी जरूरतें पूरी कीं। फिलिप्पी कलीसिया धनी नहीं थी, परन्तु वे उदार थे, उन्होंने पौलुस और दूसरों को कंगालपन से निकाला (2 कुरिन्थियों 8:1-4)। जैसे फिलिप्पियों ने पौलुस को तृप्त किया, परमेश्वर भी अपने उस धन के... (फिलिप्पियों 4:19)।
परमेश्वर अक्सर आड़े माध्यमों के द्वारा सीधी सहायता भेजते हैं । वह दूसरों की सहायता से हमारी ज़रूरतों को पूरा करते हैं। जब हम उन पर भरोसा करते हैं, तो पौलुस के समान वह हमें भी सच्चे संतोष का भेद सिखाते हैं (पद 12-13)।
मीठा और कड़वा
कुछ लोग कड़वा और कुछ मीठा चॉकलेट पसंद करते हैं। मध्य अमरिका के मायनों में इस का आनंद पेय के रूप में लिया जाता था और लोग इसमें मिर्च मिलाते थे। उन्हें यह “कड़वा पानी” पसंद था। वर्षों बाद यह स्पेन में प्रस्तुत हुआ, पर स्पेनियों को चॉकलेट मीठा पसंद था तो कड़वाहट कम करने के लिए उन्होंने इसमें चीनी और शहद मिलाई।
चॉकलेट के समान, दिन भी कड़वे या मीठे हो सकते हैं। ब्रदर लॉरेंस ने लिखा, “यदि हम जानते कि [परमेश्वर] हमें कितना प्रेम करते हैं, तो हम उनके हाथ से मीठा और कड़वा” समान रूप से लेने के लिए सदा तैयार रहते। मीठा और कड़वा समान रूप से स्वीकार करें? यह कठिन है! ब्रदर लॉरेंस किसकी बात कर रहे हैं? कुंजी परमेश्वर के चरित्र में मिलती है। भजनकार ने परमेश्वर से कहा, "तू भला है, और..." (भजन 119:68)।
चंगाई और औषधीय गुणों के लिए मायनों वासियों ने कड़वे चॉकलेट के महत्व को समझा। कड़वे दिनों का भी महत्व होता है। वह हमें हमारी कमजोरियों से अवगत कराते हैं और परमेश्वर पर निर्भर करने में हमारी सहायता करते हैं। भजनकार ने लिखा, “मुझे जो दुख हुआ...(पद 71)। परमेश्वर की भलाई का आश्वासन रखकर-आइये आज जीवन को, इसके भिन्न स्वाद समेत अपनाएं। हम कहें, "हे यहोवा, तू ने अपने वचन..."(पद 65)।
अनाम दया
ग्रेजुएशन के बाद मुझे एक कड़ा बजट बनाना पड़ा- सप्ताह में पच्चीस डॉलर। एक दिन, बिलिंग लाइन में मुझे लगा कि मेरा सामान मेरे बजट से अधिक लागत का है। "बीस डॉलर तक पहुंचकर बिलिंग रोक देना" मैंने केशियर से कहा। मिर्च छोड़कर बाकि सभी चीजें बिल हो गईं।
मैं निकल ही रही थी कि एक व्यक्ति मेरी कार के पास आया। मुझे एक पैकेट पकड़ा कर उसने कहा “आपकी मिर्ची यह रही”। इससे पहले मैं उसे धन्यवाद देती, वह जा चुका था।
दया के कार्य की इस भलाई की याद, मेरे दिल को आज भी छू जाती है और मत्ती 6 में यीशु के शब्दों का स्मरण दिलाती है। यीशु ने उन कपटियों की आलोचना करते हुए जो दिखावे के लिए दान देते थे, (पद 2) अपने चेलों को अलग रास्ता सिखाया। उन्होंने दान को ऐसे गुप्त रखने की प्रेरणा दी कि “जो तेरा दाहिना हाथ...(पद 3)!
एक अंजान व्यक्ति की दया ने मुझे याद दिलाया, देना कभी हमारे बारे में कभी न हो। हम देते हैं क्योंकि हमारे उदार परमेश्वर ने हमें बहुतायत से दिया है (2 कुरिन्थियों 9:6-11) गुप्त और उदार रूप से दान देकर हम यह दर्शाते हैं कि वह कौन हैं-और परमेश्वर को धन्यवाद की भेंट मिलती हैं जिसके केवल वो ही योग्य हैं (पद 11)।
इस सब के लिए तुच्छ जाना गया
सुज़ानाह सिब्बर अठारहवीं शताब्दी में अपनी गायन प्रतिभा के लिए मशहूर थी। हालांकि, अपने दाम्पत्य जीवन में निन्दात्मक समस्याओं के कारण वह उतनी ही बदनाम थी। इसलिए जब अप्रैल 1742 में, डबलिन में हेन्डल रचित मसीहा नाटक पहली बार किया गया, तो कई दर्शकों ने एकल गायिका के रूप में उसकी भूमिका को नहीं स्वीकारा।
नाटक के दौरान, सिब्बर मसीहा के विषय में गा रही थी: "वह तुच्छ जाना गया ...;"(यशायाह 53:3 केजेवी)। इन शब्दों से प्रभावित होकर रेव. पैट्रिक डेलेनी तुरन्त खड़े होकर कहने लगे, "हे नारी, इस कारण तेरे सभी पाप क्षमा कर दिए गए हैं!"
सुज़ानाह सिब्बर और हेन्डल रचित मसीहा के प्रसंग के बीच का संबंध स्पष्ट है "वह दुखी पुरूष”-यीशु मसीह-पाप के कारण "तुच्छ जाना जाता” और “मनुष्यों का त्यागा” हुआ था। भविष्यवक्ता यशायाह ने कहा, "मेरा धर्मी दास...।"(पद 11)।
मसीहा और हमारा संबंध कम स्पष्ट नहीं है। चाहे हम आलोचनात्मक दर्शकों के साथ, सुज़ानाह सिब्बर के साथ, या कहीं मध्य में खड़े हों, हम सभी को पश्चाताप करने और परमेश्वर की क्षमा प्राप्त करने की आवश्यकता है। यीशु ने अपने जीवन, मृत्यु और पुनरुत्थान के द्वारा परमेश्वर, हमारे पिता के साथ हमारा संबंध पुनः स्थापित कर दिया है।
इसके लिए-उस सब को जोयीशु ने पूरा किया-हमारे सभी पाप क्षमा हों।
राजा का ताज
मेज पर रखी फ़ोम डिस्क में हम सब ने टूथपिक्स डाले दिए। इस प्रकार ईस्टर के प्रथम सप्ताह में हमने कांटो का ताज बनाया। हर टूथपिक किसी ऐसी बात का प्रतीक था जो हमने की थी और जिसके लिए हम शर्मिंदा थे। जिसके लिए यीशु ने दाम चुकाया है। हर रात यह अभ्यास हमें याद दिलाता था कि हम अपराधी हैं और हमें एक उद्धारकर्ता की आवश्यकता है जिसने क्रूस पर अपनी मृत्यु के माध्यम से हमें मुक्त कर दिया है।
कांटों का ताज जिसे यीशु को पहनाया गया था, वह उन्हें क्रूसित करने से पहले रोमी सैनिकों के क्रूर खेल का एक हिस्सा था। उन्हें शाही पौशाक पहनाकर राजदण्ड के रूप में सरकण्डा दिया गया जिससे वे उसे मारने के लगे। उसे “यहूदियों के राजा” कहकर ठट्ठा उड़ाया (मत्ती 27:29)। इस बात से अनभिज्ञ कि इसे हजारों वर्ष बाद भी याद किया जाएगा। वह कोई साधारण राजा नहीं परन्तु राजाओं के राजा थे जिनकी मृत्यु और पुनरुत्थान ने हमें अनंत जीवन दिया है।
ईस्टर की सुबह, हमने टूथपिक्स को फूलों से’ बदलकर क्षमा और नए जीवन के उपहार का पर्व मनाया। इस विश्वास से हमने अद्भुत आनन्द का अनुभव किया `कि परमेश्वर ने हमारे पापों को मिटा दिया है और हमें मुक्ति तथा उनमें अनन्त जीवन दे दिया है!
वाया डोलोरोसा
पवित्र सप्ताह के दौरान, हम यीशु के क्रूसित होने से पहले के दिनों को याद करते हैं। यरूशलेम के जिस रास्ते से होकर यीशु ने क्रूस तक की यात्रा की थी, उसे आज ‘वाया डोलोरोसा’ के रूप में जाना जाता है-दुःख का रास्ता।
परन्तु इब्रानियों के लेखक ने यीशु के जिस मार्ग का अनुभव किया था, वह मात्र दुःख का एक रास्ता नहीं था। स्वेच्छा से गुलगुता जाने के लिए यीशु जिस दुःख के रास्ते पर चले वहां से उन्होंने हमारे लिए परमेश्वर की उपस्थिति में आने का "नया और जीवित मार्ग" बनाया (इब्रानियों 10:20)।
सदियों से यहूदियों ने जानवरों के बलिदान द्वारा और व्यवस्था का पालन करने द्वारा परमेश्वर की उपस्थिति में आने की कोशिश की है। परन्तु व्यवस्था आने वाली अच्छी वस्तुओं का प्रतिबिम्ब थी, क्योंकि अनहोना है, कि बैलों और बकरों का लहू पापों को दूर करे। (पद 1,4)।
वाया डोलोरोसा पर यीशु की यात्रा उन्हें उनकी मृत्यु और फिर पुनरुत्थान की ओर ले गई। उनके बलिदान से, जब हम अपने पापों की क्षमा के लिए उन पर भरोसा करते हैं तो हम पवित्र बन सकते हैं। हम सच्चे मन, और पूरे विश्वास के साथ...(पद 10, 22)। मसीह के दुःख के रास्ते ने हमारे लिए परमेश्वर के पास आने का एक नया और जीवित मार्ग खोला है।