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भाषा सीखना

जमाइका के एक छोटे चर्च में मण्डली के समक्ष खड़े होकर मैंने उत्तम तरीके से प्रान्तीय भाषा में बोलने का प्रयास किया, “वा ग्वान, जमाइका ?” प्रतिक्रिया मेरी अपेक्षा से बेहतर था, जब मुकराहट और हर्षध्वनि ने मेरा अभिवादन किया l

वास्तव में, मैंने पटोइस [पा-त्वा] भाषा में केवल सामान्य शुभकामनाएं दी थी, “क्या हो रहा है?,” किन्तु उन्होंने सुना कि मैंने बोला, “मैं आपकी भाषा बोलना पसंद करता हूँ l” निःसन्देह, मैं पटोइस भाषा में आगे और नहीं बोल सकता था, किन्तु एक द्वार अवश्य ही खुल गया था l

प्रेरित पौलुस अथेने के लोगों के सामने खड़े होकर, उनको जता दिया कि वह उनकी संस्कृति से अवगत् था l उसने उनको बताया कि उसने एक “अनजाने ईश्वर के लिए” उनकी वेदी देखी थी, और उसने उनके एक कवि का सन्दर्भ भी दिया l निःसंदेह सभी ने यीशु के पुनरुत्थान सम्बंधित सन्देश पर विश्वास नहीं किया, किन्तु कुछ ने कहा, “यह बात हम तुझ से फिर कभी सुनेंगे” (प्रेरितों 17:32) l

दूसरों के साथ यीशु और उसके द्वारा प्रदत्त उद्धार के विषय बातें करते समय, वचन हमें अपने को दूसरों में निवेश करने को कहता है-उनकी भाषा सीखना, जैसे कि वह सुसमाचार बताने के लिए एक द्वार खोलना है (1 कुरिं. 9:20-23 भी देखें) l

जब हम “वा ग्वान?” दूसरों के जीवन में खोज लेते हैं, दूसरों को बताना सरल होगा जो परमेश्वर ने हमारे जीवनों में किया है l

कोई स्पर्श के योग्य

नियमित आने-जाने वालों ने एक तनावपूर्ण क्षण में एक मार्मिक निर्णय के साक्षी बने l एक 70 वर्षीय वृद्ध महिला ने हाथ बढ़ाकर कोमलता से एक युवक को स्पर्श किया जिसकी तेज़ आवाज़ और अशांत करनेवाले शब्द दूसरे यात्रियों के लिए चौंकानेवाले थे l महिला की दयालुता ने उस व्यक्ति को शांत कर दिया जो रोते हुए ट्रेन के फर्श पर बैठ गया l उसने कहा, “दादी, धन्यवाद,” और उठकर चला गया l महिला ने बाद में बताया कि वह भयभीत थी l किन्तु वह बोली, “मैं एक माँ हूँ और उसे किसी की स्पर्श की ज़रूरत थी l” जबकि बेहतर निर्णय उसे दूरी बनाए रखने का कारण देती, उसने प्रेम का जोखिम उठाया l

यीशु इस तरह की करुणा समझता था l उसने हतोत्साहित देखनेवालों का पक्ष नहीं लिया जब एक परेशान, कुष्ठ लोगी चंगा होने उसके निकट आया l वह अन्य धार्मिक अगुवों की तरह असहाय नहीं था-लोग जो उस कुष्ठ रोगी को गाँव में कुष्ठ रोग लाने के लिए केवल उसकी निंदा करते (लेव्य. 13:45-46) l इसके बदले, यीशु ने उसे छूकर चंगा किया जिसे शायद वर्षों से कोई नहीं छूआ था l

धन्यवाद हो, यीशु उस व्यक्ति के लिए और हमारे लिए, वह देने आया जो कोई भी व्यवस्था नहीं दे सकता था-उसके हाथ और हृदय का स्पर्श l

हार न मानें

बॉब फोस्टर, जो 50 वर्ष से अधिक से मेरा सलाहकार और मित्र है, मुझे छोड़ा नहीं है l मेरे कठिन समय में भी, उसकी स्थिर मित्रता और प्रोत्साहन ने, मुझे आगे बढ़ने में मदद की l

हम दोनों अक्सर अपने को किसी ज़रूरतमंद की मदद करते पाते हैं l किन्तु जब हमें तुरंत सुधार नहीं दिखाई देता, हमारा संकल्प कमजोर हो सकता है और हम आखिरकार हार मान सकते हैं l हमें यह मालूम पड़ता है कि जिसे हम तात्कालिक बदलाव सोचते थे, वह चलनेवाली प्रक्रिया बन गयी है l

प्रेरित पौलुस हमसे जीवन की बाधाओं और संघर्षों में परस्पर मदद करने में धीरज रखने को कहता है l वह यह लिखते हुए, “तूम एक दूसरे का भार उठाओ” और “इस प्रकार मसीह की व्यवस्था को पूरी करो” (गला.6:2), हमारे परिश्रम की तुलना एक किसान के कार्य, समय, और इंतज़ार से करता है जो फसल के लिए ठहरा हुआ है l

हम कब तक उनके लिए प्रार्थना और उनको मदद करते रहेंगे जिनसे हम प्रेम करते हैं? “हम भले कामों में साहस न छोड़ें, क्योंकि यदि हम ढीले न हों तो ठीक समय पर कटनी काटेंगे” (पद.9) l हम कब तक मदद करें? “जहाँ तक अवसर मिले हम सब के साथ भलाई करें, विशेष करके विश्वासी भाइयों के साथ” (पद.10) l

प्रभु आज हमसे उस पर भरोसा करने, दूसरों के प्रति विश्वासयोग्य, निरंतर प्रार्थना करने, और हार न मानने को उत्साहित करता है!

छोटी बातें

मेरी सहेली ग्लोरिया मुझे उत्तेजित होकर पुकारी l डॉक्टर से नियोजित भेंट के अलावा वह अपने घर से निकलने में असमर्थ थी l इसलिए मैं समझ गयी वह क्यों मुझसे कहने के लिए खुश थी, “मेरे पुत्र ने अभी-अभी मेरे कंप्यूटर में स्पीकर्स जोड़ा है, इसलिए अब मैं चर्च जा सकती हूँ!” अब वह अपने चर्च उपासना का सीधा प्रसारण सुन सकती थी l उसने परमेश्वर की भलाई की अत्यधिक चर्चा करी और “वह उपहार जो मेरा बेटा कभी मुझे दे सकता था!”

ग्लोरिया मुझे धन्यवादी हृदय रखना सिखाती है l उसके अनेक सीमाओं के बावजूद, वह छोटी बातों के लिए भी धन्यवादित है-सूर्यास्त, मददगार परिजन और मित्र, परमेश्वर के साथ शांत पल, अपने अपार्टमेन्ट में अकेले रहने की क्षमता l उसने परमेश्वर को जीवन भर उसकी ज़रूरतों को पूरा करते देखा है, और वह हर मिलनेवालों से परमेश्वर के विषय बताती है l

हम भजन 116 के रचयिता की कठिनाइयों को नहीं जानते हैं l कुछ बाइबिल टीकाकारों के अनुसार संभवतः बीमारी थी क्योंकि उसने कहा, “मृत्यु की रस्सियाँ मेरे चारों ओर थीं” (पद.3) l किन्तु अपने प्रति प्रभु का अनुग्रह और करुणा देखकर वह धन्यादित है जब उसे “बलहीन किया गया” (पद.5-6) l

जब हम बलहीन होते हैं, ऊपर देखना कठिन है l फिर भी ऐसा करने पर, हम देखते हैं कि परमेश्वर हमारे जीवनों में सभी अच्छे उपहारों का देनेवाला है-बड़ा और छोटा-और हम धन्यवाद देना सीखते हैं l

छोटा होता पियानो

लगातार तीन वर्षों तक मेरा बेटा पियानो वादन में भाग लिया l पिछले वर्ष, मैंने उसे मंच पर अपना पियानो सजाते देखा l उसने दो गानें बजाए और फिर मेरे निकट बैठकर मेरे कानों में फुसफुसाया, “माँ, इस वर्ष पियानो छोटा था l” मैं बोली, “नहीं, तुमने वही पियानो बजाया l तुम बड़े हो गए हो! तुम बढ़ गए हो l”

शारीरक उन्नति की तरह, आत्मिक उन्नत्ति, समय के साथ धीरे-धीरे होती है l यह निरंतर चलनेवाली प्रक्रिया है जिसमें यीशु की तरह बनना शामिल है, और हमारे मन के नए हो जाने से हम रूपांतरित होते हैं l

हमारे अन्दर पवित्र आत्मा के कार्य से, हम अपने जीवनों में पाप को पहचान जाते हैं l परमेश्वर की महिमा करने की इच्छा में, हम बदलना चाहते हैं l कभी-कभी हम सफल होते हैं, किन्तु दूसरे समयों में, हम प्रयास करते और हार जाते हैं l कुछ नहीं बदलते देखकर हम निरास होते हैं l हम पराजय को उन्नत्ति की कमी कहते हैं, जबकि अक्सर यह प्रक्रिया के मध्य में होने का प्रमाण है l

आत्मिक उन्नत्ति में पवित्र आत्मा, हमारे बदलने की इच्छा, और समय शामिल है l जीवन के किसी ख़ास बिंदु पर, हम मुड़कर देखेंगे कि हम उन्नत्ति किये हैं l परमेश्वर हमें यह विश्वास करने का भरोसा दे कि “जिसने [हम]में अच्छा काम आरम्भ किया है, वही उसे यीशु मसीह के दिन तक पूरा करेगा” (फिलि. 1:6) l

हमेशा सुननेवाला

पिताजी कम बोलते थे l सेना में वर्षों तक ड्यूटी के दौरान सुनने की शक्ति कम होने पर वे सुनने का यंत्र लगाते थे l एक दिन जब मेरी माँ और मैं उनकी अपेक्षा से अधिक समय तक बातें करते रहे, उन्होंने मज़ाक किया, “शांति और आराम हेतु, मुझे केवल यही करना है l” उन्होंने सुननेवाले यंत्र बंद करके, सिर के पीछे दोनों हाथों को जोड़कर, धीरे से मुस्कराते हुए आँखें बंद कर लीं l

हम हँस दिए l जहाँ तक उनसे मतलब था, बातचीत ख़त्म हो चुकी थी!

मेरे पिता की उस दिन की क्रिया ने मुझे याद दिलाया कि परमेश्वर हमसे कितना भिन्न है l वह हमेशा हमारी सुनता है l हम बाइबिल की एक सबसे छोटी प्रार्थना से यह समझ जाते हैं l एक दिन फारस के राजा, अर्तक्षत्र का सेवक, नहेम्याह, राजा के समक्ष उदास दिखा l कारण पूछने पर, डरते हुए, नहेम्याह ने स्वीकारा कि उसके पुरखाओं का पराजित शहर, यरूशलेम, उजाड़ पड़ा है l नहेम्याह ने याद किया, “राजा ने मुझसे पूछा, ‘फिर तू क्या मांगता है?’ ”तब मैंने स्वर्ग के परमेश्वर से प्रार्थना करके , राजा से कहा ... l” (नहे. 2:4-5) l

परमेश्वर ने नहेम्याह की क्षणिक प्रार्थना सुन ली l इस प्रार्थना से यरूशलेम के लिए नहेम्याह की अन्य प्रार्थनाओं को परमेश्वर का करुणामय उत्तर मिला l उस क्षण, अर्तक्षत्र ने शहर के पुनर्निर्माण सम्बंधित नहेम्याह का निवेदन सुन लिया l

क्या यह जानना सुखकर नहीं कि परमेश्वर हमारी छोटी-बड़ी प्रार्थनाएँ सुनता है?

देने का उपहार

एक पासवान ने अपनी कलीसिया को बेचैन करनेवाली चुनौती देकर वाक्यांश “वह तुम्हें सब कुछ दे देगा” में जान डाल दी l क्या होगा यदि हम अपने कोट उतारकर ज़रुरतमंदों को दे दें? तत्पश्चात उसने अपना कोट उतारकर कलीसिया के आगे रख दिया l बहुतों ने उसके नमूने का अनुसरण किया l यह सर्दियों के समय हुआ, इसलिए उस दिन घर जाना कम आरामदायक था l किन्तु अनेक ज़रुरतमंदों को उस मौसम ने थोड़ी गर्माहट दी l

जब यूहन्ना बपतिस्मा देनेवाला यहूदिया के निर्जन प्रदेश में फिरता था, उसके पास आनेवाली भीड़ के लिए कड़ी चेतावनी थी l उसने कहा, “हे साँप के बच्चों ... मन फिराव के योग्य फल लाओ” (लूका 3:7-8) l चौंक कर उन्होंने उससे पूछा, “तो हम क्या करें?” उसने एक सलाह के साथ उत्तर दिया : “जिसके पास दो कुरते हों, वह उसके साथ जिसके पास नहीं है बाँट ले और जिसके पास भोजन हो, वह भी ऐसा ही करे” (पद.10-11) l सच्चा पश्चाताप एक उदार हृदय उत्पन्न करता है l

क्योंकि “परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम करता है,” दान दोष-आधारित अथवा विवशता में न हो (2 कुरिं.9:7) l किन्तु जब हम स्वतंत्रता और उदारता से देते हैं, तो हम देखते हैं कि वास्तव में लेने से देना धन्य है l

भरोसा करें

हमारे विवाह की सालगिरह पर, आनंददायक रोमांच के लिए मेरे पति ने अपने मित्र से दो सीट और दो जोड़ी पैडल वाली साइकिल मांग लाए l उसको चलाते समय, मैंने महसूस किया कि पीछे की सीट पर बैठकर मैं अपने पति के चौड़े कन्धों के कारण सामने ठीक से देखने में असमर्थ थी l और मेरा हैंडल स्थिर होने से साइकिल को मोड़ने में उसका योगदान नहीं था l केवल सामने वाला हैंडल ही हमारी दिशा निर्धारित कर रहा था; मेरा हैंडल मेरे शरीर के लिए सहारा मात्र था l साइकिल पर नियंत्रण नहीं कर पाने से मैं निराश हो सकती थी अथवा अपने पति, माइक पर भरोसा करके सुरक्षा और मार्गदर्शन का चुनाव कर सकती थी l

जब परमेश्वर ने अब्राम से अपना घर और परिवार छोड़ने को कहा, उसने उसे मंजिल के विषय अधिक जानकारी नहीं दी l कोई भुगौलिक मार्गदर्शन नहीं l नए स्थान अथवा उसके प्राकृतिक संसाधन की कोई भी जानकारी नहीं l न ही वहाँ पहुँचने में लगने वाला समय l परमेश्वर ने केवल उससे उस देश में “जाने” को कहा जो वह उसे देनेवाला था l जब बहुत लोग जानकारी चाहते हैं, अब्राम का बिना जानकारी के, परमेश्वर के निर्देश के प्रति आज्ञापालन, उसके लिए विश्वास गिना गया (इब्रा. 11:8) l

यदि हम अपने जीवनों में अनिश्चितता अथवा अनियंत्रण महसूस करें, हम अब्राम की तरह परमेश्वर का अनुसरण करें और भरोसा रखें l प्रभु हमें भली-भांति लिए चलेगा l

मधुर सुगंध

लेखिका रीटा स्नोडेन डोवर, इंग्लैंड की अपनी यात्रा की एक दिलचस्प कहानी बताती है l एक दोपहर कॉफ़ी-हाउस में कॉफ़ी का आनंद लेते हुए, उसे मधुर सुगंध का बोध हुआ l रीटा के वेटर से पूछने पर उसे बताया गया कि आने-जाने वाले लोगों से आ रही है l गाँव के अधिकतर लोग निकट के एक सुगंध कारखाना में काम करते थे l घर जाते समय, वे अपने कपड़ों में तर उस सुगंध को सड़कों तक बिखेरते जाते थे l

मसीही जीवन की कितनी सुन्दर तस्वीर? प्रेरित पौलुस अनुसार, हम मसीह की सुगंध हैं, जो हम सभी जगह फैलाते हैं (2 कुरिं. 2:15) l पौलुस युद्ध से लौटते हुए एक राजा की तस्वीर उपयोग करता है, जिसमें उसकी सेना और बंदी उसके पीछे चलते हुए, वातावरण में विजय की सुगंध फैलाते हुए, राजा की महानता घोषित कर रहे होते हैं (पद.14) l 

पौलुस अनुसार हम मसीह की सुगंध दो तरीकों से फैलाते हैं l प्रथम, खुबसूरत यीशु के विषय दूसरों को बताकर l द्वितीय, अपने जीवनों से : मसीह की तरह बलिदानी कार्यों द्वारा (इफि. 5:1-2) l यद्यपि हमारे द्वारा फैलाई जा रही उस दिव्य सुगंध को सब स्वीकार नहीं करेंगे, वह बहुतों को जीवन देगा l

रीटा स्नोडेन को महक लगी और वह उसका उद्गम जानना चाही l यीशु का अनुसरण करने पर हम भी उसके सुगंध से तर होकर, उसे अपने शब्दों और कार्यों द्वारा सभी जगह फैलाते हैं l