विभाजन का विनाश
एक लेखन अंतिम-तिथि मेरे सामने थी, जबकि सुबह हम पति-पत्नी में हुई बहस मेरे मन में थी l मेरी आँखें कर्सर पर, उंगलियाँ की-बोर्ड पर थीं l प्रभु, वह भी गलत था l
कंप्यूटर का स्क्रीन बंद होने पर, मेरा प्रतिबिम्ब भौं चढ़ाता दिखा l मेरी अस्वीकृत गलतियां मेरे कार्य में अधिक नुकसानदायक थीं l हम दोनों और परमेश्वर के साथ रिश्ते में कठिनाई हो रही थी l
मैंने अहंकार छोड़कर, क्षमा मांग ली l मेल की शांति का स्वाद लेते हुए मेरे पति ने भी क्षमा मांग ली l मेरा लेखन समय पर पूरा हुआ l
इस्राएलियों ने व्यक्तिगत पाप का दर्द और पुनर्स्थापन का आनंद अनुभव किया l यहोशू ने परमेश्वर के लोगों से यरीहो की लड़ाई से समृद्ध बनाने को मना किया(यहोशू 6:18), किन्तु आकान ने अधिग्रहित वस्तुओं को चुराकर अपने तम्बू में छिपा दिया (7:1) l उसके पाप के खुलासे और कार्यवाही पश्चात (पद. 4-12) ही राष्ट्र ने परमेश्वर की शांति का आनंद उठाया l
आकान की तरह, हम सर्वदा विचार नहीं करते कि “अपने तम्बू में पाप छिपाना” हमारे हृदयों को परमेश्वर से दूर करके हमारे आस-पास को प्रभावित करता है l यीशु को प्रभु मानकर, पाप स्वीकार करके, क्षमा ढूँढना परमेश्वर और दूसरों के साथ स्वस्थ्य और विश्वासयोग्य सम्बन्ध स्थापन की बुनियाद है l हम प्रतिदिन प्रेमी सृष्टिकर्ता और पालनहार के प्रति समर्पण द्वारा मिलकर उसकी सेवा और उपस्थिति का आनंद ले सकते हैं l
छोटा मार्ग अपनाना
नैंसी अपनी सहेली की खिड़की की ओर देखकर आहें भरी l बसंती वर्षा और धूप से सुरुचिपूर्ण ढंग से तैयार अनेक फूल खिले हुए थे l
“बिना मेहनत मुझे वही आभा चाहिए,” वह उत्साहपूर्वक बोली l
कुछ छोटे मार्ग ठीक और व्यावहारिक भी हैं l दूसरे हमारी आत्मा की उपेक्षा कर हमें मृत समान बनाते हैं l हम अपने से बिल्कुल भिन्न व्यक्तित्व के समक्ष स्वयं को समर्पित किये बिना किसी कठिनाई और मालिन्य के रोमांच चाहते हैं l हम वास्तविक जीवन के रोमांच में खतरा और पराजय बिना “महानता” चाहते हैं l हम असुविधा बगैर परमेश्वर को प्रसन्न करना चाहते हैं l
यीशु ने शिष्यों से कहा कि हम कठिन चुनाव से बचकर छोटे मार्ग द्वारा उसको अपना जीवन समर्पित नहीं कर सकते हैं l यीशु ने एक प्रत्याशित शिष्य को चिताया, “जो कोई अपना हाथ हल पर रखकर पीछे देखता है, वह परमेश्वर के राज्य के योग्य नहीं” (लूका 9:62) l मसीह का अनुसरण हमारी वफादारी का पूरा परिवर्तन मांगता है l
यीशु की ओर मुड़ने पर यह कार्य आरंभ होता है l किन्तु यह अत्यधिक महत्वपूर्ण है, क्योंकि उसने यह भी कहा कि जो “मेरे और सुसमाचार के लिए [त्याग करता है] ... इस समय सौ गुना न पाए, ... और परलोक में अनंत जीवन” (मरकुस 10:29-30) l मसीह का अनुसरण कठिन है, किन्तु उसने पवित्र आत्मा दिया है और पुरस्कार अभी और हमेशा का पूर्ण आनंदित जीवन है l
घर की सफाई
हाल ही में मुझे अपना कमरा बदलने में अपेक्षाकृत अधिक समय लगा, क्योंकि मुझे एक सम्पूर्ण नया और सुव्यवस्थित आरंभ चाहिए था l पुराने कमरे की घंटों सफाई और छंटाई के बाद, सामान भरे हुए थैले फेंकने, बांटने, या पुनर्चक्रण के लिए मेरे दरवाजे पर थे l किन्तु इस थकाऊ प्रक्रिया के अंत में मेरे रहने के लिए एक सुन्दर कमरा था l
मुझे घर साफ़ करने की योजना से 1 पतरस 2:1 पढ़ते समय एक नूतन दृष्टिकोण प्राप्त हुआ, जैसे द मेसेज (बाइबिल) में सरल ढंग से लिखा गया है : “इसलिए, घर साफ़ करें! बैरभाव और छल, डाह और निंदा को पूरी तौर से हटाएँ l” रुचिकर बात यह है, नए जीवन के आनंददायक अंगीकार के बाद (1:1-12) पतरस मसीह में उनसे हानिकारक व्यवहार हटाने को कहता है (1:13-2:3) l जब परमेश्वर के साथ हमारी चाल अव्यवस्थित और दूसरों के लिए हमारा प्रेम अस्वाभाविक लगे, यह हमारे उद्धार पर प्रश्न न उठाए l हम बचेंगे के लिए नहीं किन्तु हम बचे हुए हैं के कारण अपना जीवन बदलते हैं (1:23) l
मसीह में नए जीवन की वास्तविकता की तरह, हमारे बुरे आचरण रातों रात गायब नहीं होते l हमें प्रति दिन “घर की सफाई” करनी है, दूसरों को प्रेम करने से रोकनेवाली(1:22) और उन्नति में बाधक(2:2) बातों को हटाना है l तब, उस नए स्थान में, हम मसीह की सामर्थ्य और जीवन द्वारा नूतन निर्माण (पद.5) का आश्चर्य अनुभव करेंगे l
बढ़ने का समय
पिछले बसंत में मैं अपने घर के पीछे. दरवाजे के निकट गुलाब के पौधे को काट डालना चाहा l पिछले तीन वर्षों तक वह खिला नहीं था और उसकी बदसूरत फलहीन टहनियाँ चारों ओर फ़ैल रहीं थीं l
जीवन की व्यस्तता में बागवानी विलंबित हो गई l कुछ सप्ताह बाद गुलाब का वह पौधा फूलों से भर गया l सैकड़ों बड़े-बड़े सफ़ेद खुशबुदार गुलाब, मेरे दरवाजे के ऊपर लटके हुए थे, और मेरे आँगन में खुबसूरत पंखुड़ियां बिखरी हुई थीं l
मेरे गुलाब के पौधे के पुनर्जीवन ने लूका 13:6-9 में अंजीर के पेड़ के विषय यीशु का दृष्टान्त याद दिलाया l इस्राएली अंजीर के पेड़ को फल उत्पन्न करने के लिए तीन वर्ष देते थे l फलहीन होने पर उन्हें काट दिया जाता था कि भूमि का उपयोग हो सके l यीशु की कहानी में, माली ने स्वामी से एक ख़ास पेड़ के फलवंत होने के लिए चौथा वर्ष माँगा l सन्दर्भ में, (पद.1-5), अर्थ यह है : इस्राएलियों ने गलत जीवन जीया था, और परमेश्वर उनका न्याय कर सकता था l किन्तु परमेश्वर ने धीरज रखकर उनको उसकी ओर मुड़कर, क्षमा प्राप्त करने और फलने का अतिरिक्त समय दिया l
परमेश्वर चाहता है कि सब फलवंत हों और उसने अतिरिक्त समय दिया है l चाहे हम अभी भी विश्वास की ओर बढ़ रहें हैं अथबा अविश्वासी परिजनों और मित्रों के लिए प्रार्थना कर रहें हैं, उसका धीरज हम सब के लिए शुभसमाचार है l
व्यवहारिक विश्वास
किराने की दूकान जाते समय मेरी सहेली को लगा जैसे सड़क किनारे जाती स्त्री को अपने कार में बैठा लूँ l कार में बैठाने के बाद, उसने जाना कि पैसे नहीं होने के कारण वह गर्म और आर्द्र वातावरण में अनेक मील पैदल चलकर वापस अपने घर जा रही थी l केवल वह पैदल लम्बी यात्रा करके घर ही नहीं जा रही थी किन्तु उसी दिन अनेक घंटे चलकर प्रातः 4 बजे अपने काम पर भी पहुंची थी l
उस स्त्री को अपनी कार में बैठाकर मेरी सहेली ने आज के सन्दर्भ में याकूब के मसीहियों को अपने कार्यों द्वारा अपने विश्वास को प्रगट करने का निर्देश पूरा किया : “विश्वास भी, यदि कर्म सहित न हो तो अपने स्वभाव में मरा हुआ है” (पद.17) l उसकी चिंता थी कि कलीसिया विधवाओं और अनाथों की देखभाल करें (याकूब 1:27), किन्तु वह यह भी चाहता था कि वे मात्र शब्दों पर नहीं किन्तु विश्ववास पर चलकर प्रेम के कार्य करें l
हम अपने कर्मों से नहीं विश्वास से बचाए गए हैं, किन्तु हम दूसरों से प्रेम करके और उनकी ज़रूरतों को पूरा करके विश्वास को प्रगट करते हैं l इस जीवन में साथ चलते हुए, काश हम भी, मेरी सहेली की तरह, ज़रुरतमंदों के प्रति सजग रहें जिन्हें हमारी मदद चाहिए l
अपूर्ण कार्य
अपनी मृत्यु के बाद, महान शिल्पकार माइकलएंजलो ने अनेक अपूर्ण योजनाएँ छोड़ गए l किन्तु उनकी चार मुर्तिकलाएँ समाप्त नहीं हो सकती थीं l The Bearded Slave, the Atlas Slave, the Awakening Slave, और the Young Slave, जो अपूर्ण दिखाई देने के बावजूद, वैसे ही हैं जैसा माइकलएंजलो चाहते थे l कलाकार बताना चाहता था कि सर्वदा दासत्व में रहने का भाव कैसा होता है l
बेड़ियों में जकड़ी प्रतिमाएँ गढ़ने की अपेक्षा, माइकलएंजलो ने प्रतिमाओं को गढ़ते समय उन्हें उस चट्टान में ही फंसा दिखाया जिसमें से वे गढ़े गए थे l शरीर पत्थर से बाहर दिखाई देती हैं किन्तु पूरी तौर पर नहीं l माँसपेशियाँ दिखती है, किन्तु प्रतिमाएँ अपने को स्वतंत्र नहीं कर पातीं l
दास प्रतिमाओं(Slave sculptures) के साथ त्वरित साहनुभूति दिखाई देती है l उनकी हालत पाप के साथ मेरे संघर्ष से भिन्न नहीं है l मैं अपने को स्वतंत्र नहीं कर पाता हूँ : उन प्रतिमाओं की तरह मैं भी “पाप की व्यवस्था के बंधन में” बंदी हूँ (रोमि.7:23) l अथक प्रयास के बाद भी, मैं अपने को बदल नहीं सकता l किन्तु परमेश्वर का धन्यवाद हो, हम अपूर्ण कार्य में बंधे नहीं रहेंगे l हम स्वर्ग जाने तक पूर्ण नहीं होंगे, किन्तु इस बीच पवित्र आत्मा के कार्य द्वारा हम बदलते जाएंगे l परमेश्वर उस काम को पूरा करने का वादा किया है जो उसने हमारे अन्दर आरंभ किया है (फ़िलि.1:6) l
पाँच उँगलियों की प्रार्थना
प्रार्थना एक सूत्र नहीं, परमेश्वर के साथ बातचीत है l फिर भी हमें अपने प्रार्थना समय को तरोताज़ा करने हेतु एक “तरीका” उपयोग करना संभव है l हम भजन और दूसरे वचनों को (जैसे प्रभु की प्रार्थना) को प्रार्थना के रूप में उपयोग कर सकते हैं, अथवा ACTS तरीका (Adoration-आराधना, Confession-पाप स्वीकार, Thanksgiving-धन्यवाद, and Supplication-विनती) उपयोग कर सकते हैं l हाल ही में मुझे “पाँच उँगलियों की प्रार्थना” का पता चला जो परहित प्रार्थना के लिए मर्दार्शिका हो सकती है l
· दोनों हाथ जोड़ने पर, अंगूठा आपके सबसे निकट है l इसलिए अपने निकट के लोगों के लिए-अपने प्रियों के लिए प्रार्थना करें (फ़िलि.1:3-5) l
· अगली ऊँगली तर्जनी है l शिक्षकों के लिए-बाइबिल शिक्षक और उपदेशक, और बच्चों को पढ़ानेवालों के लिए प्रार्थना करें (1 थिस्स. 5:25) l
· अगली ऊँगली सबसे लम्बी है l अधिकारियों के लिए प्रार्थना करें-राष्ट्रीय और स्थानीय अगुवे, और अपने काम के पर्वेक्षक के लिए प्रार्थना करें(1 तीमू. 2:1-2) l
· चौथी ऊँगली सबसे कमजोर है l परेशान और दुखित लोगों के लिए प्रार्थना करें (याकूब 5:13-16) l
· उसके बाद छोटी ऊँगली l यह परमेश्वर की महानता के समक्ष आपके छोटेपन की याद दिलाती है l अपनी ज़रूरतों के लिए प्रार्थना करें (फ़िलि. 4:6,19) l
आप जो भी तरीका उपयोग करें, अपने पिता से बात करें l वह आपके दिल की आवाज़ सुनना चाहता है l
बहुत अच्छा!
कुछ दिनों में एक ही विषय दिखाई देता है l हाल ही में मेरा एक दिन ऐसा ही था l हमारे पासवान ने विस्मयकारी, दो मिनट के अन्तराल में खिलते फूलों की फोटोग्राफी के साथ उत्पत्ति पर अपना उपदेश आरंभ किया l तब, घर में, सोशल मीडिया की सूची में फूलों के अनेक चित्र दिखाई दिए l बाद में जंगल में घूमते समय, बसंत के जंगली फूल से हम घिरे थे-लाखों में जंगली गेंदे और आईरिस l
सृष्टि के तीसरे दिन परमेश्वर ने फूल और हर दूसरे प्रकार की वनस्पति (और सुखी भूमि जिसमें वे पैदा हो सकें) बनाए l और उस दिन दूसरी बार, परमेश्वर ने उन्हें “अच्छा” कहा (उत्पत्ति 1:10, 12) l केवल सृष्टि के छठवें दिन, परमेश्वर ने दो बार “अच्छा” कहा (पद.24,31) l वास्तव में, इस दिन जब उसने मनुष्य को रचा और उसकी श्रेष्ठकृति पूरी हो गई, उसने अपने द्वारा रचित सभी वस्तुओं को देखा “कि वह बहुत ही अच्छा है!”
सृष्टि की कहानी में, हम एक ऐसा सृष्टिकर्ता देखते हैं जो अपनी सृष्टि में आनंद लेता है-और सृष्टि करने में आनंदित दिखाई देता है l अन्यथा ऐसा रंगीन और अद्भुत विविधता वाला संसार क्यों बनाया जाए? और उसने सर्वोत्तम को अंत के लिए रखा जब उसने “मनुष्य को अपने स्वरुप के अनुसार उत्पन्न किया” (पद.27) l उसकी छविवाले होने के कारण हम उसकी खूबसूरत हस्तकला द्वारा आशीषित और प्रेरित हैं l
परमेश्वर के वचन में भीगना
जब हमारा बेटा ज़ेवियर छोटा बच्चा था हम पारिवारिक सैर पर मोंटेरेरी बे मछलीघर घूमने गए l मछली घर में घुसकर, मैंने छत से लटकता हुए एक बड़ी प्रतिमा की ओर इशारा किया l “देखो एक कुबड़ी व्हेल मछली l”
ज़ेवियर की आँखें बड़ी हो गयीं l “विशाल,” उसने कहा l
मेरे पति मुड़कर बोले l “वह यह शब्द कैसे जानता है?”
“उसने हमें बोलते सुना होगा l” मैंने अपना कन्धा समेटा, और चकित हुई कि हमारा बेटा शब्दावली सीख लिया है जो हमने उसे स्वेच्छा से नहीं सिखाया था l
व्यवस्थाविवरण 6 में, परमेश्वर ने अपने लोगों से जानबूझ कर अपने युवा पीढ़ियों को वचन और आज्ञाकारिता सिखाने को कहा l इस्राएलियों द्वारा परमेश्वर के विषय अपना ज्ञान बढ़ाकर, वे और उनके बच्चे परमेश्वर का अधिक आदर करना सीखेंगे और उसको निकटता से जानने, उससे पूर्ण प्रेम करने, और उसके प्रति आज्ञाकारिता के प्रतिफल का आनंद लेंगे (पद.2-5) l
जानबूझ कर उसके वचन से अपना हृदय और मस्तिष्क भरने से (जपद.6), हम बेहतर तैयारी से अपने दैनिक गतिविधियों में परमेश्वर के प्रेम और सच्चाई को अपने बच्चों के साथ बाँट पाएंगे (पद.7) l उदहारण से अगुवाई करके, हम अपने युवाओं को परमेश्वर का अधिकार पहचाना, उसका आदर करना और उसकी अपरिवर्तनीय सच्चाई के लिए सज्जित और उत्साहित कर पाएंगे (पद.8-9) l
जब स्वाभाविकता से परमेश्वर का वचन हमारे हृदय और मुँह से निकलेगा, हम पीढ़ियों तक विश्वास की मजबूत विरासत छोड़ेंगे (4:9) l