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अदृश्य प्रभाव

वाशिंगटन डी सी, में राष्ट्रीय कला भवन का सैर करते हुए मैंने अति उत्तम रचना “द विंड” देखा l तस्वीर में एक जंगल में आंधी चल रही थी l ऊंचे, पतले पेड़ बायीं ओर झुक रहे थे l झाड़ियाँ उसी दिशा में गिर रहीं थीं l

इससे भी अधिक सामर्थी भाव में, पवित्र आत्मा विश्वासियों को परमेश्वर की भलाई और सच्चाई की ओर झुका सकता है l पवित्र आत्मा के साथ चलकर, हम अधिक साहसी और प्रेमी बन सकते हैं l हम अधिक समझदारी से अपनी इच्छाओं को सँभाल सकेंगे (2 तीमु. 1:7) l

कुछ एक स्थितियों में, हालाँकि, पवित्र आत्मा हमें आत्मिक उन्नत्ति और बदलाव की ओर ले जाता है, किन्तु हम “नहीं” कहते हैं l वचन लगातार इस दृढ़ विश्वास में अवरोध उत्पन्न करने को “आत्मा को” बुझाना कहती है (1 थिस्स. 5:19) l समय के साथ, जिन बातों को हम गलत मानते थे अब उतने बुरे नहीं लगते l

परमेश्वर के साथ हमारा सम्बन्ध दूर और टूटा महसूस होता है, क्योंकि आत्मा के दृढ़ निश्चय को बारम्बार किनारे किया गया है l जितने लम्बे समय तक ऐसा होगा, समस्या का कारण जानना उतना ही कठिन होगा l धन्यवाद हो, हम प्रार्थना करके परमेश्वर से हमारे पाप प्रगट करने का आग्रह कर सकते हैं l यदि हम पाप से मन फिराकर स्वयं को पुनः उसके सामने समर्पित करते हैं, परमेश्वर हमें क्षमा करके हमारे अन्दर अपनी आत्मा की सामर्थ और प्रभाव को जागृत करेगा l

कमरा नंबर 5020

जे बफन ने अपने हॉस्पिटल के कमरे को एक प्रकाशस्तंभ में बदल दिया l

बावन वर्षीय वृद्ध पति, पिता, हाई स्कूल शिक्षक, और कोच कैंसरग्रस्त था, किन्तु उसका कमरा नंबर 5020 मित्र, परिवार, और हॉस्पिटल कार्यकर्ताओं के लिए आशा का प्रकाशस्तंभ बन गया l उसके आनंदित आचरण और मजबूत विश्वास के कारण नर्सेज चाहती थीं कि उनकी ड्यूटी जे के कमरे में लगायी जाए l कुछ एक तो ड्यूटी समाप्त होने पर भी उससे मिलने आती थीं l

यद्यपि एक समय उसका मजबूत शरीर दुर्बल होता जा रहा था, वह सभी से मुस्कराकर  और उत्साह के साथ मिलता था l एक मित्र ने कहा, “जे से हर मुलाकात के समय वह प्रसन्न, सकारात्मक और आशापूर्ण दिखाई देता था l कैंसर और मृत्यु सामने होने पर भी वह अपने विश्वास को जी रहा था l”

जे के अंतिम संस्कार के समय, एक वक्ता ने ध्यान दिया कि कमरा नंबर 5020 विशेष रूप से अर्थपूर्ण था l उसने उत्पत्ति 50:20 की ओर इशारा किया, जिसमें युसूफ कहता है कि यद्यपि उसके भाइयों ने उसे दासत्व में बेच दिया, परमेश्वर ने मेज को पलट दिया और कुछ भला संपन्न किया : “बहुत से लोगों के प्राण बचे l” जे को कैंसर हुआ, किन्तु परमेश्वर के कार्य को पहचानकर जे कह सका कि “परमेश्वर ने ... भलाई का विचार किया l” इसीलिए जे कैंसर के विनाश का उपयोग दूसरों को यीशु के विषय बताने में किया l

द्वार पर मृत्यु के दस्तक के बीच, हमारे उद्धारकर्ता में अडिग भरोसा की कितनी बड़ी विरासत! हमारे भले और भरोसेमंद परमेश्वर में भरोसे की कितनी बड़ी साक्षी!

प्रकृति देखभाल

बड़ी भूरी ट्राउट मछलियाँ शरद ऋतू की अपनी क्रियापद्धति अनुसार ओविही नदी में अंडे दे रही हैं l आप उन्हें छिछले कंकरीले जल में अपना घोंसला बनाते देख सकते हैं l

बुद्धिमान मछुए यह जानकार कि मछलियाँ अंडे पर हैं उन्हें परेशान नहीं करते l अंडे न दब जाएँ, वे कंकरीली जगहों पर पाँव नहीं रखते अथवा अण्डों के स्थान से धारा के प्रतिकूल नहीं जाते जहाँ पथरीले टुकड़े बिखरकर अण्डों को दबा न दें l और मछली पकड़ने के प्रलोभन के बावजूद, वे घोंसलों के निकट ट्राउट मछलियों का शिकार नहीं करते हैं l

ये बचाव जिम्मेदार मछली पकड़ने की नियम नीतियाँ हैं l किन्तु और गंभीर और बेहतर कारण भी हैं l

वचन कहता है कि परमेश्वर ने हमें पृथ्वी दी है (उत्पत्ति 1:28-30) l यह हमारे उपयोग के लिए है, किन्तु हम इससे प्रेम करनेवाले की तरह इसका उपयोग करें l

मैं परमेश्वर के हाथों के कार्यों पर विचार करता हूँ : एक तीतर का घटी में बोलना, एक बारहसिंघा का लड़ाई आरंभ करना, दूर एक हिरन का झुण्ड, एक ट्राउट मछली और रंग बदलते उसके गुलाबी बच्चे, झरने में अपने बच्चों के साथ खेलती हुई एक माता उदबिलाऊ -मैं इनको पसंद करता हूँ, क्योंकि मेरे पिता ने अपने महान प्रेम में इन्हें मेरे आनंद के लिए मुझे दिए हैं l

और जिनसे मैं प्रेम करता हूँ, उनकी सुरक्षा भी करता हूँ l

परमेश्वर द्वरा थामा गया

एक दोपहर अपनी बहन और उसके बच्चों के संग भोजन समाप्त करते समय, मेरी बहन ने मेरी तीन वर्षीय भांजी, अनिका से कहा कि दोपहर में उसके सोने का समय हो गया है l वह चौंक गयी l “किन्तु मोनिका आंटी ने आज मुझे गोद में नहीं लिया!” वह आँसुओं से बोली l मेरी बहन मुस्कराकर बोली l “ठीक है, तुम कितनी देर तक चाहती हो कि वह तुम्हें गोद में उठाए?” उसका उत्तर था, “पाँच मिनट l”

अपनी भांजी को गोद में लेकर, मैं कृतज्ञ हूँ कि प्रयास के अभाव में भी, वह मुझे याद दिलाती है प्रेम करना और प्रेम पाने का अनुभव क्या होता है l मेरी सोच में हमारी विश्वास यात्रा कल्पना से परे परमेश्वर का प्रेम अनुभव करने का है (इफि.3:18) l अपना ध्यान खोने पर हम यीशु के उड़ाऊ पुत्र के दृष्टान्त में जेठा पुत्र स्वरुप होते हैं, और भूलकर कि हमारे पास सब कुछ है, परमेश्वर का समर्थन पाने की कोशिश करते हैं (लूका 15:25-32) l

भजन 131 वचन में एक प्रार्थना है जो हमें “बालकों के समान”(मत्ती. 18:3) बनने में मदद करता है और हमें हमारे मस्तिष्क के नहीं समझने वाले द्वन्द से दूर करता है (भजन 131:1) l इसके बदले, हम समय के साथ उसमें शांति स्थान में लौट सकते हैं (पद.2),उसके प्रेम में आवश्यक आशा प्राप्त कर सकते हैं (पद.3)-जैसे हम शांति और चैन से अपनी माता के बाहों में हों (पद.2) l

एक नया नाम

मार्क लैबरटन ने अपने लेख “Leading by Naming” में नाम की ताकत बताया l  उसने कहा, “केवल एक संगीतप्रेमी मित्र ने मुझे ‘संगीतप्रेमी’ पुकारा था जिसका प्रभाव अभी भी मुझ में है l मैंने वाद्य कभी नहीं बजाया और एकल गायक नहीं था l फिर भी .... मैंने महसूस किया कि लोग मुझे जानते हैं और मुझसे प्रेम करते हैं ... [उसने] मुझे देखकर पुष्टि की, और मेरे विषय सच्ची बात को सराहा l”

यीशु द्वारा शमौन को नया नाम देने पर संभवतः उसने भी ऐसा ही महसूस किया होगा l अन्द्रियास यीशु को मसीह मानकर, अपने भाई शमौन को  उसके पास लाया (यूहन्ना 1:41-42) l यीशु ने शमौन के भीतर गहरी सच्चाई को प्रमाणित कर सराहा l वास्तव में, यीशु ने उसके लिए परेशानी बनने वाली पराजय और जल्दबाज़ स्वभाव भी देखा l किन्तु उससे अधिक उसने शमौन को कलीसिया का संभावित अगुआ देखा l यीशु ने उसे कैफा अर्थात् चट्टान कहा-पतरस का आरामी नाम (यूहन्ना 1:42; देखें मत्ती 16:18) l

हमारे साथ भी ऐसा ही है l परमेश्वर हमारे अहंकार, क्रोध, और दूसरों के प्रति हममें प्रेमाभाव देखता है, किन्तु यह भी जानता है कि हम मसीह में हैं l वह हमें धर्मी और परमेश्वर से अपना मेल किये हुए (रोमियों 5:9-10); क्षमा प्राप्त, पवित्र, और प्रिय (कुलु. 2:13; 3:12); चुने हुए और विश्वासी (प्रका. 17:14) लोग पुकारता है l स्मरण रखें परमेश्वर हमें कैसे देखता है, और वह नाम हमें कैसे परिभाषित करता है l

अच्छा चरवाहा

मैं चिंतित होकर अपने पति के साथ हॉस्पिटल के कमरे में बैठी थी l मेरे छोटे बेटे की आंख की दोषनिवारक शल्यचिकित्सा हो रही थी और मैंने घबराहट और चिंता में अपने पेट में झटके महसूस किये l मैंने परमेश्वर की शांति के लिए प्रार्थना करने की कोशिश की l बाइबिल खोलकर मैंने परिचित परिच्छेद यशायाह 40 खोलकर अपने लिए कुछ नया खोजना चाही l  

पढ़ते समय, मैं ठहर गयी, क्योंकि उन प्राचीन शब्दों ने मुझे याद दिलाया कि प्रभु “चरवाहे के समान अपने झुण्ड को [चरते हुए] “भेड़ों के बच्चों को अँकवार में लिए रहेगा” (पद.11) l उस क्षण मेरी चिंता चली गयी और मैंने प्रभु को हमें संभालते हुए, अगुवाई करते हुए, और देखभाल करते हुए महसूस किया l प्रभु, मुझे इसकी ही ज़रूरत थी, मैंने धीमे से प्रार्थना की l मैंने खुद को शल्यचिकित्सा के दौरान और उसके बाद(जो सफल रही) परमेश्वर की शांति से घिरी हुई पायी l

परमेश्वर ने नबी यशायाह के द्वारा अपने लोगों का उनके दैनिक जीवन में सुख देनेवाला चरवाहा बनने की प्रतिज्ञा की l हम भी उसको अपनी चिंता बताकर और उसके प्रेम और शांति को खोजकर उसके कोमल देखभाल का अनुभव कर सकते हैं l हम जानते हैं कि वह हमें अपने हृदय के निकट रखकर हमें अपने अँकवार में उठानेवाला हमारा अच्छा चरवाहा है l

दो-पंखों वाला सूर्य

मिट्टी का एक प्राचीन मुहर यरूशलेम पुरातत्व इंस्टीट्यूट की आलमारी में पाँच साल तक पड़ा रहा क्योंकि यरूशलेम की पुरानी दीवार के दक्षिणी भाग के निकट खुदाई में मिली इस  3,000 वर्ष पुरानी वस्तु के प्रारंभिक जांच में इसका महत्व पता न चला l किन्तु तब एक शोधकर्ता के उस मुहर पर खुदे शब्दों की गहन जांच में एक बड़ी खोज सामने आई l अभिलेख प्राचीन इब्री में था : “यहूदा के राजा आहाज (के पुत्र) हिजकिय्याह का l”

मुहर के बीच जीवन का प्रतीक दो-पंखों वाला सूर्य की आकृति है l मुहर खोजनेवाले पुरातत्ववेत्ताओं का मानना है कि राजा हिजकिय्याह ने इस मुहर का उपयोग खतरनाक बीमारी से प्रभु की चंगाई पाने के बाद परमेश्वर की सुरक्षा के रूप में करने लगा (यशायाह 38:1-8) l हिजकिय्याह प्रभु से चंगाई मांग रहा था l और परमेश्वर ने उसकी प्रार्थना सुनकर उसे यह कहकर, “मैं [सूर्य की छाया को] दस अंश पीछे की ओर लौटा दूंगा”  एक चिन्ह दिया कि वह दी गयी अपनी प्रतिज्ञा पूरी करेगा (पद.8) l

पुरातत्विक शिल्पकृति के ये तथ्य हमें उत्साहवर्धक ताकीद देते हैं कि बाइबिल के लोग हमारी तरह सीख रहे थे कि सहायता मांगने पर प्रभु हमारी सुनता है l और यद्यपि हमारी अपेक्षानुसार उसका उत्तर नहीं होता, हम उसकी करुणा और सामर्थ्य में विश्राम कर सकते हैं l सूर्य की गति को प्रभावित करनेवाला हमारे हृदयों को भी प्रभावित कर सकता है l

चेतावनी!

उन दिनों में जब मैं नियमित यात्रा करता था, मैं हर दिन एक नए शहर में रात बिताते समय होटल में जागने की घंटी लगवाता था l मुझे सुबह उठकर अपने काम में जाने के लिए एक व्यक्तिगत अलार्म के साथ, टेलीफोन की तेज घंटी की भी ज़रूरत होती थी l

प्रेरित यूहन्ना प्रकाशितवाक्य में एशिया प्रान्त की सात कलीसियाओं को लिखे पत्रों में चेतावनी देता है l उसने सरदीस की कलीसिया को यीशु मसीह का यह सन्देश दिया : “मैं तेरे कामों को जानता हूँ : तू जीवित तो कहलाता है, पर है मरा हुआ l जागृत हो, और उन वस्तुओं को जो बाकी रह गईं हैं ... उन्हें दृढ़ कर, क्योंकि मैं ने तेरे किसी काम को अपने परमेश्वर के निकट पूरा नहीं पाया” (प्रका. 3:1-2) l

हम आत्मिक मेहनत के मध्य परमेश्वर के साथ अपने सम्बन्ध में सुस्ती पर ध्यान नहीं देते l किन्तु परमेश्वर हमें याद दिलाता है “स्मरण कर कि तू ने कैसी शिक्षा प्राप्त की और सुनी थी, और उसमें बना रह” (पद.3) l

कुछ लोगों ने महसूस किया है कि आत्मिक रूप से जागृत रहने के लिए प्रति सुबह  बाइबिल पठन और प्रभु से प्रार्थना करने के लिए समय निर्धारण सहायक है l यह कोई काम नहीं है किन्तु यीशु के साथ समय बिताने का आनंद है और दिन के काम के लिए उसकी ओर से तैयारी है l

कीड़ा से लड़ाई तक

10 वर्ष का क्लेओ पहली बार मछली पकड़ते समय चारे के डिब्बे में झांककर हिचकिचाया l आखिरकार उसने मेरे पति से कहा, “मेरी मदद करें, मैं कीड़ा से डरता हूँ l उसके भय ने उसे काम करने से रोका l

भय वयस्कों को भी पंगु कर देता है l गिदोन भी भयभीत हुआ होगा जब परमेश्वर का स्वर्गदूत उससे मिलने आया जब वह मिद्यानी शत्रुओं से छिपकर गेहूँ साफ़ कर रहा था (न्यायियों 6:11) l स्वर्गदूत ने उससे कहा कि वह युद्ध में परमेश्वर के लोगों की अगुवाई करने के लिए परमेश्वर द्वारा चुना गया था (पद.12-14) l

गिदोन का प्रतुत्तर? “हे मेरे प्रभु, विनती सुन, मैं इस्राएल को कैसे छुड़ाऊँ? देख, मेरा कुल मनश्शे में सब से कंगाल है, फिर मैं अपने पिता के घराने में सब से छोटा हूँ” (पद.15) l परमेश्वर की उपस्थिति की निश्चितता के बाद भी, गिदोन भयभीत था और चिन्ह माँगा कि परमेश्वर अपनी प्रतिज्ञा अनुसार इस्राएल को बचाने के लिए उसे उपयोग करेगा (पद.36-40) l और परमेश्वर ने उसके निवेदन का उत्तर दिया l इस्राएली यूद्ध में सफल रहे और 40 वर्षों तक शांति का आनंद उठाया l

हम सब भी अनेक तरह से भयभीत होते हैं-कीड़ों से लड़ाई तक l गिदोन की कहानी हमें सिखाती है कि हम इसमें निश्चित रहें : यदि परमेश्वर हमसे कुछ करने को कहता है, वह उसे करने के लिए सामर्थ्य और ताकत देगा l