प्रेम का प्रगटीकरण
श्रृंखलाबद्ध संकेत “मैं तुमसे प्रेम करता हूँ,” वेल्लैंड, ओंटारियो शहर में रहस्मय ढंग से दिखने पर स्थानीय संवाददाता मेरियन फ़र्थ पता लगाना चाही l परिणाम शून्य था l हफ़्तों बाद, नए संकेत में तिथि और समय के साथ एक स्थानीय पार्क का नाम दिखाई दिया l
फ़र्थ, निश्चित समय पर शहर के जिज्ञासु लोगों के संग पार्क पहुंची l वहां उसकी मुलाकात सूट पहने और चेहरा छिपाए हुए एक व्यक्ति से हुई l उसके आश्चर्य के विषय कल्पना करें जब उसने उसे फूलों का एक गुलदस्ता देकर विवाह प्रस्ताव रखा l रहस्यमय पुरुष उसका प्रेमी, रेयान सैंट डेनिस था l उसने खुशी से स्वीकार किया l
सैंट डेनिस का अपनी प्रेमिका के समक्ष प्रेम प्रदर्शन कुछ अजीब प्रतीत हो सकता है, किन्तु हमारे लिए परमेश्वर के प्रेम का प्रगटीकरण बेमेल नहीं था l “जो प्रेम परमेश्वर हम से रखता है, वह इस से प्रगट हुआ कि परमेश्वर ने अपने एकलौते पुत्र को जगत में भेजा है कि हम उसके द्वारा जीवन पाएँ” (1 यूहन्ना 4:9) l
यीशु, एक व्यक्ति की ओर से दूसरे को दिया गया एक गुलाब की तरह, मात्र प्रेम का एक प्रतीक नहीं है l वह दिव्य मानव है जिसने खुद ही अपना जीवन बलिदान किया ताकि उद्धार हेतु उस पर विश्वास करनेवाला परमेश्वर के साथ अनंत वाचा का सम्बन्ध बना सके l एक मसीही को “परमेश्वर के प्रेम से” कुछ भी “अलग [नहीं] कर” सकती है (रोमि. 8:39) l
सन्देह की मृत्यु
हम उसे संदेही थोमा कहते हैं (देखें यूहन्ना 20:24-29), किन्तु यह नाम बिल्कुल ठीक नहीं है l आख़िरकार, हममें से कितने विश्वास किये होते कि हमारा मृतक अगुआ पुनरुथित हुआ है? हम उसे “साहसी थोमा” भी पुकार सकते हैं l आखिरकार, यीशु के अपनी मृत्यु की ओर उद्देश्यपूर्ण ढंग से बढ़ते समय, थोमा ने प्रभावशाली साहस दर्शाया l
लाजर की मृत्यु के बाद, यीशु ने कहा था, “आओ, हम फिर यहूदिया को चलें” (यूहन्ना 11:7), शिष्यों ने जिसका विरोध किया l “हे रबी,” उन्होंने कहा, “अभी तो यहूदी तुझ पर पथराव करना चाहते थे, और क्या तू फिर भी वहीं जाता है?” (पद.8) l थोमा ने ही बोला था, “आओ, हम भी उसके साथ मरने को चलें” (पद. 16) l
थोमा का विचार उसके कार्य से उत्तम था l यीशु की गिरफ़्तारी पश्चात, पतरस और यूहन्ना को छोड़कर जो मसीह के संग महायाजक के आंगन तक गए, थोमा बाकी के साथ भाग गया (मत्ती 26:56) l केवल यूहन्ना ही यीशु के संग क्रूस तक गया l
लाजर को जीवित देखकर भी (यूहन्ना 11:38-44), थोमा क्रूसित प्रभु की मृत्युंजय पर विश्वास नहीं किया l मानवीय-संदेही थोमा-पुनरुथित यीशु को देखने के बाद ही विश्वास करके बोला, “हे मेरे प्रभु, हे मेरे परमेश्वर” (यूहन्ना 20:28) l संदेही को यीशु ने निश्चय दिया और हमें अपार सुख l “तू ने मुझे देखा था, क्या इसलिए विश्वास किया है? धन्य वे हैं जिन्होंने बिना देखे विश्वास किया?” (पद. 29) l
यीशु के कार्य देखें
वह आठ वर्षीय छोटा लड़का अपने माता-पिता के मित्र, वोली से बोला, “मैं यीशु से प्रेम करता हूँ और किसी दिन विदेश में परमेश्वर की सेवा करना चाहता हूँ l” आनेवाले दस वर्षों में वोली उसको बढ़ता देखकर उसके लिए प्रार्थना किया l जब वह युवक द्वारा माली जाकर सेवा करने हेतु एक मिशन एजेंसी में आवेदन किया, वोली ने उससे कहा, “समय हो गया है! मैंने तुम्हारी इच्छा जानकार, इस उत्तेजक खबर का इंतज़ार करते हुए, तुम्हारे लिए थोड़े पैसे जमा करना आरंभ किया l” वोली दूसरों की चिंता करता है और लोगों तक परमेश्वर का सुसमाचार पहुँचाना चाहता है l
परमेश्वर के राज्य का सुसमाचार सुनाते हुए एक नगर और गाँव से दूसरे तक जाते समय यीशु और उसके शिष्यों को आर्थिक साहयता चाहिए थी (लूका 8:1-3) l दुष्टात्मा और बीमारियों से छुटकारा प्राप्त स्त्रियों ने “अपनी सम्पति से” उनकी मदद की (पद.3) l एक सात दुष्टात्माओं से छुड़ाई गई मरियम मगदलीनी थी l दूसरी हेरोदेस के भंडारी खोजा की पत्नी, योअन्ना थी l सूसन्नाह और “बहुत से अन्य [स्त्रियों]” के विषय ज्ञात नहीं है (पद.3), किन्तु हमें मालूम है कि यीशु ने उनकी आत्मिक ज़रूरतें पूरी किये थे l अब उन्होंने आर्थिक संसाधन से उनकी मदद की l
यीशु के कार्य पर ध्यान देकर दूसरों के लिए उसकी इच्छा हमारी इच्छा बन जाती है l परमेश्वर से पूँछें वह आपको किस तरह उपयोग करना चाहता है l
मैं सब जानता हूँ
निमोनिया और अत्यधिक खाँसी के कारण मेरे पुत्र और बहु मेरे पौत्र, कैमेरोन को हॉस्पिटल ले जाना ज़रूरी समझे l उन्होंने हमसे उनके पाँच-वर्षीय बेटे, नेथन को स्कूल से घर ले जाने का आग्रह किया जिसे हमदोनों करने में खुश थे l
मार्लिन ने नेथन से कार में पूछा, “क्या तुम चकित हो कि आज हम तुम्हें लेने आए?” वह बोला, “नहीं!” पूछने पर कि क्यों नहीं, उसने उत्तर दिया, “क्योंकि मैं सब जानता हूँ!”
एक पाँच-वर्षीय बच्चा सब कुछ जाने का दावा करता है, किन्तु हम बड़े उम्र वाले उससे कुछ बेहतर जानते हैं l हमारे पास अक्सर उत्तर से अधिक प्रश्न होते हैं l हम जीवन के क्यों, कब, और कैसे पर सोचते हैं-अक्सर यह भूलकर कि यद्यपि हम सब कुछ नहीं जानते, हम सर्वज्ञानी परमेश्वर को जानते हैं l
भजन 139:1,3 सर्वज्ञानी परमेश्वर का हमें घेरनेवाला और अतिनिकट प्रेम के विषय बताता है l दाऊद कहता है, “तू ने मुझे जांचकर जान लिया है ... मेरे चलने और लेटने की तू भली-भांति छानबीन करता है, और मेरे पूरे चालचलन के भेद जानता है l” परमेश्वर हमसे सम्पूर्ण प्रेम करता है, आज हम किसका सामना करेंगे पूर्णरूपेण जानता है, और हमारे जीवन की हर परिस्थिति में हमारी पूर्ण मदद करना जानता है l यह जानना कितना आरामदायक है l
हमारा ज्ञान सदा सीमित रहेगा, किन्तु परमेश्वर को जानना ही सर्वाधिक अर्थपूर्ण है l हम उस पर भरोसा रख सकते हैं l
यीशु पर निर्भरता
कभी-कभी रात में अपनी तकिया पर सिर रखकर प्रार्थना करते वक्त मैं कल्पना करता हूँ जैसे मैं यीशु पर टिका हुआ हूँ l ऐसा करते समय मैं परमेश्वर के वचन में वर्णित प्रेरित यूहन्ना को स्मरण करता हूँ l यूहन्ना खुद के विषय लिखता है कैसे अंतिम भोज में वह यीशु के निकट था l “उसके चेलों में से एक जिससे यीशु प्रेम रखता था, यीशु ... की ओर झुका हुआ बैठा था” (यूहन्ना 13:23) l
यूहन्ना “[चेला] जिससे यीशु प्रेम रखता था” शब्दों का प्रयोग अपना नाम लिए बगैर अपने लिए करता है l वह प्रथम-शताब्दी इस्राएल का एक ख़ास भोज विन्यास दर्शाता है, जब मेज आज से नीचे, लगभग घुटने तक हुआ करता था l बिना कुर्सियों के मेज के चारों ओर चटाई अथवा गद्दियों पर बैठना स्वाभाविक था l यूहन्ना प्रभु के करीब बैठे हुए प्रश्न पूछते समय “यीशु की छाती की ओर झुका हुआ बैठा था” (यूहन्ना 13:23) l
उस समय यूहन्ना की यीशु से निकटता आज हमारे जीवनों के लिए एक उदाहरण है l हम यीशु को स्पर्श नहीं कर सकते किन्तु अपनी कठिनतम परिस्थितियाँ उसे सौंप सकते हैं l उसने कहा, “हे सब परिश्रम करनेवालो और बोझ से दबे हुए लोगो, मेरी पास आओ; मैं तुम्हें विश्राम दूंगा” (मत्ती 11:28) l हमारे हर परिस्थिति में हमारे साथ विश्वासयोग्य रहनेवाला उद्धारकर्ता पाकर हम धन्य हैं! क्या आज आप उस पर “टिके हुए” हैं?
सहायक
जून 1962 में फ्लोरिडा के एक कैदखाने से, क्लेरेंस अर्ल गिडियन ने अपने एक अपराध के लिए जो उसने नहीं किया था अमरीकी सर्वोच्च न्यायलय से पुनःविचार करने का आग्रह किया और वह वकील भी करने में असमर्थ है l
एक वर्ष के भीतर, गिडियन वी. वेनराईट के ऐतिहासिक केस में, सर्वोच्च न्यायलय ने निर्णय सुनाया कि अपने बल पर अपना बचाव करने में अयोग्य लोगों को सरकार द्वारा एक वकील दिया जाए l इसके बाद न्यायलय द्वारा नियुक्त वकील की मदद से, क्लेरेंस गिडियन के केस पर पुनः विचार किया गया और वह दोषमुक्त हुआ l
किन्तु यदि हम निर्दोष नहीं हैं तो? प्रेरित पौलुस के अनुसार, हम सब दोषी हैं l किन्तु स्वर्ग का न्यायलय हमारा और हमारी आत्मा के बचाव हेतु परमेश्वर की कीमत पर एक वकील देता है (1 यूहन्ना 2:2) l अपने पिता की ओर से, यीशु एक स्वतंत्रता देता है जिसे कैदी भी किसी प्रकार की बाहरी स्थिति के अनुभव से बेहतर बताते हैं l यह हृदय और मन की स्वतंत्रता है l
यीशु हमारे द्वारा या हमारे विरुद्ध किए गए अन्याय के लिए दुःख उठाने में हम सब का प्रतिनिधि हो सकता है l वह सर्वोच्च अधिकार से करुणा, क्षमा, और विश्राम के लिए हमारे प्रत्येक निवेदन का उत्तर देता है l
हमारा सहायक, यीशु, खोई हुई आशा, भय, अथवा पछतावा के कैद को अपनी उपस्थिति का स्थान बना सकता है l
अच्छा, बुरा, और बदसूरत
मेरी एक प्रिय सहेली ने मुझे एक सन्देश भेजा जिसमें लिखा था, “मैं बहुत आनंदित हूँ कि हम एक दूसरे को अच्छी, बुरी, और बदसूरत बातें बता सकते हैं!” हम वर्षों से मित्र रहे हैं, और हमने अपना आनंद और पराजय बांटना सीख लिया है l हम मानते हैं कि हम सम्पूर्ण नहीं हैं, इसलिए हम अपने संघर्ष बांटे हैं, किन्तु परस्पर सफलताओं में आनंदित होते हैं l
गोलियत पर दाऊद के विजय वाले अच्छे दिनों के आरम्भ से, दाऊद और योनातान भी घनिष्ठ मित्र थे (1 शमूएल 18:1-4) l उन्होंने योनातान के पिता के ईर्ष्या के बुरे दिनों में परस्पर भय बांटे (18:6-11; 20:1-2) l आख़िरकार, उन्होंने दाऊद की हत्या की शाऊल की योजना के बदसूरत दिनों में दुःख उठाया (20:42) l
अच्छे मित्र हमें बाहरी स्थितियों के बदलने पर त्यागते नहीं l वे अच्छे और बुरे दिनों में साथ रहते हैं l बदसूरत दिनों में परमेश्वर से दूर जाने की परीक्षा आने पर वह हमें परमेश्वर की ओर इशारा करते हैं l
सच्ची मित्रता परमेश्वर का उपहार है क्योंकि वह सिद्ध मित्र का उदाहरण है, जो अच्छे, बुरे, और बदसूरत दिनों में वफादार रहता है l जैसे प्रभु हमें याद दिलाता है, “मैं तुझे कभी न छोडूंगा, और न कभी त्यागूँगा” (इब्रानियों 13:5) l
क्या यह आनंद देता है?
व्यवस्था एवं संगठन विषय पर एक युवा जापानी स्त्री की पुस्तक की लाखों प्रतियां संसार में बिक गयीं l मारी कोंडो का मुख्य सन्देश घरों और आलमारियों में अनावश्यक वस्तुएँ- जो वस्तुएं उनके लिए बोझ हैं-को हटाने में लोगों को मदद करना है l वह कहती हैं, “हर एक को ऊपर उठाकर पूछिये, “क्या यह आनंद देता है?” यदि उत्तर हाँ है, रख लीजिये l यदि नहीं, तो हटा दीजिये l
प्रेरित पौलुस फिलिप्पी के मसीहियों को मसीह के साथ सम्बन्ध में आनंद खोजने को कहा l “प्रभु में सदा आनंदित रहो; मैं फिर कहता हूँ, आनंदित रहो” (फ़िलि. 4:4) l चिंता ग्रस्त जीवन के बदले, उसने उनको हर बात के लिए प्रार्थना करने को कहा और तब परमेश्वर की शांति उनके हृदय एवं विचारों को मसीह यीशु में सुरक्षित रखेगी (पद.6-7) l
हमारे दैनिक कार्यों एवं जिम्मेदारियों में, सब कुछ आनंदायक नहीं है l किन्तु हम पूछ सकते हैं, “यह किस तरह परमेश्वर और मेरे हृदय में आनंद उत्पन्न कर सकता है? काम करने के कारण में परिवर्तन उनके विषय हमारे अहसास को रूपांतरित कर सकता है l
इसलिए हे भाइयों, जो जो बातें सत्य हैं, ... आदरणीय हैं, ... उचित हैं, ...पवित्र हैं, ... सुहावनी हैं, ... मनभावनी हैं, अर्थात् जो भी सद्गुण और प्रशंसा की बातें हैं उन पर ध्यान लगाया करो l (पद.8) l
पौलुस के अंतिम शब्द विचार के लिए भोजन और आनंद का नुसखा है l
आजमाया हुआ और पवित्र
एक साक्षात्कार में, गायिका और गीत लेखिका मेरेडिथ एंड्रूज ने सुसमाचार प्रचार, रचनात्मक कार्य, विवाह विषय, और मातृत्व के बीच संतुलन बनाने में खुद को अभिभूत पाया l अपनी कठिनाई के विषय सोचकर, वह बोली, “मैंने महसूस किया कि परमेश्वर मुझे दमित प्रक्रिया द्वारा संशोधन ऋतू से गुज़ार रहा है l
अय्यूब अपनी जीविका, स्वास्थ्य, और परिवार खोकर अभिभूत हुआ l इससे भी बदतर, परमेश्वर का दैनिक उपासक होकर भी, उसने अहसास किया कि परमेश्वर सहायता हेतु उसके निवेदन नज़रन्दाज़ कर रहा है l परमेश्वर उसके जीवन के दृश्य में अनुपस्थित दिखाई दिया l अय्यूब ने दावा किया कि वह परमेश्वर को किसी भी दिशा में देख नहीं पा रहा है (अय्यूब 23:2-9) l
निराशा में, अय्यूब को क्षणिक स्पष्टता मिली l उसका विश्वास एक अँधेरे कमरे में मोमबत्ती की तरह टिमटिमाया l उसने कहा, “[परमेश्वर] जानता है कि मैं कैसी चाल चलता हूँ; और जब वह मुझे ता लेगा मैं सोने के समान निकलूँगा” (पद.10) l मसीही आजमाए और शुद्ध किये जाते हैं जब परमेश्वर हमारे आत्मनिर्भरता, अहंकार, और सांसारिक ज्ञान को हटाने के लिए कठिनाई का उपयोग करता है l यदि इस प्रक्रिया में परमेश्वर शांत दिखाई दे और मदद की पुकार न सुने, वह हमें हमारे विश्वास में सामर्थी बनने का एक अवसर दे रहा होगा l
दुःख और समस्याएँ दीप्तिमान, चट्टान सा मजबूत चरित्र देती हैं जो जीवन की कठिनाई में परमेश्वर पर भरोसे से आती है l